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सीएक्यूएम ने एनसीआर उद्योगों में और पीटीजेड कैमरे अनिवार्य किए

सीएक्यूएम ने एनसीआर के उद्योगों को 31 अक्टूबर 2026 तक अतिरिक्त पीटीजेड कैमरे लगाने का आदेश दिया है, जिससे ईंधन के उपयोग पर वास्तविक समय में निगरानी रहेगी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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सीएक्यूएम ने एनसीआर उद्योगों में और पीटीजेड कैमरे अनिवार्य किए — GK24 title card

चर्चा में क्यों

6 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं संलग्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने उद्योगों को 31 अक्टूबर 2026 तक अतिरिक्त पैन-टिल्ट-जूम कैमरे लगाने का आदेश दिया, जिससे ईंधन उपयोग और अनुपालन की वास्तविक समय निगरानी हो सके।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं संलग्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने आदेश जारी करके एनसीआर की औद्योगिक इकाइयों में पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरों का दायरा बढ़ा दिया है, ताकि ईंधन की खपत और आयोग के निर्देशों के पालन पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सके। यह कदम उस समय के लिए निगरानी कड़ी करने के उद्देश्य से है जब औद्योगिक उत्सर्जन क्षेत्र की हवा पर सबसे भारी पड़ता है, यानी सर्दियों के महीनों में।

उद्योगों को क्या करना है

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिन स्थानों पर कैमरे लगाने के निर्देश पहले ही दिए थे, उनके अतिरिक्त अब इकाइयों को एक मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार 31 अक्टूबर 2026 तक और पीटीजेड कैमरे लगाने होंगे। कैमरों को ईंधन भंडारण के सभी स्थान और ईंधन डालने के सभी बिंदु कवर करने होंगे। जहां गैस आधारित ईंधन का उपयोग हो, वहां गैस का गेज या मीटर भी कैमरे की पकड़ में आना चाहिए। वीडियो फीड की वास्तविक समय स्ट्रीमिंग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के सर्वरों पर उपलब्ध करानी होगी। इकाइयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कैमरों तथा कनेक्टिविटी के लिए पर्याप्त बिजली बैकअप रहे।

रिपोर्ट किसे देनी है

आदेश में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित राज्य बोर्डों और दिल्ली समिति से यह भी कहा गया है कि वे इन लाइव फीड को प्राप्त करने के लिए पोर्टल और अन्य आवश्यक ढांचा तैयार करें, जिससे ईंधन के उपयोग की दूर से निगरानी संभव होगी। इन बोर्डों और समिति को कार्यान्वयन की स्थिति 1 नवंबर 2026 तक आयोग को सौंपनी होगी।

आदेश की पृष्ठभूमि

आयोग ने पहले ही एनसीआर में औद्योगिक उपयोग सहित विभिन्न कामों के लिए स्वीकृत ईंधनों की एक मानक सूची तय की थी। आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड ने क्षेत्र भर के उद्योगों के गुप्त निरीक्षण के दौरान कई मामलों में गैर-स्वीकृत ईंधन जलाए जाने की जानकारी दी। इस लगातार उपयोग को देखते हुए आयोग ने ईंधन खपत की वास्तविक समय निगरानी आवश्यक मानी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इससे पहले इकाइयों को वास्तविक समय ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के साथ पीटीजेड कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे, जिनमें बॉयलर वाली वस्त्र तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में निगरानी पोर्ट-होल और चिमनी से निकलने वाली गैसों तथा धातु इकाइयों में धुआं निकासी और भट्ठी में सामग्री डालने के क्षेत्र शामिल थे।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थाराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं संलग्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम)
उपायउद्योगों में अतिरिक्त पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरे
कैमरे लगाने की तिथि31 अक्टूबर 2026
स्थिति रिपोर्ट1 नवंबर 2026 तक
फीड किसेसीपीसीबी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति
कवर किए जाने वाले क्षेत्रईंधन भंडारण स्थल, ईंधन डालने के बिंदु, गैस गेज या मीटर
कारणफ्लाइंग स्क्वॉड के निरीक्षण में गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला
संबंधित प्रणालीऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस)

परीक्षा की दृष्टि से

संस्था (सीएक्यूएम, एनसीआर एवं संलग्न क्षेत्रों के लिए), उपाय (पैन-टिल्ट-जूम कैमरे), कैमरे लगाने की अंतिम तिथि (31 अक्टूबर 2026) और स्थिति रिपोर्ट की तिथि (1 नवंबर 2026), फीड पाने वाली एजेंसियां (सीपीसीबी, एसपीसीबी, डीपीसीसी), कारण (फ्लाइंग स्क्वॉड की जांच में गैर-स्वीकृत ईंधन) तथा संबंधित प्रणाली ओसीईएमएस याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

सीएक्यूएम के आदेश के अनुसार एनसीआर के उद्योगों को अतिरिक्त पीटीजेड कैमरे किस तिथि तक लगाने होंगे?

  1. A.15 अक्टूबर 2026
  2. B.31 अक्टूबर 2026
  3. C.1 नवंबर 2026
  4. D.31 दिसंबर 2026
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 31 अक्टूबर 2026

व्याख्या

सही उत्तर 31 अक्टूबर 2026 है। आयोग के आदेश में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों से कहा गया है कि वे इसी तिथि तक अतिरिक्त पैन-टिल्ट-जूम कैमरे लगाएं और उसके लिए तय मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करें। विकल्प C यानी 1 नवंबर 2026 बहुत निकट का भ्रम है, पर वह एक अलग दायित्व की अंतिम तिथि है - राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को कार्यान्वयन की स्थिति उसी तिथि तक आयोग को सौंपनी है। विकल्प A और विकल्प D इस आदेश में तय की गई तिथियां नहीं हैं। परीक्षार्थी दोनों तिथियों को सही क्रम में जोड़कर याद रखें - अक्टूबर के अंत तक कैमरे और नवंबर के आरंभ में अनुपालन रिपोर्ट। यह आदेश सर्दियों के महीनों को ध्यान में रखकर जारी किया गया है, जब औद्योगिक उत्सर्जन का असर क्षेत्र की हवा पर सबसे अधिक पड़ता है।

Q2.पर्यावरणआसान

सीएक्यूएम के आदेश के तहत पीटीजेड कैमरों को औद्योगिक इकाइयों में क्या कवर करना होगा?

  1. A.केवल कारखाने के प्रवेश द्वार
  2. B.ईंधन भंडारण स्थल और ईंधन डालने के बिंदु
  3. C.श्रमिकों के उपस्थिति रजिस्टर
  4. D.केवल अपशिष्ट जल निकासी नाले
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ईंधन भंडारण स्थल और ईंधन डालने के बिंदु

व्याख्या

सही उत्तर ईंधन भंडारण स्थल और ईंधन डालने के बिंदु है। आदेश की मानक संचालन प्रक्रिया कहती है कि कैमरे इस तरह लगाए जाएं कि ईंधन भंडारण के सभी स्थान और ईंधन डालने के सभी बिंदु उनकी पकड़ में आ जाएं, और जहां गैस आधारित ईंधन काम में हो वहां गैस का गेज या मीटर भी दिखे। इसका उद्देश्य यह जानना है कि कोई इकाई वास्तव में कौन सा ईंधन जला रही है। विकल्प A, C और D उन चीजों की बात करते हैं जिनसे इस आदेश का सरोकार नहीं है - प्रवेश द्वार, उपस्थिति रजिस्टर और अपशिष्ट जल के नाले इस ईंधन निगरानी उपाय का विषय नहीं हैं, इसलिए तीनों गलत हैं। यह भी याद रखें कि इकाइयों को कैमरों और कनेक्टिविटी के लिए पर्याप्त बिजली बैकअप देना होगा।

Q3.पर्यावरणमध्यम

ईंधन उपयोग की वास्तविक समय निगरानी का आदेश सीएक्यूएम की किस जांच के बाद आया?

  1. A.फ्लाइंग स्क्वॉड को उद्योगों में गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला
  2. B.उद्योगों ने वार्षिक विवरणी देना बंद कर दिया था
  3. C.पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना बढ़ गया था
  4. D.निर्माण धूल स्वीकृत स्तर से ऊपर चली गई थी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. फ्लाइंग स्क्वॉड को उद्योगों में गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला

व्याख्या

सही उत्तर यह है कि आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड को उद्योगों में गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला। आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में औद्योगिक उपयोग सहित विभिन्न कामों के लिए स्वीकृत ईंधनों की मानक सूची पहले ही तय कर दी थी, पर उसके फ्लाइंग स्क्वॉड ने क्षेत्र भर के उद्योगों के गुप्त निरीक्षण में कई बार गैर-स्वीकृत ईंधन जलाए जाने की जानकारी दी। यह उपयोग लगातार जारी रहने के कारण आयोग ने ईंधन खपत की वास्तविक समय निगरानी आवश्यक मानी और कैमरों से कवर किए जाने वाले क्षेत्र का दायरा बढ़ाया। विकल्प C यानी पराली जलाना और विकल्प D यानी निर्माण धूल क्षेत्र में सर्दियों के प्रदूषण के वास्तविक स्रोत हैं, पर यह आदेश उनसे जुड़ा नहीं है। विकल्प B का उल्लेख कहीं नहीं है।

Q4.पर्यावरणमध्यम

पीटीजेड कैमरों की वास्तविक समय वीडियो फीड किसके सर्वरों पर उपलब्ध करानी होगी?

  1. A.उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री
  2. B.सीपीसीबी और राज्य बोर्ड या डीपीसीसी
  3. C.गृह मंत्रालय
  4. D.केवल स्थानीय नगर निगम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सीपीसीबी और राज्य बोर्ड या डीपीसीसी

व्याख्या

सही उत्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति है। आदेश कहता है कि वीडियो फीड की वास्तविक समय स्ट्रीमिंग इनके सर्वरों पर उपलब्ध करानी होगी, और इन्हीं एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इन फीड को प्राप्त करने के लिए पोर्टल तथा अन्य आवश्यक ढांचा तैयार करें। इसी व्यवस्था से उद्योगों में ईंधन के उपयोग की दूर से निगरानी संभव होगी और आयोग के वैधानिक निर्देशों का पालन कराया जा सकेगा। विकल्प A, C और D ऐसी संस्थाओं के नाम हैं जिनकी इस आदेश के तहत फीड पाने में कोई भूमिका नहीं है, इसलिए तीनों गलत हैं। यह भी याद रखें कि कार्यान्वयन की स्थिति 1 नवंबर 2026 तक आयोग को बतानी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीआर के उद्योगों को अतिरिक्त पीटीजेड कैमरे कब तक लगाने हैं?

सीएक्यूएम के आदेश की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार 31 अक्टूबर 2026 तक। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली समिति को कार्यान्वयन की स्थिति 1 नवंबर 2026 तक आयोग को देनी होगी।

नए कैमरों को क्या कवर करना होगा?

ईंधन भंडारण के सभी स्थान और ईंधन डालने के सभी बिंदु, तथा गैस आधारित ईंधन की स्थिति में गैस का गेज या मीटर। फीड सीपीसीबी और राज्य बोर्डों या डीपीसीसी को लाइव भेजनी होगी और बिजली बैकअप रखना होगा।

सीएक्यूएम ने यह आदेश क्यों जारी किया?

आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड को एनसीआर भर के उद्योगों के गुप्त निरीक्षण में कई बार गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला, इसलिए आयोग ने ईंधन खपत की वास्तविक समय निगरानी आवश्यक मानी, विशेष रूप से सर्दियों को देखते हुए।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 6 अक्टूबर 2026

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