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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

आईपीआरडी 2026 में डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार भारत 6,000 मीटर तक गहराई में अपना पहला मानवयुक्त मिशन किस वर्ष तक भेजेगा?

  1. A.2026
  2. B.2027
  3. C.2028
  4. D.2030

सही उत्तर

C. 2028

व्याख्या

सही उत्तर 2028 है। मंत्री ने कहा कि भारत उसी वर्ष तक छह हजार मीटर तक की गहराई में अपना पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन भेजने की दिशा में बढ़ रहा है और इसे स्वदेशी क्षमता पर आधारित कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। शेष वर्ष संबोधन में बताए गए लक्ष्य से मेल नहीं खाते। परीक्षार्थियों को इस समय सीमा को शेष तथ्यों के साथ जोड़कर याद रखना चाहिए। यह गोता समुद्रयान मिशन के अंतर्गत होगा, मत्स्य पनडुब्बी तीन एक्वानॉट को पांच से छह हजार मीटर की गहराई तक ले जाने के लिए बनी है और राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई ने मध्य हिंद महासागर बेसिन में इसी गहराई पर परीक्षण की क्षमता दिखा दी है। मंत्री ने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम से तुलना करते हुए एक भारतीय के गहरे समुद्र में और दूसरे के अंतरिक्ष में लगभग साथ-साथ जाने की कल्पना भी रखी।

पूरा लेख पढ़ें: भारत 2028 तक भेजेगा 6,000 मीटर गहराई तक मानवयुक्त मिशन

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

मत्स्य पनडुब्बी कितने एक्वानॉट को ले जाने के लिए बनाई गई है?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.छह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीन

समुद्रयान मिशन की पनडुब्बी तीन एक्वानॉट को पांच से छह हजार मीटर के बीच की गहराई तक ले जाने के लिए बनाई गई है और यही वाहन भारत के प्रस्तावित मानवयुक्त गोते का आधार है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने हिंद-प्रशांत में महासागर विज्ञान सहयोग के लिए कौन सा मार्गदर्शक सिद्धांत सुझाया?

  1. A.एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि
  2. B.एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य
  3. C.क्षेत्र में सबके लिए सुरक्षा और विकास
  4. D.साझा समृद्धि के लिए नील अर्थव्यवस्था
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि

मंत्री ने इसे हिंद-प्रशांत में सहयोग का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया और कहा कि महासागर राजनीतिक सीमाओं का पालन नहीं करते, इसलिए समुद्री प्रदूषण या समुद्री तापमान में बदलाव का असर उस देश से बाहर भी जाता है जहां से वह आरंभ होता है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

जेएनसीएएसआर के टेराहर्ट्ज़ उपकरणों का माप किस आवृत्ति सीमा में किया गया?

  1. A.24 से 40 गीगाहर्ट्ज़
  2. B.110 से 170 गीगाहर्ट्ज़
  3. C.310 से 360 गीगाहर्ट्ज़
  4. D.600 से 750 गीगाहर्ट्ज़
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 310 से 360 गीगाहर्ट्ज़

इस बैंड में किए गए माप टीम के अनुकरण से निकट रूप से मेल खाए, और पावर स्प्लिटर में दोनों निर्गत संकेत लगभग समान रहे, जिससे पता चला कि बनाए गए अवरोध का संप्रेषण पर बहुत कम असर पड़ा।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

जेएनसीएएसआर के कार्य में उपयोग किया गया सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल किस पदार्थ की जालक संरचना की नकल करता है?

  1. A.हीरा
  2. B.ग्रैफीन
  3. C.गैलियम नाइट्राइड
  4. D.नीलम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ग्रैफीन

टीम ने ऐसा सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल डिजाइन किया, जिसकी संरचना ग्रैफीन की मधुमक्खी-छत्ते जैसी जालक संरचना की नकल करती है।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

अवरोध के पार 100 जीबीपीएस टेराहर्ट्ज़ डेटा ले जाने वाली सिलिकॉन चिप किस संस्थान ने विकसित की?

  1. A.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
  2. B.जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र
  3. C.साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान, कोलकाता
  4. D.सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र

इसकी टीम ने, मेटा ऑप्टिक्स प्रयोगशाला के डॉ. अभिषेक कुमार के नेतृत्व में, टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स का उपयोग करते हुए दिखाया कि टेराहर्ट्ज़ तरंगें जानबूझकर बनाए गए अवरोध को पार करते हुए 100 जीबीपीएस की दर से डेटा ले जा सकती हैं, और यह कार्य एडवांस्ड मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ।