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राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय में 5वां ईआरमेड सम्मेलन हुआ

राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय ने नई दिल्ली में 5वां ईआरमेड कंसोर्टियम सम्मेलन डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों और पुस्तकालयों से पहुंच के विषय पर आयोजित किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय में 5वां ईआरमेड सम्मेलन हुआ

चर्चा में क्यों

9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय ने ईआरमेड कंसोर्टियम पर 5वां एक दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन आयोजित किया, जिसका विषय पुस्तकालयों के जरिये डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच को नए सिरे से गढ़ना था।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय ने ईआरमेड कंसोर्टियम पर 5वां एक दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अपने परिसर में आयोजित किया।

विषय और वक्ता

सम्मेलन का विषय था डिजिटल हेल्थ रिसोर्सेज: रीडिफाइनिंग एक्सेस थ्रू लाइब्रेरीज, अर्थात पुस्तकालयों के जरिये डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच को नए सिरे से गढ़ना। उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव, मंत्रालय की अपर सचिव डॉ. विनोद कोतवाल और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य सचिव ने क्या कहा

स्वास्थ्य सचिव ने पुस्तकालय को ज्ञान का प्रवेशद्वार बताया, जिस पर चिकित्सा शिक्षा, शोध और इलाज की नींव टिकी है। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय का नेटवर्क अब 93 मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच चुका है और जोर दिया कि इसे देश के सभी मेडिकल कॉलेजों तक, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों के कॉलेजों तक, बढ़ाया जाए। उनका कहना था कि डिजिटल स्वास्थ्य संसाधन केवल जानकारी पाने का जरिया नहीं, बल्कि शोध संस्कृति बनाने का साधन हैं, और उन्होंने वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन पहल को ईआरमेड कंसोर्टियम के साथ पूरक बताया। उन्होंने पुस्तकालय से ऐसी रूपरेखा बनाने को कहा जिसमें चिकित्सा शिक्षा तथा शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका शामिल हो और राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों को अच्छी पुस्तकालय पद्धतियां अपनाने में मदद मिले।

महानिदेशक की बात

डॉ. कृष्णा ने कहा कि पुस्तकालय उन भौतिक स्थानों से बदलकर ऐसे मंच बन रहे हैं जो ज्ञान उपयोगकर्ता तक पहुंचाते हैं, और 2024 में कंसोर्टियम के पुनर्गठन को साझा पहुंच की दिशा में अहम कदम बताया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा पुस्तकालयों को सूचना से साक्ष्य, साक्ष्य से ज्ञान और ज्ञान से बेहतर इलाज तक पहुंचना होगा, जिसमें एआई साक्षरता तथा शोध कौशल पर अधिक जोर जरूरी है। डॉ. कोतवाल ने कहा कि संकाय, ढांचा और ज्ञान संसाधन किसी मेडिकल कॉलेज के तीन स्तंभ हैं।

प्रशिक्षण, परिचर्चा और विमोचन

संस्करण5वां एक दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन
आयोजकराष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय, डीजीएचएस
शामिल मंचक्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन
विमोचनएनएमएल न्यूजलेटर एवं स्मारिका

सम्मेलन की मुख्य विशेषता चार ईआरमेड मंचों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण रही, अर्थात क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन। एक परिचर्चा का शीर्षक था फ्रॉम कस्टोडियन टू क्लिनिकल पार्टनर: द नेक्स्ट मैंडेट फॉर द मेडिकल लाइब्रेरियन, जिसमें देखा गया कि चिकित्सा पुस्तकालयाध्यक्षों की भूमिका संग्रह संभालने से आगे कैसे बढ़ रही है। स्वास्थ्य सचिव ने एनएमएल न्यूजलेटर एवं स्मारिका का विमोचन किया। पुस्तकालय के निदेशक डॉ. मुकेश पाठक और महानिदेशालय के उप महानिदेशक डॉ. बी. श्रीनिवास भी उपस्थित रहे।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनईआरमेड कंसोर्टियम पर 5वां एक दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन
आयोजकराष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय
मंत्रालयस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
स्थानराष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय, नई दिल्ली
विषयडिजिटल हेल्थ रिसोर्सेज: रीडिफाइनिंग एक्सेस थ्रू लाइब्रेरीज
स्वास्थ्य सचिवश्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशकडॉ. लवनीश जी. कृष्णा
पुस्तकालय नेटवर्क93 मेडिकल कॉलेज
प्रशिक्षण के मंचक्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन
विमोचित प्रकाशनएनएमएल न्यूजलेटर एवं स्मारिका

परीक्षा की दृष्टि से

संस्करण (5वां), आयोजक (स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय), स्थान (राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय, नई दिल्ली), विषय, नेटवर्क की पहुंच 93 मेडिकल कॉलेज, प्रशिक्षण के चार मंच (क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन), परिचर्चा का शीर्षक, विमोचित न्यूजलेटर एवं स्मारिका तथा उद्धृत दो नीतियां, अर्थात वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

ईआरमेड कंसोर्टियम पर 5वें राष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन का विषय क्या था?

  1. A.प्रौद्योगिकी के जरिये सबके लिए स्वास्थ्य
  2. B.डिजिटल हेल्थ रिसोर्सेज: रीडिफाइनिंग एक्सेस थ्रू लाइब्रेरीज
  3. C.विकसित भारत के लिए पुस्तकालय
  4. D.नैदानिक व्यवहार में साक्ष्य से कार्रवाई तक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. डिजिटल हेल्थ रिसोर्सेज: रीडिफाइनिंग एक्सेस थ्रू लाइब्रेरीज

व्याख्या

सही उत्तर डिजिटल हेल्थ रिसोर्सेज: रीडिफाइनिंग एक्सेस थ्रू लाइब्रेरीज है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय ने इसी विषय पर नई दिल्ली में एक दिवसीय सम्मेलन किया, जिसमें स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और साक्ष्य आधारित नैदानिक व्यवहार में डिजिटल ज्ञान संसाधनों की भूमिका पर ध्यान खींचा गया। विकल्प A, विकल्प C और विकल्प D गढ़े हुए शीर्षक हैं। विकल्प C भ्रमित करने वाला है, क्योंकि स्वास्थ्य सचिव ने विकसित भारत के संकल्प में पुस्तकालय के योगदान की बात कही थी, और विकल्प D महानिदेशक के उस विचार की झलक देता है कि पुस्तकालयों को सूचना से साक्ष्य और साक्ष्य से बेहतर इलाज तक जाना होगा, लेकिन इनमें से कोई भी विषय नहीं था। परीक्षार्थी संस्करण भी याद रखें, क्योंकि यह पांचवां ऐसा सम्मेलन था।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के अनुसार राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय का नेटवर्क कितने मेडिकल कॉलेजों तक बढ़ा है?

  1. A.63 मेडिकल कॉलेज
  2. B.78 मेडिकल कॉलेज
  3. C.93 मेडिकल कॉलेज
  4. D.120 मेडिकल कॉलेज
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 93 मेडिकल कॉलेज

व्याख्या

सही उत्तर 93 मेडिकल कॉलेज है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय के नेटवर्क के इतने कॉलेजों तक फैलने का उल्लेख किया और कहा कि इसकी पहुंच देश के हर मेडिकल कॉलेज तक बढ़े, जिसमें वंचित क्षेत्रों की संस्थाओं पर विशेष ध्यान हो, ताकि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा साहित्य तथा डिजिटल अध्ययन संसाधनों तक समान पहुंच बने। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D में बताई संख्याएं सम्मेलन के ब्योरे में कहीं नहीं हैं। यह आंकड़ा उनके बताए दो नीतिगत नामों के साथ याद रखने योग्य है, अर्थात वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन पहल और ईआरमेड कंसोर्टियम, जिन्हें उन्होंने चिकित्सकों, शोधकर्ताओं तथा विद्यार्थियों के लिए शोध प्रकाशनों तक पहुंच बढ़ाने के पूरक रास्ते बताया।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

सम्मेलन में व्यावहारिक प्रशिक्षण किन चार ईआरमेड मंचों पर दिया गया?

  1. A.क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन
  2. B.पबमेड, स्कोपस, वेब ऑफ साइंस और जेस्टोर
  3. C.कोक्रेन, एमबेस, अपटूडेट और मेडलाइन
  4. D.क्लिनिकलकी, स्कोपस, कोक्रेन और मेडवन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन

व्याख्या

सही उत्तर क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन है। सम्मेलन की मुख्य विशेषता इन चार मंचों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण रही, जिसका उद्देश्य चिकित्सा पुस्तकालयाध्यक्षों तथा स्वास्थ्य पेशेवरों को इनसे परिचित कराना और नैदानिक जानकारी एवं अकादमिक संसाधनों तक उनकी पहुंच मजबूत करना था। विकल्प B में जाने पहचाने डेटाबेस और संग्रह गिनाए गए हैं, पर प्रशिक्षण में इनका नाम नहीं था। विकल्प C में नैदानिक साक्ष्य से जुड़े संसाधन हैं, जो ब्योरे में नहीं आते। विकल्प D सबसे पेचीदा है, क्योंकि उसमें दो सही नाम रखकर दो ऐसे नाम जोड़ दिए गए हैं जिनका उल्लेख नहीं हुआ, और प्रश्न इसी तरह बनाए जाते हैं। परीक्षार्थी उस दिन की परिचर्चा का शीर्षक भी याद रखें, जो चिकित्सा पुस्तकालयाध्यक्ष की अगली जिम्मेदारी पर केंद्रित थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

5वें ईआरमेड कंसोर्टियम सम्मेलन का विषय क्या था?

विषय था डिजिटल हेल्थ रिसोर्सेज: रीडिफाइनिंग एक्सेस थ्रू लाइब्रेरीज। यह एक दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं सम्मेलन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय ने नई दिल्ली में आयोजित किया।

राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय का नेटवर्क कितने मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचा है?

स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि यह नेटवर्क 93 मेडिकल कॉलेजों तक फैल चुका है और उन्होंने कहा कि इसे देश के सभी मेडिकल कॉलेजों, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों के कॉलेजों तक बढ़ाया जाए, जिससे चिकित्सा साहित्य तक समान पहुंच बने।

व्यावहारिक प्रशिक्षण में कौन से डिजिटल मंच शामिल थे?

प्रतिभागियों को चार प्रमुख ईआरमेड मंचों पर प्रशिक्षण दिया गया, अर्थात क्लिनिकलकी, बीएमजे, एक्सेस मेडिसिन और मेडवन। इसका उद्देश्य चिकित्सा साहित्य, नैदानिक जानकारी और अकादमिक संसाधनों तक उनकी पहुंच तथा उपयोग क्षमता बढ़ाना था।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CHSLSSC MTS