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सोनोवाल की दक्षिण कोरिया यात्रा, जहाज निर्माण पर जोर

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बुसान से दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा शुरू की और जहाज निर्माण साझेदारी का प्रस्ताव रखा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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सोनोवाल की दक्षिण कोरिया यात्रा, जहाज निर्माण पर जोर

चर्चा में क्यों

25 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा शुरू की, बुसान में कोरियाई जहाज निर्माण में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों से मिले और कोरियाई उद्योग के सामने भारत के जहाज निर्माण अवसर रखे।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा शुरू की। उन्होंने यात्रा की शुरुआत बुसान से की, जिसे उन्होंने कोरिया के समुद्री उद्योग का केंद्र बताया। यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण में सहयोग बढ़ाना और भारत को 2047 तक दुनिया के पहले पांच जहाज निर्माण देशों में पहुंचाना है।

यात्रा की शुरुआत

बुसान में मंत्री ने कोरिया के जहाज निर्माण क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों से मुलाकात की। दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत गौरांगलाल दास ने इस सभा का स्वागत किया, जिसमें सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज, हानवा ओशन, एचडी हुंडई, डीएनवी और इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग से जुड़े लोग शामिल हुए। सोनोवाल ने कहा कि दुनिया के सबसे उन्नत जहाज निर्माण तंत्र में इन पेशेवरों की मौजूदगी भारत के लिए गर्व की बात है और उन्हें दोनों देशों के उद्योगों के बीच जीवंत पुल बनना चाहिए।

वॉयजेस ढांचा

मंत्री ने वॉयजेस (VOYAGES) ढांचे की ओर ध्यान दिलाया, जिसे दोनों देशों ने अप्रैल में अपनाया था, जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे। यह ढांचा जहाज निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स को समेटता है। सोनोवाल ने भारतीय पेशेवरों से कहा कि वे इसे केवल दो सरकारों के बीच समझौता न मानें, बल्कि अपने कामकाजी भविष्य और देश के समुद्री भविष्य का मंच समझें।

भारत के समुद्री लक्ष्य

मंत्री ने इस पहल को समुद्री भारत दृष्टि 2030 और समुद्री अमृत काल दृष्टि 2047 से जोड़ा, जिनके तहत भारत जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत, समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स का विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र बनना चाहता है। उन्होंने याद दिलाया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2025 में इस क्षेत्र के लिए नीतिगत प्रोत्साहनों को मंजूरी दी थी। उनके मुताबिक आगे देश को और अधिक समुद्री इंजीनियर, नौसैनिक वास्तुकार, वेल्डर, डिजाइनर, परियोजना प्रबंधक और तकनीकी विशेषज्ञ चाहिए होंगे।

आगे का कार्यक्रम

सोनोवाल ने तीन सवालों पर सुझाव मांगे: शिपयार्ड की उत्पादकता और परियोजना पूरी करने की रफ्तार कैसे सुधरे, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कुशल कार्यबल कैसे बने, और दोनों देशों के उद्योग तकनीक, निर्माण और नवाचार में कैसे मिलकर काम करें। उन्होंने इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर और भारत तथा कोरिया अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी के बीच कौशल साझेदारी का भी उल्लेख किया। उनके कार्यक्रम में वैश्विक जहाज निर्माण कंपनियों के प्रमुखों, समुद्री उद्योग संगठनों और शोध संस्थानों से मुलाकात शामिल है, साथ ही बुसान में विश्व समुद्री दिवस के लिए मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक भी, जिसमें बड़े समुद्री देशों के मंत्रियों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव के शामिल होने की संभावना है।

महत्वपूर्ण तथ्य

मंत्रीसर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री
यात्रादक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा, 25 अक्टूबर 2026 से शुरू
पहला पड़ावबुसान, कोरिया के समुद्री उद्योग का केंद्र
ढांचावॉयजेस (VOYAGES) - जहाज निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स
कब अपनायाअप्रैल में, राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान
भारत का लक्ष्य2047 तक दुनिया के पहले पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होना
नीतिगत दृष्टिसमुद्री भारत दृष्टि 2030 और समुद्री अमृत काल दृष्टि 2047
मंत्रिमंडल की मंजूरीसितंबर 2025 में क्षेत्र के लिए नीतिगत प्रोत्साहन
राजदूतगौरांगलाल दास, दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत

परीक्षा की दृष्टि से

मंत्री और उनका विभाग (सर्बानंद सोनोवाल, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग), देश और पहला शहर (दक्षिण कोरिया, बुसान), ढांचा और उसे अपनाने का समय (वॉयजेस, अप्रैल, राष्ट्रपति ली जे म्युंग की राजकीय यात्रा), लक्ष्य (2047 तक पहले पांच जहाज निर्माण देशों में, समुद्री भारत दृष्टि 2030, समुद्री अमृत काल दृष्टि 2047), राजदूत (गौरांगलाल दास) और बुसान का आयोजन (विश्व समुद्री दिवस गोलमेज) याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अंतरराष्ट्रीयआसान

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच जहाज निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स पर सहयोग का ढांचा कौन सा है?

  1. A.सागर
  2. B.वॉयजेस
  3. C.होराइजन
  4. D.महासागर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वॉयजेस

यही वह सहयोग ढांचा है जिसे भारत और दक्षिण कोरिया ने अप्रैल में अपनाया था, जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे, और यह जहाज निर्माण, पोत परिवहन तथा समुद्री लॉजिस्टिक्स को समेटता है।

Q2.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

भारत किस वर्ष तक दुनिया के पहले पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होना चाहता है?

  1. A.2030
  2. B.2035
  3. C.2047
  4. D.2040
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2047

भारत ने इसी वर्ष तक दुनिया के पहले पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है, और सर्बानंद सोनोवाल की दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा को इसी दिशा में एक कदम बताया गया।

Q3.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

सोनोवाल ने किस कोरियाई शहर से यात्रा शुरू की, जहां विश्व समुद्री दिवस की मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक भी होनी है?

  1. A.सोल
  2. B.इंचियोन
  3. C.बुसान
  4. D.उल्सान
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बुसान

सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा बुसान से शुरू की, जिसे उन्होंने कोरिया के समुद्री उद्योग का केंद्र कहा, और वहीं उन्होंने कोरियाई जहाज निर्माण में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों से बातचीत की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच जहाज निर्माण सहयोग का ढांचा कौन सा है?

वॉयजेस (VOYAGES), जिसे अप्रैल में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान अपनाया गया। यह जहाज निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स को समेटता है।

भारत कब तक पहले पांच जहाज निर्माण देशों में आना चाहता है?

2047 तक। इसके लिए समुद्री भारत दृष्टि 2030 और समुद्री अमृत काल दृष्टि 2047 हैं, और मंत्रिमंडल ने सितंबर 2025 में क्षेत्र के लिए नीतिगत प्रोत्साहन मंजूर किए थे।

सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया यात्रा कहां से शुरू की?

बुसान से, जिसे उन्होंने कोरिया के समुद्री उद्योग का केंद्र कहा। वहां उन्होंने कोरियाई जहाज निर्माण में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों से बातचीत की।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS