संसद में एक साधारण विधेयक पेश करते समय निम्नलिखित में से कौन-सा प्रस्ताव नहीं रखा जा सकता?
- A.कि विधेयक पर विचार किया जाए
- B.कि जनमत जानने के उद्देश्य से विधेयक को परिचालित किया जाए
- C.कि विधेयक को प्रवर समिति को भेजा जाए
- D.कि विधेयक को दूसरे सदन की सहमति के बिना सदन की संयुक्त समिति को भेजा जाए
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, कि विधेयक को दूसरे सदन की सहमति के बिना सदन की संयुक्त समिति को भेजा जाए। संयुक्त समिति में दोनों सदनों के सदस्य होते हैं, इसलिए कोई विधेयक उसे तभी भेजा जा सकता है जब दूसरा सदन उसमें शामिल होने को सहमत हो। साधारण विधेयक पेश होने के बाद, सामान्य चर्चा के चरण में प्रभारी सदस्य चार में से कोई एक प्रस्ताव रख सकता है: विधेयक पर विचार किया जाए; इसे सदन की प्रवर समिति को भेजा जाए; दूसरे सदन की सहमति से इसे दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा जाए; या जनमत जानने के लिए इसे परिचालित किया जाए। विकल्प A उत्तर नहीं है, क्योंकि विचार का प्रस्ताव सामान्य अगला कदम है। विकल्प B उत्तर नहीं है, क्योंकि जनमत के लिए विधेयक का परिचालन एक मान्य प्रस्ताव है। विकल्प C उत्तर नहीं है, क्योंकि प्रवर समिति एक ही सदन से बनती है और उसके लिए दूसरे सदन की सहमति नहीं चाहिए। परीक्षा टिप: प्रवर समिति एक सदन की होती है; संयुक्त समिति दोनों सदनों की, इसलिए दूसरे सदन की सहमति आवश्यक है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंराजव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किसे आप स्वतंत्रता की सबसे उपयुक्त परिभाषा के रूप में स्वीकार करेंगे?
- A.राजनीतिक शासकों की निरंकुशता से सुरक्षा
- B.प्रतिबंध का अभाव
- C.जो चाहे वह करने का अवसर
- D.स्वयं का पूर्ण विकास करने का अवसर
उत्तर देखें
राजनीतिक सिद्धांत में, और भारतीय संविधान की भावना में भी, स्वतंत्रता का अर्थ सकारात्मक स्वतंत्रता है: वे परिस्थितियां और अवसर जिनकी व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए आवश्यकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संवैधानिक सरकार का अर्थ है
- A.संघीय ढांचे वाले राष्ट्र की प्रतिनिधि सरकार
- B.ऐसी सरकार जिसके प्रमुख के पास नाममात्र की शक्तियां हों
- C.ऐसी सरकार जिसके प्रमुख के पास वास्तविक शक्तियां हों
- D.संविधान की शर्तों द्वारा सीमित सरकार
उत्तर देखें
संवैधानिक सरकार का अर्थ है सीमित सरकार: सत्ता में बैठे लोग केवल उन्हीं सीमाओं में काम कर सकते हैं जो संविधान तय करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →26 जनवरी, 1950 को भारत की वास्तविक संवैधानिक स्थिति क्या थी?
- A.एक लोकतंत्रात्मक गणराज्य
- B.एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य
- C.एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य
- D.एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य
उत्तर देखें
26 जनवरी 1950 को जब संविधान लागू हुआ, तब उसकी उद्देशिका ने भारत को संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित किया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के संविधान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. किसी भी उच्च न्यायालय को किसी केंद्रीय विधि को संवैधानिक रूप से अवैध घोषित करने का क्षेत्राधिकार नहीं होगा। 2. भारत के संविधान के किसी संशोधन पर भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
दोनों कथन न्यायिक पुनर्विलोकन की उन शक्तियों को नकारते हैं जो भारतीय न्यायालयों के पास स्पष्ट रूप से हैं। कथन 1 गलत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय संविधान के अंतर्गत, धन का संकेंद्रण किसका उल्लंघन करता है?
- A.समता का अधिकार
- B.राज्य की नीति के निदेशक तत्व
- C.स्वतंत्रता का अधिकार
- D.कल्याण की अवधारणा
उत्तर देखें
संविधान के भाग IV में दिए निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 39(c) राज्य को निर्देश देता है कि आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण सर्वसाधारण के लिए अहितकारी न हो।
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