उस मात्रा को क्या कहते हैं, जिससे वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद का संतुलन स्तर, सकल घरेलू उत्पाद के पूर्ण रोजगार स्तर से अधिक हो जाता है?
- A.मंदी अंतराल
- B.मुद्रास्फीति अंतराल
- C.आय गुणक
- D.आभ्यंतरिक स्थिरक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मुद्रास्फीति अंतराल
व्याख्या
सही उत्तर है B, मुद्रास्फीति अंतराल। जब मांग अर्थव्यवस्था से पूर्ण रोज़गार की क्षमता से ज़्यादा उत्पादन करवाना चाहती है, तो अतिरिक्त मांग केवल कीमतें बढ़ाती है। पूर्ण रोज़गार GDP, जिसे संभावित GDP भी कहते हैं, वह उत्पादन है जो सभी संसाधनों के उपयोग से हो सकता है। अगर कुल मांग इतनी अधिक हो कि संतुलन वास्तविक GDP इस स्तर से ऊपर चला जाए, तो यह अंतर मुद्रास्फीति अंतराल है। क्षमता से आगे वास्तविक उत्पादन नहीं बढ़ सकता, इसलिए यह अधिकता बढ़ती कीमतों के रूप में दिखती है। यह विचार जे.एम. कीन्स का है, जिन्होंने 1940 की पुस्तिका "हाउ टू पे फॉर द वॉर" में इसका प्रयोग किया; इसका इलाज ऊँचे कर, कम सरकारी खर्च या सख्त मौद्रिक नीति से मांग घटाना है। विकल्प A गलत है, क्योंकि मंदी अंतराल उलटी स्थिति है, जब संतुलन GDP पूर्ण रोज़गार स्तर से नीचे रहता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि आय गुणक बताता है कि नए खर्च के हर रुपये से आय कितनी बढ़ती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि स्वतः स्थिरक प्रगतिशील कर जैसे साधन हैं, जो इन अंतरालों को कम करते हैं। परीक्षा टिप: उत्पादन क्षमता से ऊपर हो तो मुद्रास्फीति अंतराल, नीचे हो तो मंदी अंतराल।