कवच किस प्रकार की प्रणाली है?
- A.स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली
- B.टिकट और आरक्षण मंच
- C.उपग्रह आधारित माल ट्रैकिंग सेवा
- D.रोलिंग स्टॉक रखरखाव डिपो
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर यह है कि कवच एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे संक्षेप में एटीपी कहा जाता है। विज्ञप्ति इसके चार काम बताती है और इन चारों को अलग-अलग याद रखना उपयोगी है, क्योंकि प्रश्न इन्हीं पर बनते हैं। यह खतरे के सिग्नल को पार करने से रोकती है, जिसे रेलवे में एसपीएडी कहा जाता है। यह असुरक्षित स्थिति से बचने के लिए आवश्यकता पड़ने पर स्वयं ब्रेक लगाती है। यह गंभीर परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है। और यह टक्करों का जोखिम काफी घटाती है। यह प्रणाली देश के भीतर विकसित हुई है, इसीलिए इसे स्वदेशी कहा जाता है, और इसका दायरा बढ़ाना सिग्नलिंग तथा ट्रेन सुरक्षा के आधुनिकीकरण के बड़े प्रयास का हिस्सा है। बाकी तीनों विकल्प रेलवे के ऐसे काम बताते हैं जिनका कवच से कोई संबंध नहीं है।
पूरा लेख पढ़ें: भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 सहित चार कार्यों को मंजूरी दी
अभ्यास प्रश्न
कवच वर्जन 4.0 किस रेल डिवीजन के शेष खंडों के लिए स्वीकृत हुआ?
- A.समस्तीपुर डिवीजन
- B.मुरादाबाद डिवीजन
- C.आद्रा डिवीजन
- D.भावनगर डिवीजन
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भारतीय रेलवे ने इस डिवीजन के उन खंडों पर कवच वर्जन 4.0 को मंजूरी दी जहां यह प्रणाली अभी नहीं थी, और इसमें 712 रूट किलोमीटर शामिल हैं तथा कुल लागत 170 करोड़ रुपये है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आद्रा और जॉयचंदीपहाड़ के बीच नई बाईपास लाइन किस कॉरिडोर का हिस्सा है?
- A.समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर
- B.ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर
- C.स्वर्ण चतुर्भुज
- D.अमृत भारत कॉरिडोर
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दक्षिण पूर्व रेलवे में 272 करोड़ रुपये से स्वीकृत 11 किलोमीटर की यह बाईपास लाइन मार्गों को अलग करेगी और प्रस्तावित तीसरी लाइन के लिए दोनों दिशाओं में संपर्क देगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →233 करोड़ रुपये की लागत से कौन-सा कार्य स्वीकृत हुआ?
- A.मुरादाबाद डिवीजन में कवच 4.0
- B.समस्तीपुर डिवीजन के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग
- C.आद्रा-जॉयचंदीपहाड़ बाईपास लाइन
- D.भावनगर पारा यार्ड का पुनर्निर्माण
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इस कार्य में वर्तमान पैनल इंटरलॉकिंग की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगेगी, यानी पुरानी रिले आधारित प्रणालियों की जगह कंप्यूटर आधारित इंटरलॉकिंग, जिससे विश्वसनीयता बढ़ती है, खराबी जल्दी पकड़ में आती है, रखरखाव आसान होता है और परिचालन में लचीलापन आता है; साथ ही यह कवच लगाने में भी सहायक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 चलाने वाला ईपीएफओ किस केंद्रीय मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
- A.वित्त मंत्रालय
- B.श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
- C.कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
- D.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सही उत्तर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय है, जिसने ईपीएफओ के विशेष अभियान 6 के समापन की घोषणा जारी की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 के दौरान ईपीएफओ ने कुल कितनी जनशिकायतों का निपटारा किया?
- A.2,05,000
- B.1,80,000
- C.2,36,021
- D.2,02,984
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अभियान के दौरान ईपीएफओ ने कुल इतनी जनशिकायतें निपटाईं, जबकि लक्ष्य 2,05,000 था; यह प्रदर्शन लक्ष्य से 15.1 प्रतिशत अधिक रहा।
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