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ईएसटीआईसी 2026: आनुवंशिक विविधता भारत को जीन अनुसंधान का केंद्र बनाएगी

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ईएसटीआईसी 2026 के एक सत्र में कहा कि भारत की आनुवंशिक विविधता उसे जीन अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बना सकती है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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ईएसटीआईसी 2026: आनुवंशिक विविधता भारत को जीन अनुसंधान का केंद्र बनाएगी — GK24 title card

चर्चा में क्यों

नई दिल्ली में ईएसटीआईसी 2026 के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की आनुवंशिक और फीनोटाइपिक विविधता उसे जीन अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बना सकती है, और उन्होंने जीन संश्लेषण में स्वदेशी क्षमता की मांग की।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत की व्यापक आनुवंशिक विविधता में देश को जीन अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक संसाधन बनाने की क्षमता है, और आने वाले वर्षों में दूसरे देश भारत के अनूठे आनुवंशिक संसाधनों की ओर देखेंगे।

कहां कही गई बात

यह बात उन्होंने नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026 के दौरान सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी पर आयोजित सत्र में कही। प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष का प्रभार भी संभाल रहे मंत्री ने जैव प्रौद्योगिकी के नए क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बनाने और भारत की वैज्ञानिक ताकत को अनुसंधान के अवसरों तथा व्यावहारिक उपयोग में बदलने की जरूरत बताई।

विविधता क्यों मायने रखती है

मंत्री ने कहा कि देश की आनुवंशिक और फीनोटाइपिक विविधता शोधकर्ताओं को मजबूत आधार देती है, विशेषकर यह समझने के लिए कि अलग-अलग आबादी में बीमारियों का स्वरूप क्यों बदलता है, और स्वास्थ्य सेवा में नई संभावनाएं खोलने के लिए। जैसे-जैसे भारत अपनी अनुसंधान क्षमता बढ़ाएगा, वह दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए आनुवंशिक संसाधनों का बड़ा स्रोत बन सकता है।

जीन संश्लेषण और आत्मनिर्भरता

दूसरा बड़ा विषय जीन संश्लेषण में स्वदेशी क्षमता का रहा। मंत्री ने कहा कि विशेष अनुसंधान सामग्री के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता भारतीय वैज्ञानिकों का समय लेती है और उपलब्धता तथा काम की निरंतरता पर असर डालती है। यह क्षमता देश में ही विकसित होने पर शोधकर्ता तेजी से आगे बढ़ सकेंगे और जैव प्रौद्योगिकी का पूरा तंत्र मजबूत होगा।

सत्र की अन्य बातें

  • अनुसंधान को मजबूत सहायता तंत्र चाहिए, जिसमें उद्योग की अधिक भागीदारी और आशाजनक वैज्ञानिक कार्यों के लिए धन शामिल है।
  • जीव विज्ञान, इंजीनियरिंग, गणित और अन्य विषय एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं, और जटिल अनुप्रयोगों के लिए यह अंतर्विषयक काम जरूरी होता जा रहा है।
  • हाल ही में बने शांति अधिनियम के प्रावधान परमाणु चिकित्सा अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खोलते हैं।
  • खोज से प्रौद्योगिकी और फिर व्यावहारिक उपयोग तक का रास्ता संस्थानों, उद्योग और उद्यमियों के सहयोग से छोटा करना होगा।

सम्मेलन के बारे में

इस सत्र में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले भी शामिल हुए और वैज्ञानिकों तथा विशेषज्ञों ने भारत में सिस्टम व सिंथेटिक बायोलॉजी की संभावनाओं पर चर्चा की। ईएसटीआईसी 2026 वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, स्टार्टअप और युवा शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाता है ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा जा सके।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनइमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026
स्थानभारत मंडपम, नई दिल्ली
सत्रसिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी
वक्ताडॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
मुख्य बातआनुवंशिक विविधता भारत को जीन अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बना सकती है
जरूरी क्षमतास्वदेशी जीन संश्लेषण क्षमता
उल्लिखित कानूनशांति अधिनियम, जो परमाणु चिकित्सा अनुसंधान निजी क्षेत्र के लिए खोलता है
सत्र में उपस्थितडॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग

परीक्षा की दृष्टि से

वक्ता और उनका विभाग (डॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार), आयोजन (ईएसटीआईसी 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली), सत्र (सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी), आनुवंशिक विविधता तथा जीन संश्लेषण का विषय, परमाणु चिकित्सा से जुड़ा शांति अधिनियम और डीबीटी सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की जीन अनुसंधान क्षमता पर किस आयोजन में विचार रखे?

  1. A.भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव
  2. B.इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026
  3. C.भारतीय विज्ञान कांग्रेस
  4. D.ग्लोबल बायो-इंडिया शिखर सम्मेलन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) 2026

मंत्री वहां सिस्टम और सिंथेटिक बायोलॉजी पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अगुवों, स्टार्टअप और युवा शोधकर्ताओं को एक साथ लाता है ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा जा सके।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाने के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह ने किस क्षमता को देश में विकसित करने पर जोर दिया?

  1. A.जीन संश्लेषण
  2. B.उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएं
  3. C.सेमीकंडक्टर विनिर्माण
  4. D.टीकों का शीत भंडारण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जीन संश्लेषण

मंत्री ने कहा कि विशेष अनुसंधान आवश्यकताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने से भारतीय वैज्ञानिकों के सामने समय, उपलब्धता और काम की निरंतरता की दिक्कतें आती हैं, और यह क्षमता देश के भीतर विकसित होने पर शोधकर्ता अधिक कुशलता से काम कर सकेंगे तथा जैव प्रौद्योगिकी का समूचा…

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार हाल में बना कौन सा कानून परमाणु चिकित्सा अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी खोलता है?

  1. A.परमाणु ऊर्जा अधिनियम
  2. B.शांति अधिनियम
  3. C.बायोई3 अधिनियम
  4. D.राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन अधिनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. शांति अधिनियम

परमाणु चिकित्सा में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए मंत्री ने हाल में बने इस कानून के उन प्रावधानों का उल्लेख किया जो इस क्षेत्र के अनुसंधान में निजी भागीदारी की अनुमति देते हैं, और कहा कि ऐसे कदमों से आगे के अनुसंधान तथा उद्योग की भागीदारी के नए अवसर…

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईएसटीआईसी 2026 क्या है?

यह इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव है, जो नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हुआ। इसमें वैज्ञानिक, नीति निर्माता, उद्योग जगत, स्टार्टअप और युवा शोधकर्ता एक मंच पर आते हैं।

भारत की आनुवंशिक विविधता अनुसंधान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार यह विविधता यह समझने का मजबूत आधार देती है कि बीमारियों का स्वरूप क्यों बदलता है, और इससे भारत आनुवंशिक संसाधनों का वैश्विक स्रोत बन सकता है।

मंत्री ने शांति अधिनियम के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि हाल में बने इस कानून के प्रावधान परमाणु चिकित्सा अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खोलते हैं, जिससे अनुसंधान और उद्योग की भागीदारी के नए अवसर बन सकते हैं।

स्रोत

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