एमएससीएआरओ 2026: बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए नया आदेश
सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए एक समान और जोखिम-आधारित लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग आदेश एमएससीएआरओ 2026 को अनिवार्य कर दिया है।

चर्चा में क्यों
सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए एक समान, सुव्यवस्थित और जोखिम-आधारित लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग ढांचा एमएससीएआरओ, 2026 अनिवार्य किया है, जो बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 73(6) के तहत जारी हुआ है।
सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश, 2026 को अनिवार्य कर दिया है, जिसे संक्षेप में एमएससीएआरओ, 2026 कहा जाता है। यह आदेश बहु-राज्य सहकारी समितियों की वैधानिक लेखापरीक्षा के लिए एक समान, सुव्यवस्थित और जोखिम-आधारित ढांचा तय करता है, और मंत्रालय इसे 'सहकार से समृद्धि' के लक्ष्य से जोड़ता है।
अधिकार कहां से आया
बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने धारा 73(6) के तहत केंद्र सरकार को इन समितियों के लिए लेखापरीक्षा और लेखांकन मानक निर्धारित करने का अधिकार दिया था। इसी प्रावधान के तहत यह आदेश तैयार हुआ, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक तथा समितियों से मिले सुझाव शामिल किए गए। इसका आधार कॉरपोरेट क्षेत्र में लागू कंपनी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश है।
लेखापरीक्षकों को क्या बताना होगा
- वित्तीय, प्रशासनिक, सुशासन और वैधानिक अनुपालन से जुड़े मानकों पर निर्धारित प्रारूप में स्पष्ट हां या नहीं के उत्तर तथा टिप्पणियां।
- वित्तीय दबाव के संकेत: गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां, अतिदेय ऋण, तरलता, जमाराशियां, अग्रिम, पुनर्भुगतान में चूक और उधारियां।
- निवेश, धन के उपयोग, शेयर पूंजी, सदस्यता अभिलेखों और वैधानिक स्वीकृतियों का स्वतंत्र सत्यापन, जिससे सदस्यों का धन जांचा जा सके।
- सुशासन से जुड़े विषय: निदेशक मंडल की संरचना, निदेशकों की पात्रता और अयोग्यता, वार्षिक आम सभा तथा बोर्ड बैठकों का आयोजन, वैधानिक समितियां और संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन।
- जहां लागू हो, साइबर सुरक्षा उपाय और धन शोधन निवारण अनुपालन, जिसमें संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग, ग्राहक पहचान तथा धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत नामित निदेशक और प्रधान अधिकारी की नियुक्ति शामिल है।
जोखिम के आधार पर निगरानी
सबसे बड़ा बदलाव जोखिम-आधारित पर्यवेक्षण है। लेखापरीक्षा टिप्पणियों के आधार पर केंद्रीय सहकारी समिति पंजीयक उन समितियों की पहचान कर सकेंगे जिनमें वित्तीय या प्रशासनिक जोखिम अधिक है, और निरीक्षण, जांच तथा कार्रवाई उन पर केंद्रित होगी। मानकीकृत लेखापरीक्षा सूचनाओं को सीआरसीएस पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे स्वचालित जांच, नियामकीय डैशबोर्ड, जोखिम मूल्यांकन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण संभव होंगे।
चरणबद्ध अमल
| चरण | दायरा |
| प्रारंभिक चरण | संबंधित वित्तीय मानकों में 1,000 करोड़ रुपये की सीमा पार करने वाली बड़ी समितियां |
| दीर्घकालिक लक्ष्य | 50 करोड़ रुपये की निर्धारित सीमा पार करने वाली समितियां |
यह क्रम जानबूझकर रखा गया है, ताकि छोटी समितियों को भारी रिपोर्टिंग लागू होने से पहले अपनी प्रणालियां और प्रक्रियाएं सुधारने का समय मिले। कुल मिलाकर मानकीकृत लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग, जोखिम आधारित पर्यवेक्षण और प्रौद्योगिकी से निगरानी का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ाना और सदस्यों के धन की रक्षा करना है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आदेश | बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश, 2026 (एमएससीएआरओ, 2026) |
|---|---|
| मंत्रालय | सहकारिता मंत्रालय |
| सक्षम प्रावधान | बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 73(6) |
| आधार | कॉरपोरेट क्षेत्र का कंपनी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश |
| सुझाव देने वाले | रिजर्व बैंक, आईसीएआई, सीएजी और बहु-राज्य सहकारी समितियां |
| पर्यवेक्षी प्राधिकरण | केंद्रीय सहकारी समिति पंजीयक (सीआरसीएस) |
| प्रौद्योगिकी | सीआरसीएस पोर्टल से एकीकरण, स्वचालित जांच, डैशबोर्ड, जोखिम मूल्यांकन और एआई विश्लेषण |
| प्रारंभिक सीमा | 1,000 करोड़ रुपये से अधिक वाली समितियां |
| दीर्घकालिक सीमा | 50 करोड़ रुपये से अधिक वाली समितियां |
| विजन | सहकार से समृद्धि |
परीक्षा की दृष्टि से
आदेश का नाम (एमएससीएआरओ, 2026), मंत्रालय (सहकारिता), सक्षम प्रावधान (बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी संशोधन अधिनियम, 2023 की धारा 73(6)), कॉरपोरेट आधार (सीएआरओ), सुझाव देने वाली चार संस्थाएं (रिजर्व बैंक, आईसीएआई, सीएजी और समितियां), सीआरसीएस तथा उसका पोर्टल, और 1,000 करोड़ रुपये व 50 करोड़ रुपये की सीमाएं याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
सहकारिता मंत्रालय द्वारा अनिवार्य एमएससीएआरओ, 2026 किस विषय से संबंधित है?
- A.सहकारी बैंकों में पदाधिकारियों का चुनाव
- B.बहु-राज्य सहकारी समितियों की वैधानिक लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग
- C.नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का पंजीकरण
- D.शहरी सहकारी बैंकों के लिए न्यूनतम पूंजी मानदंड
उत्तर देखें
एमएससीएआरओ का अर्थ बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश है, और अब अनिवार्य किया गया यह आदेश एक समान, सुव्यवस्थित तथा जोखिम-आधारित ढांचा बनाता है, जिसमें लेखापरीक्षक वित्तीय, प्रशासनिक, सुशासन और वैधानिक अनुपालन मानकों पर निर्धारित प्रारूप में स्पष्ट हां या नहीं के उत्तर और टिप्पणियों के साथ रिपोर्ट…
पूरी व्याख्या पढ़ें →केंद्र सरकार को बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए लेखापरीक्षा और लेखांकन मानक तय करने का अधिकार किस प्रावधान से मिला है?
- A.बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 73(6)
- B.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35
- C.कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143
- D.संविधान का अनुच्छेद 243ZH
उत्तर देखें
इस संशोधन ने केंद्र सरकार को इन समितियों के लिए लेखापरीक्षा और लेखांकन मानक निर्धारित करने का अधिकार दिया, और नया लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग आदेश इसी प्रावधान के तहत तैयार किया गया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एमएससीएआरओ, 2026 के प्रारंभिक चरण में कौन सी समितियां शामिल होंगी?
- A.100 करोड़ रुपये से अधिक वाली
- B.250 करोड़ रुपये से अधिक वाली
- C.1,000 करोड़ रुपये से अधिक वाली
- D.पहले दिन से सभी पंजीकृत समितियां
उत्तर देखें
अमल जानबूझकर चरणबद्ध रखा गया है और पहले चरण में वे बड़ी समितियां आती हैं जो संबंधित वित्तीय मानकों में यह सीमा पार करती हैं, ताकि छोटी संस्थाओं को बढ़ी हुई रिपोर्टिंग लागू होने से पहले अपनी आंतरिक प्रणालियां और प्रक्रियाएं मजबूत करने का अतिरिक्त समय मिल सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एमएससीएआरओ, 2026 क्या है?
यह बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश, 2026 है, जिसे सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्य सहकारी समितियों की वैधानिक लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग के लिए एक समान, सुव्यवस्थित और जोखिम-आधारित ढांचा बनाने के लिए अनिवार्य किया है।
यह आदेश किस कानून के तहत जारी हुआ है?
बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 73(6) के तहत, जिसने केंद्र सरकार को इन समितियों के लिए लेखापरीक्षा और लेखांकन मानक तय करने का अधिकार दिया।
पहले चरण में कौन सी समितियां आएंगी?
प्रारंभिक चरण में संबंधित वित्तीय मानकों में 1,000 करोड़ रुपये की सीमा पार करने वाली बड़ी समितियां आएंगी। दीर्घकालिक लक्ष्य 50 करोड़ रुपये की निर्धारित सीमा पार करने वाली समितियों तक इसे बढ़ाना है।
एमएससीएआरओ में प्रौद्योगिकी का उपयोग कैसे होगा?
मानकीकृत लेखापरीक्षा सूचनाओं को सीआरसीएस पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे स्वचालित जांच, नियामकीय डैशबोर्ड, जोखिम मूल्यांकन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण के जरिये तथ्यों पर आधारित कार्रवाई संभव होगी।
स्रोत
- https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2323313 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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