महत्वपूर्ण खनिज प्राप्त करने के लिए किसे द्वितीयक स्रोत के रूप में गिनाया गया?
- A.कोयले की फ्लाई ऐश
- B.नदी की रेत
- C.चूना पत्थर की धूल
- D.समुद्री नमक
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर कोयले की फ्लाई ऐश है। महत्वपूर्ण खनिज एवं दुर्लभ मृदा पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नीति आयोग के सदस्य ने द्वितीयक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिज प्राप्त करने की संभावना रेखांकित की और कोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, खदान अवशेष तथा इलेक्ट्रॉनिक कचरे का नाम लिया। विकल्प B गलत है, क्योंकि नदी की रेत इन स्रोतों में नहीं है और रेत खनन निर्माण सामग्री का अलग विषय है। विकल्प C गलत है, क्योंकि चूना पत्थर की धूल सूची में नहीं आई; चूना पत्थर सीमेंट और इस्पात में उपयोग होने वाला बल्क खनिज है। विकल्प D गलत है, क्योंकि समुद्री नमक का उल्लेख नहीं हुआ, हालांकि ब्राइन से खनिज प्राप्त करना अनुसंधान की अलग दिशा है। बड़ा तर्क यह था कि क्षेत्र को खदान केंद्रित सोच से आगे बढ़ना होगा।
पूरा लेख पढ़ें: नीति आयोग और टेक्समिन के बीच महत्वपूर्ण खनिज समझौता
अभ्यास प्रश्न
नीति आयोग के साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने वाला टेक्समिन किस संस्थान में है?
- A.आईआईटी खड़गपुर
- B.आईआईटी (आईएसएम) धनबाद
- C.आईआईटी बॉम्बे
- D.आईआईटी मद्रास
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टेक्समिन उसी संस्थान का प्रौद्योगिकी अनुवाद शोध पार्क है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल है; नीति आयोग के साथ संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर आयोग के एक सदस्य की उस परिसर की यात्रा के दौरान हुए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नीति आयोग-टेक्समिन संयुक्त आशय वक्तव्य किस मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है?
- A.राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
- B.राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन
- C.राष्ट्रीय क्वांटम मिशन
- D.गहरे समुद्र मिशन
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यह सहयोग उस मिशन के उद्देश्यों तथा आत्मनिर्भर और विकसित भारत के विजन के अनुरूप बताया गया है, क्योंकि इसका लक्ष्य स्वदेशी तकनीकी क्षमता बढ़ाना तथा महत्वपूर्ण खनिजों की सुदृढ़ एवं संपोषणीय मूल्य श्रृंखला बनाना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सौर विस्फोट के असममित फैलाव पर यह अध्ययन किस पत्रिका में प्रकाशित हुआ?
- A.नेचर एस्ट्रोनॉमी
- B.एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स
- C.करंट साइंस
- D.मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी
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यह शोधपत्र, जिसमें बताया गया कि कोरोनल मास इजेक्शन सममित बुलबुले की तरह नहीं फैला, इसी पत्रिका में छपा, और यह 5 अगस्त 2024 को सूर्य के पश्चिमी किनारे के पास सक्रिय क्षेत्र से उठे विस्फोट पर आधारित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आदित्य-एल1 के वीईएलसी पेलोड का डिजाइन और निर्माण किस संस्थान ने किया?
- A.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद
- B.भारतीय तारा भौतिकी संस्थान
- C.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
- D.अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र
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यह कोरोनाग्राफ संस्थान की होसकोटे स्थित क्रेस्ट परिसर की एमजीके मेनन अंतरिक्ष विज्ञान प्रयोगशाला में इसरो के पर्याप्त सहयोग से बनाया गया, और इस अध्ययन को करने वाले वैज्ञानिक भी आईआईए के ही हैं, प्रमुख लेखक वहां के शोध छात्र सौरभ त्रिपाठी, संवादी लेखक सौर खगोलशास्त्री तन्मय सामंत और सह-लेखक…
पूरी व्याख्या पढ़ें →वीईएलसी के प्रेक्षणों से कोरोनल मास इजेक्शन के बारे में पहली बार क्या पता चला?
- A.वह पूर्ण रूप से सममित बुलबुले की तरह फैला
- B.वह असमान रूप से फैला और असममित हो गया
- C.वह पृथ्वी की ओर बढ़ा ही नहीं
- D.उसमें आयनित लोहा नहीं था
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इस अध्ययन से पहले माना जाता था कि कोरोनल मास इजेक्शन सूर्य से किसी सरल सममित बुलबुले की तरह बाहर बढ़ता है; वीईएलसी के स्पेक्ट्रा को नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी की तस्वीरों और त्रि-आयामी मॉडल के साथ पढ़ने पर पता चला कि फैलाव असमान था।
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