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स्वच्छ भारत मिशन के बारह साल, बदले सार्वजनिक शौचालय

स्वच्छ भारत मिशन के बारह वर्ष पूरे होने पर बेंगलुरु से तिरुपति तक शहरों ने कबाड़ बस, पुनर्चक्रित प्लास्टिक और स्मार्ट उपकरणों से सार्वजनिक शौचालय नए सिरे से बनाए।

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स्वच्छ भारत मिशन के बारह साल, बदले सार्वजनिक शौचालय

चर्चा में क्यों

2 अक्टूबर 2026 की पीआईबी पृष्ठभूमि विज्ञप्ति में बताया गया कि 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन के बारह वर्ष पूरे होने पर भारतीय शहरों ने सार्वजनिक शौचालयों को नए सिरे से गढ़ा है, जिसके उदाहरण बेंगलुरु, नवी मुंबई, भोपाल, कराड तथा तिरुपति से दिए गए।

2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन बारह वर्ष पूरे कर रहा है, और पीआईबी के एक विवरण से दिखता है कि सार्वजनिक शौचालय का विचार कितनी दूर आ चुका है। शहरों ने पहले शौचालय बनाए और खुले में शौच से मुक्त होने की दिशा में काम किया, कई आगे बढ़कर ओडीएफ प्लस तथा ओडीएफ डबल प्लस दर्जे तक पहुंचे। 2022 में मिशन की शहरी शाखा के अंतर्गत टॉयलेट्स 2.0 पहल ने नया लक्ष्य रखा: सामुदायिक तथा सार्वजनिक शौचालय सुरक्षित, स्वच्छ और आकर्षक हों। नागरिक स्वच्छता ऐप पर एसबीएम टॉयलेट लोकेटर से निकटतम शौचालय ढूंढ सकता है।

बेंगलुरु में कबाड़ बस

बेंगलुरु में कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के मैजेस्टिक टर्मिनल पर एक पुरानी बस को स्त्री टॉयलेट में बदल दिया गया, जो केवल महिलाओं के लिए है। इसमें तीन भारतीय शैली तथा दो पश्चिमी शैली के कमोड, सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और भस्मक है, साथ ही वह जगह जहां माताएं शिशुओं को दूध पिला सकें और डायपर बदल सकें। इसकी सेंसर बत्तियां उसी परिसर में बनी सौर ऊर्जा से चलती हैं।

नवी मुंबई महानगरपालिका ने अपने एस्पिरेशनल टॉयलेट सेक्टर 14, कोपरखैरणे में निसर्गउद्यान शहरी बगीचे के पास बनाए, जहां रोज 8,000 से 9,000 लोग आते हैं।

पुन: उपयोग सामग्रीमात्रा
पुनर्चक्रित प्लास्टिक शीट426 वर्ग मीटर
एकल उपयोग प्लास्टिक5.3 मीट्रिक टन
प्लास्टिक बोतलें11,700
बोतल के ढक्कन35,200
कंप्यूटर कीबोर्ड85, पुन: उपयोग
कबाड़ धातु284 किलोग्राम

भोपाल के फ्रेशरूम

भोपाल नगर निगम 10 नंबर मार्केट पर फ्रेशरूम चलाता है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत डिजाइन-बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल पर बने हैं। वहां का स्मार्ट लाउंज 800 से 1,000 वर्ग फुट में फैला है और रोज 500 से 1,000 लोगों को सेवा देता है, जिसमें सेंसर आधारित शौचालय, स्पर्श रहित यूरिनल, गर्म तथा ठंडे शॉवर, लॉकर, वाई-फाई और कैफे हैं।

कराड में सैनिटरी कचरा

महाराष्ट्र के सतारा जिले का कराड अपने सैनिटरी तथा जैव चिकित्सा कचरे का पूरा पृथक्करण, संग्रह और प्रसंस्करण करता है, रोज 300 से 350 किलोग्राम कचरा जुटाता है। नगर परिषद ने सार्वजनिक शौचालयों में लाल डिब्बे रखे, महिलाओं के साथ मिलकर झिझक तोड़ी, और कराड हॉस्पिटल एसोसिएशन के साथ मिलकर रोज 600 किलोग्राम क्षमता वाली साझा जैव चिकित्सा कचरा उपचार सुविधा खड़ी की, जिसका भस्मक 1,200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है और उत्सर्जन की निगरानी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रणाली से जुड़ी है।

तिरुपति के तीर्थयात्री

तिरुपति नगर निगम बस स्टैंड के पास महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट कॉम्प्लेक्स चलाता है, जो तीन पालियों की सफाई व्यवस्था के साथ रोज 12,000 से 15,000 लोगों को सेवा देता है, तथा रेलवे स्टेशन के पास एक साझा परिसर, जो गोविंदराजस्वामी मंदिर क्षेत्र में रोज आने वाले 20,000 से 25,000 श्रद्धालुओं के लिए है, जिसमें रैंप, रेलिंग तथा ट्रांसजेंडर और दिव्यांग उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधाएं हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

मिशनस्वच्छ भारत मिशन, 2 अक्टूबर 2014 को शुरू
पूरे हुए वर्षबारह
टॉयलेट्स 2.0स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत 2022 की पहल, सामुदायिक तथा सार्वजनिक शौचालयों के लिए
शौचालय कैसे खोजेंस्वच्छता ऐप पर एसबीएम टॉयलेट लोकेटर
बेंगलुरुकेएसआरटीसी मैजेस्टिक टर्मिनल पर कबाड़ बस से बना महिलाओं का स्त्री टॉयलेट
नवी मुंबईसेक्टर 14, कोपरखैरणे में एस्पिरेशनल टॉयलेट, 426 वर्ग मीटर पुनर्चक्रित प्लास्टिक शीट से
नवी मुंबई सामग्री11,700 प्लास्टिक बोतलें, 35,200 ढक्कन, 85 कंप्यूटर कीबोर्ड और 284 किलोग्राम कबाड़ धातु
भोपाल10 नंबर मार्केट पर फ्रेशरूम, सार्वजनिक-निजी भागीदारी में डिजाइन-बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल पर
कराडमहाराष्ट्र के सतारा जिले में; रोज 300 से 350 किलोग्राम सैनिटरी कचरा संग्रह
कराड सुविधारोज 600 किलोग्राम क्षमता वाली साझा जैव चिकित्सा कचरा उपचार सुविधा, भस्मक 1,200 डिग्री सेल्सियस तक
तिरुपतिमहिलाओं का पिंक टॉयलेट कॉम्प्लेक्स, रोज 12,000 से 15,000 उपयोगकर्ता
तिरुपति रेलवे स्टेशन परिसरगोविंदराजस्वामी मंदिर क्षेत्र में रोज 20,000 से 25,000 श्रद्धालुओं के लिए

परीक्षा की दृष्टि से

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की तिथि 2 अक्टूबर 2014 और पूरे हो रहे बारह वर्ष पहले तथ्य हैं। फिर शहरी मिशन के अंतर्गत 2022 की टॉयलेट्स 2.0 पहल तथा स्वच्छता ऐप पर एसबीएम टॉयलेट लोकेटर। शहरवार जोड़ियां संभावित प्रश्न हैं: बेंगलुरु के केएसआरटीसी मैजेस्टिक टर्मिनल पर कबाड़ बस से बना स्त्री टॉयलेट; नवी मुंबई के कोपरखैरणे में पुनर्चक्रित प्लास्टिक के एस्पिरेशनल टॉयलेट; भोपाल में डीबीओटी मॉडल पर फ्रेशरूम; सतारा जिले के कराड में 1,200 डिग्री सेल्सियस वाले भस्मक के साथ सैनिटरी कचरा उपचार; और तिरुपति का पिंक टॉयलेट कॉम्प्लेक्स।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

स्वच्छ भारत मिशन किस तिथि को शुरू किया गया था?

  1. A.15 अगस्त 2014
  2. B.2 अक्टूबर 2014
  3. C.2 अक्टूबर 2015
  4. D.26 जनवरी 2015
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2 अक्टूबर 2014

व्याख्या

सही उत्तर 2 अक्टूबर 2014 है, वही तिथि जिससे मिशन अपने पूरे हो रहे बारह वर्ष गिनता है। विकल्प A उसी वर्ष का स्वतंत्रता दिवस है, वह तिथि जिससे राष्ट्रीय कार्यक्रमों की घोषणा अक्सर जोड़ी जाती है, और इसीलिए यह सबसे आकर्षक गलत विकल्प है। विकल्प C और D वर्ष आगे खिसका देते हैं और वर्षगांठ को पूरे बारह महीने गलत कर देंगे। मिशन की शुरुआत शहरों से शौचालय बनवाने, जागरूकता फैलाने तथा खुले में शौच से मुक्त दर्जे की दिशा में काम कराने से हुई, जिसके बाद कई शहर आगे बढ़कर ओडीएफ प्लस और ओडीएफ डबल प्लस दर्जे तक पहुंचे। शहरी शाखा ने बाद में टॉयलेट्स दो दशमलव शून्य पहल से गुणवत्ता का लक्ष्य जोड़ा, और नागरिक अब स्वच्छता ऐप के शौचालय लोकेटर से निकटतम सुविधा खोज सकता है। इसे उस वर्ष की गांधी जयंती से जोड़कर याद रखना सबसे आसान है।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

महिला यात्रियों के लिए कबाड़ बस से बना स्त्री टॉयलेट किस शहर के बस टर्मिनल पर है?

  1. A.बेंगलुरु
  2. B.भोपाल
  3. C.नवी मुंबई
  4. D.तिरुपति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बेंगलुरु

व्याख्या

सही उत्तर बेंगलुरु है, कर्नाटक में, जहां कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के मैजेस्टिक टर्मिनल पर एक पुराने वाहन को केवल महिलाओं की सुविधा में बदल दिया गया। इसमें तीन भारतीय शैली तथा दो पश्चिमी शैली के कमोड, मासिक धर्म स्वच्छता के लिए सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और भस्मक, तथा वह अलग जगह है जहां माताएं शिशुओं को दूध पिला सकें और डायपर बदल सकें, जबकि इसकी सेंसर बत्तियां उसी परिसर में बनी सौर ऊर्जा से चलती हैं। तीनों गलत विकल्प उसी विवरण के दूसरे शहर हैं, हर एक अपने नवाचार के साथ: भोपाल बाजार में फ्रेशरूम स्मार्ट लाउंज चलाता है, नवी मुंबई ने कोपरखैरणे में पुनर्चक्रित प्लास्टिक से शौचालय बनाए, और तिरुपति तीर्थयात्रियों के लिए बड़े परिसर संभालता है। हर शहर को उसके नवाचार से जोड़कर याद रखना सबसे पक्का तरीका है।

Q3.सरकारी योजनाएंकठिन

नवी मुंबई के कोपरखैरणे स्थित एस्पिरेशनल टॉयलेट बनाने में कितनी प्लास्टिक बोतलें और ढक्कन लगे?

  1. A.9,500 बोतलें और 28,400 ढक्कन
  2. B.11,700 बोतलें और 35,200 ढक्कन
  3. C.14,200 बोतलें और 41,000 ढक्कन
  4. D.7,600 बोतलें और 19,800 ढक्कन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 11,700 बोतलें और 35,200 ढक्कन

व्याख्या

सही उत्तर 11,700 बोतलें और 35,200 ढक्कन है। नवी मुंबई महानगरपालिका ने सेक्टर 14, कोपरखैरणे में जो ढांचा बनाया उसमें 426 वर्ग मीटर पुनर्चक्रित प्लास्टिक शीट लगी है, जिसमें 5.3 मीट्रिक टन एकल उपयोग प्लास्टिक शामिल है, और निर्माताओं ने 85 पुन: उपयोग किए कंप्यूटर कीबोर्ड तथा 284 किलोग्राम कबाड़ धातु का भी उपयोग किया। उपचारित सीवेज जल से चलने वाला फव्वारा इस डिजाइन को पूरा करता है, और यह स्थल निसर्गउद्यान शहरी बगीचे के पास है जहां रोज 8,000 से 9,000 लोग आते हैं। बाकी विकल्पों में गढ़ी हुई गिनती है, जैसी परीक्षक यह देखने के लिए रखता है कि परीक्षार्थी ने बोतल तथा ढक्कन के आंकड़े साथ याद किए हैं या नहीं। इस शौचालय में पुरुषों और महिलाओं के अलग हिस्से, बच्चों तथा दिव्यांगजनों के लिए इकाइयां, शिशु देखभाल केंद्र और सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें भी हैं।

Q4.सरकारी योजनाएंकठिन

सैनिटरी तथा जैव चिकित्सा कचरे का पूरा पृथक्करण एवं प्रसंस्करण करने वाला कराड किस जिले में है?

  1. A.सांगली, महाराष्ट्र
  2. B.सतारा, महाराष्ट्र
  3. C.कोल्हापुर, महाराष्ट्र
  4. D.सोलापुर, महाराष्ट्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सतारा, महाराष्ट्र

व्याख्या

सही उत्तर महाराष्ट्र का सतारा जिला है। वहां की नगर परिषद अस्पतालों, क्लीनिकों, घरों तथा अन्य परिसरों से रोज 300 से 350 किलोग्राम सैनिटरी कचरा जुटाती है, उसने सार्वजनिक शौचालयों में लाल डिब्बे रखे, और महिलाओं के साथ मिलकर जागरूकता समूह बनाए जिन्होंने यह संदेश रिहायशी इलाकों तक पहुंचाया। परिषद ने रोज 600 किलोग्राम क्षमता वाली साझा जैव चिकित्सा कचरा उपचार सुविधा के लिए जमीन दी, जिसे कराड हॉस्पिटल एसोसिएशन चलाता तथा संभालता है, और परिषद अपने जुटाए कचरे के उपचार का कोई शुल्क नहीं देती। केंद्रीय भस्मक 1,200 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पर पहुंचता है, गैसें छानी जाती हैं, और उत्सर्जन पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रणाली से जुड़कर वास्तविक समय में नजर रखी जाती है। बाकी तीन विकल्प पश्चिमी महाराष्ट्र के पड़ोसी जिले हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वच्छ भारत मिशन कब शुरू हुआ था?

2 अक्टूबर 2014 को। मिशन बारह वर्ष पूरे कर रहा है और शहर अब शौचालय बनाने से आगे बढ़कर उन्हें स्वच्छ, सुरक्षित, समावेशी तथा टिकाऊ बनाए रखने पर काम कर रहे हैं।

स्त्री टॉयलेट क्या है और कहां है?

बेंगलुरु में कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के मैजेस्टिक बस टर्मिनल पर कबाड़ बस से बना महिलाओं का शौचालय, जिसमें तीन भारतीय तथा दो पश्चिमी शैली के कमोड और सौर ऊर्जा से चलने वाली सेंसर बत्तियां हैं।

नवी मुंबई के एस्पिरेशनल टॉयलेट में कौन सी सामग्री लगी?

426 वर्ग मीटर पुनर्चक्रित प्लास्टिक शीट, जिसमें 5.3 मीट्रिक टन एकल उपयोग प्लास्टिक है, साथ ही 11,700 प्लास्टिक बोतलें, 35,200 ढक्कन, 85 पुन: उपयोग किए कंप्यूटर कीबोर्ड और 284 किलोग्राम कबाड़ धातु।

कराड सैनिटरी कचरे का प्रबंध कैसे करता है?

वह अपने सैनिटरी तथा जैव चिकित्सा कचरे का पूरा पृथक्करण, संग्रह और प्रसंस्करण करता है, रोज 300 से 350 किलोग्राम जुटाता है, और उसका उपचार कराड हॉस्पिटल एसोसिएशन के साथ चलने वाली रोज 600 किलोग्राम क्षमता की सुविधा में करता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC CHSL