भारत के वित्त आयोग के पहले अध्यक्ष कौन थे?
- A.अशोक कुमार चंदा
- B.के. सी. नियोगी
- C.के. संथानम
- D.पी. वी. राजमन्नार
सही उत्तर
B. के. सी. नियोगी
व्याख्या
सही उत्तर है B, के. सी. नियोगी। क्षितिश चंद्र नियोगी पहले वित्त आयोग के अध्यक्ष थे, जिसे राष्ट्रपति ने नवंबर 1951 में गठित किया और जिसने 1952 में 1952 से 1957 की अवधि के लिए रिपोर्ट दी। वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के तहत एक संवैधानिक निकाय है। यह हर पाँच वर्ष में, या ज़रूरत हो तो पहले, एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों के साथ बनता है, और सुझाव देता है कि केंद्र द्वारा वसूले गए करों का राज्यों के साथ बँटवारा कैसे हो और सहायता अनुदान कैसे दिए जाएँ। इसके सदस्यों की योग्यताएँ वित्त आयोग (विविध उपबंध) अधिनियम, 1951 में तय हैं। नियोगी पहले संविधान सभा के सदस्य और नेहरू के पहले मंत्रिमंडल में मंत्री रहे थे। A गलत है क्योंकि अशोक कुमार चंदा तीसरे वित्त आयोग के अध्यक्ष थे। C गलत है क्योंकि के. संथानम दूसरे वित्त आयोग के अध्यक्ष थे। D गलत है क्योंकि पी. वी. राजमन्नार चौथे वित्त आयोग के अध्यक्ष थे। परीक्षा टिप: पहले चार अध्यक्ष क्रम से नियोगी, संथानम, चंदा, राजमन्नार; वित्त आयोग का अनुच्छेद 280 है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंबाज़ार मूल्य पर GNP को किस प्रकार मापा जाता है?
- A.बाज़ार मूल्य पर GDP − मूल्यह्रास
- B.बाज़ार मूल्य पर GNP + सब्सिडी
- C.बाज़ार मूल्य पर GDP + विदेश से शुद्ध कारक आय
- D.कारक लागत पर NDP + विदेश से शुद्ध कारक आय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बाज़ार मूल्य पर GDP + विदेश से शुद्ध कारक आय
व्याख्या
सही उत्तर है C, बाज़ार मूल्य पर GDP + विदेश से शुद्ध कारक आय। GDP देश की सीमा के भीतर हुए सारे उत्पादन को गिनता है, चाहे उत्पादन कोई भी करे। GNP देश के सामान्य निवासियों द्वारा किए गए उत्पादन को गिनता है, वे जहाँ भी काम करें। इसलिए GDP से GNP पर जाने के लिए हम अपने निवासियों की विदेश में कमाई जोड़ते हैं और भारत में विदेशियों की कमाई घटाते हैं; इस शुद्ध राशि को विदेश से शुद्ध कारक आय (NFIA) कहते हैं। अगर NFIA ऋणात्मक हो, तो GNP, GDP से छोटा होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि बाज़ार मूल्य पर GDP में से मूल्यह्रास घटाने पर बाज़ार मूल्य पर NDP मिलता है, GNP नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें GNP को उसी से परिभाषित किया गया है, और सब्सिडी जोड़ना बाज़ार मूल्य से कारक लागत पर जाने का कदम है, GNP निकालने का नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि कारक लागत पर NDP में NFIA जोड़ने से कारक लागत पर NNP मिलता है, जो राष्ट्रीय आय है। परीक्षा टिप: घरेलू से राष्ट्रीय के लिए NFIA जोड़ें, सकल से शुद्ध के लिए मूल्यह्रास घटाएँ, बाज़ार मूल्य से कारक लागत के लिए अप्रत्यक्ष कर घटाएँ और सब्सिडी जोड़ें।
निम्नलिखित में से मुद्रा के किस माप को समग्र मौद्रिक संसाधन भी कहा जाता है?
- A.M2
- B.M3
- C.M4
- D.M1
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. M3
व्याख्या
सही उत्तर है B, M3। M3 को व्यापक मुद्रा या समग्र मौद्रिक संसाधन कहा जाता है। यह M1 में बैंकों के पास जनता की सावधि जमाओं को जोड़कर बनता है, इसलिए अर्थव्यवस्था में उपलब्ध लगभग सारे पैसे को मापता है। भारतीय रिज़र्व बैंक 1977 में शुरू किए गए चार माप, M1 से M4, इस्तेमाल करता है, और मुद्रा आपूर्ति पर नज़र रखने के लिए सबसे ज़्यादा M3 का ही प्रयोग होता है। M1 से M4 की ओर बढ़ने पर तरलता घटती जाती है, क्योंकि सावधि जमा और डाकघर जमा नकदी जितनी जल्दी खर्च नहीं की जा सकतीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि M2 में M1 के साथ डाकघर बचत बैंकों की बचत जमाएँ जुड़ती हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि M4 में M3 के साथ डाकघर की कुल जमाएँ जुड़ती हैं, राष्ट्रीय बचत पत्रों को छोड़कर। विकल्प D गलत है, क्योंकि M1 संकीर्ण मुद्रा है: जनता के पास करेंसी, बैंकों की माँग जमाएँ और RBI के पास अन्य जमाएँ। परीक्षा टिप: M1 संकीर्ण मुद्रा है और M3 व्यापक मुद्रा या समग्र मौद्रिक संसाधन; M1 सबसे तरल है और M4 सबसे कम।
1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दौरान निम्नलिखित में से किस बैंक का राष्ट्रीयकरण नहीं किया गया था?
- A.केनरा बैंक
- B.SBI
- C.यूको बैंक
- D.बैंक ऑफ़ बड़ौदा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. SBI
व्याख्या
सही उत्तर है B, SBI। भारतीय स्टेट बैंक 1969 के राष्ट्रीयकरण में शामिल नहीं था, क्योंकि वह पहले से ही सरकारी बैंक था। अखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण समिति की सिफ़ारिश पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया अधिनियम के तहत इम्पीरियल बैंक ऑफ़ इंडिया को अपने हाथ में लेकर 1 जुलाई 1955 को SBI बनाया गया था। 19 जुलाई 1969 को इंदिरा गांधी सरकार ने 14 बड़े व्यावसायिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, जिनमें से हर एक की जमा राशि ₹50 करोड़ से अधिक थी। 1980 में छह और बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि केनरा बैंक 1969 में राष्ट्रीयकृत 14 बैंकों में से एक था। विकल्प C गलत है, क्योंकि यूको बैंक, जिसका तब नाम यूनाइटेड कमर्शियल बैंक था, भी 1969 की सूची में था। विकल्प D गलत है, क्योंकि बैंक ऑफ़ बड़ौदा का भी 1969 में ही राष्ट्रीयकरण हुआ। परीक्षा टिप: इम्पीरियल बैंक 1955 में SBI बना; 1969 में 14 और 1980 में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ; स्वयं RBI का राष्ट्रीयकरण 1949 में हुआ।
भारत में 1991 के बाद शुरू हुए वित्तीय क्षेत्र के सुधारों से निम्न में से कौन सा सम्बन्धित नहीं है?
- A.पूँजी पर्याप्तता
- B.गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ
- C.एफ. आर. बी. एम. अधिनियम (फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट)
- D.सरफेसी अधिनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एफ. आर. बी. एम. अधिनियम (फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट)
व्याख्या
सही उत्तर है C, एफ. आर. बी. एम. अधिनियम। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 एक राजकोषीय सुधार है: यह केंद्र सरकार को राजकोषीय और राजस्व घाटा घटाने तथा अपने उधार की जानकारी देने के लिए बाध्य करता है। इसका संबंध सरकार के बजट से है, बैंकों और वित्तीय बाज़ारों से नहीं। 1991 के बाद वित्तीय क्षेत्र के सुधार वित्तीय प्रणाली पर नरसिंहम समिति से शुरू हुए, जिसने बैंकिंग के ठोस नियम माँगे। बैंकों को अपनी जोखिम वाली परिसम्पत्तियों के अनुपात में पूँजी रखनी पड़ी, यानी बेसल मानकों पर आधारित पूँजी पर्याप्तता अनुपात, और डूबते कर्ज़ों को छिपाने के बजाय ईमानदारी से गैर-निष्पादित परिसम्पत्ति (NPA) के रूप में दिखाना पड़ा। विकल्प A गलत है, क्योंकि पूँजी पर्याप्तता मानक बैंकिंग सुधार का मुख्य हिस्सा थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि NPA के स्पष्ट नियम भी इसी सुधार का भाग थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि सरफेसी अधिनियम, 2002 बैंकों को अदालत गए बिना चूककर्ता की गिरवी संपत्ति ज़ब्त कर बेचने देता है, जो डूबे कर्ज़ वसूलने का बड़ा कदम था। परीक्षा टिप: बैंकिंग सुधार = पूँजी पर्याप्तता, NPA मानक, सरफेसी; FRBM = सरकार का राजकोषीय अनुशासन।
मुद्रास्फीति के सन्दर्भ में निम्न कथनों पर ध्यान दीजिये:
कथन (A): हैडलाइन मुद्रास्फीति उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में परिवर्तन की दर को संदर्भित करती है, जो एक विशिष्ट परिवार द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की एक मानक टोकरी की औसत कीमत का माप है।
कथन (B): कोर मुद्रास्फीति उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से अस्थिर मूल्य वाली कुछ वस्तुओं जैसे खाद्य और ईंधन को बाहर करने के बाद औसत उपभोक्ता कीमतों में बदलाव को मापती है।
इन कथनों में से
- A.न तो (A) और न ही (B) सही है।
- B.(A) और (B) दोनों सही हैं।
- C.केवल (B) सही है।
- D.केवल (A) सही है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. (A) और (B) दोनों सही हैं।
व्याख्या
सही उत्तर है B, (A) और (B) दोनों सही हैं। हैडलाइन मुद्रास्फीति पूरे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बदलाव है, जो एक सामान्य परिवार द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की तय टोकरी, जैसे भोजन, ईंधन, कपड़े, आवास और सेवाओं, की औसत कीमत पर नज़र रखता है। कोर मुद्रास्फीति उन वस्तुओं को हटा देती है जिनकी कीमतें सबसे अधिक ऊपर-नीचे होती हैं, मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन, ताकि कीमतों का असली रुझान दिखे। नीति के लिए यह अंतर अहम है: खराब मानसून के बाद सब्ज़ियों के दाम का उछाल कुछ महीनों में उतर सकता है, पर कोर मुद्रास्फीति का लगातार बढ़ना केंद्रीय बैंक को बताता है कि महँगाई का दबाव पूरी अर्थव्यवस्था में फैल गया है। इसीलिए रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति दोनों आँकड़ों पर नज़र रखती है। भारत में अखिल भारतीय CPI हर महीने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय तैयार करता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि दोनों कथन सही परिभाषाएँ हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि कथन A भी सही है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कथन B भी सही है। परीक्षा टिप: हैडलाइन = पूरी टोकरी; कोर = टोकरी में से खाद्य और ईंधन हटाकर।