डॉ. जितेंद्र सिंह ने हिंद-प्रशांत में महासागर विज्ञान सहयोग के लिए कौन सा मार्गदर्शक सिद्धांत सुझाया?
- A.एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि
- B.एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य
- C.क्षेत्र में सबके लिए सुरक्षा और विकास
- D.साझा समृद्धि के लिए नील अर्थव्यवस्था
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर एक महासागर, साझा ज्ञान और न्यायसंगत समृद्धि है। मंत्री ने इसे हिंद-प्रशांत में सहयोग का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया और कहा कि महासागर राजनीतिक सीमाओं का पालन नहीं करते, इसलिए समुद्री प्रदूषण या समुद्री तापमान में बदलाव का असर उस देश से बाहर भी जाता है जहां से वह आरंभ होता है। इसी कारण उन्होंने संयुक्त वैज्ञानिक मिशन, अनुसंधान सुविधाओं तक पारस्परिक पहुंच और आंकड़ों के साझाकरण की बात कही। शेष विकल्प सुनने में सही लगते हैं, पर यहां नामित सिद्धांत नहीं हैं। विकल्प ख किसी अन्य मंच से जुड़ी विषयवस्तु है, विकल्प ग एक भिन्न समुद्री सिद्धांत है और विकल्प घ गढ़ा हुआ है। उनके साथ गिनाई गई प्राथमिकताएं भी याद रखें: प्रेक्षण की कमियां दूर करना, चरम घटनाओं का पूर्वानुमान, तटों और द्वीपों के लिए क्षेत्रीय जलवायु सेवाएं तथा संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग।
पूरा लेख पढ़ें: भारत 2028 तक भेजेगा 6,000 मीटर गहराई तक मानवयुक्त मिशन
अभ्यास प्रश्न
आईपीआरडी 2026 में डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार भारत 6,000 मीटर तक गहराई में अपना पहला मानवयुक्त मिशन किस वर्ष तक भेजेगा?
- A.2026
- B.2027
- C.2028
- D.2030
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मंत्री ने कहा कि भारत उसी वर्ष तक छह हजार मीटर तक की गहराई में अपना पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन भेजने की दिशा में बढ़ रहा है और इसे स्वदेशी क्षमता पर आधारित कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मत्स्य पनडुब्बी कितने एक्वानॉट को ले जाने के लिए बनाई गई है?
- A.दो
- B.तीन
- C.चार
- D.छह
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समुद्रयान मिशन की पनडुब्बी तीन एक्वानॉट को पांच से छह हजार मीटर के बीच की गहराई तक ले जाने के लिए बनाई गई है और यही वाहन भारत के प्रस्तावित मानवयुक्त गोते का आधार है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जेएनसीएएसआर के टेराहर्ट्ज़ उपकरणों का माप किस आवृत्ति सीमा में किया गया?
- A.24 से 40 गीगाहर्ट्ज़
- B.110 से 170 गीगाहर्ट्ज़
- C.310 से 360 गीगाहर्ट्ज़
- D.600 से 750 गीगाहर्ट्ज़
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इस बैंड में किए गए माप टीम के अनुकरण से निकट रूप से मेल खाए, और पावर स्प्लिटर में दोनों निर्गत संकेत लगभग समान रहे, जिससे पता चला कि बनाए गए अवरोध का संप्रेषण पर बहुत कम असर पड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जेएनसीएएसआर के कार्य में उपयोग किया गया सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल किस पदार्थ की जालक संरचना की नकल करता है?
- A.हीरा
- B.ग्रैफीन
- C.गैलियम नाइट्राइड
- D.नीलम
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टीम ने ऐसा सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल डिजाइन किया, जिसकी संरचना ग्रैफीन की मधुमक्खी-छत्ते जैसी जालक संरचना की नकल करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अवरोध के पार 100 जीबीपीएस टेराहर्ट्ज़ डेटा ले जाने वाली सिलिकॉन चिप किस संस्थान ने विकसित की?
- A.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
- B.जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र
- C.साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान, कोलकाता
- D.सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स
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इसकी टीम ने, मेटा ऑप्टिक्स प्रयोगशाला के डॉ. अभिषेक कुमार के नेतृत्व में, टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स का उपयोग करते हुए दिखाया कि टेराहर्ट्ज़ तरंगें जानबूझकर बनाए गए अवरोध को पार करते हुए 100 जीबीपीएस की दर से डेटा ले जा सकती हैं, और यह कार्य एडवांस्ड मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ।
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