सुअर प्रजनन: तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान का मानक प्रोटोकॉल जारी
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को सिक्किम में सुअर वीर्य उत्पादन और कृत्रिम गर्भाधान का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल जारी किया, जिसका केंद्र पूर्वोत्तर है।

चर्चा में क्यों
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने 6 नवंबर 2026 को बताया कि केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 2 नवंबर को सिक्किम में सूअरों में तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल जारी किया।
केंद्र ने वैज्ञानिक तरीके से सुअर प्रजनन के लिए नियम-पुस्तिका तैयार की है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को अपनी दो दिन की सिक्किम यात्रा के दौरान सूअरों में तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य उत्पादन का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रियाएं नाम की पुस्तिका जारी की। मंत्रालय ने 6 नवंबर 2026 को इसकी जानकारी दी।
पुस्तिका में क्या है
यह प्रोटोकॉल सूअरों के वीर्य उत्पादन और उसके उपयोग का पूरा ढांचा देता है। इसमें गुणवत्ता की जांच, जैव सुरक्षा, वीर्य को सुरक्षित रखना, उसका परिवहन और कृत्रिम गर्भाधान के तरीके शामिल हैं। सुअर वीर्य प्रयोगशालाएं बनाने और चलाने तथा सभी राज्यों में कृत्रिम गर्भाधान सेवा देने के लिए एक जैसी प्रक्रियाएं तय की गई हैं। मकसद है वैज्ञानिक प्रजनन फैलाना, नस्ल सुधार तेज करना और खास तौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र के सुअर पालकों की आमदनी बढ़ाना।
पूर्वोत्तर पर जोर क्यों
| संकेतक | आंकड़ा |
|---|---|
| सुअरों की संख्या (20वीं पशुधन गणना, 2019) | 9.06 मिलियन |
| कुल पशुधन में हिस्सा | 1.7 प्रतिशत |
| पूर्वोत्तर का हिस्सा | लगभग 45 प्रतिशत |
| देसी और गैर-वर्णित सुअर | लगभग 79 प्रतिशत |
देश के हर कृषि-जलवायु क्षेत्र में सुअर पाले जाते हैं, पर पूर्वोत्तर इसका मुख्य केंद्र है। लगभग चार में से तीन से ज्यादा सुअर देसी या गैर-वर्णित नस्ल के हैं, इसलिए बेहतर प्रजनन से उत्पादकता बढ़ाने की बड़ी गुंजाइश है। अच्छे जर्मप्लाज्म, नई प्रजनन तकनीक और कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं तक पहुंच को सूअर मांस उत्पादन और छोटे पालकों की आय बढ़ाने की कुंजी माना गया है।
किन चरणों को शामिल किया गया
- प्रजनन के लिए नर सुअर का चयन
- वीर्य का संग्रह, जांच, प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन
- प्रयोगशाला में गुणवत्ता प्रबंधन
- रोग की रोकथाम और जैव सुरक्षा
क्या फायदा होगा
राज्य, पशु चिकित्सक, प्रजनन केंद्र और किसान इसे व्यावहारिक मार्गदर्शिका की तरह इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे प्रजनन क्षमता सुधरेगी, नस्ल सुधार तेज होगा और पूर्वोत्तर की देसी सुअर नस्लों का संरक्षण तथा उन्नयन होगा। बेहतर प्रजनन सामग्री मिलने से सुअर पालन ज्यादा लाभकारी बनेगा। पुस्तिका की पीडीएफ पशुपालन और डेयरी विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पुस्तिका | सूअरों में तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य उत्पादन का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रियाएं |
|---|---|
| जारी करने वाले | राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री |
| तिथि और स्थान | 2 नवंबर 2026, सिक्किम की दो दिन की यात्रा के दौरान |
| मुख्य क्षेत्र | पूर्वोत्तर क्षेत्र |
| सुअरों की संख्या | 9.06 मिलियन (20वीं पशुधन गणना, 2019) |
| कुल पशुधन में हिस्सा | 1.7 प्रतिशत |
| पूर्वोत्तर का हिस्सा | लगभग 45 प्रतिशत |
| देसी और गैर-वर्णित सुअर | लगभग 79 प्रतिशत |
परीक्षा की दृष्टि से
विषय (सुअर वीर्य उत्पादन और तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान), जारी करने वाले (राजीव रंजन सिंह), स्थान (सिक्किम), तिथि (2 नवंबर 2026) और आंकड़े: 9.06 मिलियन सुअर (20वीं पशुधन गणना, 2019), 1.7 प्रतिशत, पूर्वोत्तर का हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत, देसी हिस्सा लगभग 79 प्रतिशत याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
20वीं पशुधन गणना (2019) के अनुसार भारत में सुअरों की संख्या कितनी है?
- A.5.12 मिलियन
- B.9.06 मिलियन
- C.12.40 मिलियन
- D.18.30 मिलियन
उत्तर देखें
यह आंकड़ा तब सामने आया जब केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को सिक्किम में सुअर वीर्य उत्पादन और कृत्रिम गर्भाधान का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल जारी किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →देश की लगभग 45 प्रतिशत सुअर आबादी किस क्षेत्र में है, जिस पर नए कृत्रिम गर्भाधान प्रोटोकॉल का मुख्य ध्यान है?
- A.पूर्वी तटीय क्षेत्र
- B.पूर्वोत्तर क्षेत्र
- C.पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र
- D.दक्कन का पठार
उत्तर देखें
भारत के हर कृषि-जलवायु क्षेत्र में सुअर पाले जाते हैं, लेकिन पूर्वोत्तर को सुअर पालन का मुख्य केंद्र माना गया है और यहां देश के लगभग 45 प्रतिशत सुअर हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को सुअर वीर्य उत्पादन और कृत्रिम गर्भाधान का प्रोटोकॉल किस राज्य में जारी किया?
- A.असम
- B.नागालैंड
- C.सिक्किम
- D.मिजोरम
उत्तर देखें
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 नवंबर 2026 को अपनी दो दिन की सिक्किम यात्रा के दौरान सूअरों में तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य उत्पादन का न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी कीं, और मंत्रालय ने…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नया सुअर प्रजनन प्रोटोकॉल किस बारे में है?
यह सुअर वीर्य उत्पादन के न्यूनतम मानक और तरल वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान की मानक प्रक्रियाएं तय करता है, जिनमें गुणवत्ता, जैव सुरक्षा, भंडारण और परिवहन शामिल हैं।
भारत में सुअरों की संख्या कितनी है?
20वीं पशुधन गणना (2019) के अनुसार 9.06 मिलियन, जो कुल पशुधन का 1.7 प्रतिशत है। इनमें लगभग 45 प्रतिशत पूर्वोत्तर में हैं।
यह प्रोटोकॉल कहां जारी हुआ?
सिक्किम में, 2 नवंबर 2026 को, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह की दो दिन की यात्रा के दौरान।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2333399 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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