एक सामान्य पुष्प में अंकुरित परागकण बीजांड तक पहुँचने से पहले जायांग के कई भागों से होकर गुजरते हैं। जायांग के भागों की एक सूची नीचे विभिन्न संयोजनों में दी गई है। वह संयोजन चुनिए जो पराग नलिका के मार्ग/यात्रा के सही क्रम को दर्शाता है:
- A.वर्तिका, वर्तिकाग्र, अंडाशय
- B.वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय
- C.स्त्रीकेसर, वर्तिकाग्र, अंडाशय
- D.अंडाशय, स्त्रीकेसर, वर्तिका
उत्तर देखें
परागकण वर्तिकाग्र पर गिरता है, उससे पराग नलिका निकलती है जो वर्तिका से होकर नीचे बढ़ती है और अंडाशय में पहुँचकर बीजांड तक जाती है, जहाँ निषेचन होता है।
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