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GK24

UPSC CAPF 2024 पिछले वर्ष के GK प्रश्न

UPSC CAPF 2024 में पूछे गए GK प्रश्न, उत्तर और व्याख्या सहित।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q1.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2024, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वायु में PM1 कणों को सही रूप में परिभाषित करता है?

  1. A.ये 10 माइक्रॉन से अधिक व्यास वाले निलंबित कण हैं
  2. B.ये वे कण हैं जिन्हें श्वसन के दौरान नाक छान लेती है
  3. C.ये 1 माइक्रॉन से कम व्यास वाले अत्यंत सूक्ष्म कण हैं
  4. D.ये मोटे कण हैं जो फेफड़ों से होकर सीधे रक्तप्रवाह में पहुँच जाते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ये 1 माइक्रॉन से कम व्यास वाले अत्यंत सूक्ष्म कण हैं

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1 माइक्रॉन से कम व्यास वाले अत्यंत सूक्ष्म कण। PM के बाद लिखी संख्या कणों के आकार की ऊपरी सीमा माइक्रोमीटर में बताती है।

कणिकीय पदार्थ को उसके वायुगतिकीय व्यास से बाँटा जाता है: PM10 यानी 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटे, PM2.5 यानी 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे, और PM1 यानी 1 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण, जो मानव बाल की मोटाई के लगभग सत्तरवें हिस्से जितने हैं। कण जितना छोटा, उतना गहरा जाता है: PM1 नाक और गले से बचकर फेफड़ों की वायुकोशिकाओं तक पहुँचता है और रक्त में भी जा सकता है, इसलिए यह हृदय और फेफड़ों के रोगों से जुड़ा है। ये कण मुख्यतः वाहनों के धुएँ, ईंधन और पराली जलाने तथा कारखानों से आते हैं।

A गलत है: 10 माइक्रोमीटर से बड़े कण मोटी धूल हैं, PM1 नहीं।

B गलत है: नाक मुख्यतः बड़े कण रोकती है; PM1 वहाँ नहीं छनता।

D गलत है: PM1 मोटे नहीं, अत्यंत महीन कण हैं, और रक्त तक महीन कण ही पहुँचते हैं।

परीक्षा टिप: PM10 मोटे, PM2.5 महीन, PM1 अति-महीन; संख्या जितनी छोटी, शरीर में उतनी गहराई तक।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2024, Paper Iमध्यम

हरितगृह प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें न कोई विकिरण भीतर आ सके और न ही वापस बाहर जा सके
  2. B.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें लंबी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण भीतर आ सके और छोटी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण वापस बाहर न जा सके
  3. C.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें छोटी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण भीतर आ सके और लंबी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण वापस बाहर न जा सके
  4. D.यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें सभी अवरक्त विकिरण भीतर आ सकें या वापस बाहर जा सकें
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. यह काँच के ऐसे कक्ष के भीतर हो सकता है जिसमें छोटी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण भीतर आ सके और लंबी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त विकिरण वापस बाहर न जा सके

व्याख्या

सही उत्तर है C: कक्ष छोटी तरंगदैर्ध्य वाले विकिरण को भीतर आने देता है, पर लंबी तरंगदैर्ध्य वाले अवरक्त विकिरण को बाहर नहीं जाने देता, इसलिए ऊष्मा भीतर फँस जाती है।

ग्लासहाउस तक पहुँचने वाला सूर्य-प्रकाश अधिकतर दृश्य प्रकाश और छोटी तरंगदैर्ध्य वाला अवरक्त होता है, जिसे काँच आसानी से पार होने देता है। भीतर के पौधे और मिट्टी इसे सोखकर गर्म होते हैं और यह ऊर्जा लंबी तरंगदैर्ध्य वाले अवरक्त के रूप में फिर छोड़ते हैं, क्योंकि ठंडी वस्तुएँ लंबी तरंगें उत्सर्जित करती हैं। काँच इन लंबी तरंगों को काफ़ी हद तक रोक लेता है, इसलिए तापमान बढ़ता है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड यही काम करती हैं और पृथ्वी को लगभग 33 °C अधिक गर्म रखती हैं।

A गलत है: कोई विकिरण भीतर ही न आए तो फँसाने को ऊर्जा ही नहीं होगी।

B गलत है: इसमें तरंगदैर्ध्य उलट दी गई हैं।

D गलत है: सारा अवरक्त बाहर निकल जाए तो कुछ नहीं फँसेगा।

परीक्षा टिप: छोटी तरंगें भीतर, लंबी तरंगें बाहर नहीं; काँच और ग्रीनहाउस गैसें बाहर जाते लंबी तरंग वाले अवरक्त को रोकती हैं।

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