भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 सहित चार कार्यों को मंजूरी दी
भारतीय रेलवे ने 1 सितंबर 2026 को चार कार्यों को स्वीकृति दी, जिनमें मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर पर 170 करोड़ रुपये का कवच 4.0 शामिल है।

चर्चा में क्यों
1 सितंबर 2026 को भारतीय रेलवे ने चार कार्य स्वीकृत किए: मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर पर 170 करोड़ रुपये का कवच 4.0, समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर 233 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, 11 किलोमीटर की आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास लाइन 272 करोड़ रुपये में और भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण लगभग 125 करोड़ रुपये में।
रेल मंत्रालय ने 1 सितंबर 2026 को चार अलग-अलग कार्यों को स्वीकृति दी। इनमें ट्रेन सुरक्षा, सिग्नलिंग, माल ढुलाई क्षमता और एक यार्ड का पुनर्निर्माण शामिल है, और ये चार अलग-अलग क्षेत्रों में पड़ते हैं। एक साथ देखें तो ये बताते हैं कि खर्च कहां हो रहा है: पहले सुरक्षा प्रणालियां और उसके बाद माल यातायात के लिए जगह।
चार स्वीकृतियां
| कार्य | कहां | लागत |
| शेष 712 रूट किलोमीटर पर कवच वर्जन 4.0 | मुरादाबाद डिवीजन, उत्तरी रेलवे | 170 करोड़ रुपये |
| 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग | समस्तीपुर डिवीजन, पूर्वी मध्य रेलवे | 233 करोड़ रुपये |
| आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच 11 किलोमीटर की बाईपास लाइन | दक्षिण पूर्व रेलवे | 272 करोड़ रुपये |
| भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण | गुजरात | लगभग 125 करोड़ रुपये |
कवच और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
कवच भारत में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। यह ट्रेन को खतरे के सिग्नल से आगे जाने से रोकती है, स्थिति असुरक्षित होने पर स्वयं ब्रेक लगाती है, गंभीर परिस्थितियों में गति पर नियंत्रण रखती है और टक्कर का खतरा घटाती है। वर्जन 4.0 अब उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के उन खंडों पर लगेगा जहां यह अभी नहीं है, और इसमें 712 रूट किलोमीटर शामिल हैं तथा लागत 170 करोड़ रुपये है।
समस्तीपुर का कार्य 21 स्टेशनों की पुरानी पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदलेगा। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कंप्यूटर आधारित सिग्नलिंग है, जो पुरानी रिले प्रणालियों की जगह लेती है, इसलिए वह अधिक भरोसेमंद है, खराबी जल्दी पकड़ में आती है और रखरखाव आसान होता है। विज्ञप्ति यह भी बताती है कि यह आधुनिकीकरण उन स्टेशनों को कवच के लिए तैयार करता है।
पूर्व में माल ढुलाई की क्षमता
दक्षिण पूर्व रेलवे में आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच 11 किलोमीटर की बाईपास लाइन मार्गों को अलग करेगी और प्रस्तावित तीसरी लाइन के लिए दोनों दिशाओं में संपर्क देगी। यह ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है। इसका उद्देश्य एसएआईएल की 23.40 मीट्रिक टन प्रति वर्ष लौह अयस्क मांग और बीसीसीएल के अनुमानित 45 मालगाड़ी प्रतिदिन को सहारा देना है। यह खंड अभी 71 प्रतिशत उपयोग पर चल रहा है, 47.50 प्रतिशत लाइन क्षमता 2028-29 तक 56.45 प्रतिशत होने की उम्मीद है, और पूरा होने पर बाईपास से 8.88 मीट्रिक टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी।
भावनगर पारा यार्ड
गुजरात में भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण लगभग 125 करोड़ रुपये में होगा, ताकि ट्रेनों के ठहराव और अन्य परिचालन कार्य भावनगर टर्मिनस से हटकर यहां आ जाएं। योजना में चार लूप लाइनें, एक इंजन रिवर्सल लाइन, एआरटी और एआरएमई साइडिंग, एक ऊंचा आइलैंड प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म नंबर 2 का चौड़ीकरण, एक नया फुट ओवर ब्रिज और दो रोड अंडर ब्रिज शामिल हैं। लक्ष्य रैक का विलंब घटाना और समय की पाबंदी सुधारना है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कवच 4.0 स्वीकृति | मुरादाबाद डिवीजन, उत्तरी रेलवे के शेष 712 रूट किलोमीटर, 170 करोड़ रुपये |
|---|---|
| इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग | समस्तीपुर डिवीजन, पूर्वी मध्य रेलवे के 21 स्टेशन, 233 करोड़ रुपये |
| नई बाईपास लाइन | आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच 11 किलोमीटर, दक्षिण पूर्व रेलवे, 272 करोड़ रुपये |
| यार्ड पुनर्निर्माण | भावनगर पारा, गुजरात, लगभग 125 करोड़ रुपये |
| कवच क्या है | स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली |
| कॉरिडोर | आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा |
| किसकी माल ढुलाई | एसएआईएल की 23.40 मीट्रिक टन प्रति वर्ष लौह अयस्क मांग और बीसीसीएल के अनुमानित 45 मालगाड़ी प्रतिदिन |
| क्षमता का अनुमान | 47.50 प्रतिशत लाइन क्षमता 2028-29 तक 56.45 प्रतिशत; 8.88 मीट्रिक टन प्रति वर्ष अतिरिक्त यातायात |
परीक्षा की दृष्टि से
हर कार्य को डिवीजन, क्षेत्र और लागत के साथ याद रखें: उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0, लागत 170 करोड़ रुपये; पूर्वी मध्य रेलवे के समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, 233 करोड़ रुपये; दक्षिण पूर्व रेलवे में 11 किलोमीटर की आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास, 272 करोड़ रुपये, ऊर्जा-खनिज-सीमेंट कॉरिडोर के अंतर्गत; और गुजरात का भावनगर पारा यार्ड, लगभग 125 करोड़ रुपये। कवच के काम और उसके स्वदेशी होने का तथ्य भी याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
कवच वर्जन 4.0 किस रेल डिवीजन के शेष खंडों के लिए स्वीकृत हुआ?
- A.समस्तीपुर डिवीजन
- B.मुरादाबाद डिवीजन
- C.आद्रा डिवीजन
- D.भावनगर डिवीजन
उत्तर देखें
भारतीय रेलवे ने इस डिवीजन के उन खंडों पर कवच वर्जन 4.0 को मंजूरी दी जहां यह प्रणाली अभी नहीं थी, और इसमें 712 रूट किलोमीटर शामिल हैं तथा कुल लागत 170 करोड़ रुपये है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कवच किस प्रकार की प्रणाली है?
- A.स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली
- B.टिकट और आरक्षण मंच
- C.उपग्रह आधारित माल ट्रैकिंग सेवा
- D.रोलिंग स्टॉक रखरखाव डिपो
उत्तर देखें
विज्ञप्ति इसके चार काम बताती है और इन चारों को अलग-अलग याद रखना उपयोगी है, क्योंकि प्रश्न इन्हीं पर बनते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच नई बाईपास लाइन किस कॉरिडोर का हिस्सा है?
- A.समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर
- B.ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर
- C.स्वर्ण चतुर्भुज
- D.अमृत भारत कॉरिडोर
उत्तर देखें
दक्षिण पूर्व रेलवे में 272 करोड़ रुपये से स्वीकृत 11 किलोमीटर की यह बाईपास लाइन मार्गों को अलग करेगी और प्रस्तावित तीसरी लाइन के लिए दोनों दिशाओं में संपर्क देगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →233 करोड़ रुपये की लागत से कौन-सा कार्य स्वीकृत हुआ?
- A.मुरादाबाद डिवीजन में कवच 4.0
- B.समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
- C.आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास लाइन
- D.भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण
उत्तर देखें
इस कार्य में वर्तमान पैनल इंटरलॉकिंग की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगेगी, यानी पुरानी रिले आधारित प्रणालियों की जगह कंप्यूटर आधारित इंटरलॉकिंग, जिससे विश्वसनीयता बढ़ती है, खराबी जल्दी पकड़ में आती है, रखरखाव आसान होता है और परिचालन में लचीलापन आता है; साथ ही यह कवच लगाने में भी सहायक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवच क्या है?
भारत में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली। यह खतरे के सिग्नल को पार करने से रोकती है, आवश्यकता पर स्वयं ब्रेक लगाती है, गंभीर परिस्थितियों में गति नियंत्रित करती है और टक्कर का खतरा कम करती है। वर्जन 4.0 अब मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर के लिए स्वीकृत हुआ है।
21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग किस डिवीजन में लगेगी?
पूर्वी मध्य रेलवे के समस्तीपुर डिवीजन में, 233 करोड़ रुपये की लागत से। वर्तमान पैनल इंटरलॉकिंग की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगेगी, जो कंप्यूटर आधारित सिग्नलिंग है, और यह कार्य उन स्टेशनों पर कवच लगाने में भी सहायक होगा।
आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास क्यों बनाई जा रही है?
अधिक माल ढुलाई के लिए और आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ खंड की भीड़ कम करने के लिए, जो अभी 71 प्रतिशत उपयोग पर चल रहा है। 11 किलोमीटर की यह लाइन 272 करोड़ रुपये की है, ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है और इससे 8.88 मीट्रिक टन प्रति वर्ष अतिरिक्त यातायात संभव होगा।
भावनगर पारा यार्ड के पुनर्निर्माण से क्या होगा?
गुजरात के भावनगर टर्मिनस से ट्रेनों का ठहराव और अन्य परिचालन कार्य हटकर भावनगर पारा आ जाएगा, जिससे रैक का विलंब घटेगा और समय की पाबंदी सुधरेगी। कार्य की लागत लगभग 125 करोड़ रुपये है और इसमें चार लूप लाइनें, ऊंचा आइलैंड प्लेटफॉर्म, एक नया फुट ओवर ब्रिज तथा दो रोड अंडर ब्रिज शामिल हैं।
स्रोत
- भारतीय रेलवे ने गुजरात के भावनगर पारा यार्ड के पुनर्निर्माण के लिए 125 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- भारतीय रेलवे ने समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के लिए 233 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- भारतीय रेलवे ने आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए 272 करोड़ रुपये की लागत वाली बाईपास लाइन को स्वीकृति दी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- भारतीय रेलवे ने मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 किलोमीटर पर कवच 4.0 परियोजना के लिए 170 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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