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GK24
भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

दालों और तिलहनों का बाजार भाव एमएसपी से नीचे गिरने पर उनकी खरीद किस योजना के अंतर्गत होती है?

  1. A.बाजार हस्तक्षेप योजना
  2. B.मूल्य समर्थन योजना
  3. C.मूल्य अंतर भुगतान योजना
  4. D.खुला बाजार बिक्री योजना

सही उत्तर

B. मूल्य समर्थन योजना

व्याख्या

सही उत्तर B, मूल्य समर्थन योजना है। इसके अंतर्गत केंद्रीय नोडल एजेंसियां, मुख्यतः नैफेड, मंडियों में भाव उस स्तर से नीचे जाने पर दालें, तिलहन और खोपरा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती हैं, और हानि सरकार उठाती है। जिन फसलों को भारतीय खाद्य निगम नहीं देखता, उनके लिए यही एमएसपी व्यवस्था की खरीद शाखा है।

विकल्प A गलत है क्योंकि बाजार हस्तक्षेप योजना प्याज, आलू, सेब और अंगूर जैसी शीघ्र नष्ट होने वाली बागवानी फसलों के लिए है, जिनका एमएसपी होता ही नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मूल्य अंतर भुगतान में फसल खरीदने के स्थान पर किसान को अंतर नकद दिया जाता है, और वह कुछ राज्यों की योजनाओं में चलता है, केंद्र की खरीद व्यवस्था के रूप में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि खुला बाजार बिक्री योजना भंडार बेचने की है, खरीदने की नहीं।

पूरा लेख पढ़ें: कृषि अर्थव्यवस्था और एमएसपी: सीएसीपी, लागत और खरीद

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Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · 19 Feb 2019मध्यम

भारत सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अंतर्गत आने वाली फसलों की कुल संख्या कितनी है?

  1. A.20
  2. B.22
  3. C.24
  4. D.18
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 22

व्याख्या

सही उत्तर B, 22 है। भारत सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिश पर बाईस अधिदेशित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। इनमें अनाज, दालें, तिलहन तथा खोपरा, कच्ची कपास और कच्चे जूट जैसी व्यापारिक फसलें आती हैं। गन्ना इस सूची से बाहर रखा गया है और उसके लिए उचित तथा लाभकारी मूल्य अलग से तय होता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि बीस अधिदेशित सूची से कम है और किसी सरकारी वर्गीकरण से मेल नहीं खाता। विकल्प C गलत है क्योंकि चौबीस उन परीक्षार्थियों की पसंद बनता है जो गन्ने तथा एक दो गौण फसलों को भी इस सूची में गिन लेते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि अठारह बहुत कम है; केवल दालें और तिलहन मिलकर बाईस में से दस से अधिक हो जाते हैं। याद रखने योग्य आंकड़ा है बाईस अधिदेशित फसलें और गन्ने के लिए अलग एफआरपी।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 15 Oct 2018, Shift 3आसान

टीपीडीएस का पूरा रूप क्या है?

  1. A.टोटल पॉपुलेशन डिस्ट्रिब्यूटेड इन स्टेट्स
  2. B.टोटल पब्लिक डाइवर्स सोसाइटी
  3. C.टारगेट पीपल डेवलपमेंट सिस्टम
  4. D.टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम

व्याख्या

सही उत्तर D, टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम अर्थात लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को 1997 में लक्षित बनाया गया, जब परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर और नीचे वाले वर्गों में बांटकर सहायता गरीब वर्ग पर केंद्रित की गई। केंद्रीय पूल का अनाज, जिसे मुख्यतः भारतीय खाद्य निगम खरीदता है, राज्यों को दिया जाता है और इसी प्रणाली के अंतर्गत उचित दर दुकानों से बेचा जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि वह जनसंख्या के फैलाव से जुड़ा गढ़ा हुआ वाक्यांश है और खाद्य नीति में उसका कोई स्थान नहीं। विकल्प B इसी कारण गलत है; वह खाद्य सहायता के प्रशासन में किसी बात का वर्णन नहीं करता। विकल्प C गलत है क्योंकि लक्ष्य शब्द उधार लेने पर भी इस नाम की कोई योजना नहीं है; उस काल के विकास कार्यक्रम एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम और उसके उत्तरवर्ती थे।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 20 April 2022, Shift 2कठिन

विपणन वर्ष 2021-22 के लिए जौ की उत्पादन लागत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से किसानों को अपेक्षित प्रतिफल कितना आंका गया था?

  1. A.65%
  2. B.93%
  3. C.50%
  4. D.106%
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 65%

व्याख्या

सही उत्तर A, 65 प्रतिशत है। जब सरकार ने विपणन वर्ष 2021-22 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए, तब उसने हर कीमत का ए2 और एफएल उत्पादन लागत पर लाभ भी प्रकाशित किया। जौ के लिए यह लाभ लगभग पैंसठ प्रतिशत निकला, जो घोषित न्यूनतम पचास प्रतिशत अर्थात लागत के डेढ़ गुना से अच्छा खासा ऊपर है।

विकल्प B गलत है क्योंकि इसी घोषणा में तिरानवे प्रतिशत गेहूं का लाभ था, और ये दोनों आंकड़े प्रायः आपस में बदल दिए जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि पचास प्रतिशत वह न्यूनतम है जिसका नीति वचन देती है, जौ के लिए आंका गया आंकड़ा नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि उस वर्ष किसी भी रबी फसल पर सौ प्रतिशत से अधिक लाभ नहीं था। याद रखने योग्य बात यह है कि यह लाभ ए2 और एफएल लागत पर मापा जाता है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

भारत में कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश कौन सी संस्था करती है?

  1. A.भारतीय खाद्य निगम
  2. B.कृषि लागत एवं मूल्य आयोग
  3. C.नीति आयोग
  4. D.भारतीय रिजर्व बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग

व्याख्या

सही उत्तर B, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग है। जनवरी 1965 में कृषि मूल्य आयोग के रूप में बना और 1985 में नाम बदलकर रखा गया यह आयोग कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है। वह उत्पादन लागत, मांग और आपूर्ति, कीमतों की प्रवृत्ति तथा व्यापार शर्तों का अध्ययन करके हर अधिदेशित फसल के लिए कीमत की सिफारिश करता है, जिसे आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति स्वीकृति देती है।

विकल्प A गलत है क्योंकि भारतीय खाद्य निगम घोषित कीमत पर खरीद करता है पर कीमत तय करने में उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि नीति आयोग नीति विषयक विचार संस्था है, जिसे मूल्य निर्धारण में कोई वैधानिक भूमिका नहीं मिली। विकल्प D गलत है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक प्राधिकरण है और ब्याज दर तथा मुद्रा देखता है, फसल की कीमत नहीं।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

सीएसीपी द्वारा प्रयुक्त कौन सी लागत अवधारणा में स्वयं की भूमि का किराया मूल्य तथा स्वयं की स्थिर पूंजी पर ब्याज सम्मिलित होता है?

  1. A.ए2
  2. B.ए2 और एफएल
  3. C.सी2
  4. D.बी1
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सी2

व्याख्या

सही उत्तर C, सी2 है। सी2 लागत आयोग की सभी मापों में सबसे व्यापक है। वह पहले चुकाई गई सब लागत लेती है, उसमें अवैतनिक परिवार श्रम का आरोपित मूल्य जोड़ती है, और फिर दो ऐसी बातें जोड़ती है जिन्हें किसान वास्तव में कभी नहीं चुकाता: उसकी अपनी भूमि से जो किराया मिल सकता था और उसकी स्थिर पूंजी में लगे धन पर जो ब्याज मिल सकता था।

विकल्प A गलत है क्योंकि ए2 में केवल वह लागत आती है जो नकद या वस्तु रूप में वास्तव में चुकाई जाती है, जैसे बीज, उर्वरक, मजदूरी, ईंधन और सिंचाई शुल्क। विकल्प B गलत है क्योंकि ए2 और एफएल परिवार श्रम जोड़कर रुक जाता है और स्वयं की भूमि या पूंजी को नहीं छूता; फिर भी वही डेढ़ गुना सूत्र का आधार है। विकल्प D गलत है क्योंकि बी1 इस श्रृंखला की मध्यवर्ती लागत है, प्रश्न में वर्णित व्यापक माप नहीं।