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GK24
रक्षामध्यम

डीईएफएसएसी प्रणाली किसका स्थान लेगी?

  1. A.कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट
  2. B.पुराने एनालॉग फील्ड रेडियो सेट
  3. C.राशन और कैंटीन के हस्तलिखित रजिस्टर
  4. D.पुराने नाइट विजन उपकरण

सही उत्तर

A. कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट

व्याख्या

सही उत्तर है कागज आधारित पहचान पत्र, पास और परमिट। डीईएफएसएसी का पूरा नाम डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड है और विज्ञप्ति के अनुसार यह मौजूदा कागजी व्यवस्था की जगह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान पर चलने वाले इंटरऑपरेबल स्मार्ट कार्ड लाएगा। इंटरऑपरेबल शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे एक ही कार्ड तीनों सेनाओं के ठिकानों पर पढ़ा जा सकेगा, किसी एक ठिकाने पर नहीं। विकल्प बी में फील्ड रेडियो सेट हैं, जो संचार से जुड़ी अलग योजनाओं का विषय हैं। विकल्प सी में राशन और कैंटीन के रजिस्टर हैं, जो कल्याण और आपूर्ति का काम है और इस विज्ञप्ति में नहीं आता। विकल्प डी में नाइट विजन उपकरण हैं, जो निगरानी के दूसरे प्रकार के साधन हैं। वायु सेना के लिए डीईएफएसएसी के साथ जीबीएमपीजे भी मंजूर हुआ, जो विरोधी के रडार को जाम करता है।

पूरा लेख पढ़ें: डीएसी ने 1.10 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दी

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Q1.रक्षाआसान

7 सितंबर 2026 की रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में लगभग कितने मूल्य के प्रस्ताव मंजूर हुए?

  1. A.45,000 करोड़ रुपये
  2. B.1,10,000 करोड़ रुपये
  3. C.2,23,000 करोड़ रुपये
  4. D.84,560 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1,10,000 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर है 1,10,000 करोड़ रुपये। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में तीनों सेनाओं के खरीद प्रस्तावों को इसी अनुमानित लागत पर आवश्यकता की स्वीकृति दी गई। ध्यान रखें कि आवश्यकता की स्वीकृति केवल सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी होती है; अनुबंध और भुगतान इसके बहुत बाद आते हैं, इसलिए यदि प्रश्न पूछे कि परिषद ने क्या किया तो उत्तर मंजूरी है, खरीद नहीं। शेष तीनों विकल्पों में दिए गए आंकड़े विज्ञप्ति में कहीं नहीं आते। परीक्षक ऐसे मिलते-जुलते बड़े अंक इसलिए रखता है क्योंकि जल्दबाजी में शीर्षक पढ़ने वाला छात्र एक बड़ी राशि को दूसरी बड़ी राशि समझ बैठता है। इसे इस तरह याद रखें कि एक ही बैठक में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए मिलाकर लगभग सवा लाख करोड़ से कुछ कम की मंजूरी मिली, और इसका लगभग 98 प्रतिशत भारतीय उद्योग से लिया जाएगा।

Q2.रक्षाआसान

रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?

  1. A.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस)
  2. B.रक्षा सचिव
  3. C.रक्षा मंत्री
  4. D.राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रक्षा मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर है रक्षा मंत्री। विज्ञप्ति में स्पष्ट लिखा है कि बैठक रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई, इसलिए इस परिषद के प्रमुख रक्षा मंत्री ही होते हैं। विकल्प ए में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का नाम है, जो सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं और तीनों सेनाओं से जुड़े विषयों पर सलाह देते हैं, किंतु इस निकाय की अध्यक्षता उनके पास नहीं है। विकल्प बी में रक्षा सचिव हैं, जो मंत्रालय के सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और खरीद प्रक्रिया में उनकी भूमिका प्रशासनिक होती है, अध्यक्ष की नहीं। विकल्प डी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं, जो सुरक्षा नीति पर काम करते हैं, पूंजीगत खरीद की मंजूरी पर नहीं। जैसे सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति को प्रधानमंत्री से जोड़कर याद किया जाता है, वैसे ही इस परिषद को रक्षा मंत्री से जोड़कर याद रखें।

Q3.रक्षामध्यम

इस बैठक में मंजूर अरुध्रा रडार किस सेना के लिए और किस काम के लिए है?

  1. A.थल सेना, तोपखाना नियंत्रण के लिए
  2. B.नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए
  3. C.वायु सेना, अग्रिम ठिकानों पर परिवहन विमानों के मार्गदर्शन के लिए
  4. D.तटरक्षक बल, अनन्य आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए

व्याख्या

सही उत्तर है नौसेना, नौसैनिक वायु स्टेशनों के एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेने के लिए। विज्ञप्ति में अरुध्रा रडार नौसेना की सूची में है, साथ में मरीन गैस टर्बाइन के डिजाइन, विकास और बाद की खरीद का प्रस्ताव भी है। वहां साफ लिखा है कि यह रडार नौसैनिक वायु स्टेशनों पर लगे मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार का स्थान लेगा। विकल्प ए इसे थल सेना के तोपखाना नियंत्रण से जोड़ता है, जो काम हथियार पहचानने वाले अलग रडार करते हैं और जिनका यहां उल्लेख नहीं है। विकल्प सी इसे वायु सेना से जोड़ता है, जबकि वायु सेना के लिए इस बैठक में लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर क्षमता के अलावा जीबीएमपीजे तथा डीईएफएसएसी मंजूर हुए थे। विकल्प डी में तटरक्षक बल है, जिसका जिक्र ही नहीं है। नौसेना के दोनों नाम जोड़ी बनाकर याद रखें।

Q4.रक्षामध्यम

43वें तटरक्षक कमांडर सम्मेलन में रक्षा राज्य मंत्री से चर्चा करने वाले भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक कौन हैं?

  1. A.एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन
  2. B.जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि
  3. C.परमेश शिवमणि
  4. D.संजय सेठ
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. परमेश शिवमणि

व्याख्या

सही उत्तर परमेश शिवमणि है, जो भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक के रूप में इसका नेतृत्व करते हैं और जिन्होंने मंत्री तथा कमांडरों के साथ राष्ट्रीय एवं समुद्री सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की। विकल्प A गलत है क्योंकि एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन नौसेना प्रमुख हैं, जिनसे कमांडर सम्मेलन के दौरान अलग से मिलेंगे। विकल्प B गलत है क्योंकि जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ हैं, जो अंतर-सेवा सहयोग के लिए कमांडरों से बातचीत करेंगे। विकल्प D गलत है क्योंकि संजय सेठ रक्षा राज्य मंत्री हैं, जिन्होंने पहले दिन संबोधित किया, वे बल के अधिकारी नहीं हैं। ऐसे प्रश्नों में एक ही आयोजन के चार नाम मिलाकर पूछे जाते हैं, इसलिए हर नाम को उसके पद के साथ याद रखें।

Q5.रक्षामध्यम

तटरक्षक कमांडर सम्मेलन में उल्लिखित 'महासागर' दृष्टिकोण का पूरा रूप क्या है?

  1. A.बंदरगाह सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के लिए समुद्री गठजोड़
  2. B.क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति
  3. C.मानवीय सहायता, सुरक्षा और शासन के लिए समुद्री सहयोग
  4. D.उन्नत बंदरगाह एवं समुद्री तत्परता मिशन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति

व्याख्या

सही उत्तर क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति है। रक्षा राज्य मंत्री ने इस दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की समुद्री क्षमताओं को पूरे दायरे में मजबूत करना होगा, तटीय और उथले पानी से लेकर खुले तथा गहरे समुद्र तक। विकल्प A, C और D काल्पनिक विस्तार हैं, जो असली रूप से मिलते-जुलते शब्दों से गढ़े गए हैं; संक्षिप्त नामों पर प्रश्न प्रायः इसी ढांचे में बनते हैं, जिसमें सही उत्तर के इर्द-गिर्द तीन मिलते-जुलते विकल्प रखे जाते हैं। पूरे रूप के साथ मंत्री द्वारा गिनाई गई जरूरतें भी याद रखें: उन्नत प्लेटफॉर्म, पानी के नीचे की प्रौद्योगिकियां, मानवरहित प्रणालियां, लंबी अवधि की निगरानी, उपग्रह आधारित समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सुरक्षित संचार।