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GK24

एनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता में पीएमजीएसवाई-IV अध्ययन पर एमओयू

एनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता ने पीएमजीएसवाई-IV तथा पीएम-जनमन की ग्रामीण सड़कों के चार वर्षीय प्रभाव आकलन अध्ययन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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एनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता में पीएमजीएसवाई-IV अध्ययन पर एमओयू

चर्चा में क्यों

एनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता ने पीएमजीएसवाई-IV तथा पीएम-जनमन के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के चार वर्षीय लॉन्गिट्यूडिनल अध्ययन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जो 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की 250 सड़कों को कवर करेगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (एनआरआईडीए) और भारतीय प्रबंध संस्थान कलकत्ता ने पीएमजीएसवाई-IV तथा पीएम-जनमन के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के चार वर्षीय लॉन्गिट्यूडिनल प्रभाव आकलन अध्ययन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। मकसद यह है कि ग्रामीण संपर्क पर होने वाले खर्च को केवल बनी सड़कों की लंबाई से नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्य से परखा जाए।

हस्ताक्षर किसने किए

एजेंसी की ओर से महानिदेशक सुश्री अदिति सिंह (आईएएस) और संस्थान की ओर से निदेशक प्रो. आलोक कुमार राय ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर ग्रामीण विकास सचिव श्री रोहित कंसल तथा मंत्रालय और संस्थान के अधिकारी मौजूद रहे।

अध्ययन का दायरा

सर्वेक्षण 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों, 50 जिलों, 150 ब्लॉकों और 250 सड़कों में होगा। इसमें आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम और उत्तराखंड शामिल हैं। आवागमन, पहुंच तथा सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में आए बदलाव दर्ज करने के लिए लगभग 5,000 परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा।

तीन चरण

चरणअवधि
बेसलाइन सर्वेक्षण, निर्माण से पहले14 माह
परिवर्तन अवधिलगभग 12 माह
एंडलाइन सर्वेक्षण, निर्माण के बाद22 माह

चूंकि उन्हीं परिवारों के पास बार-बार लौटा जाएगा, इसलिए इस ढांचे को लॉन्गिट्यूडिनल कहा जाता है। यह अलग-अलग नमूनों की तुलना करने के बजाय एक ही जगह पर समय के साथ आए बदलाव को मापता है।

क्या-क्या मापा जाएगा

अध्ययन यात्रा के समय और परिवहन लागत, आजीविका, रोजगार, आय के एक से अधिक स्रोत, खेती और खेती से इतर काम तथा बाजारों तक पहुंच को देखेगा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा, पलायन और सार्वजनिक व वित्तीय सेवाओं की पहुंच भी शामिल है, और यह भी देखा जाएगा कि अलग-अलग क्षेत्रों तथा कमजोर वर्गों में नतीजे कैसे बदलते हैं।

यह क्यों अहम है

पीएमजीएसवाई ग्रामीण सड़कों का प्रमुख कार्यक्रम है और पीएम-जनमन विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए है। एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला आकलन यह दिखा सकता है कि सड़क बनने के वर्षों बाद भी फायदे बने रहते हैं या नहीं, कार्यान्वयन की खामियां उजागर कर सकता है और आगे की योजना व नीति में मदद कर सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

समझौताएनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता के बीच प्रभाव आकलन अध्ययन पर एमओयू
मंत्रालयग्रामीण विकास मंत्रालय
अध्ययन किए जा रहे कार्यक्रमपीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन
अवधिचार वर्षीय लॉन्गिट्यूडिनल अध्ययन
दायरा10 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश, 50 जिले, 150 ब्लॉक और 250 सड़कें
नमूनालगभग 5,000 परिवार
बेसलाइन सर्वेक्षण14 माह, निर्माण से पहले
परिवर्तन अवधिलगभग 12 माह
एंडलाइन सर्वेक्षण22 माह, निर्माण के बाद
हस्ताक्षरकर्ताअदिति सिंह (आईएएस), महानिदेशक एनआरआईडीए और प्रो. आलोक कुमार राय, निदेशक, आईआईएम कलकत्ता
उपस्थितरोहित कंसल, सचिव, ग्रामीण विकास

परीक्षा की दृष्टि से

हस्ताक्षर करने वाली दोनों संस्थाएं (एनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता), संबंधित मंत्रालय (ग्रामीण विकास), अध्ययन किए जा रहे दोनों कार्यक्रम (पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन), दायरा (10 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश, 50 जिले, 150 ब्लॉक, 250 सड़कें), नमूना (लगभग 5,000 परिवार) तथा 14 माह का बेसलाइन और 22 माह का एंडलाइन सर्वेक्षण याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

एनआरआईडीए ने पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन सड़कों के चार वर्षीय प्रभाव आकलन के लिए किस संस्थान से एमओयू किया?

  1. A.आईआईएम अहमदाबाद
  2. B.आईआईएम कलकत्ता
  3. C.आईआईटी रुड़की
  4. D.राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आईआईएम कलकत्ता

व्याख्या

सही उत्तर आईआईएम कलकत्ता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाली राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी ने भारतीय प्रबंध संस्थान कलकत्ता के साथ पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन के तहत बनी सड़कों के चार वर्षीय लॉन्गिट्यूडिनल अध्ययन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर करने वाले थे एनआरआईडीए महानिदेशक अदिति सिंह और आईआईएम कलकत्ता के निदेशक आलोक कुमार राय, जबकि ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल उपस्थित रहे। विकल्प A यानी आईआईएम अहमदाबाद एक अलग प्रबंध संस्थान है और इस समझौते का पक्ष नहीं था, इसलिए गलत है। विकल्प C यानी आईआईटी रुड़की एक अभियांत्रिकी संस्थान है और यहां शामिल नहीं था। विकल्प D यानी राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान इसी क्षेत्र में काम करता है, इसलिए भ्रम पैदा करता है, पर इस एमओयू में नामित साझेदार नहीं है।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

एनआरआईडीए का प्रभाव आकलन अध्ययन कितनी सड़कों को कवर करेगा?

  1. A.150
  2. B.200
  3. C.250
  4. D.500
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 250

व्याख्या

सही उत्तर 250 है। अध्ययन में इतनी ग्रामीण सड़कें शामिल होंगी, जो दस राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों, पचास जिलों और एक सौ पचास ब्लॉकों में फैली हैं। साथ ही आवागमन, पहुंच और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में बदलाव दर्ज करने के लिए लगभग पांच हजार परिवारों का सर्वेक्षण होगा। विकल्प A सड़कों की नहीं, बल्कि ब्लॉकों की संख्या है, इसलिए यह आकर्षक भ्रम है पर गलत है। विकल्प B और विकल्प D गोल-मटोल आंकड़े हैं जो घोषित दायरे से मेल नहीं खाते, अतः दोनों गलत हैं। परीक्षार्थी चारों आंकड़ों को क्रम में याद रखें, पहले राज्य व केंद्र शासित प्रदेश, फिर जिले, फिर ब्लॉक और अंत में सड़कें, क्योंकि प्रश्नों में अक्सर इनमें से एक को दूसरे से बदल दिया जाता है। अध्ययन में शामिल राज्य आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम और उत्तराखंड हैं।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

एनआरआईडीए के अध्ययन ढांचे में निर्माण से पहले होने वाला बेसलाइन सर्वेक्षण कितने समय तक चलेगा?

  1. A.6 माह
  2. B.14 माह
  3. C.22 माह
  4. D.36 माह
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 14 माह

व्याख्या

सही उत्तर 14 माह है। यह आकलन तीन चरणों में बना है। पहले चौदह माह का बेसलाइन यानी निर्माण-पूर्व सर्वेक्षण होगा, फिर लगभग बारह माह की परिवर्तन अवधि, और अंत में बाईस माह का एंडलाइन यानी निर्माण-पश्चात सर्वेक्षण। चूंकि हर चरण में उन्हीं परिवारों और उन्हीं सड़कों के पास लौटा जाएगा, इसलिए इस ढांचे को लॉन्गिट्यूडिनल कहा जाता है और यह अलग-अलग नमूनों की तुलना करने के बजाय समय के साथ आए बदलाव को दिखा सकता है। विकल्प A बताई गई बेसलाइन अवधि से कम है, इसलिए गलत है। विकल्प C निर्माण के बाद होने वाले एंडलाइन सर्वेक्षण की अवधि है, बेसलाइन की नहीं, इसलिए यह आम जाल है। विकल्प D किसी भी एक चरण से लंबा है और योजना से मेल नहीं खाता। पूरा अध्ययन चार वर्ष चलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रामीण सड़कों के प्रभाव अध्ययन में एनआरआईडीए का साझेदार कौन-सा संस्थान है?

भारतीय प्रबंध संस्थान कलकत्ता। इसके निदेशक प्रो. आलोक कुमार राय ने एनआरआईडीए महानिदेशक अदिति सिंह के साथ पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन सड़कों के चार वर्षीय आकलन पर एमओयू किया।

अध्ययन में कितनी सड़कें और कितने परिवार शामिल होंगे?

10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों, 50 जिलों और 150 ब्लॉकों की 250 सड़कें, तथा आवागमन, पहुंच और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर लगभग 5,000 परिवारों का सर्वेक्षण।

अध्ययन के चरण कौन-कौन से हैं?

निर्माण से पहले 14 माह का बेसलाइन सर्वेक्षण, लगभग 12 माह की परिवर्तन अवधि और निर्माण के बाद 22 माह का एंडलाइन सर्वेक्षण, ताकि उन्हीं जगहों को समय के साथ मापा जा सके।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC CHSL