233 करोड़ रुपये की लागत से कौन-सा कार्य स्वीकृत हुआ?
- A.मुरादाबाद डिवीजन में कवच 4.0
- B.समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
- C.आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास लाइन
- D.भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण
सही उत्तर
B. समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
व्याख्या
सही उत्तर पूर्वी मध्य रेलवे के समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग है, जिसकी कुल लागत 233 करोड़ रुपये स्वीकृत हुई। इस कार्य में वर्तमान पैनल इंटरलॉकिंग की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगेगी, यानी पुरानी रिले आधारित प्रणालियों की जगह कंप्यूटर आधारित इंटरलॉकिंग, जिससे विश्वसनीयता बढ़ती है, खराबी जल्दी पकड़ में आती है, रखरखाव आसान होता है और परिचालन में लचीलापन आता है; साथ ही यह कवच लगाने में भी सहायक है। बाकी विकल्पों में उसी दिन के तीन और आंकड़े हैं और इन्हें एक समूह की तरह याद रखना चाहिए। मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 की लागत 170 करोड़ रुपये है। दक्षिण पूर्व रेलवे में 11 किलोमीटर की आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास 272 करोड़ रुपये की है। गुजरात में भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण लगभग 125 करोड़ रुपये का है।
पूरा लेख पढ़ें: भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 सहित चार कार्यों को मंजूरी दी
अभ्यास प्रश्न
कवच वर्जन 4.0 किस रेल डिवीजन के शेष खंडों के लिए स्वीकृत हुआ?
- A.समस्तीपुर डिवीजन
- B.मुरादाबाद डिवीजन
- C.आद्रा डिवीजन
- D.भावनगर डिवीजन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मुरादाबाद डिवीजन
व्याख्या
सही उत्तर उत्तरी रेलवे का मुरादाबाद डिवीजन है। भारतीय रेलवे ने इस डिवीजन के उन खंडों पर कवच वर्जन 4.0 को मंजूरी दी जहां यह प्रणाली अभी नहीं थी, और इसमें 712 रूट किलोमीटर शामिल हैं तथा कुल लागत 170 करोड़ रुपये है। हर गलत विकल्प उसी दिन की स्वीकृतियों में आया स्थान है, इसलिए यह प्रश्न सावधानी मांगता है। पूर्वी मध्य रेलवे के समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर 233 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग मंजूर हुई, जो आगे उन स्टेशनों को कवच के लिए तैयार करती है। आद्रा का नाम दक्षिण पूर्व रेलवे में बनने वाली 11 किलोमीटर की नई बाईपास लाइन के एक छोर के रूप में आता है, जिसकी लागत 272 करोड़ रुपये है। भावनगर का नाम इसलिए आता है कि गुजरात में भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण लगभग 125 करोड़ रुपये में होना है। उत्तर वाली जोड़ी याद रखें: मुरादाबाद, 712 रूट किलोमीटर और 170 करोड़ रुपये।
कवच किस प्रकार की प्रणाली है?
- A.स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली
- B.टिकट और आरक्षण मंच
- C.उपग्रह आधारित माल ट्रैकिंग सेवा
- D.रोलिंग स्टॉक रखरखाव डिपो
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सही उत्तर: A. स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली
व्याख्या
सही उत्तर यह है कि कवच एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे संक्षेप में एटीपी कहा जाता है। विज्ञप्ति इसके चार काम बताती है और इन चारों को अलग-अलग याद रखना उपयोगी है, क्योंकि प्रश्न इन्हीं पर बनते हैं। यह खतरे के सिग्नल को पार करने से रोकती है, जिसे रेलवे में एसपीएडी कहा जाता है। यह असुरक्षित स्थिति से बचने के लिए आवश्यकता पड़ने पर स्वयं ब्रेक लगाती है। यह गंभीर परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है। और यह टक्करों का जोखिम काफी घटाती है। यह प्रणाली देश के भीतर विकसित हुई है, इसीलिए इसे स्वदेशी कहा जाता है, और इसका दायरा बढ़ाना सिग्नलिंग तथा ट्रेन सुरक्षा के आधुनिकीकरण के बड़े प्रयास का हिस्सा है। बाकी तीनों विकल्प रेलवे के ऐसे काम बताते हैं जिनका कवच से कोई संबंध नहीं है।
आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच नई बाईपास लाइन किस कॉरिडोर का हिस्सा है?
- A.समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर
- B.ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर
- C.स्वर्ण चतुर्भुज
- D.अमृत भारत कॉरिडोर
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सही उत्तर: B. ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर
व्याख्या
सही उत्तर भारतीय रेलवे के लिए निर्धारित ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर है। दक्षिण पूर्व रेलवे में 272 करोड़ रुपये से स्वीकृत 11 किलोमीटर की यह बाईपास लाइन मार्गों को अलग करेगी और प्रस्तावित तीसरी लाइन के लिए दोनों दिशाओं में संपर्क देगी। इसका उद्देश्य भारी औद्योगिक यातायात है, और कॉरिडोर का नाम भी इसी से जुड़ा है। विज्ञप्ति इसे एसएआईएल की लौह अयस्क मांग से जोड़ती है, जो 23.40 मीट्रिक टन प्रति वर्ष बताई गई है, और बीसीसीएल के अनुमानित 45 मालगाड़ी प्रतिदिन से भी। क्षमता का हिसाब भी इसमें है: खंड अभी 71 प्रतिशत उपयोग पर चल रहा है, 47.50 प्रतिशत लाइन क्षमता 2028-29 तक 56.45 प्रतिशत होने की उम्मीद है, और पूरा होने पर बाईपास से 8.88 मीट्रिक टन प्रति वर्ष अतिरिक्त यातायात संभव होगा। बाकी विकल्प यहां उल्लिखित नहीं हैं।
भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों पर राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन की अध्यक्षता किसने की?
- A.शोभा करंदलाजे
- B.मनसुख मांडविया
- C.चंद्र भूषण कुमार
- D.भूपेंद्र यादव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मनसुख मांडविया
व्याख्या
सही उत्तर मनसुख मांडविया है, जो केंद्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री हैं और जिन्होंने सम्मेलन के पहले दिन की अध्यक्षता की। विकल्प A यानी शोभा करंदलाजे श्रम और रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्यमंत्री हैं और उसी सत्र में मौजूद थीं, पर अध्यक्षता उन्होंने नहीं की, इसलिए यही सबसे नजदीकी भ्रामक विकल्प है। विकल्प C यानी डॉ. चंद्र भूषण कुमार श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव हैं और उन्होंने दूसरे दिन की शुरुआत की, जहां उन्होंने कौशल इकोसिस्टम, श्रमिक की गरिमा, राज्यों और देशों के बीच श्रमिकों की आवाजाही, पेशेगत सेहत तथा कल्याणकारी उपायों में बीमांकिक विश्लेषण के उपयोग की बात रखी। विकल्प D में दूसरा विभाग संभालने वाले मंत्री का नाम है। मंत्री, राज्यमंत्री और सचिव को अलग-अलग याद रखना ही ऐसे प्रश्न का उद्देश्य है।
बीओसीडब्ल्यू सम्मेलन में डिजिटल लेबर चौक से जुड़ा अनुभव किस राज्य ने साझा किया?
- A.उत्तर प्रदेश
- B.बिहार
- C.राजस्थान
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. राजस्थान
व्याख्या
सही उत्तर राजस्थान है। नई श्रम संहिताओं के आलोक में बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों की भूमिका और जिम्मेदारियों वाले सत्र में कई राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी पहलें प्रस्तुत कीं। राजस्थान ने डिजिटल लेबर चौक का अनुभव रखा, जो उस पारंपरिक चौक को डिजिटल रूप देता है जहां दिहाड़ी श्रमिक काम की प्रतीक्षा में जुटते हैं, ताकि श्रमिक और नियोक्ता एक-दूसरे तक आसानी से पहुंच सकें। विकल्प A यानी उत्तर प्रदेश ने भवन निर्माण श्रमिकों के कौशल विकास पर अपना काम रखा। विकल्प B यानी बिहार ने श्रम सेवा सुविधा केंद्रों पर प्रकाश डाला। विकल्प D यानी असम ने निर्माण सखी पोर्टल पेश किया। चारों प्रस्तुतियां एक ही सत्र की हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग तथ्य के बजाय एक मिलान सूची की तरह याद करना बेहतर है।