मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24

खरीफ 2026-27: 5,547.99 करोड़ रुपये की पीएसएस खरीद मंजूर

केंद्र ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में 5,547.99 करोड़ रुपये के दलहन-तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीद मंजूर की।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
Read in English
खरीफ 2026-27: 5,547.99 करोड़ रुपये की पीएसएस खरीद मंजूर — GK24 title card

चर्चा में क्यों

30 सितंबर 2026 को कृषि मंत्रालय ने बताया कि खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में 5,547.99 करोड़ रुपये मूल्य के दलहन और तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीद को मंजूरी दी गई है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए 5,547.99 करोड़ रुपये मूल्य के दलहन और तिलहन की खरीद को हरी झंडी दी है। यह खरीद मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होगी।

यह मंजूरी क्यों मायने रखती है

खरीफ की उपज जब एक साथ मंडियों में पहुंचती है तो दलहन और तिलहन के भाव कई बार समर्थन मूल्य से नीचे फिसल जाते हैं। पीएसएस में सरकारी एजेंसियां स्वयं बाजार में उतरकर घोषित समर्थन मूल्य पर फसल उठाती हैं, जिससे किसान को घाटे में सौदा करने की मजबूरी नहीं रहती। मंत्री ने कहा कि खरीद तंत्र को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया जा रहा है तथा उपज का पैसा किसान के बैंक खाते में सीधे और तय समय में भेजा जाएगा।

किस राज्य को कितनी खरीद

मंजूरी में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के नाम रहा। कर्नाटक दूसरे स्थान पर है, जहां तीन फसलें शामिल हैं, और तेलंगाना तीसरे स्थान पर। तुअर (अरहर), मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी इस स्वीकृति में शामिल फसलें हैं।

राज्यस्वीकृत राशिफसल और मात्रा
उत्तर प्रदेश3,992.57 करोड़ रुपये4,66,000 मीट्रिक टन तुअर, मूल्य 3,937.70 करोड़ रुपये; 6,250 मीट्रिक टन मूंग, मूल्य 54.87 करोड़ रुपये
कर्नाटक1,107 करोड़ रुपये1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन, मूल्य 659.27 करोड़ रुपये; 38,250 मीट्रिक टन मूंग, मूल्य 335.83 करोड़ रुपये; 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी, मूल्य 111.90 करोड़ रुपये
तेलंगाना448.42 करोड़ रुपये62,000 मीट्रिक टन सोयाबीन, मूल्य 353.90 करोड़ रुपये; 10,766 मीट्रिक टन मूंग, मूल्य 94.52 करोड़ रुपये

बड़ा लक्ष्य क्या है

मंत्री ने इस फैसले को खाद्य तेल और दालों के आयात पर निर्भरता घटाने की व्यापक कोशिश से जोड़ा। उनका तर्क है कि समर्थन मूल्य पर पक्की खरीद किसान को पहले ही यह भरोसा देती है कि दलहन या तिलहन बोना घाटे का सौदा नहीं है, और इसी भरोसे से इन फसलों का रकबा बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर उपार्जन केंद्र पर व्यवस्था पारदर्शी रहेगी और भुगतान समय पर होगा।

मूल्य समर्थन योजना को समझें

पीएसएस प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान का वह हिस्सा है जो दलहन, तिलहन और नारियल गरी से जुड़ा है। राज्य सरकार मांग रखती है, केंद्र मात्रा और राशि स्वीकृत करता है, और नोडल एजेंसियां पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर उपज खरीदती हैं। खरीद पर होने वाला घाटा केंद्र और राज्य तय अनुपात में उठाते हैं, इसलिए हर स्वीकृति में मात्रा और रुपये, दोनों का आंकड़ा दिया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

फैसला5,547.99 करोड़ रुपये मूल्य के दलहन-तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीद
योजनामूल्य समर्थन योजना (पीएसएस)
मौसमखरीफ विपणन मौसम 2026-27
मंजूरीशिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री
शामिल राज्यउत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना
उत्तर प्रदेश3,992.57 करोड़ रुपये: 4,66,000 मीट्रिक टन तुअर और 6,250 मीट्रिक टन मूंग
कर्नाटक1,107 करोड़ रुपये: 1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन, 38,250 मीट्रिक टन मूंग, 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी
तेलंगाना448.42 करोड़ रुपये: 62,000 मीट्रिक टन सोयाबीन और 10,766 मीट्रिक टन मूंग
फसलेंतुअर (अरहर), मूंग, सोयाबीन और सूरजमुखी

परीक्षा की दृष्टि से

कुल स्वीकृति (5,547.99 करोड़ रुपये), मौसम (खरीफ विपणन मौसम 2026-27), योजना (मूल्य समर्थन योजना), तीनों राज्य, राज्यवार राशि (उत्तर प्रदेश 3,992.57 करोड़, कर्नाटक 1,107 करोड़, तेलंगाना 448.42 करोड़ रुपये) और शामिल फसलें - तुअर, मूंग, सोयाबीन, सूरजमुखी - याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत कुल कितने मूल्य की खरीद मंजूर की गई है?

  1. A.3,992.57 करोड़ रुपये
  2. B.5,547.99 करोड़ रुपये
  3. C.6,547.99 करोड़ रुपये
  4. D.1,107 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 5,547.99 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 5,547.99 करोड़ रुपये है। यही पूरी राशि है जो उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में मिलाकर खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के दलहन और तिलहन को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए स्वीकृत की गई है। विकल्प A, 3,992.57 करोड़ रुपये, केवल उत्तर प्रदेश का हिस्सा है; यह तीनों राज्यों में सबसे बड़ा हिस्सा है, इसलिए भ्रम पैदा करता है, लेकिन यह कुल राशि नहीं है। विकल्प D, 1,107 करोड़ रुपये, केवल कर्नाटक का हिस्सा है, जिसमें सोयाबीन, मूंग और सूरजमुखी शामिल हैं। विकल्प C एक बड़ा आंकड़ा है, जिसका इस मंजूरी में कोई आधार नहीं है। तीनों राज्यों के हिस्से - 3,992.57 करोड़, 1,107 करोड़ और 448.42 करोड़ रुपये - जोड़ने पर स्वीकृत कुल राशि बनती है, इसलिए केवल विकल्प B पूरी मंजूरी बताता है।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

खरीफ 2026-27 की इस खरीद मंजूरी में सबसे बड़ा हिस्सा किस राज्य को मिला है?

  1. A.कर्नाटक
  2. B.तेलंगाना
  3. C.उत्तर प्रदेश
  4. D.मध्य प्रदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. उत्तर प्रदेश

व्याख्या

सही उत्तर उत्तर प्रदेश है। इस राज्य को 3,992.57 करोड़ रुपये मिले, जो तीनों राज्यों में सबसे बड़ा हिस्सा है। इसका लगभग पूरा भाग तुअर के लिए है, अर्थात 4,66,000 मीट्रिक टन तुअर जिसका मूल्य 3,937.70 करोड़ रुपये है, और इसके साथ 6,250 मीट्रिक टन मूंग जिसका मूल्य 54.87 करोड़ रुपये है। विकल्प A, कर्नाटक, 1,107 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है और वहां सोयाबीन, मूंग तथा सूरजमुखी तीनों शामिल हैं, इसलिए वह मंजूरी में है पर सबसे बड़ा नहीं। विकल्प B, तेलंगाना, 448.42 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है। विकल्प D, मध्य प्रदेश, दलहन-तिलहन का बड़ा उत्पादक है इसलिए अनुमान लगाना स्वाभाविक है, लेकिन इस स्वीकृति में शामिल तीन राज्यों में उसका नाम नहीं है।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

इस मूल्य समर्थन योजना स्वीकृति में निम्नलिखित में से कौन-सी फसल शामिल नहीं है?

  1. A.तुअर (अरहर)
  2. B.सूरजमुखी
  3. C.धान
  4. D.सोयाबीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. धान

व्याख्या

सही उत्तर धान है। यह स्वीकृति केवल दलहन और तिलहन के लिए है, और धान एक अनाज है जिसकी खरीद केंद्रीय पूल की अलग व्यवस्था से होती है, मूल्य समर्थन योजना से नहीं। विकल्प A, तुअर या अरहर, इस मंजूरी की सबसे बड़ी मद है और उत्तर प्रदेश में इसी की खरीद होगी। विकल्प D, सोयाबीन, दो राज्यों में शामिल है, कर्नाटक और तेलंगाना दोनों में, और यह स्वीकृति का प्रमुख तिलहन है। विकल्प B, सूरजमुखी, केवल कर्नाटक में शामिल है और वहां की तीन मदों में सबसे छोटी है। मूंग चौथी फसल है, जो तीनों राज्यों में आती है। इस प्रकार सूची से बाहर केवल धान है, जो इस दलहन-तिलहन स्वीकृति का हिस्सा नहीं है। जो अभ्यर्थी यह याद रखता है कि यह योजना दलहन, तिलहन और नारियल गरी तक सीमित है, वह धान को तुरंत अलग कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खरीफ 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत कितनी खरीद मंजूर हुई है?

5,547.99 करोड़ रुपये की। इसमें उत्तर प्रदेश का हिस्सा 3,992.57 करोड़ रुपये, कर्नाटक का 1,107 करोड़ रुपये और तेलंगाना का 448.42 करोड़ रुपये है।

किन राज्यों में कौन-सी फसलें खरीदी जाएंगी?

उत्तर प्रदेश में तुअर और मूंग; कर्नाटक में सोयाबीन, मूंग और सूरजमुखी; तेलंगाना में सोयाबीन और मूंग। सबसे बड़ी एक मात्रा उत्तर प्रदेश में 4,66,000 मीट्रिक टन तुअर की है।

मूल्य समर्थन योजना क्या है?

यह पीएम-आशा का वह हिस्सा है जिसके तहत बाजार भाव समर्थन मूल्य से नीचे जाने पर सरकारी एजेंसियां दलहन, तिलहन और नारियल गरी को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती हैं, ताकि किसान को घाटे में बेचना न पड़े।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 30 सितंबर 2026

  1. CAFE मानक अधिसूचित, 2031-32 तक ईंधन खपत 16.7% घटेगीपर्यावरण
  2. संघ लोक सेवा आयोग के 100 वर्ष पूरे, 1926 में हुई थी स्थापनाराष्ट्रीय
  3. नौसेना कमांडर सम्मेलन 2026 का दूसरा संस्करण नई दिल्ली में शुरूरक्षा
  4. नवीज्ञान 2026 में एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर रिपोर्ट जारीविज्ञान और प्रौद्योगिकी
  5. एसबीएम 2.0 में सीवेज शोधन संयंत्रों को 11,785 करोड़ रुपये मंजूरपर्यावरण
  6. ट्राई ने असम के सोनितपुर में मोबाइल नेटवर्क परीक्षण के नतीजे जारी किएविज्ञान और प्रौद्योगिकी
  7. विशेष अभियान 6 : 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा सफाई अभियानराष्ट्रीय
  8. आरआईएस अध्ययन: आयुष सेवा अर्थव्यवस्था 36.92 अरब डॉलर कीरिपोर्ट और सूचकांक
आज का क्विज25 प्रश्नपूरा संस्करण पढ़ें →
इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS