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GK क्विजभारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था क्विज: कृषि अर्थव्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य

  • 12 प्रश्न
  • 12 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय अर्थव्यवस्था के अंतर्गत "कृषि अर्थव्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य" विषय पर यह क्विज़ 12 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 3 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

12 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · 19 Feb 2019मध्यम

भारत सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अंतर्गत आने वाली फसलों की कुल संख्या कितनी है?

  1. A.20
  2. B.22
  3. C.24
  4. D.18
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 22

व्याख्या

सही उत्तर B, 22 है। भारत सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिश पर बाईस अधिदेशित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। इनमें अनाज, दालें, तिलहन तथा खोपरा, कच्ची कपास और कच्चे जूट जैसी व्यापारिक फसलें आती हैं। गन्ना इस सूची से बाहर रखा गया है और उसके लिए उचित तथा लाभकारी मूल्य अलग से तय होता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि बीस अधिदेशित सूची से कम है और किसी सरकारी वर्गीकरण से मेल नहीं खाता। विकल्प C गलत है क्योंकि चौबीस उन परीक्षार्थियों की पसंद बनता है जो गन्ने तथा एक दो गौण फसलों को भी इस सूची में गिन लेते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि अठारह बहुत कम है; केवल दालें और तिलहन मिलकर बाईस में से दस से अधिक हो जाते हैं। याद रखने योग्य आंकड़ा है बाईस अधिदेशित फसलें और गन्ने के लिए अलग एफआरपी।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 15 Oct 2018, Shift 3आसान

टीपीडीएस का पूरा रूप क्या है?

  1. A.टोटल पॉपुलेशन डिस्ट्रिब्यूटेड इन स्टेट्स
  2. B.टोटल पब्लिक डाइवर्स सोसाइटी
  3. C.टारगेट पीपल डेवलपमेंट सिस्टम
  4. D.टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम

व्याख्या

सही उत्तर D, टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम अर्थात लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को 1997 में लक्षित बनाया गया, जब परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर और नीचे वाले वर्गों में बांटकर सहायता गरीब वर्ग पर केंद्रित की गई। केंद्रीय पूल का अनाज, जिसे मुख्यतः भारतीय खाद्य निगम खरीदता है, राज्यों को दिया जाता है और इसी प्रणाली के अंतर्गत उचित दर दुकानों से बेचा जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि वह जनसंख्या के फैलाव से जुड़ा गढ़ा हुआ वाक्यांश है और खाद्य नीति में उसका कोई स्थान नहीं। विकल्प B इसी कारण गलत है; वह खाद्य सहायता के प्रशासन में किसी बात का वर्णन नहीं करता। विकल्प C गलत है क्योंकि लक्ष्य शब्द उधार लेने पर भी इस नाम की कोई योजना नहीं है; उस काल के विकास कार्यक्रम एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम और उसके उत्तरवर्ती थे।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 20 April 2022, Shift 2कठिन

विपणन वर्ष 2021-22 के लिए जौ की उत्पादन लागत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से किसानों को अपेक्षित प्रतिफल कितना आंका गया था?

  1. A.65%
  2. B.93%
  3. C.50%
  4. D.106%
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 65%

व्याख्या

सही उत्तर A, 65 प्रतिशत है। जब सरकार ने विपणन वर्ष 2021-22 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए, तब उसने हर कीमत का ए2 और एफएल उत्पादन लागत पर लाभ भी प्रकाशित किया। जौ के लिए यह लाभ लगभग पैंसठ प्रतिशत निकला, जो घोषित न्यूनतम पचास प्रतिशत अर्थात लागत के डेढ़ गुना से अच्छा खासा ऊपर है।

विकल्प B गलत है क्योंकि इसी घोषणा में तिरानवे प्रतिशत गेहूं का लाभ था, और ये दोनों आंकड़े प्रायः आपस में बदल दिए जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि पचास प्रतिशत वह न्यूनतम है जिसका नीति वचन देती है, जौ के लिए आंका गया आंकड़ा नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि उस वर्ष किसी भी रबी फसल पर सौ प्रतिशत से अधिक लाभ नहीं था। याद रखने योग्य बात यह है कि यह लाभ ए2 और एफएल लागत पर मापा जाता है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

भारत में कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश कौन सी संस्था करती है?

  1. A.भारतीय खाद्य निगम
  2. B.कृषि लागत एवं मूल्य आयोग
  3. C.नीति आयोग
  4. D.भारतीय रिजर्व बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग

व्याख्या

सही उत्तर B, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग है। जनवरी 1965 में कृषि मूल्य आयोग के रूप में बना और 1985 में नाम बदलकर रखा गया यह आयोग कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है। वह उत्पादन लागत, मांग और आपूर्ति, कीमतों की प्रवृत्ति तथा व्यापार शर्तों का अध्ययन करके हर अधिदेशित फसल के लिए कीमत की सिफारिश करता है, जिसे आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति स्वीकृति देती है।

विकल्प A गलत है क्योंकि भारतीय खाद्य निगम घोषित कीमत पर खरीद करता है पर कीमत तय करने में उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि नीति आयोग नीति विषयक विचार संस्था है, जिसे मूल्य निर्धारण में कोई वैधानिक भूमिका नहीं मिली। विकल्प D गलत है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक प्राधिकरण है और ब्याज दर तथा मुद्रा देखता है, फसल की कीमत नहीं।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

सीएसीपी द्वारा प्रयुक्त कौन सी लागत अवधारणा में स्वयं की भूमि का किराया मूल्य तथा स्वयं की स्थिर पूंजी पर ब्याज सम्मिलित होता है?

  1. A.ए2
  2. B.ए2 और एफएल
  3. C.सी2
  4. D.बी1
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सी2

व्याख्या

सही उत्तर C, सी2 है। सी2 लागत आयोग की सभी मापों में सबसे व्यापक है। वह पहले चुकाई गई सब लागत लेती है, उसमें अवैतनिक परिवार श्रम का आरोपित मूल्य जोड़ती है, और फिर दो ऐसी बातें जोड़ती है जिन्हें किसान वास्तव में कभी नहीं चुकाता: उसकी अपनी भूमि से जो किराया मिल सकता था और उसकी स्थिर पूंजी में लगे धन पर जो ब्याज मिल सकता था।

विकल्प A गलत है क्योंकि ए2 में केवल वह लागत आती है जो नकद या वस्तु रूप में वास्तव में चुकाई जाती है, जैसे बीज, उर्वरक, मजदूरी, ईंधन और सिंचाई शुल्क। विकल्प B गलत है क्योंकि ए2 और एफएल परिवार श्रम जोड़कर रुक जाता है और स्वयं की भूमि या पूंजी को नहीं छूता; फिर भी वही डेढ़ गुना सूत्र का आधार है। विकल्प D गलत है क्योंकि बी1 इस श्रृंखला की मध्यवर्ती लागत है, प्रश्न में वर्णित व्यापक माप नहीं।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

2018 में घोषित उस नीति का आधार कौन सी लागत है जिसमें एमएसपी उत्पादन लागत के डेढ़ गुना से कम नहीं रखा जाता?

  1. A.ए2
  2. B.ए2 और एफएल
  3. C.सी2
  4. D.सी3
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ए2 और एफएल

व्याख्या

सही उत्तर B, ए2 और एफएल है। 2018 के केंद्रीय बजट में घोषित हुआ कि न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर रखा जाएगा, और इस गणना के लिए ली जाने वाली लागत ए2 और एफएल है, अर्थात सब चुकाए गए व्यय के साथ अवैतनिक परिवार श्रम का आरोपित मूल्य।

विकल्प A गलत है क्योंकि केवल ए2 लेने से किसान के अपने परिवार का श्रम छूट जाता, जो वास्तविक लागत का बड़ा भाग है। विकल्प C गलत है क्योंकि सी2 वह आधार है जिसकी सिफारिश स्वामीनाथन आयोग ने की थी, और इन दोनों आधारों का अंतर ही इस प्रश्न को पूछने योग्य बनाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सी3 सी2 पर एक और वृद्धि है जो कुछ विश्लेषण कार्यों में प्रयुक्त होती है और घोषित सूत्र में उसकी कोई भूमिका नहीं।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारतीय खाद्य निगम की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

  1. A.1955
  2. B.1965
  3. C.1975
  4. D.1982
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1965

व्याख्या

सही उत्तर B, 1965 है। भारतीय खाद्य निगम 1964 के खाद्य निगम अधिनियम के अंतर्गत 1965 में, गंभीर खाद्य संकट के समय स्थापित हुआ, जिसका काम खाद्यान्न खरीदना, बफर स्टॉक रखना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से अनाज बांटना तथा किसान और उपभोक्ता दोनों के लिए कीमतें स्थिर रखना है। कृषि मूल्य आयोग भी इसी वर्ष बना था।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1955 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया भारतीय स्टेट बैंक बना, खाद्य निगम नहीं बना। विकल्प C गलत है क्योंकि 1975 में बीस सूत्री कार्यक्रम आरंभ हुआ और उसका निगम से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1982 में नाबार्ड ग्रामीण ऋण की शीर्ष संस्था के रूप में बना, और इस प्रश्न में सबसे अधिक भ्रम इसी से होता है।

यह भी याद रखें कि भारतीय खाद्य निगम का मुख्यालय नई दिल्ली में है और उसकी खरीद केंद्रीय पूल में जाती है, जिससे लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए राज्यों को अनाज दिया जाता है।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

दालों और तिलहनों का बाजार भाव एमएसपी से नीचे गिरने पर उनकी खरीद किस योजना के अंतर्गत होती है?

  1. A.बाजार हस्तक्षेप योजना
  2. B.मूल्य समर्थन योजना
  3. C.मूल्य अंतर भुगतान योजना
  4. D.खुला बाजार बिक्री योजना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मूल्य समर्थन योजना

व्याख्या

सही उत्तर B, मूल्य समर्थन योजना है। इसके अंतर्गत केंद्रीय नोडल एजेंसियां, मुख्यतः नैफेड, मंडियों में भाव उस स्तर से नीचे जाने पर दालें, तिलहन और खोपरा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती हैं, और हानि सरकार उठाती है। जिन फसलों को भारतीय खाद्य निगम नहीं देखता, उनके लिए यही एमएसपी व्यवस्था की खरीद शाखा है।

विकल्प A गलत है क्योंकि बाजार हस्तक्षेप योजना प्याज, आलू, सेब और अंगूर जैसी शीघ्र नष्ट होने वाली बागवानी फसलों के लिए है, जिनका एमएसपी होता ही नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मूल्य अंतर भुगतान में फसल खरीदने के स्थान पर किसान को अंतर नकद दिया जाता है, और वह कुछ राज्यों की योजनाओं में चलता है, केंद्र की खरीद व्यवस्था के रूप में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि खुला बाजार बिक्री योजना भंडार बेचने की है, खरीदने की नहीं।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारतीय कृषि में उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) किस फसल पर लागू होता है?

  1. A.गेहूं
  2. B.गन्ना
  3. C.कपास
  4. D.जूट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. गन्ना

व्याख्या

सही उत्तर B, गन्ना है। उचित और लाभकारी मूल्य वह न्यूनतम कीमत है जो चीनी मिल को गन्ना उत्पादक को कानूनन देनी ही होती है, और इसे केंद्र सरकार गन्ना नियंत्रण आदेश के अंतर्गत सीएसीपी की सिफारिश पर तय करती है। चूंकि यह बाध्यता मिल पर पड़ती है, किसी सरकारी एजेंसी पर नहीं, इसलिए गन्ना सामान्य एमएसपी वाली बाईस फसलों से अलग रखा जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि गेहूं अधिदेशित एमएसपी फसल है जिसे भारतीय खाद्य निगम खरीदता है। विकल्प C गलत है क्योंकि कच्ची कपास का एमएसपी होता है और उसे भारतीय कपास निगम खरीदता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कच्चे जूट का भी एमएसपी होता है, जिसकी खरीद एजेंसी भारतीय जूट निगम है। केवल गन्ने पर एफआरपी लागू है, और कुछ राज्य उससे ऊपर राज्य परामर्शित मूल्य भी घोषित करते हैं।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार अर्थात ई-नाम किस वर्ष आरंभ किया गया था?

  1. A.2014
  2. B.2015
  3. C.2016
  4. D.2018
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2016

व्याख्या

सही उत्तर C, 2016 है। ई-नाम 14 अप्रैल 2016 को, डॉ. बी. आर. आंबेडकर की जयंती पर आरंभ हुआ, जो राज्यों की नियंत्रित मंडियों को एक राष्ट्रीय बाजार में जोड़ने वाला ऑनलाइन व्यापार मंच है। इसमें खरीदार गुणवत्ता जांच रिपोर्ट देखकर किसी लॉट के लिए बोली लगा सकता है, जिससे किसान केवल स्थानीय मंडी में उपस्थित व्यापारियों तक सीमित नहीं रहता।

विकल्प A गलत है क्योंकि 2014 में वर्ष के अंत में नीति आयोग बना और कोई कृषि बाजार मंच नहीं आया। विकल्प B गलत है क्योंकि 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना आरंभ हुई, जिसे प्रायः ई-नाम से मिला दिया जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2018 में एमएसपी के डेढ़ गुना की घोषणा और आदर्श संविदा खेती कानून आया, ई-नाम नहीं।

इसके साथ यह तथ्य भी पूछा जाता है कि ई-नाम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की योजना है और उसे लघु किसान कृषि व्यापार संघ अर्थात एसएफएसी लागू करता है।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

कृषि गणना के वर्गीकरण के अनुसार एक हेक्टेयर से कम की जोत को क्या कहा जाता है?

  1. A.लघु
  2. B.सीमांत
  3. C.अर्ध मध्यम
  4. D.मध्यम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सीमांत

व्याख्या

सही उत्तर B, सीमांत है। कृषि गणना परिचालन जोतों को आकार के अनुसार बांटती है: एक हेक्टेयर से कम सीमांत, एक से दो हेक्टेयर लघु, दो से चार अर्ध मध्यम, चार से दस मध्यम और दस हेक्टेयर से अधिक बड़ी। सीमांत और लघु वर्ग मिलकर भारत की जोतों का अत्यधिक बहुमत बनाते हैं, इसीलिए जोतों का बिखराव भारतीय कृषि की संरचनात्मक समस्या माना जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि लघु एक से दो हेक्टेयर वर्ग है, जो सीमांत से एक सीढ़ी ऊपर है। विकल्प C गलत है क्योंकि अर्ध मध्यम दो से चार हेक्टेयर तक है। विकल्प D गलत है क्योंकि मध्यम चार से दस हेक्टेयर तक है। प्रश्नपत्र इन वर्गों को उलट पुलट क्रम में देते हैं, इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका एक, दो, चार और दस हेक्टेयर की सीमाएं क्रम से याद रखना है।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

भारत में ग्रामीण ऋण की शीर्ष संस्था नाबार्ड की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

  1. A.1969
  2. B.1975
  3. C.1982
  4. D.1991
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1982

व्याख्या

सही उत्तर C, 1982 है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक शिवरामन समिति की सिफारिश पर 12 जुलाई 1982 को स्थापित हुआ और उसने वे पुनर्वित्त कार्य संभाले जो पहले भारतीय रिजर्व बैंक तथा कृषि पुनर्वित्त और विकास निगम करते थे। वह किसानों को सीधे ऋण देने के स्थान पर सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त देता है, और उसका मुख्यालय मुंबई में है।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1969 में चौदह बड़े व्यापारिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ और अग्रणी बैंक योजना आरंभ हुई। विकल्प B गलत है क्योंकि 1975 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक बने, जिनकी देखरेख बाद में नाबार्ड के पास आई। विकल्प D गलत है क्योंकि 1991 आर्थिक उदारीकरण तथा वित्तीय व्यवस्था पर नरसिम्हम समिति का वर्ष है, नाबार्ड की स्थापना का नहीं।

यह भी ध्यान रखें कि कृषि बैंकों के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का एक घटक है, जिसके अंतर्गत बैंकों को अपने ऋण का एक निश्चित भाग इस क्षेत्र को देना होता है।

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