मंत्री के अनुसार यूएनएफसीसीसी और पेरिस करार के तहत पहले से तय दीर्घकालिक तापमान महत्वाकांक्षा क्या है?
- A.वैश्विक तापमान वृद्धि 3 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
- B.वैश्विक तापमान वृद्धि 2.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
- C.वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
- D.वैश्विक तापमान वृद्धि 0.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
सही उत्तर
C. वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
व्याख्या
सही उत्तर वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है। पूर्ण सत्र में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि दीर्घकालिक उद्देश्य और लक्ष्य, जिनमें यह महत्वाकांक्षा भी शामिल है, यूएनएफसीसीसी तथा पेरिस करार के तहत पहले ही तय हो चुके हैं, और अब कमी केवल अमल के समुचित साधनों की है। इसी तर्क पर उन्होंने कहा कि ध्यान नए लक्ष्य गढ़ने से हटकर इस आकलन पर जाना चाहिए कि देश पहले से तय लक्ष्यों की ओर कितनी तेज़ी से बढ़ सकते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि तीन डिग्री की वृद्धि किसी भी सहमत महत्वाकांक्षा से कहीं ऊपर है और जलवायु कार्रवाई का उद्देश्य ऐसी स्थिति को टालना है। विकल्प B भी इसी कारण गलत है और वक्तव्य में ऐसा कोई आँकड़ा नहीं आता। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसी कोई सीमा संधि ढाँचे के तहत कभी स्वीकार नहीं की गई। पेरिस करार के साथ याद रखने योग्य आँकड़ा डेढ़ डिग्री ही है।
पूरा लेख पढ़ें: फिजी में प्री-कॉप31 बैठक: भूपेंद्र यादव ने भारत का नेतृत्व किया
अभ्यास प्रश्न
वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप31 किस शहर में आयोजित हो रहा है?
- A.बाकू, अज़रबैजान
- B.एन्टाल्या, तुर्किये
- C.सुवा, फिजी
- D.बेलेम, ब्राज़ील
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सही उत्तर: B. एन्टाल्या, तुर्किये
व्याख्या
सही उत्तर एन्टाल्या, तुर्किये है। प्री-कॉप वह तैयारी बैठक होती है जो वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होती है, और इस वर्ष वह मुख्य सम्मेलन नवंबर में तुर्किये के एन्टाल्या शहर में हो रहा है। विकल्प C यानी फिजी का सुवा गलत है, क्योंकि फिजी ने तैयारी बैठक प्री-कॉप31 की मेज़बानी की थी, मुख्य सम्मेलन की नहीं; तैयारी बैठक के स्थान और सम्मेलन के स्थान को आपस में मिला देना इस प्रश्न पर सबसे आम भूल है। विकल्प A यानी अज़रबैजान का बाकू गलत है, क्योंकि कॉप31 की प्राथमिकताओं पर दिए गए भारत के वक्तव्य में अज़रबैजान का कोई उल्लेख नहीं है। विकल्प D यानी ब्राज़ील का बेलेम भी इसी कारण गलत है, क्योंकि ब्राज़ील का नाम कहीं नहीं आता। आने वाले सम्मेलन का स्थान केवल एन्टाल्या बताया गया है, और मंत्री ने सफलता के पैमाने की चर्चा करते हुए इसी नाम का प्रयोग किया।
यूएनएफसीसीसी की प्री-कॉप31 बैठक, जिसमें भारत ने भाग लिया, की सह-मेज़बानी किन देशों ने की?
- A.भारत, फिजी और ऑस्ट्रेलिया
- B.तुर्किये, ऑस्ट्रेलिया और तुवालु
- C.ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु
- D.फिजी, समोआ और टोंगा
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सही उत्तर: C. ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु
व्याख्या
सही उत्तर ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु है। प्री-कॉप31 बैठक की सह-मेज़बानी इन तीन देशों ने की, और भारत उसमें एक भागीदार पक्षकार के रूप में अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि भारत ने बैठक में हिस्सा लिया और अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, परंतु वह मेज़बानों में शामिल नहीं था। विकल्प B गलत है, क्योंकि तुर्किये वह देश है जो वर्ष के अंत में एन्टाल्या में मुख्य सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है; तैयारी बैठक के सह-मेज़बानों में उसका नाम नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि समोआ और टोंगा फिजी के प्रशांत पड़ोसी होने के बावजूद मेज़बानी के संदर्भ में कहीं नहीं आते। याद रखने योग्य बात यही है कि तैयारी बैठक प्रशांत देशों और ऑस्ट्रेलिया ने साझा की, जबकि मुख्य सम्मेलन तुर्किये के पास है।
फिजी में हुई यूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किस मंत्री ने किया?
- A.केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री
- B.केंद्रीय विदेश मंत्री
- C.केंद्रीय जल शक्ति मंत्री
- D.केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री
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सही उत्तर: A. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री
व्याख्या
सही उत्तर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री है, अर्थात भूपेंद्र यादव, जिन्होंने फिजी में हुई प्री-कॉप31 बैठक में भारत की अगुवाई की और कॉप31 की प्राथमिकताओं पर हुई पूर्ण चर्चा को संबोधित किया। यूएनएफसीसीसी और पेरिस करार के तहत होने वाली जलवायु वार्ताएँ पर्यावरण मंत्रालय के अधीन आती हैं, इसलिए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इसी विभाग के पास रहा। विकल्प B गलत है, क्योंकि विदेश मंत्री का नाम वक्तव्य में नहीं है और इन बैठकों में जलवायु वार्ता का दायित्व उनके पास नहीं होता। विकल्प C गलत है, क्योंकि जल शक्ति मंत्रालय जल संसाधन और स्वच्छता से जुड़ा है, जो एक अलग विषय है और उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि प्रतिनिधिमंडल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री की कोई भूमिका नहीं बताई गई। परीक्षार्थी प्री-कॉप और कॉप बैठकों को पर्यावरण मंत्रालय तथा भूपेंद्र यादव से जोड़कर याद रखें।
पीटीजेड कैमरों की वास्तविक समय वीडियो फीड किसके सर्वरों पर उपलब्ध करानी होगी?
- A.उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री
- B.सीपीसीबी और राज्य बोर्ड या डीपीसीसी
- C.गृह मंत्रालय
- D.केवल स्थानीय नगर निगम
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सही उत्तर: B. सीपीसीबी और राज्य बोर्ड या डीपीसीसी
व्याख्या
सही उत्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति है। आदेश कहता है कि वीडियो फीड की वास्तविक समय स्ट्रीमिंग इनके सर्वरों पर उपलब्ध करानी होगी, और इन्हीं एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इन फीड को प्राप्त करने के लिए पोर्टल तथा अन्य आवश्यक ढांचा तैयार करें। इसी व्यवस्था से उद्योगों में ईंधन के उपयोग की दूर से निगरानी संभव होगी और आयोग के वैधानिक निर्देशों का पालन कराया जा सकेगा। विकल्प A, C और D ऐसी संस्थाओं के नाम हैं जिनकी इस आदेश के तहत फीड पाने में कोई भूमिका नहीं है, इसलिए तीनों गलत हैं। यह भी याद रखें कि कार्यान्वयन की स्थिति 1 नवंबर 2026 तक आयोग को बतानी है।
ईंधन उपयोग की वास्तविक समय निगरानी का आदेश सीएक्यूएम की किस जांच के बाद आया?
- A.फ्लाइंग स्क्वॉड को उद्योगों में गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला
- B.उद्योगों ने वार्षिक विवरणी देना बंद कर दिया था
- C.पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना बढ़ गया था
- D.निर्माण धूल स्वीकृत स्तर से ऊपर चली गई थी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. फ्लाइंग स्क्वॉड को उद्योगों में गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला
व्याख्या
सही उत्तर यह है कि आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड को उद्योगों में गैर-स्वीकृत ईंधन का उपयोग मिला। आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में औद्योगिक उपयोग सहित विभिन्न कामों के लिए स्वीकृत ईंधनों की मानक सूची पहले ही तय कर दी थी, पर उसके फ्लाइंग स्क्वॉड ने क्षेत्र भर के उद्योगों के गुप्त निरीक्षण में कई बार गैर-स्वीकृत ईंधन जलाए जाने की जानकारी दी। यह उपयोग लगातार जारी रहने के कारण आयोग ने ईंधन खपत की वास्तविक समय निगरानी आवश्यक मानी और कैमरों से कवर किए जाने वाले क्षेत्र का दायरा बढ़ाया। विकल्प C यानी पराली जलाना और विकल्प D यानी निर्माण धूल क्षेत्र में सर्दियों के प्रदूषण के वास्तविक स्रोत हैं, पर यह आदेश उनसे जुड़ा नहीं है। विकल्प B का उल्लेख कहीं नहीं है।