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GK24

पर्चे वाली दवाओं के विज्ञापन पर सख्ती का मसौदा प्रस्ताव

औषधि नियम, 1945 में प्रस्तावित संशोधन से खुदरा और थोक विक्रेता भी केंद्र की मंजूरी बिना अनुसूची H, H1 तथा X की दवाओं का विज्ञापन नहीं कर सकेंगे।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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पर्चे वाली दवाओं के विज्ञापन पर सख्ती का मसौदा प्रस्ताव — GK24 title card

चर्चा में क्यों

9 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में मसौदा संशोधन की घोषणा की, जिससे अनुसूची H, H1 और X की दवाओं के विज्ञापन के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी की शर्त खुदरा तथा थोक दवा लाइसेंसधारियों पर भी लागू होगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में एक मसौदा संशोधन प्रस्तावित किया है, जिससे दवा की दुकानें, थोक विक्रेता और वितरक भी उन नियमों के दायरे में आ जाएंगे जो केवल डॉक्टर के पर्चे पर बिकने वाली दवाओं के विज्ञापन को नियंत्रित करते हैं।

कौन सी कमी भरी जा रही है

मौजूदा व्यवस्था में कोई दवा निर्माता अनुसूची H, अनुसूची H1 या अनुसूची X में दर्ज दवा का विज्ञापन केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी बिना नहीं कर सकता। लेकिन इन दवाओं का भंडारण और बिक्री करने वाली इकाइयों के लिए ऐसा स्पष्ट प्रावधान कभी लिखा ही नहीं गया। मंत्रालय का कहना है कि इस चुप्पी से अनधिकृत प्रचार की गुंजाइश बनी रही और संशोधन का मकसद उसे बंद करना है।

मसौदे में क्या है

नियम 65 के अंतर्गत एक नया उप नियम, क्रमांक बाईस, जोड़ा जाना है। इससे विज्ञापन संबंधी रोक दवा बेचने, भंडारण करने, प्रदर्शित करने, बिक्री के लिए रखने या वितरण करने के लाइसेंस वाले हर धारक पर लागू होगी, जिसमें खुदरा और थोक लाइसेंसधारी दोनों शामिल हैं। प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार अनुसूची H, अनुसूची H1 या अनुसूची X की किसी दवा का विज्ञापन केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी बिना नहीं किया जा सकेगा।

यह प्रस्ताव कैसे आया

संशोधित नियमऔषधि नियम, 1945
राजपत्र अधिसूचनाG.S.R. 861(E), दिनांक 28 सितंबर 2026
परामर्श निकायऔषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड
सुझाव की अवधिराजपत्र की प्रतियां सार्वजनिक होने से 30 दिन

मसौदा राजपत्र अधिसूचना G.S.R. 861(E), दिनांक 28 सितंबर 2026 के जरिये अधिसूचित किया गया, और इससे पहले मंत्रालय ने औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) से परामर्श किया। यह प्रस्ताव DTAB की 93वीं बैठक की सिफारिश पर आधारित है, जो 16 फरवरी 2026 को हुई थी और जिसमें यह देखा गया कि दवा बिक्री तथा वितरण लाइसेंसधारियों के विज्ञापनों पर अलग प्रावधान जरूरी है या नहीं।

महत्व क्यों है

मंत्रालय को उम्मीद है कि इस बदलाव से पूरी दवा आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी कसेगी, विज्ञापन के लिए अधिकृत न होने वालों द्वारा पर्चे वाली दवाओं का प्रचार रुकेगा और मरीजों के गलत स्व उपचार का खतरा घटेगा। इन अनुसूचियों की दवाएं डॉक्टर की निगरानी में ही ली जानी चाहिए, जिनमें कुछ एंटीबायोटिक और मनोरोग संबंधी दवाएं शामिल हैं, जहां दुरुपयोग की कीमत जन स्वास्थ्य चुकाता है। राजपत्र की प्रतियां उपलब्ध होने के तीस दिन के भीतर जनता और हितधारकों से आपत्तियां तथा सुझाव मांगे गए हैं, और समय पर मिले सुझावों पर संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले विचार होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

मंत्रालयस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
संशोधित नियमऔषधि नियम, 1945
शामिल अनुसूचियांअनुसूची H, अनुसूची H1 और अनुसूची X
नया प्रावधाननियम 65 के अंतर्गत उप नियम 22
राजपत्र अधिसूचनाG.S.R. 861(E), दिनांक 28 सितंबर 2026
परामर्श निकायऔषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB)
सिफारिश करने वाली बैठकDTAB की 93वीं बैठक, 16 फरवरी 2026
सुझाव अवधिराजपत्र की प्रतियां सार्वजनिक होने से 30 दिन

परीक्षा की दृष्टि से

संशोधित नियम (औषधि नियम, 1945), शामिल अनुसूचियां (H, H1 और X), नया प्रावधान (नियम 65 के अंतर्गत उप नियम 22), राजपत्र अधिसूचना (G.S.R. 861(E), 28 सितंबर 2026), परामर्श निकाय (औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड), आधार बैठक (DTAB की 93वीं बैठक, 16 फरवरी 2026) और आपत्तियों के लिए 30 दिन की अवधि याद रखें। अनुसूची H तथा H1 में पर्चे पर मिलने वाली दवाएं और अनुसूची X में अधिक नियंत्रित मनोरोग दवाएं आती हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

पर्चे वाली दवाओं के विज्ञापन पर स्वास्थ्य मंत्रालय का मसौदा संशोधन किन नियमों में प्रस्तावित है?

  1. A.औषधि नियम, 1945
  2. B.औषधि एवं चमत्कारिक उपचार नियम, 1955
  3. C.खाद्य सुरक्षा और मानक नियम, 2011
  4. D.क्लिनिकल प्रतिष्ठान नियम, 2012
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. औषधि नियम, 1945

व्याख्या

सही उत्तर औषधि नियम, 1945 है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इन्हीं नियमों में संशोधन प्रस्तावित किया है, जिससे अनुसूची H, अनुसूची H1 और अनुसूची X की दवाओं के विज्ञापन के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी की शर्त दवा बेचने तथा वितरण करने वाली इकाइयों पर भी लागू होगी, न कि केवल निर्माताओं पर। इसका माध्यम नियम 65 के अंतर्गत जोड़ा जाने वाला नया उप नियम है। विकल्प B एक अलग कानूनी दस्तावेज है, जो उपचारों के आपत्तिजनक विज्ञापनों से संबंधित है और यहां उसमें बदलाव नहीं हुआ। विकल्प C खाद्य से जुड़ा है, दवाओं से नहीं, और उसका नियामक अलग है। विकल्प D क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के पंजीकरण तथा मानकों से संबंधित है, जो दवा विज्ञापन के विषय से बाहर है। याद रखने योग्य बात यही है कि अनुसूची H, H1 और X औषधि नियम, 1945 के भीतर आती हैं।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

पर्चे वाली दवाओं के विज्ञापन संबंधी मसौदा संशोधन किस राजपत्र अधिसूचना से अधिसूचित हुआ?

  1. A.G.S.R. 612(E), दिनांक 12 अगस्त 2026
  2. B.G.S.R. 861(E), दिनांक 28 सितंबर 2026
  3. C.S.O. 904(E), दिनांक 1 अक्टूबर 2026
  4. D.G.S.R. 455(E), दिनांक 30 जून 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. G.S.R. 861(E), दिनांक 28 सितंबर 2026

व्याख्या

सही उत्तर G.S.R. 861(E), दिनांक 28 सितंबर 2026 है। मंत्रालय ने औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श के बाद इसी अधिसूचना से मसौदा संशोधन जारी किया और हितधारकों तथा जनता से राजपत्र की प्रतियां उपलब्ध होने की तिथि से तीस दिन के भीतर आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए। विकल्प A, विकल्प C और विकल्प D में दिए क्रमांक तथा तिथियां घोषणा में कहीं नहीं हैं। विकल्प C में श्रेणी भी गलत है, क्योंकि इस प्रकार का अधीनस्थ विधान सामान्य सांविधिक नियम के रूप में जारी होता है, सांविधिक आदेश के रूप में नहीं। परीक्षा के लिए तीन बातें साथ जोड़कर याद रखें, अर्थात अधिसूचना का क्रमांक, 28 सितंबर 2026 की तिथि और उससे पहले औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से हुआ परामर्श।

Q3.राष्ट्रीयकठिन

दवा बिक्री तथा वितरण लाइसेंसधारियों के विज्ञापनों पर प्रावधान की सिफारिश औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड की किस बैठक ने की थी?

  1. A.88वीं बैठक, जून 2025
  2. B.90वीं बैठक, अक्टूबर 2025
  3. C.93वीं बैठक, 16 फरवरी 2026
  4. D.95वीं बैठक, 4 अगस्त 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 93वीं बैठक, 16 फरवरी 2026

व्याख्या

सही उत्तर 93वीं बैठक, 16 फरवरी 2026 है। औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड की उसी बैठक में यह प्रश्न विचार के लिए आया था कि दवा बेचने तथा वितरण करने का लाइसेंस रखने वाली इकाइयों के विज्ञापनों पर स्पष्ट प्रावधान जरूरी है या नहीं, और मसौदा संशोधन उसी सिफारिश पर आधारित है। राजपत्र में मसौदा अधिसूचित करने से पहले भी बोर्ड से परामर्श किया गया था। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D में बताए बैठक क्रमांक तथा तिथियां घोषणा में नहीं हैं, और तीनों सिफारिश को या तो बहुत पहले या अधिसूचना के बाद रख देते हैं, जबकि अधिसूचना 28 सितंबर 2026 को जारी हुई। परीक्षार्थी घटनाक्रम क्रम से याद रखें, अर्थात फरवरी में बोर्ड की सिफारिश, सितंबर में राजपत्र अधिसूचना और उसके बाद तीस दिन की सुझाव अवधि।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में क्या बदलाव प्रस्तावित किया है?

उसने नियम 65 के अंतर्गत उप नियम 22 जोड़ने का प्रस्ताव रखा है, जिससे दवा बेचने, भंडारण, प्रदर्शन, बिक्री के लिए रखने या वितरण के लाइसेंसधारी, अर्थात खुदरा और थोक विक्रेता भी, केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी बिना अनुसूची H, H1 या X की दवाओं का विज्ञापन नहीं कर सकेंगे।

मसौदा संशोधन किस अधिसूचना से जारी हुआ है?

राजपत्र अधिसूचना G.S.R. 861(E), दिनांक 28 सितंबर 2026 से, जो औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श के बाद जारी हुई। मंत्रालय ने राजपत्र की प्रतियां जनता को उपलब्ध होने से 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

यह संशोधन क्यों जरूरी माना गया?

मौजूदा नियम केवल निर्माताओं को केंद्र की मंजूरी बिना अनुसूची H, H1 और X की दवाओं का विज्ञापन करने से रोकते थे, जिससे विक्रेता तथा वितरक इस रोक से बाहर रह जाते थे। मंत्रालय के अनुसार इस कमी को भरने से अनधिकृत प्रचार रुकेगा और गलत स्व उपचार का खतरा घटेगा।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC CHSL