मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24
रक्षाआसान

7 सितंबर 2026 की रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में लगभग कितने मूल्य के प्रस्ताव मंजूर हुए?

  1. A.45,000 करोड़ रुपये
  2. B.1,10,000 करोड़ रुपये
  3. C.2,23,000 करोड़ रुपये
  4. D.84,560 करोड़ रुपये

सही उत्तर

B. 1,10,000 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर है 1,10,000 करोड़ रुपये। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में तीनों सेनाओं के खरीद प्रस्तावों को इसी अनुमानित लागत पर आवश्यकता की स्वीकृति दी गई। ध्यान रखें कि आवश्यकता की स्वीकृति केवल सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी होती है; अनुबंध और भुगतान इसके बहुत बाद आते हैं, इसलिए यदि प्रश्न पूछे कि परिषद ने क्या किया तो उत्तर मंजूरी है, खरीद नहीं। शेष तीनों विकल्पों में दिए गए आंकड़े विज्ञप्ति में कहीं नहीं आते। परीक्षक ऐसे मिलते-जुलते बड़े अंक इसलिए रखता है क्योंकि जल्दबाजी में शीर्षक पढ़ने वाला छात्र एक बड़ी राशि को दूसरी बड़ी राशि समझ बैठता है। इसे इस तरह याद रखें कि एक ही बैठक में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए मिलाकर लगभग सवा लाख करोड़ से कुछ कम की मंजूरी मिली, और इसका लगभग 98 प्रतिशत भारतीय उद्योग से लिया जाएगा।

पूरा लेख पढ़ें: डीएसी ने 1.10 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दी

Read in English
Q1.रक्षाआसान

रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?

  1. A.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस)
  2. B.रक्षा सचिव
  3. C.रक्षा मंत्री
  4. D.राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रक्षा मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर है रक्षा मंत्री। विज्ञप्ति में स्पष्ट लिखा है कि बैठक रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई, इसलिए इस परिषद के प्रमुख रक्षा मंत्री ही होते हैं। विकल्प ए में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का नाम है, जो सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं और तीनों सेनाओं से जुड़े विषयों पर सलाह देते हैं, किंतु इस निकाय की अध्यक्षता उनके पास नहीं है। विकल्प बी में रक्षा सचिव हैं, जो मंत्रालय के सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और खरीद प्रक्रिया में उनकी भूमिका प्रशासनिक होती है, अध्यक्ष की नहीं। विकल्प डी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं, जो सुरक्षा नीति पर काम करते हैं, पूंजीगत खरीद की मंजूरी पर नहीं। जैसे सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति को प्रधानमंत्री से जोड़कर याद किया जाता है, वैसे ही इस परिषद को रक्षा मंत्री से जोड़कर याद रखें।

Q2.रक्षामध्यम

इस बैठक में मंजूर अरुध्रा रडार किस सेना के लिए और किस काम के लिए है?

  1. A.थल सेना, तोपखाना नियंत्रण के लिए
  2. B.नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए
  3. C.वायु सेना, अग्रिम ठिकानों पर परिवहन विमानों के मार्गदर्शन के लिए
  4. D.तटरक्षक बल, अनन्य आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए

व्याख्या

सही उत्तर है नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए। विज्ञप्ति में अरुध्रा रडार नौसेना की सूची में है, साथ में मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास और बाद की खरीद का प्रस्ताव भी है। वहां साफ लिखा है कि यह रडार नौसैनिक वायु स्टेशनों पर लगे मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार का स्थान लेगा। विकल्प ए इसे थल सेना के तोपखाना नियंत्रण से जोड़ता है, जो काम हथियार पहचानने वाले अलग रडार करते हैं और जिनका यहां उल्लेख नहीं है। विकल्प सी इसे वायु सेना से जोड़ता है, जबकि वायु सेना के लिए इस बैठक में लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर क्षमता के अलावा जीबीएमपीजे तथा डीईएफएसएसी मंजूर हुए थे। विकल्प डी में तटरक्षक बल है, जिसका जिक्र ही नहीं है। नौसेना के दोनों नाम जोड़ी बनाकर याद रखें।

Q3.रक्षामध्यम

डीईएफएसएसी प्रणाली किसका स्थान लेगी?

  1. A.कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट
  2. B.पुराने एनालॉग फील्ड रेडियो सेट
  3. C.राशन और कैंटीन के हस्तलिखित रजिस्टर
  4. D.पुराने नाइट विजन उपकरण
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट

व्याख्या

सही उत्तर है कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट। डीईएफएसएसी का पूरा नाम डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड है और विज्ञप्ति के अनुसार यह मौजूदा कागजी व्यवस्था की जगह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान पर चलने वाले इंटरऑपरेबल स्मार्ट कार्ड लाएगा। इंटरऑपरेबल शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे एक ही कार्ड तीनों सेनाओं के ठिकानों पर पढ़ा जा सकेगा, किसी एक ठिकाने पर नहीं। विकल्प बी में फील्ड रेडियो सेट हैं, जो संचार से जुड़ी अलग योजनाओं का विषय हैं। विकल्प सी में राशन और कैंटीन के रजिस्टर हैं, जो कल्याण और आपूर्ति का काम है और इस विज्ञप्ति में नहीं आता। विकल्प डी में नाइट विजन उपकरण हैं, जो निगरानी के दूसरे प्रकार के साधन हैं। वायु सेना के लिए डीईएफएसएसी के साथ जीबीएमपीजे भी मंजूर हुआ, जो विरोधी के रडार को जाम करता है।

Q4.रक्षामध्यम

बैठक में बताया गया कि भारत-मोरक्को द्विपक्षीय सहयोग की 70वीं वर्षगांठ किस वर्ष पड़ेगी?

  1. A.2026
  2. B.2027
  3. C.2028
  4. D.2030
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2027

व्याख्या

सही उत्तर 2027 है। बैठक में दोनों पक्षों ने कहा कि भारत और मोरक्को के द्विपक्षीय सहयोग की सत्तरवीं वर्षगांठ उसी वर्ष आ रही है और इसी पड़ाव से पहले रक्षा संबंधों को व्यापक बनाने पर सहमति बनी। विकल्प A उस वर्ष को बताता है जिसमें बैठक हुई, क्योंकि बैठक 8 सितंबर 2026 को हुई थी; जल्दबाजी में पढ़ने वाला अभ्यर्थी यही चुन सकता है, जबकि बैठक का वर्ष और वर्षगांठ का वर्ष अलग तथ्य हैं। विकल्प C और विकल्प D ऐसे वर्ष हैं जिनका उल्लेख इस बैठक की विज्ञप्ति में है ही नहीं। इस समाचार को दोहराते समय तीन वर्ष अलग-अलग याद रखें: रक्षा समझौता ज्ञापन सितंबर 2025 में, समिति की पहली बैठक 2026 में और सहयोग की सत्तरवीं वर्षगांठ 2027 में।

Q5.रक्षामध्यम

भारत-मोरक्को संयुक्त रक्षा समिति जिस समझौता ज्ञापन से बनी, वह किसकी मोरक्को यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.रक्षा मंत्री
  3. C.विदेश मंत्री
  4. D.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रक्षा मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर रक्षा मंत्री है। रक्षा सहयोग का समझौता ज्ञापन सितंबर 2025 में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की मोरक्को यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था और संयुक्त रक्षा समिति उसी समझौते से बना संस्थागत तंत्र है। विकल्प A यानी प्रधानमंत्री गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति इस समझौते को रक्षा मंत्री की यात्रा से जोड़ती है। विकल्प C यानी विदेश मंत्री भ्रमित करने वाला विकल्प है, क्योंकि बैठक में भारतीय दल में विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे; परंतु बैठक में शामिल होना और मूल समझौते पर हस्ताक्षर करना अलग-अलग बातें हैं। विकल्प D यानी प्रमुख रक्षा अध्यक्ष गलत है, क्योंकि ऐसे समझौते राजनीतिक स्तर पर होते हैं। याद रखने का क्रम सरल है: 2025 की यात्रा से समझौता ज्ञापन और समझौता ज्ञापन से यह समिति बनी।