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रक्षा मंत्री ने सुकना में त्रिशक्ति कोर की समीक्षा की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल के सुकना में त्रिशक्ति कोर की तैयारियों, एलएसी ढाँचे और आधुनिक सैन्य उपकरणों की तैनाती का जायजा लिया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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रक्षा मंत्री ने सुकना में त्रिशक्ति कोर की समीक्षा की

चर्चा में क्यों

7 नवंबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल के सुकना पहुँचकर त्रिशक्ति कोर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की, एलएसी के ढाँचे तथा आधुनिक उपकरणों की जानकारी ली और दीवाली पूर्व संध्या के बड़ाखाना में सैनिकों को संबोधित किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 7 नवंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के सुकना में त्रिशक्ति कोर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।

समीक्षा में क्या शामिल रहा

रक्षा मंत्री को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ बनाए जा रहे ढाँचे तथा लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए तैनात किए गए आधुनिक सैन्य उपकरणों और नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कोर की तैयारियों पर संतोष जताया और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों तथा अन्य ढाँचे के निर्माण तथा स्थानीय समुदायों से जुड़ाव बढ़ाने वाले कल्याण कार्यों के लिए कोर की सराहना की। त्रिशक्ति कोर भारतीय सेना की 33 कोर है, जिसका मुख्यालय सिलीगुड़ी के निकट सुकना में है।

कौन उपस्थित रहे

थल सेनाध्यक्षजनरल धीरज सेठ
पूर्वी कमान प्रमुखलेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन
33 कोर के जीओसीलेफ्टिनेंट जनरल मन राज सिंह मान

सुकना: रसद का केंद्र

दीवाली की पूर्व संध्या पर बड़ाखाना में सैनिकों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने रसद को राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बताया और कहा कि सुकना तथा उसके आसपास का क्षेत्र अग्रिम चौकियों तक सामग्री, हथियार, भोजन, दवाइयाँ और जवानों को पहुँचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सुकना पूर्वी भारत की सुरक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है और इसकी भौगोलिक संवेदनशीलता चौबीसों घंटे तैयारी की मांग करती है। उन्होंने बताया कि सरकार आपूर्ति श्रृंखला मजबूत कर रही है ताकि अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को किसी वस्तु की कमी न रहे, और सड़कों, सुरंगों, सीमा ढाँचे तथा आधुनिक उपकरणों के लिए बजट बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप और उद्योग अब सेना के लिए ड्रोन, एंटी-ड्रोन प्रणाली तथा अत्याधुनिक उपकरण बना रहे हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है।

युद्ध का बदलता स्वरूप

रक्षा मंत्री ने कहा कि सुरक्षा चुनौतियाँ अब सीमा पर गोलीबारी या तोपखाने तक सीमित नहीं हैं। इनमें हाइब्रिड युद्ध, छद्म युद्ध, साइबर हमले, ड्रोन घुसपैठ और सूचना युद्ध शामिल हो गए हैं। विरोधी सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाते हैं, ड्रोन से संवेदनशील ठिकानों की निगरानी करते हैं और साइबर हमलों से सैन्य प्रणालियों में घुसने का प्रयास करते हैं। उन्होंने हर क्षेत्र में सतर्क रहने को कहा। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य पर भी बात की और तनाव में रहने वाले सैनिकों से अपनी बात साथियों से साझा करने तथा अधिकारियों से जवानों के साथ अधिक समय बिताने का आग्रह किया।

पूर्वोत्तर: देश का पहला छोर

पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश का अंतिम छोर नहीं, बल्कि पहला छोर बताते हुए उन्होंने कहा कि यहीं सूर्य की पहली किरण पड़ती है और यहीं से देश का भौगोलिक तथा सांस्कृतिक विस्तार शुरू होता है। उन्होंने क्षेत्र की जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता की प्रशंसा की तथा बड़ाखाना को पद, क्षेत्र और भाषा से परे एकजुटता का प्रतीक बताया।

महत्वपूर्ण तथ्य

कार्यक्रमत्रिशक्ति कोर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा
समीक्षा कीराजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
स्थानसुकना, पश्चिम बंगाल
तारीख7 नवंबर 2026
त्रिशक्ति कोरभारतीय सेना की 33 कोर, मुख्यालय सुकना
थल सेनाध्यक्षजनरल धीरज सेठ
पूर्वी कमान प्रमुखलेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन
कोर कमांडरलेफ्टिनेंट जनरल मन राज सिंह मान
जानकारी का विषयवास्तविक नियंत्रण रेखा पर ढाँचा और आधुनिक उपकरण
प्रयुक्त शब्दपूर्वोत्तर को देश का पहला छोर, अंतिम छोर नहीं, कहा गया

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि त्रिशक्ति कोर भारतीय सेना की 33 कोर है, जिसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के सुकना में है; रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं, थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ, पूर्वी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन और कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मन राज सिंह मान हैं। एलएसी ढाँचे की समीक्षा, बड़ाखाना तथा पूर्वोत्तर के लिए पहला छोर शब्द भी याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षामध्यम

7 नवंबर 2026 को जिस त्रिशक्ति कोर की तैयारियों की समीक्षा हुई, उसका मुख्यालय कहाँ है?

  1. A.तेजपुर, असम
  2. B.सुकना, पश्चिम बंगाल
  3. C.बागडोगरा, पश्चिम बंगाल
  4. D.दीमापुर, नागालैंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सुकना, पश्चिम बंगाल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुकना में त्रिशक्ति कोर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की, जहाँ उन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ बनाए जा रहे ढाँचे तथा आधुनिक सैन्य उपकरणों और उभरती तकनीकों की तैनाती के बारे में जानकारी दी गई।

Q2.रक्षामध्यम

सुकना दौरे में रक्षा मंत्री को किस सीमा रेखा के साथ बने ढाँचे की जानकारी दी गई?

  1. A.नियंत्रण रेखा
  2. B.रेडक्लिफ रेखा
  3. C.वास्तविक नियंत्रण रेखा
  4. D.ड्यूरंड रेखा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वास्तविक नियंत्रण रेखा

सुकना में रक्षा मंत्री को वास्तविक नियंत्रण रेखा, जिसे संक्षेप में एलएसी कहा जाता है, के साथ हो रहे ढाँचागत विकास तथा परिचालन क्षमता और युद्धक प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए तैनात आधुनिक सैन्य उपकरणों एवं उभरती तकनीकों की जानकारी दी गई।

Q3.रक्षाआसान

सुकना में सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए कौन सा शब्द प्रयोग किया?

  1. A.देश का अंतिम छोर
  2. B.देश का पहला छोर
  3. C.पूर्वी प्रवेश द्वार
  4. D.सात बहनों का क्षेत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. देश का पहला छोर

दीवाली की पूर्व संध्या पर आयोजित बड़ाखाना में सैनिकों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश का अंतिम छोर नहीं, बल्कि पहला छोर बताया और कहा कि यह क्षेत्र देश के भौगोलिक तथा सांस्कृतिक विस्तार की शुरुआत है, क्योंकि यहीं सूर्य की पहली किरण पहुँचती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना की कौन सी कोर त्रिशक्ति कोर कहलाती है?

भारतीय सेना की 33 कोर, जिसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के सुकना में है। राजनाथ सिंह ने 7 नवंबर 2026 को इसकी परिचालन तैयारियों की समीक्षा की और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बने ढाँचे तथा नए उपकरणों की जानकारी ली।

रक्षा मंत्री ने सुकना को महत्वपूर्ण क्यों बताया?

उन्होंने सुकना और उसके आसपास के क्षेत्र को अग्रिम चौकियों तक सामग्री, हथियार, भोजन, दवाइयों और जवानों को पहुँचाने का अहम केंद्र तथा पूर्वी भारत की सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताया, जिसकी भौगोलिक संवेदनशीलता चौबीसों घंटे तैयारी की मांग करती है।

सुकना में राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि सुरक्षा चुनौतियाँ अब सीमा पर गोलीबारी या तोपखाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें हाइब्रिड युद्ध, छद्म युद्ध, साइबर हमले, ड्रोन घुसपैठ और सूचना युद्ध शामिल हैं, जिनमें विरोधी सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाते और सैन्य प्रणालियों में घुसने का प्रयास करते हैं।

पूर्वोत्तर को पहला छोर कहने का क्या अर्थ था?

उनका आशय था कि पूर्वोत्तर को देश का अंतिम छोर मानने के बजाय भौगोलिक और सांस्कृतिक विस्तार की शुरुआत माना जाए, क्योंकि वहीं सूर्य की पहली किरण पहुँचती है। उन्होंने क्षेत्र की जैव विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता की भी प्रशंसा की।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLUPSC सिविल सेवा