PM E-DRIVE के तहत उन्नयन के लिए चर्चा में रहा ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) कहाँ स्थित है?
- A.मानेसर, हरियाणा
- B.ओरगडम, चेन्नई
- C.अहमदनगर, महाराष्ट्र
- D.पीथमपुर, मध्य प्रदेश
सही उत्तर
B. ओरगडम, चेन्नई
व्याख्या
सही उत्तर ओरगडम, चेन्नई है। ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर चेन्नई के बाहरी हिस्से में ओरगडम में स्थित है और भारी उद्योग मंत्रालय के राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड के अधीन कार्य करता है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम के नियम 126 के तहत यह अधिकृत परीक्षण एजेंसी है, इसलिए वाहनों तथा कल-पुर्जों की जाँच के साथ होमोलोगेशन और प्रमाणन भी करता है। इसकी नई व उन्नत सुविधाओं में AIS-156 मानक पर इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी जाँच, AIS-004 भाग 3 Rev.1 के तहत EMI तथा EMC जाँच, भारी व्यावसायिक वाहनों की जाँच, उन्नत पावरट्रेन प्रयोगशाला, उन्नत निष्क्रिय सुरक्षा परीक्षण और ADAS परीक्षण शामिल हैं। विकल्प A, C और D देश के अन्य वाहन परीक्षण व अनुसंधान संस्थानों से जुड़े स्थान हैं, परंतु इनमें कोई भी GARC का स्थान नहीं है, इसलिए तीनों गलत हैं।
पूरा लेख पढ़ें: PM E-DRIVE: GARC को EV परीक्षण के लिए 221.13 करोड़
अभ्यास प्रश्न
ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) किस केंद्रीय योजना के तहत अपनी परीक्षण सुविधाओं का उन्नयन कर रहा है?
- A.फेम इंडिया चरण-II
- B.PM E-DRIVE
- C.पीएम-कुसुम
- D.एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के लिए पीएलआई योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. PM E-DRIVE
व्याख्या
सही उत्तर PM E-DRIVE है, यानी भारी उद्योग मंत्रालय की पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट योजना। राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड के अधीन काम करने वाला GARC इसी योजना के धन से अपनी प्रयोगशालाएँ नई कर रहा है और इसके लिए उसे 221.13 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। योजना का कुल परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है, इसमें 780 करोड़ रुपये केवल परीक्षण एजेंसियों के लिए हैं, और यह 31 मार्च 2028 तक चलेगी। विकल्प A यानी फेम इंडिया चरण-II इलेक्ट्रिक गतिशीलता का पुराना कार्यक्रम है, यहाँ उसका नाम नहीं है। विकल्प C यानी पीएम-कुसुम किसानों के सौर पंपों से जुड़ी योजना है, वाहन परीक्षण से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D की पीएलआई योजना बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए है, परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए नहीं, इसलिए वह भी गलत है।
PM E-DRIVE योजना का कुल परिव्यय कितना है?
- A.7,800 करोड़ रुपये
- B.10,900 करोड़ रुपये
- C.13,500 करोड़ रुपये
- D.22,113 करोड़ रुपये
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सही उत्तर: B. 10,900 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 10,900 करोड़ रुपये है। यही पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट योजना का कुल परिव्यय है, और इसके भीतर 780 करोड़ रुपये देश में वाहनों को प्रमाणित करने वाली परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए अलग रखे गए हैं। योजना 31 मार्च 2028 तक प्रभावी है। विकल्प A का आँकड़ा परीक्षण एजेंसियों वाले 780 करोड़ रुपये के घटक से मिलता-जुलता दिखता है, परंतु वह पूरे परिव्यय का नाम नहीं है। विकल्प C का आँकड़ा भारी उद्योग मंत्रालय ने कहीं नहीं बताया। विकल्प D में ओरगडम, चेन्नई के GARC को मिले 221.13 करोड़ रुपये की छाया है, जो परीक्षण घटक में एक केंद्र का हिस्सा है, पूरी योजना का आकार नहीं। अभ्यर्थी तीनों राशियों को अलग-अलग याद रखें — योजना का कुल, परीक्षण एजेंसियों का घटक और एक एजेंसी का आवंटन।
भारत में नैनो औषधियों के दिशानिर्देश किन तीन संस्थाओं ने मिलकर बनाए हैं?
- A.DBT, ICMR और CDSCO
- B.DST, CSIR और FSSAI
- C.DBT, BIRAC और नीति आयोग
- D.ICMR, एम्स और CDSCO
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. DBT, ICMR और CDSCO
व्याख्या
सही उत्तर DBT, ICMR और CDSCO है, यानी जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद तथा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन। मंत्री ने बताया कि इन तीनों ने मिलकर ऐसा साझा ढाँचा बनाया है, जिससे नैनो औषधि उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभाव को परखा जा सके, और इससे शोध के साथ-साथ भारत को नियामक आधार भी मिला है। विकल्प B में जो संस्थाएँ गिनाई गई हैं, उनका इस संदर्भ में नाम ही नहीं आया। विकल्प C गलत है, क्योंकि BIRAC का जिक्र नई जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों को अनुदान और भागीदारी कार्यक्रम तक पहुँचाने के रास्ते के रूप में हुआ, जबकि नीति आयोग का नाम केवल इसलिए आया कि उसके एक सदस्य सत्र में उपस्थित थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि दिशानिर्देश बनाने वालों में कोई अस्पताल शामिल नहीं था।
नैनोमेडिसिन विश्व कांग्रेस 2026 के अध्यक्ष कौन हैं?
- A.प्रो. टी. एम. एस. चांग
- B.प्रो. योगेश सिंह
- C.प्रो. रोजर डी. कोर्नबर्ग
- D.प्रो. गोबर्धन दास
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्रो. रोजर डी. कोर्नबर्ग
व्याख्या
सही उत्तर प्रो. रोजर डी. कोर्नबर्ग हैं, जो अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े नोबेल पुरस्कार विजेता हैं। उन्होंने इस क्षेत्र को नया और तेजी से विकसित होता बताया तथा कहा कि इसकी सबसे बड़ी संभावना यह है कि दवा की उचित मात्रा उचित स्थान पर उचित समय पर पहुँचे, जिससे इलाज का असर बढ़े और विषाक्तता घटे। विकल्प A गलत है, क्योंकि कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय के प्रो. टी. एम. एस. चांग मानद अध्यक्ष के अलग पद पर हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि प्रो. योगेश सिंह मेजबान दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के नाते उपस्थित थे, अध्यक्ष के नाते नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि प्रो. गोबर्धन दास नीति आयोग के सदस्य के रूप में उद्घाटन सत्र में शामिल हुए थे।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग नैनोमेडिसिन की कितनी परियोजनाओं को कितनी राशि दे रहा है?
- A.120 परियोजनाएँ, 210 करोड़ रुपये
- B.210 परियोजनाएँ, 174 करोड़ रुपये
- C.174 परियोजनाएँ, 210 करोड़ रुपये
- D.310 परियोजनाएँ, 240 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 210 परियोजनाएँ, 174 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 210 परियोजनाएँ, 174 करोड़ रुपये है। मंत्री ने सरकार की मदद का ब्योरा देते हुए यही आंकड़े बताए और कहा कि यह काम लक्षित औषधि वितरण, कैंसर नैनोमेडिसिन, संक्रामक रोग नैनोमेडिसिन, न्यूक्लिक अम्ल एवं टीका वितरण, नैनो निदान एवं इमेजिंग, पुनर्योजी चिकित्सा, घाव भरने तथा नैनो विषविज्ञान और नियामक विज्ञान तक फैला है। विकल्प A और C दोनों आंकड़ों को आपस में उलट देते हैं या नया आंकड़ा गढ़ते हैं, इसलिए वे परियोजनाओं की संख्या को राशि और राशि को संख्या बना देते हैं। विकल्प D में दोनों आंकड़े बढ़ा दिए गए हैं और वह कही गई किसी बात से मेल नहीं खाता। परीक्षार्थियों को यह भी जोड़कर याद रखना चाहिए कि BIRAC की योजनाएँ इस शोध को उद्यम में बदलने में मदद करती हैं।