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तटीय लचीलेपन पर राष्ट्रीय कार्यशाला नई दिल्ली में शुरू

पर्यावरण मंत्रालय ने ग्रीन क्लाइमेट फंड की जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के तहत तटीय लचीलेपन पर दो दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला नई दिल्ली में शुरू की।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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तटीय लचीलेपन पर राष्ट्रीय कार्यशाला नई दिल्ली में शुरू

चर्चा में क्यों

29 अक्टूबर 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ग्रीन क्लाइमेट फंड की जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के अंतर्गत नई दिल्ली में 'अनुकूलन रणनीतियों के माध्यम से तटीय लचीलेपन को बढ़ाना' विषय पर दो दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू की।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में दो दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू की, जिसका विषय 'अनुकूलन रणनीतियों के माध्यम से तटीय लचीलेपन को बढ़ाना' है। यह 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। कार्यशाला ग्रीन क्लाइमेट फंड की उस परियोजना के अंतर्गत हो रही है जिसका नाम भारत के तटीय समुदायों की जलवायु सहनशीलता बढ़ाना है और जिसे अधिकारी जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी कहते हैं।

परियोजना का काम

यह परियोजना तट की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रणालियों को फिर खड़ा करने पर काम करती है: मैंग्रोव, तटीय जलग्रहण क्षेत्र, समुद्री घास, लवणीय दलदल और प्रवाल। इसके साथ ही वह सबसे संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका को मजबूत करती है। परियोजना आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में चल रही है, और इन तीन राज्यों की प्रगति तथा इस तरीके को अन्यत्र दोहराने की संभावना कार्यशाला में रखी गई।

मंत्रालय ने क्या कहा

मंत्रालय के सचिव नरेंद्र भूषण ने उद्घाटन सत्र में कहा कि बदलती जलवायु के सामने तट को मजबूत करना और साथ ही आजीविका की रक्षा करना भारत के लिए आवश्यक है, यदि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाना है। उन्होंने जैव विविधता, आय और तट की सुरक्षा के लिए मैंग्रोव, समुद्री घास, लवणीय दलदल और प्रवाल भित्तियों के महत्व पर बल दिया। उनके अनुसार तटीय नियोजन का वैज्ञानिक आधार तटरेखा-परिवर्तन आकलन, संकट-रेखा मानचित्रण, तटीय संवेदनशीलता आकलन और पारिस्थितिकी संबंधी जानकारी के जरिये मजबूत हुआ है, और अब काम यह है कि इन प्रमाणों को रिपोर्टों और नक्शों से निकालकर राज्य, जिला तथा स्थानीय स्तर पर वास्तविक नियोजन, अवसंरचना और निवेश के निर्णयों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय तटीय मिशन इस प्रयास की धुरी बनेगा।

अन्य वक्ता

मंत्रालय की वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार राजश्री राय ने स्वागत भाषण दिया और राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर के दृष्टिकोण, विज्ञान, क्षेत्रीय अनुभव और वित्तपोषण को एक साथ लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने परियोजना का क्लाइमेट चैंपियन मॉडल सामने रखा, जिसमें मुख्य रूप से तटीय समुदायों की महिलाएं, जिन्हें ईसीआरआईसीसी दीदी कहा जाता है, तकनीकी जानकारी को स्थानीय समुदायों के लिए उपयोगी रूप में बदलती हैं। संयुक्त सचिव तन्वी गर्ग ने तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ राष्ट्रीय तटीय मिशन की भूमिका पर बात की। यूएनडीपी इंडिया की रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव डॉ. एंजेला लुसिगी ने कहा कि तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली आजीविका को सहारा देती है और महिलाओं के उद्यमों को बढ़ने में मदद करती है। द नेचर कंजरवेंसी इंडिया के अंतरिम प्रबंध निदेशक डॉ. सुशील सैगल ने सिद्ध पद्धतियों के प्रसार के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान पर जोर दिया।

कौन शामिल हुए

कार्यशाला में करीब 150 प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें मंत्रालय तथा अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, यूएनडीपी और द नेचर कंजरवेंसी के प्रतिनिधि, तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वन विभाग, शोध संस्थान, गैर-सरकारी संगठन, वित्तीय संस्थान और परमार्थ संस्थाएं थीं। कार्यशाला की सिफारिशें भारत में अनुकूलनशील तटीय लचीलेपन के व्यापक दिशानिर्देशों में काम आएंगी, जो राष्ट्रीय नीति, राज्यों की प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय अनुभव पर आधारित होंगी और नीली क्रांति तथा समुद्री अर्थव्यवस्था की उस परिकल्पना के अनुरूप होंगी जिसका प्रतीक तिरंगे का नीला चक्र है।

महत्वपूर्ण तथ्य

कार्यशाला'अनुकूलन रणनीतियों के माध्यम से तटीय लचीलेपन को बढ़ाना' पर राष्ट्रीय कार्यशाला
तिथि और स्थान29 और 30 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली
आयोजकपर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
परियोजनाभारत के तटीय समुदायों की जलवायु सहनशीलता बढ़ाना (जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी)
वित्तपोषणग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ)
परियोजना राज्यआंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा
पारिस्थितिकी तंत्रमैंग्रोव, तटीय जलग्रहण क्षेत्र, समुद्री घास, लवणीय दलदल और प्रवाल
मंत्रालय के सचिवनरेंद्र भूषण
महिला स्वयंसेवीईसीआरआईसीसी दीदी, क्लाइमेट चैंपियन मॉडल के तहत
यूएनडीपी इंडियाडॉ. एंजेला लुसिगी, रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव
प्रतिभागीकरीब 150
मार्गदर्शक मिशनराष्ट्रीय तटीय मिशन, विकसित भारत 2047 से जुड़ा

परीक्षा की दृष्टि से

कार्यशाला का विषय, तिथियां (29-30 अक्टूबर 2026) और स्थान (नई दिल्ली), मंत्रालय (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन), वित्तपोषक परियोजना (ग्रीन क्लाइमेट फंड की जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी), तीन परियोजना राज्य (आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा), ईसीआरआईसीसी दीदी का क्लाइमेट चैंपियन मॉडल, धुरी के रूप में राष्ट्रीय तटीय मिशन और करीब 150 प्रतिभागी याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

'अनुकूलन रणनीतियों के माध्यम से तटीय लचीलेपन को बढ़ाना' विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला किस मंत्रालय ने आयोजित की?

  1. A.जल शक्ति मंत्रालय
  2. B.पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
  3. C.पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
  4. D.मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

इसने यह कार्यशाला 29 और 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ग्रीन क्लाइमेट फंड की जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के अंतर्गत आयोजित की, और मंत्रालय के सचिव नरेंद्र भूषण ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

Q2.पर्यावरणमध्यम

जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना किन तीन राज्यों में चल रही है?

  1. A.गुजरात, केरल और तमिलनाडु
  2. B.आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा
  3. C.पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु
  4. D.गोवा, कर्नाटक और केरल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा

कार्यशाला के स्वागत भाषण में इन तीन राज्यों में परियोजना की प्रगति तथा सफल तरीकों को दोहराने और बड़े पैमाने पर लागू करने की संभावना रखी गई।

Q3.पर्यावरणमध्यम

मंत्रालय के सचिव ने किस मिशन को तटीय लचीलेपन की धुरी बताया?

  1. A.राष्ट्रीय तटीय मिशन
  2. B.राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन
  3. C.राष्ट्रीय जल मिशन
  4. D.राष्ट्रीय हरित भारत मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राष्ट्रीय तटीय मिशन

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव नरेंद्र भूषण ने उद्घाटन सत्र में कहा कि यह मिशन जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के परिणामों पर आधार बनाकर तटीय लचीलेपन और अनुकूलन हस्तक्षेप की धुरी के रूप में काम करेगा।

Q4.पर्यावरणमध्यम

जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना में 'ईसीआरआईसीसी दीदी' कहलाने वाले क्लाइमेट चैंपियन कौन हैं?

  1. A.तट पर तैनात वन अधिकारी
  2. B.मुख्य रूप से तटीय समुदायों की महिलाएं
  3. C.तटीय जिलों के स्कूल शिक्षक
  4. D.शोध संस्थानों के वैज्ञानिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मुख्य रूप से तटीय समुदायों की महिलाएं

परियोजना का क्लाइमेट चैंपियन मॉडल इन महिलाओं को तकनीकी जानकारी और उस पर अमल करने वाले गांवों के बीच की कड़ी बनाता है, और इन्हें ईसीआरआईसीसी दीदी कहा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी क्या है?

ग्रीन क्लाइमेट फंड की परियोजना 'भारत के तटीय समुदायों की जलवायु सहनशीलता बढ़ाना'। यह मैंग्रोव, तटीय जलग्रहण क्षेत्र, समुद्री घास, लवणीय दलदल और प्रवाल की बहाली करती है तथा अत्यंत संवेदनशील इलाकों में आजीविका मजबूत करती है; यह आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में चल रही है।

नई दिल्ली की राष्ट्रीय कार्यशाला का विषय क्या था?

'अनुकूलन रणनीतियों के माध्यम से तटीय लचीलेपन को बढ़ाना'। इसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 29 और 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया और इसमें करीब 150 प्रतिभागी शामिल हुए।

ईसीआरआईसीसी दीदी कौन हैं?

मुख्य रूप से तटीय समुदायों की वे महिलाएं जो जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी में क्लाइमेट चैंपियन के रूप में काम करती हैं। वे परियोजना की तकनीकी जानकारी को स्थानीय समुदायों के काम लायक रूप में बदलती हैं, और यह मॉडल कार्यशाला में व्यापक अनुकरण के लिए प्रस्तुत किया गया।

इस काम को आगे कौन-सा मिशन बढ़ाएगा?

राष्ट्रीय तटीय मिशन। मंत्रालय के सचिव नरेंद्र भूषण ने कहा कि यह मिशन जीसीएफ-ईसीआरआईसीसी परियोजना के परिणामों पर आधार बनाकर तटीय लचीलेपन और अनुकूलन संबंधी हस्तक्षेप की धुरी के रूप में काम करेगा।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 29 अक्टूबर 2026

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