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डीएसी ने 1.10 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 7 सितंबर 2026 को लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये के खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति दी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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डीएसी ने 1.10 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दी — GK24 title card

चर्चा में क्यों

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 7 सितंबर 2026 को थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति प्रदान की।

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक 7 सितंबर 2026 को हुई। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने की। परिषद ने तीनों सेनाओं के कई खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) दी। एओएन किसी भी रक्षा खरीद का पहला कदम है, यानी सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी। इन प्रस्तावों की कुल अनुमानित लागत लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये है।

थल सेना को क्या मिलेगा

थल सेना के लिए छह प्रकार के साजो-सामान मंजूर हुए। पहला है रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) टोही वाहन। ये वाहन दूषित क्षेत्र का पता लगाते हैं, उसकी पहचान करते हैं, निगरानी रखते हैं और उसे चिह्नित करते हैं। उच्च गतिशीलता वाले वाहन (एचएमवी) कठिन भू-भाग में रसद और गतिशीलता बढ़ाएंगे। स्वचालित यांत्रिक बारूदी सुरंग बिछाने वाले वाहन (एमएमएल) कठिन इलाके में तेजी से सुरंगें बिछाएंगे। उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) थल सेना और वायु सेना दोनों के लिए मंजूर हुए। सूची में ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम भी हैं, जो लड़ाकू दस्तों को बाधा पार कराते हैं।

नौसेना और वायु सेना

सेनामंजूरीउपयोग
नौसेनाअरुध्रा रडारनौसैनिक वायु स्टेशनों के मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेगा
नौसेनामरीन गैस टर्बाइन (एमजीटी)युद्धपोत प्रणोदन प्रणाली, भारत में ही डिजाइन और विकास
वायु सेनाग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (जीबीएमपीजे)विरोधी के रडार को जाम करेगा
वायु सेनाडीईएफएसएसी प्रणालीकागजी पहचान पत्रों की जगह आरएफआईडी स्मार्ट कार्ड

नौसेना के लिए अरुध्रा रडार तथा मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास और खरीद को मंजूरी मिली। गैस टर्बाइन युद्धपोत को चलाती है और इसे देश में बनाने से विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता घटेगी। वायु सेना के लिए लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर क्षमता बढ़ाने वाले प्रस्ताव मंजूर हुए। डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड (डीईएफएसएसी) कागजी पहचान पत्रों, पासों और परमिटों की जगह एक ऐसी स्मार्ट कार्ड प्रणाली लाएगा जिसे हर ठिकाने पर पढ़ा जा सकेगा।

भारतीय उद्योग का हिस्सा

इस दौर में मंजूर कुल मूल्य का लगभग 98 प्रतिशत भारतीय उद्योग से खरीदा जाएगा। परीक्षा के लिए यही आंकड़ा सबसे अहम है, क्योंकि यह बताता है कि रक्षा खरीद में आत्मनिर्भरता कितनी आगे बढ़ चुकी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

निकायरक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी)
अध्यक्षरक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह
बैठक की तिथि7 सितंबर 2026
मंजूर राशिलगभग 1,10,000 करोड़ रुपये
दी गई मंजूरीआवश्यकता की स्वीकृति (एओएन), सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी
थल सेनासीबीआरएन टोही वाहन, एचएमवी, एमएमएल, एएलएच, ट्रॉल टैंक, सर्वत्र ब्रिज सिस्टम
नौसेनाअरुध्रा रडार और मरीन गैस टर्बाइन (एमजीटी)
वायु सेनाग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर और डीईएफएसएसी प्रणाली
भारतीय उद्योग का हिस्सामंजूर मूल्य का लगभग 98 प्रतिशत

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि यह निकाय रक्षा अधिग्रहण परिषद है, अध्यक्ष रक्षा मंत्री होते हैं, एओएन का अर्थ आवश्यकता की स्वीकृति है, राशि लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये है, भारतीय उद्योग का हिस्सा लगभग 98 प्रतिशत है, तथा नाम वाले सिस्टम हैं सीबीआरएन टोही वाहन, सर्वत्र ब्रिज सिस्टम, अरुध्रा रडार, मरीन गैस टर्बाइन, जीबीएमपीजे और डीईएफएसएसी।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षाआसान

7 सितंबर 2026 की रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में लगभग कितने मूल्य के प्रस्ताव मंजूर हुए?

  1. A.45,000 करोड़ रुपये
  2. B.1,10,000 करोड़ रुपये
  3. C.2,23,000 करोड़ रुपये
  4. D.84,560 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1,10,000 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर है 1,10,000 करोड़ रुपये। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में तीनों सेनाओं के खरीद प्रस्तावों को इसी अनुमानित लागत पर आवश्यकता की स्वीकृति दी गई। ध्यान रखें कि आवश्यकता की स्वीकृति केवल सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी होती है; अनुबंध और भुगतान इसके बहुत बाद आते हैं, इसलिए यदि प्रश्न पूछे कि परिषद ने क्या किया तो उत्तर मंजूरी है, खरीद नहीं। शेष तीनों विकल्पों में दिए गए आंकड़े विज्ञप्ति में कहीं नहीं आते। परीक्षक ऐसे मिलते-जुलते बड़े अंक इसलिए रखता है क्योंकि जल्दबाजी में शीर्षक पढ़ने वाला छात्र एक बड़ी राशि को दूसरी बड़ी राशि समझ बैठता है। इसे इस तरह याद रखें कि एक ही बैठक में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए मिलाकर लगभग सवा लाख करोड़ से कुछ कम की मंजूरी मिली, और इसका लगभग 98 प्रतिशत भारतीय उद्योग से लिया जाएगा।

Q2.रक्षाआसान

रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?

  1. A.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस)
  2. B.रक्षा सचिव
  3. C.रक्षा मंत्री
  4. D.राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रक्षा मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर है रक्षा मंत्री। विज्ञप्ति में स्पष्ट लिखा है कि बैठक रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई, इसलिए इस परिषद के प्रमुख रक्षा मंत्री ही होते हैं। विकल्प ए में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का नाम है, जो सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं और तीनों सेनाओं से जुड़े विषयों पर सलाह देते हैं, किंतु इस निकाय की अध्यक्षता उनके पास नहीं है। विकल्प बी में रक्षा सचिव हैं, जो मंत्रालय के सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और खरीद प्रक्रिया में उनकी भूमिका प्रशासनिक होती है, अध्यक्ष की नहीं। विकल्प डी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं, जो सुरक्षा नीति पर काम करते हैं, पूंजीगत खरीद की मंजूरी पर नहीं। जैसे सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति को प्रधानमंत्री से जोड़कर याद किया जाता है, वैसे ही इस परिषद को रक्षा मंत्री से जोड़कर याद रखें।

Q3.रक्षामध्यम

इस बैठक में मंजूर अरुध्रा रडार किस सेना के लिए और किस काम के लिए है?

  1. A.थल सेना, तोपखाना नियंत्रण के लिए
  2. B.नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए
  3. C.वायु सेना, अग्रिम ठिकानों पर परिवहन विमानों के मार्गदर्शन के लिए
  4. D.तटरक्षक बल, अनन्य आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए

व्याख्या

सही उत्तर है नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए। विज्ञप्ति में अरुध्रा रडार नौसेना की सूची में है, साथ में मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास और बाद की खरीद का प्रस्ताव भी है। वहां साफ लिखा है कि यह रडार नौसैनिक वायु स्टेशनों पर लगे मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार का स्थान लेगा। विकल्प ए इसे थल सेना के तोपखाना नियंत्रण से जोड़ता है, जो काम हथियार पहचानने वाले अलग रडार करते हैं और जिनका यहां उल्लेख नहीं है। विकल्प सी इसे वायु सेना से जोड़ता है, जबकि वायु सेना के लिए इस बैठक में लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर क्षमता के अलावा जीबीएमपीजे तथा डीईएफएसएसी मंजूर हुए थे। विकल्प डी में तटरक्षक बल है, जिसका जिक्र ही नहीं है। नौसेना के दोनों नाम जोड़ी बनाकर याद रखें।

Q4.रक्षामध्यम

डीईएफएसएसी प्रणाली किसका स्थान लेगी?

  1. A.कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट
  2. B.पुराने एनालॉग फील्ड रेडियो सेट
  3. C.राशन और कैंटीन के हस्तलिखित रजिस्टर
  4. D.पुराने नाइट विजन उपकरण
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट

व्याख्या

सही उत्तर है कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट। डीईएफएसएसी का पूरा नाम डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड है और विज्ञप्ति के अनुसार यह मौजूदा कागजी व्यवस्था की जगह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान पर चलने वाले इंटरऑपरेबल स्मार्ट कार्ड लाएगा। इंटरऑपरेबल शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे एक ही कार्ड तीनों सेनाओं के ठिकानों पर पढ़ा जा सकेगा, किसी एक ठिकाने पर नहीं। विकल्प बी में फील्ड रेडियो सेट हैं, जो संचार से जुड़ी अलग योजनाओं का विषय हैं। विकल्प सी में राशन और कैंटीन के रजिस्टर हैं, जो कल्याण और आपूर्ति का काम है और इस विज्ञप्ति में नहीं आता। विकल्प डी में नाइट विजन उपकरण हैं, जो निगरानी के दूसरे प्रकार के साधन हैं। वायु सेना के लिए डीईएफएसएसी के साथ जीबीएमपीजे भी मंजूर हुआ, जो विरोधी के रडार को जाम करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) का क्या अर्थ है?

यह रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा किसी खरीद प्रस्ताव को दी गई सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी है। यह पूंजीगत खरीद का पहला औपचारिक चरण है, अनुबंध नहीं।

7 सितंबर 2026 की बैठक में कितनी राशि मंजूर हुई?

तीनों सेनाओं के प्रस्तावों की अनुमानित लागत लगभग 1,10,000 करोड़ रुपये है। इसमें से लगभग 98 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी।

अरुध्रा रडार किस काम आएगा?

यह भारतीय नौसेना के लिए मंजूर हुआ है और विभिन्न नौसैनिक वायु स्टेशनों पर लगे मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेगा।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 7 सितंबर 2026

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