भारत के निम्नलिखित राष्ट्रपतियों में से किसने भारत के संविधान के 100वें संशोधन को स्वीकृति दी थी?
- A.राम नाथ कोविंद
- B.प्रतिभा देवीसिंह पाटिल
- C.एपीजे अब्दुल कलाम
- D.प्रणब मुखर्जी
सही उत्तर
D. प्रणब मुखर्जी
व्याख्या
सही उत्तर है D, प्रणब मुखर्जी। संविधान (100वाँ संशोधन) अधिनियम 2015 में पारित हुआ और उसे 31 मई 2015 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली, जब यह पद प्रणब मुखर्जी के पास था; वे 2012 से 2017 तक राष्ट्रपति रहे। इस संशोधन ने बांग्लादेश के साथ हुए भूमि सीमा समझौते को लागू किया, जिसके तहत दोनों देशों ने परिक्षेत्रों तथा प्रतिकूल कब्जे वाले क्षेत्रों का आदान-प्रदान किया, और इससे पहली अनुसूची में असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय तथा त्रिपुरा से जुड़ी प्रविष्टियाँ बदल गईं। हस्तांतरित परिक्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी नागरिकता चुनने का अवसर दिया गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि राम नाथ कोविंद दो वर्ष बाद, 2017 में राष्ट्रपति बने। विकल्प B गलत है, क्योंकि प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल 2007 से 2012 तक रहा, यानी इस संशोधन से पहले। विकल्प C गलत है, क्योंकि एपीजे अब्दुल कलाम 2002 से 2007 तक राष्ट्रपति थे। परीक्षा टिप: 2015 का 100वाँ संशोधन भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा से जुड़ा है और इसने पहली अनुसूची बदली।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारत में जन्मे व्यक्ति को जन्म से नागरिक होने के लिए माता या पिता में से एक का भारतीय नागरिक होना किस तिथि से आवश्यक हुआ?
- A.26 जनवरी 1950
- B.1 जुलाई 1987
- C.3 दिसंबर 2004
- D.31 दिसंबर 2014
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 जुलाई 1987
व्याख्या
सही उत्तर B, 1 जुलाई 1987 है। 1986 के संशोधन ने जन्म से नागरिकता का नियम 1 जुलाई 1987 से बदल दिया: उस तिथि को या उसके बाद भारत में जन्मा व्यक्ति जन्म से नागरिक तभी है जब जन्म के समय उसके माता या पिता में से एक भारतीय नागरिक हो। विकल्प A गलत है क्योंकि 26 जनवरी 1950 से 30 जून 1987 तक केवल भारत में जन्म पर्याप्त था और माता-पिता की राष्ट्रीयता से कोई अंतर नहीं पड़ता था। विकल्प C गलत है क्योंकि 3 दिसंबर 2004 अगला और अधिक कठोर चरण है, जिसके अनुसार भारत में जन्मा व्यक्ति नागरिक तभी है जब उसके दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों, अथवा एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। विकल्प D गलत है क्योंकि 31 दिसंबर 2014, 2019 के संशोधन में प्रवेश की कट-ऑफ तिथि है और जन्म से नागरिकता से उसका कोई संबंध नहीं है।
भारतीय संविधान में एकल नागरिकता का विचार किस देश के संविधान से लिया गया है?
- A.अमेरिका
- B.ब्रिटेन
- C.कनाडा
- D.आयरलैंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ब्रिटेन
व्याख्या
सही उत्तर B, ब्रिटेन है। भारत ब्रिटिश व्यवहार के अनुसार एकल नागरिकता अपनाता है: केवल भारत की नागरिकता होती है, किसी राज्य की अलग नागरिकता नहीं, इसलिए प्रत्येक नागरिक को देश के हर भाग में समान अधिकार मिलते हैं। ब्रिटेन से भारत ने संसदीय शासन, विधि का शासन, एकल नागरिकता, विधायी प्रक्रिया और अध्यक्ष का पद भी लिया। विकल्प A गलत है क्योंकि अमेरिका में दोहरी नागरिकता होती है, संघ की और राज्य की; अमेरिका से भारत ने मूल अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन और महाभियोग की प्रक्रिया ली। विकल्प C गलत है क्योंकि कनाडा से भारत ने सशक्त केंद्र वाला संघ, संघ के पास अवशिष्ट शक्तियाँ और राज्यपालों की नियुक्ति ली। विकल्प D गलत है क्योंकि आयरलैंड से भारत ने नीति निदेशक तत्व, राज्यसभा में सदस्यों का नामनिर्देशन और राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति ली।
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पात्रता के लिए भारत में प्रवेश की कट-ऑफ तिथि क्या है?
- A.31 दिसंबर 2004
- B.31 दिसंबर 2014
- C.31 मार्च 2015
- D.31 दिसंबर 2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 31 दिसंबर 2014
व्याख्या
सही उत्तर B, 31 दिसंबर 2014 है। नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 कहता है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई व्यक्ति, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आ गए, अवैध प्रवासी नहीं माने जाएंगे और नागरिकता के पात्र होंगे, तथा उनके देशीयकरण की अर्हता अवधि ग्यारह वर्ष से घटाकर पाँच वर्ष कर दी गई है। इसके अंतर्गत आवेदन के नियम 2024 में अधिसूचित हुए। विकल्प A गलत है क्योंकि 3 दिसंबर 2004 वह तिथि है जिससे जन्म से नागरिकता का कठोर नियम लागू होता है, जिसमें दोनों माता-पिता नागरिक हों या एक नागरिक और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। विकल्प C गलत है क्योंकि अधिनियम में ऐसी कोई तिथि नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 अधिनियम बनने का वर्ष है, प्रवेश की कट-ऑफ तिथि उससे पाँच वर्ष पहले की है।
भारतीय मूल के व्यक्ति का कार्ड किस वर्ष प्रवासी भारतीय नागरिक योजना में मिला दिया गया?
- A.2003
- B.2005
- C.2015
- D.2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2015
व्याख्या
सही उत्तर C, 2015 है। नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2015 ने पुरानी भारतीय मूल के व्यक्ति कार्ड योजना को प्रवासी भारतीय नागरिक योजना में मिला दिया, जिससे पीआईओ कार्डधारक ओसीआई कार्डधारक माने गए और केवल एक ही श्रेणी बची। विकल्प A गलत है क्योंकि 2003 के संशोधन ने अवैध प्रवासी की अवधारणा दी और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर का उपबंध किया, विलय नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 2005 में ओसीआई योजना स्वयं आरंभ हुई, जिससे भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को आजीवन वीजा और अधिकांश आर्थिक मामलों में अनिवासी भारतीय के समान दर्जा मिला, किंतु मताधिकार या संवैधानिक पद नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 का संशोधन अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह निर्दिष्ट समुदायों की पात्रता से संबंधित है, जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए थे।
नागरिकता, देशीयकरण और विदेशी विषय सातवीं अनुसूची की किस सूची में रखे गए हैं?
- A.संघ सूची
- B.राज्य सूची
- C.समवर्ती सूची
- D.अनुसूची से बाहर अवशिष्ट विषय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संघ सूची
व्याख्या
सही उत्तर A, संघ सूची है। नागरिकता, देशीयकरण और विदेशी सातवीं अनुसूची की संघ सूची की एक प्रविष्टि हैं, इसलिए इन पर केवल संसद विधि बना सकती है; यही बात अनुच्छेद 11 से मेल खाती है और बताती है कि देश में एक ही केंद्रीय नागरिकता अधिनियम है और किसी राज्य की अलग नागरिकता विधि नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि राज्य सूची में लोक व्यवस्था, पुलिस, स्थानीय शासन, लोक स्वास्थ्य और कृषि जैसे विषय हैं, और कोई राज्य विधानमंडल नागरिकता दे या छीन नहीं सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि समवर्ती सूची में दंड विधि, विवाह और विवाह विच्छेद, शिक्षा तथा वन जैसे विषय हैं, जिन पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों विधि बना सकते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि नागरिकता स्पष्ट रूप से परिगणित विषय है, अतः अवशिष्ट विषय नहीं है; अवशिष्ट शक्तियाँ, जो संसद के पास ही हैं, केवल उन विषयों पर लागू होती हैं जो किसी सूची में नहीं हैं।