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टीडीबी ने स्वदेशी मल्टी गैस सेंसर को 37.51 करोड़ रुपये दिए

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने स्वदेशी मल्टी गैस सेंसिंग प्लेटफॉर्म के लिए मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज के साथ 37.51 करोड़ रुपये के आरडीआई समर्थन का करार किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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टीडीबी ने स्वदेशी मल्टी गैस सेंसर को 37.51 करोड़ रुपये दिए

चर्चा में क्यों

29 सितंबर 2026 को प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने नागपुर की मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ स्वदेशी एमईएमएस आधारित मल्टी गैस सेंसिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए आरडीआई कोष से 37.51 करोड़ रुपये की सहायता का करार किया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने नागपुर, महाराष्ट्र की मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया है, जिसके तहत अनुसंधान विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष से 37.51 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 75.02 करोड़ रुपये है और सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के माध्यम से मिलेगी।

क्या विकसित हो रहा है

कंपनी एक प्लेटफॉर्म एमईएमएस और एएफई एसओसी मल्टी गैस सेंसर विकसित कर रही है, जिसमें सूक्ष्म विद्युत यांत्रिक प्रणाली पर आधारित संवेदी तत्व को उस विशिष्ट फ्रंट एंड सिस्टम ऑन चिप के साथ जोड़ा जाता है जो संकेत ग्रहण और प्रसंस्करण करता है। परियोजना का लक्ष्य प्रौद्योगिकी को टीआरएल चार से टीआरएल नौ तक पहुंचाना है, अर्थात प्रयोगशाला में सत्यापित डिजाइन से लेकर तैनाती योग्य सिद्ध उत्पाद तक। कंपनी स्वदेशी एमईएमएस टीसीडीआईआर गैस सेंसर के साथ सीएमओएस एएफई एसओसी प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है, जिससे छोटे आकार में कई गैसों की भरोसेमंद पहचान हो सके।

डिजाइन के लक्ष्य

  • छोटे आकार में उच्च संवेदनशीलता के साथ कम बिजली खपत
  • तापमान की व्यापक सीमा और कठिन औद्योगिक परिस्थितियों में संचालन
  • स्वतः अंशशोधन, पर्यावरणीय मानकों की भरपाई तथा सॉफ्टवेयर आधारित गैस लाइब्रेरी प्रसंस्करण
  • तेज पहचान के लिए 200 मिलीसेकंड से कम प्रतिक्रिया समय
  • 25 मिलीमीटर गुणा 25 मिलीमीटर गुणा 15 मिलीमीटर से छोटा सेंसर पैकेज, जिससे बैटरी चालित और अंतर्निहित उपयोग संभव होगा

उपयोग के क्षेत्र

गैस की पहचान औद्योगिक सुरक्षा, हाइड्रोजन अवसंरचना, ऊर्जा प्रणालियों और प्रक्रिया निगरानी में महत्वपूर्ण है। यह प्लेटफॉर्म रिसाव की पहचान, प्रक्रिया नियंत्रण तथा स्वास्थ्य एवं सुरक्षा निगरानी के लिए बनाया जा रहा है, जिसके संभावित उपयोगकर्ता रिफाइनरी, पेट्रोरसायन, बिजली, पाइप से आने वाली प्राकृतिक गैस के नेटवर्क, औद्योगिक सुरक्षा, बैटरी और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था हैं। परियोजना डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र में आती है और इसका उपक्षेत्र क्वांटम प्रौद्योगिकी बताया गया है।

यह सहायता क्यों मायने रखती है

टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा कि सेंसर आधुनिक प्रौद्योगिकी प्रणालियों की नींव हैं और संवेदन तथा अर्धचालक प्रौद्योगिकी में स्वदेशी क्षमता औद्योगिक प्रतिस्पर्धा एवं सामरिक आत्मनिर्भरता दोनों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आरडीआई कोष उन प्रौद्योगिकियों के लिए है जिन्हें व्यापक व्यावसायिक उपयोग से पहले लंबे विकास की जरूरत होती है। कंपनी ने कहा कि इस सहायता से वह अपने एमईएमएस गैस संवेदन कार्य को एकीकरण, सत्यापन और विस्तार के अगले चरण तक ले जा सकेगी। चूंकि यह प्लेटफॉर्म एमईएमएस निर्माण, अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी और बुद्धिमान संवेदन को एक साथ लाता है, इसका महत्व गैस पहचान से आगे उन्नत सेंसर तथा चिप में भारत की समग्र क्षमता तक फैला है।

महत्वपूर्ण तथ्य

वित्तपोषक संस्थाप्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
कंपनीमल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर, महाराष्ट्र
टीडीबी सहायताआरडीआई कोष से 37.51 करोड़ रुपये
कुल परियोजना लागत75.02 करोड़ रुपये
सहायता का स्वरूपवैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण
प्रौद्योगिकीप्लेटफॉर्म एमईएमएस और एएफई एसओसी मल्टी गैस सेंसर
तैयारी स्तरटीआरएल चार से टीआरएल नौ तक
लक्षित प्रतिक्रिया समय200 मिलीसेकंड से कम
क्षेत्रडीप टेक्नोलॉजी, उपक्षेत्र क्वांटम प्रौद्योगिकी
टीडीबी सचिवश्री राजेश कुमार पाठक

परीक्षा की दृष्टि से

वित्तपोषक संस्था टीडीबी, कंपनी और शहर मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज तथा नागपुर, सहायता राशि 37.51 करोड़ रुपये, कुल लागत 75.02 करोड़ रुपये, सहायता का तरीका वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण, टीआरएल चार से नौ तक की छलांग और क्षेत्र डीप टेक्नोलॉजी याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने मल्टी गैस सेंसिंग प्लेटफॉर्म के लिए मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज को कितनी वित्तीय सहायता दी है?

  1. A.18.75 करोड़ रुपये
  2. B.37.51 करोड़ रुपये
  3. C.75.02 करोड़ रुपये
  4. D.150 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 37.51 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 37.51 करोड़ रुपये है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से यही राशि वित्तीय सहायता के रूप में देने का करार किया है और यह धनराशि वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में दी जाएगी। विकल्प ग परियोजना की कुल स्वीकृत लागत बताता है, जो सहायता राशि से लगभग दुगनी है, इसलिए वह सबसे भ्रमित करने वाला विकल्प है और अभ्यर्थियों को दोनों आंकड़े अलग अलग याद रखने चाहिए, बोर्ड लगभग आधा खर्च उठा रहा है और शेष कंपनी लगाएगी। विकल्प क और घ की राशियां इस करार से जुड़ी ही नहीं हैं। दोनों आंकड़े साथ याद रखें, क्योंकि प्रश्न किसी एक पर भी आ सकता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

टीडीबी समर्थित परियोजना मल्टी गैस सेंसर प्रौद्योगिकी को किन तैयारी स्तरों के बीच ले जाना चाहती है?

  1. A.टीआरएल एक से टीआरएल पांच
  2. B.टीआरएल दो से टीआरएल सात
  3. C.टीआरएल चार से टीआरएल नौ
  4. D.टीआरएल छह से टीआरएल नौ
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. टीआरएल चार से टीआरएल नौ

व्याख्या

सही उत्तर टीआरएल चार से टीआरएल नौ है। परियोजना का घोषित उद्देश्य प्लेटफॉर्म एमईएमएस और एएफई एसओसी मल्टी गैस सेंसर को टीआरएल चार से, जहां डिजाइन प्रयोगशाला परिवेश में सत्यापित हो चुका होता है, टीआरएल नौ तक पहुंचाना है, जहां प्रौद्योगिकी अपने वास्तविक परिचालन परिवेश में सिद्ध और तैनाती के लिए तैयार होती है। कार्यक्रम इसी हेतु आगे का विकास, एकीकरण, परीक्षण, सत्यापन तथा विस्तार वित्तपोषित करता है। विकल्प क तैनाती योग्य उत्पाद से बहुत पहले रुक जाता है। विकल्प ख बहुत पहले शुरू होकर बीच में ही समाप्त हो जाता है। विकल्प घ अंतिम स्तर सही बताता है पर प्रारंभिक स्तर गलत, इसलिए वह निकटतम भ्रम है। चूंकि प्रारंभ और अंत दोनों मिलने चाहिए, केवल विकल्प ग सही है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

टीडीबी के साथ करार करने वाली मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड किस शहर में स्थित है?

  1. A.पुणे
  2. B.नागपुर
  3. C.हैदराबाद
  4. D.बेंगलुरु
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नागपुर

व्याख्या

सही उत्तर नागपुर है। करार महाराष्ट्र के नागपुर स्थित मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ है, जो छोटे आकार में कई गैसों की पहचान के लिए स्वदेशी एमईएमएस टीसीडीआईआर गैस सेंसर तथा सीएमओएस फ्रंट एंड सिस्टम ऑन चिप प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। विकल्प क, पुणे, भी महाराष्ट्र में है और वहां इलेक्ट्रॉनिकी तथा अभियांत्रिकी उद्योग बड़ा है, इसलिए वह संभावित लगता है, परंतु कंपनी का आधार वहां नहीं है। विकल्प ग और घ, हैदराबाद और बेंगलुरु, डीप टेक्नोलॉजी तथा अर्धचालक डिजाइन के बड़े केंद्र हैं, अतः वे भी विश्वसनीय लगते हैं, फिर भी करार में उनका नाम नहीं है। शहर के साथ राज्य भी याद रखें, क्योंकि प्रश्न राज्य पर भी पूछा जाता है। कंपनी का यह प्लेटफॉर्म छोटे आकार में कई गैसों की भरोसेमंद पहचान संभव बनाने के लिए तैयार हो रहा है।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

टीडीबी की सहायता से विकसित हो रहे मल्टी गैस सेंसर प्लेटफॉर्म का लक्षित प्रतिक्रिया समय क्या है?

  1. A.20 मिलीसेकंड से कम
  2. B.200 मिलीसेकंड से कम
  3. C.2 सेकंड से कम
  4. D.20 सेकंड से कम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 200 मिलीसेकंड से कम

व्याख्या

सही उत्तर 200 मिलीसेकंड से कम है। यह प्लेटफॉर्म उच्च संवेदनशीलता, कम बिजली खपत, छोटे आकार और बुद्धिमान संकेत प्रसंस्करण के संयोजन पर बनाया जा रहा है, और इसके घोषित डिजाइन लक्ष्यों में 200 मिलीसेकंड से कम प्रतिक्रिया समय शामिल है, ताकि यह उन कार्यों के लिए उपयुक्त हो जहां तुरंत पहचान और निगरानी चाहिए, जैसे रिफाइनरी तथा पाइप से आने वाली प्राकृतिक गैस के नेटवर्क में रिसाव पकड़ना। विकल्प क दिए गए लक्ष्य से दस गुना तेज है और वह आंकड़ा नहीं है। विकल्प ग और घ बहुत धीमी प्रतिक्रिया बताते हैं, जो गैस रिसाव की तत्काल चेतावनी में उपयोगी नहीं होगी। सेंसर पैकेज का आकार अलग से 25 गुणा 25 गुणा 15 मिलीमीटर से छोटा रखा गया है, इसलिए आकार और समय के आंकड़े न मिलाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वदेशी मल्टी गैस सेंसर परियोजना के लिए टीडीबी ने कितनी सहायता दी है?

अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से 37.51 करोड़ रुपये, जो वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में मिलेंगे। परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 75.02 करोड़ रुपये है।

यह प्लेटफॉर्म कौन सी कंपनी बना रही है और कहां स्थित है?

मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, जो नागपुर, महाराष्ट्र में स्थित है। वह स्वदेशी एमईएमएस टीसीडीआईआर गैस सेंसर के साथ सीएमओएस फ्रंट एंड सिस्टम ऑन चिप प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है।

परियोजना किस तैयारी स्तर तक प्रौद्योगिकी को ले जाएगी?

परियोजना का लक्ष्य प्रौद्योगिकी को टीआरएल चार से टीआरएल नौ तक ले जाना है, अर्थात प्रयोगशाला में सत्यापित चरण से एकीकरण, परीक्षण, सत्यापन और विस्तार के जरिये बाजार के लिए तैयार सिद्ध उत्पाद तक।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS