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ट्राई ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन तीसरा संशोधन विनियम जारी किए

ट्राई ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और इंटरकनेक्शन को एलएसए स्तर पर ले जाएंगे।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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ट्राई ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन तीसरा संशोधन विनियम जारी किए — GK24 title card

चर्चा में क्यों

3 नवंबर 2026 को ट्राई ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और दूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियम, 2018 में संशोधन करते हैं।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 3 नवंबर 2026 को दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए। ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे और दूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियम, 2018 के कुछ हिस्सों को बदल देंगे।

इंटरकनेक्शन उन तकनीकी, परिचालन और व्यावसायिक व्यवस्थाओं का समूह है जो दो या अधिक दूरसंचार नेटवर्कों को जोड़ती हैं, जिससे कॉल, संदेश और डेटा एक नेटवर्क से दूसरे तक जा पाते हैं और एक कंपनी का ग्राहक दूसरी कंपनी के ग्राहक तक पहुंच पाता है। इंटरकनेक्शन की शर्तें तय करने और सेवा प्रदाताओं के बीच तकनीकी अनुकूलता बनाए रखने का अधिकार ट्राई को ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(ब) से मिलता है।

मुख्य बदलाव

  • एलएसए स्तर पर इंटरकनेक्शन: अब देने वाला और लेने वाला आपसी सहमति से तय कर सकते हैं कि ट्रैफिक कहां सौंपा जाएगा। ढांचा पुराने एलडीसीए और एसडीसीए स्तर से हटकर लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) स्तर पर आ गया है, जिससे रूटिंग सरल होगी, नंबरिंग संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विलंब घटेगा।
  • मौजूदा ट्रैफिक का स्थानांतरण: एलडीसीए और एसडीसीए स्तर के इंटरकनेक्शन बिंदुओं (पीओआई) पर चल रहे उपयोग के मिनटों को तीन वर्ष के भीतर चरणों में एलएसए स्तर के पीओआई पर ले जाना होगा।
  • आईपी आधारित इंटरकनेक्शन: नियम लागू होने के बाद बनने वाला हर इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होगा, और ई1 या टीडीएम लिंक पर चल रहे पीओआई को तीन वर्ष में आईपी पर बदलना होगा।
  • पीओआई सरेंडर: कोई कंपनी अपनी परिचालन जरूरत के अनुसार स्वेच्छा से पीओआई छोड़ सके, इसके लिए अलग रास्ता बनाया गया है, जैसे ट्रैफिक घटने या किसी क्षेत्र से सेवा हटाने पर। पहले नियमों में केवल डिस्कनेक्शन की बात थी, जो दूसरे प्रदाता से विवाद की स्थिति में उठाया जाने वाला कदम है।

शुल्क और प्रवर्तन

बैंक गारंटी का ढांचा बना रहेगा, लेकिन पुनर्मूल्यांकन के बाद दी गई गारंटी की वैधता और दो पुनर्मूल्यांकनों के बीच का अंतराल, दोनों 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिए गए हैं, तथा गारंटी की अधिकतम सीमा तय करने का तरीका भी बदला गया है ताकि आईपी आधारित इंटरकनेक्शन उसमें आ जाए। इंटरकनेक्शन शुल्क या इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क देर से चुकाने पर ब्याज दर दोनों कंपनियां आपस में तय करेंगी, मगर वह भारतीय स्टेट बैंक की एक वर्ष की एमसीएलआर दर में 2 प्रतिशत जोड़ने से बनी दर से ऊपर नहीं जा सकती। ट्रैफिक के स्थानांतरण और आईपी पर जाने की निगरानी के लिए रिपोर्टिंग की शर्तें रखी गई हैं, और उल्लंघन पर श्रेणीबद्ध वित्तीय दंड लगेगा।

नियम कैसे बने

ट्राई ने 03.04.2025 के प्रारंभिक-परामर्श पत्र से समीक्षा शुरू की, फिर 10.11.2025 को परामर्श पत्र जारी किया। समय बढ़ाने के बाद लिखित टिप्पणियों की अंतिम तिथि 15.12.2025 और जवाबी टिप्पणियों की 29.12.2025 रही। सत्रह हितधारकों ने टिप्पणियां और नौ ने प्रति-टिप्पणियां भेजीं, और 28.01.2026 को खुली चर्चा के बाद संशोधन को अंतिम रूप दिया गया।

महत्वपूर्ण तथ्य

विनियमदूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026
जारीकर्ताभारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई)
जारी होने की तिथि3 नवंबर 2026
लागू1 जनवरी 2027 से
संशोधित विनियमदूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियम, 2018
सक्षम प्रावधानट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(ब)
नया इंटरकनेक्शन स्तरलाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए)
ब्याज की अधिकतम सीमाएसबीआई की एक वर्षीय एमसीएलआर में 2 प्रतिशत
मंत्रालयसंचार मंत्रालय

परीक्षा की दृष्टि से

नियामक (ट्राई), संशोधन विनियमों का पूरा नाम और वर्ष, लागू होने की तिथि (1 जनवरी 2027), मूल विनियम 2018, ट्राई अधिनियम 1997 की धारा 11(1)(ब), एलडीसीए/एसडीसीए से एलएसए स्तर पर बदलाव, आईपी पर जाने की तीन वर्ष की समय-सीमा और एसबीआई की एक वर्षीय एमसीएलआर में 2 प्रतिशत की ब्याज सीमा याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 किस तिथि से लागू होंगे?

  1. A.1 दिसंबर 2026
  2. B.1 जनवरी 2027
  3. C.1 अप्रैल 2027
  4. D.3 नवंबर 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 जनवरी 2027

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने ये संशोधन विनियम जारी करते हुए बताया कि ये जनवरी 2027 के पहले दिन से प्रभावी होंगे, जिससे कंपनियों को नई इंटरकनेक्शन जिम्मेदारियां शुरू होने से पहले तैयारी का समय मिल जाएगा।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

संशोधित नियमों के तहत इंटरकनेक्शन किस स्तर पर आ जाएगा?

  1. A.शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एसडीसीए) स्तर
  2. B.लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एलडीसीए) स्तर
  3. C.लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) स्तर
  4. D.जिला स्तर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) स्तर

संशोधन ट्रैफिक सौंपने और लेने की व्यवस्था को पुराने चार्जिंग एरिया वाले भूगोल से हटाकर लाइसेंस्ड सर्विस एरिया पर ले आता है, और इंटरकनेक्शन देने वाले तथा लेने वाले को आपसी सहमति से स्थान तय करने की छूट देता है।

Q3.राष्ट्रीयकठिन

इंटरकनेक्शन शुल्क के विलंबित भुगतान पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा क्या है?

  1. A.आरबीआई रेपो दर में एक प्रतिशत जोड़कर
  2. B.एसबीआई की एक वर्षीय एमसीएलआर में दो प्रतिशत जोड़कर
  3. C.सालाना 18 प्रतिशत की निश्चित दर
  4. D.बैंक दर में तीन प्रतिशत जोड़कर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एसबीआई की एक वर्षीय एमसीएलआर में दो प्रतिशत जोड़कर

एक नया प्रावधान इंटरकनेक्शन शुल्क और इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क के देर से भुगतान से निपटता है, जिसमें दोनों सेवा प्रदाता ब्याज दर आपस में तय कर सकते हैं, मगर वह इस मानक से ऊपर नहीं जा सकती।

Q4.राष्ट्रीयमध्यम

ई1 या टीडीएम लिंक पर चल रहे मौजूदा पीओआई को आईपी आधारित इंटरकनेक्शन पर कितने समय में बदलना होगा?

  1. A.एक वर्ष
  2. B.दो वर्ष
  3. C.तीन वर्ष
  4. D.पांच वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तीन वर्ष

संशोधन विनियमों में कहा गया है कि नियम लागू होने के बाद स्थापित हर इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होगा, और जो पीओआई अब भी ई1 या टीडीएम तकनीक पर काम कर रहे हैं उन्हें चरणबद्ध तरीके से तीन वर्ष के भीतर आईपी आधारित इंटरकनेक्शन में बदलना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 कब से लागू होंगे?

1 जनवरी 2027 से। ट्राई ने इन्हें 3 नवंबर 2026 को जारी किया और ये दूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियम, 2018 में संशोधन करते हैं।

नए नियमों से इंटरकनेक्शन बिंदुओं में क्या बदलेगा?

ट्रैफिक एलडीसीए और एसडीसीए स्तर के पीओआई से तीन वर्ष में चरणों में एलएसए स्तर के पीओआई पर जाएगा, हर नया इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होगा और ई1 या टीडीएम पीओआई तीन वर्ष में आईपी पर बदले जाएंगे।

देर से भुगतान पर ब्याज की सीमा क्या है?

दोनों कंपनियां दर आपस में तय कर सकती हैं, लेकिन वह भारतीय स्टेट बैंक की एक वर्ष की एमसीएलआर दर में 2 प्रतिशत जोड़कर बनी दर से अधिक नहीं हो सकती।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS