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भारत 2028 तक भेजेगा 6,000 मीटर गहराई तक मानवयुक्त मिशन

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईपीआरडी 2026 में कहा कि भारत समुद्रयान मिशन के अंतर्गत 2028 तक अपना पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन 6,000 मीटर गहराई तक भेजेगा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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भारत 2028 तक भेजेगा 6,000 मीटर गहराई तक मानवयुक्त मिशन

चर्चा में क्यों

4 नवंबर 2026 को हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत समुद्रयान मिशन के अंतर्गत 2028 तक 6,000 मीटर तक की गहराई में अपना पहला मानवयुक्त मिशन भेजने की दिशा में बढ़ रहा है।

भारत अपना पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र का मिशन 2028 तक 6,000 मीटर तक की गहराई में भेजेगा। यह घोषणा केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 4 नवंबर 2026 को हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) 2026 को संबोधित करते हुए की। यह संवाद रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय समुद्री प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि भारत स्वदेशी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक सह-सृजन के माध्यम से महासागर अनुसंधान में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का लक्ष्य रखता है।

समुद्रयान और मत्स्य पनडुब्बी

यह मानवयुक्त गोता समुद्रयान मिशन के अंतर्गत होगा, जिसकी पनडुब्बी मत्स्य तीन एक्वानॉट को 5,000 से 6,000 मीटर की गहराई तक ले जाने के लिए बनाई गई है। राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी), चेन्नई ने मध्य हिंद महासागर बेसिन में इसी गहराई पर परीक्षण करने की क्षमता विकसित कर ली है। मंत्री ने ओशन मिनरल एक्सप्लोरर का भी उल्लेख किया, जिससे हाइड्रोथर्मल सल्फाइड निक्षेपों का उच्च विभेदन सर्वेक्षण संभव होता है और कई निक्षेप पहचाने भी जा चुके हैं। उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम से तुलना करते हुए कहा कि वह दिन आएगा जब एक भारतीय लगभग 6,000 मीटर गहराई में उतरेगा और लगभग उसी समय दूसरा भारतीय अंतरिक्ष में जाएगा।

विभागों के पार विज्ञान

मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में वैज्ञानिक कार्य मिशन-मोड ढांचे पर आ गया है, जिसमें महासागर विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, परमाणु विज्ञान, भूविज्ञान, इलेक्ट्रॉनिकी और रोबोटिकी एक साथ आते हैं, न कि अलग-अलग मंत्रालयों में सीमित रहते हैं। उपग्रह अब समुद्र के रंग, सतही तापमान और पवन दिशा के प्रेक्षण से महासागर अनुसंधान में योगदान देते हैं और यही आंकड़े आगे समुद्र से नवीकरणीय ऊर्जा लेने में भी काम आ सकते हैं। परमाणु प्रौद्योगिकी समुद्री जल के विलवणीकरण में सहयोग करती है, जिसमें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की मदद से कलपक्कम में लगा संयंत्र शामिल है, जो तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने में सहायक है। मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधनों में डीप ओशन मिशन का दो बार उल्लेख किया, जो महासागरीय संसाधनों को दी जा रही प्राथमिकता दर्शाता है।

वित्त पोषण और सहयोग

अनुसंधान वित्त पोषण पर मंत्री ने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन तथा एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष का उल्लेख किया, जो 50:50 इक्विटी आधारित व्यवस्था पर चलता है ताकि निजी निवेशक सरकार के साथ आएं। परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जलयानों पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने शांति अधिनियम के तहत परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने तथा 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के लक्ष्य की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का मार्गदर्शक सिद्धांत एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि होना चाहिए, क्योंकि प्रदूषण और बढ़ता समुद्री तापमान राष्ट्रीय सीमाओं पर नहीं रुकता। प्रेक्षण की कमियां दूर करना, चरम घटनाओं का बेहतर पूर्वानुमान, तटों और द्वीपों के लिए क्षेत्रीय जलवायु सेवाएं तथा महासागरीय संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग उनकी प्राथमिकताओं में रहे।

महत्वपूर्ण तथ्य

घोषणा2028 तक 6,000 मीटर गहराई तक भारत का पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन
घोषणा करने वालेडॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
अवसरहिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) 2026, आयोजक राष्ट्रीय समुद्री प्रतिष्ठान
मिशन और पनडुब्बीसमुद्रयान मिशन; मत्स्य पनडुब्बी, तीन एक्वानॉट, 5,000 से 6,000 मीटर
संस्थानराष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी), चेन्नई
परीक्षण क्षेत्रमध्य हिंद महासागर बेसिन
आरडीआई कोषएक लाख करोड़ रुपये, 50:50 इक्विटी आधारित व्यवस्था
परमाणु लक्ष्य2047 तक 100 गीगावाट; शांति अधिनियम से निजी भागीदारी
मार्गदर्शक सिद्धांतएक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें पहले मानवयुक्त गोते की गहराई और समय सीमा (2028 तक 6,000 मीटर), पनडुब्बी मत्स्य और उसके तीन एक्वानॉट, मिशन का नाम समुद्रयान, एनआईओटी चेन्नई तथा मध्य हिंद महासागर बेसिन, एक लाख करोड़ रुपये का आरडीआई कोष और उसकी 50:50 व्यवस्था, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु लक्ष्य तथा सिद्धांत एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

आईपीआरडी 2026 में डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार भारत 6,000 मीटर तक गहराई में अपना पहला मानवयुक्त मिशन किस वर्ष तक भेजेगा?

  1. A.2026
  2. B.2027
  3. C.2028
  4. D.2030
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2028

मंत्री ने कहा कि भारत उसी वर्ष तक छह हजार मीटर तक की गहराई में अपना पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन भेजने की दिशा में बढ़ रहा है और इसे स्वदेशी क्षमता पर आधारित कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

मत्स्य पनडुब्बी कितने एक्वानॉट को ले जाने के लिए बनाई गई है?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.छह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीन

समुद्रयान मिशन की पनडुब्बी तीन एक्वानॉट को पांच से छह हजार मीटर के बीच की गहराई तक ले जाने के लिए बनाई गई है और यही वाहन भारत के प्रस्तावित मानवयुक्त गोते का आधार है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने हिंद-प्रशांत में महासागर विज्ञान सहयोग के लिए कौन सा मार्गदर्शक सिद्धांत सुझाया?

  1. A.एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि
  2. B.एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य
  3. C.क्षेत्र में सबके लिए सुरक्षा और विकास
  4. D.साझा समृद्धि के लिए नील अर्थव्यवस्था
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि

मंत्री ने इसे हिंद-प्रशांत में सहयोग का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया और कहा कि महासागर राजनीतिक सीमाओं का पालन नहीं करते, इसलिए समुद्री प्रदूषण या समुद्री तापमान में बदलाव का असर उस देश से बाहर भी जाता है जहां से वह आरंभ होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन कब जाएगा?

समुद्रयान मिशन के अंतर्गत 2028 तक, 6,000 मीटर तक की गहराई में। मत्स्य पनडुब्बी तीन एक्वानॉट को 5,000 से 6,000 मीटर तक ले जाने के लिए बनाई गई है।

गहरे समुद्र में परीक्षण की क्षमता किस संस्थान ने विकसित की है?

राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई ने, जो मध्य हिंद महासागर बेसिन में 5,000 से 6,000 मीटर गहराई पर परीक्षण कर सकता है।

मंत्री ने जिस आरडीआई कोष का उल्लेख किया वह क्या है?

एक लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए 50:50 इक्विटी आधारित व्यवस्था पर चलता है और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के साथ काम करता है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 4 नवंबर 2026

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