नीति आयोग ने शहरी कॉन्क्लेव में सीधे चुने मेयर की मांग रखी
दूसरे राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने सीधे चुने जाने वाले मेयर और शहरी स्थानीय निकायों को सभी 18 कार्य सौंपने की मांग रखी।

चर्चा में क्यों
25 अक्टूबर 2026 को दूसरे राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव के समापन सत्र में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने सशक्त शहरी सरकारों, सीधे चुने जाने वाले मेयर और 74वें संविधान संशोधन के सभी 18 कार्यों के हस्तांतरण की मांग रखी।
नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने दूसरे राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव के समापन सत्र में कहा कि विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब शहरों के नियोजन, शासन और वित्त की पूरी व्यवस्था नए सिरे से गढ़ी जाए। उनका कहना था कि विकास शहरों में बनता है, पर शहर चलाने वाली संस्थाएं ही सबसे कमजोर कड़ी बनी हुई हैं।
आगे का बदलाव कितना बड़ा है
गौबा ने बताया कि देश की आबादी अभी कई दशकों तक बढ़ती रहेगी और 2060 के आसपास लगभग 165 करोड़ पर जाकर थमेगी। 2050 तक लगभग आधे भारतीय शहरों में रह रहे होंगे, यानी शहरी आबादी आज के करीब 50 करोड़ से बढ़कर 85 करोड़ हो जाएगी। इतनी बड़ी आबादी के लिए आवास, पानी, परिवहन और दूसरी बुनियादी सेवाएं मौजूदा ढांचे से नहीं जुटाई जा सकतीं।
अब तक शहरों पर क्या लगा
उन्होंने कहा कि नियोजित बस्तियों की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है, फिर भी आजादी के बाद के दशकों में शहर अपेक्षाकृत उपेक्षित रहे। 2014 के बाद स्मार्ट सिटीज, अमृत, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत और शहरी आजीविका मिशन जैसे बड़े मिशनों से यह तस्वीर बदली है। शहरी क्षेत्र के लिए बजट में रखी राशि दस गुना बढ़ चुकी है और अकेले मेट्रो रेल तथा बस व्यवस्थाओं में लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
| मद | राशि |
| मेट्रो रेल और बस व्यवस्था | करीब 3.7 लाख करोड़ रुपये का निवेश |
| अर्बन चैलेंज फंड (2025-26 का बजट) | 1 लाख करोड़ रुपये |
| इस वर्ष के बजट में शहरी आर्थिक क्षेत्र | 7 क्षेत्रों के लिए पांच वर्ष में 5,000 करोड़ रुपये प्रति क्षेत्र |
| वित्त आयोग अनुदान में शहरी निकायों का हिस्सा | 36 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत |
मेयर जो सचमुच चुने जाएं
गौबा ने मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस नाम की उस रिपोर्ट का हवाला दिया जो नीति आयोग और आवासन तथा शहरी कार्य मंत्रालय ने मिलकर तैयार की है। रिपोर्ट चाहती है कि मेयर सीधे मतदाताओं से चुने जाएं और उनका कार्यकाल पूरे पांच वर्ष का हो, मेयर-इन-काउंसिल व्यवस्था लागू हो तथा नगर निकाय चुनाव समय पर कराए जाएं। इसके साथ राज्यों से कहा गया है कि 74वें संविधान संशोधन में गिनाए गए सभी 18 कार्य शहरी स्थानीय निकायों को सौंप दिए जाएं, जिनमें महायोजना बनाना, जलापूर्ति, अग्निशमन सेवाएं और यातायात शामिल हैं। उनका कहना था कि शहर को राज्य की राजधानी से नहीं चलाया जा सकता और असली अधिकार तथा संस्थागत क्षमता वाली परिषद ही स्थानीय जरूरतों का जवाब दे सकती है।
शहरों के पास अपना पैसा हो
नगर निकायों की अपनी आय कम बनी हुई है, इसलिए गौबा ने संपत्ति कर और उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली सुधारने पर जोर दिया। केंद्रीय वित्त आयोग से शहरी निकायों को मिलने वाला अनुदान पिछले आवंटन से दोगुने से भी अधिक हो गया है और उनका हिस्सा 36 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो चुका है, पर राज्य अपनी ओर से शहरों को बहुत कम हस्तांतरित करते हैं। उन्होंने राज्य वित्त आयोगों के नियमित गठन और निकायों को पर्याप्त राशि देने की बात कही।
नियोजन के नियम और किराये के मकान
सख्त फ्लोर एरिया रेशियो और भवन नियम जमीन की आपूर्ति रोकते हैं तथा घर और कारोबार दोनों की लागत बढ़ाते हैं, इसलिए गौबा ने इन्हें हटाने को कहा। उनकी जगह उन्होंने मिश्रित उपयोग वाली जोनिंग, पारगमन केंद्रों के आसपास विकास और भूमि पूलिंग की सिफारिश की। प्रवासी श्रमिकों, औद्योगिक मजदूरों, विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों के लिए किफायती किराये के मकान दूसरी बड़ी कमी है, जिसके लिए उन्होंने राज्यों से आदर्श किरायेदारी अधिनियम अपनाने का आग्रह किया। अंत में उन्होंने कहा कि ये सभी सुधार राज्यों के नए नगरपालिका कानून लाने से संभव हैं, और मंत्रालय शहरी मिशनों की सहायता को इन सुधारों से जोड़कर इन्हें लागू कराए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | दूसरा राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव, समापन सत्र |
|---|---|
| वक्ता | राजीव गौबा, सदस्य, नीति आयोग |
| लक्ष्य | विकसित भारत @ 2047 |
| आबादी का अनुमान | 2060 के आसपास लगभग 165 करोड़ पर स्थिर |
| शहरी आबादी | 2050 तक करीब 50 करोड़ से बढ़कर 85 करोड़ |
| रिपोर्ट | मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस, नीति आयोग और आवासन तथा शहरी कार्य मंत्रालय |
| हस्तांतरित किए जाने वाले कार्य | 74वें संविधान संशोधन के सभी 18 कार्य |
| मेयर | सीधे चुनाव, पांच वर्ष का कार्यकाल और मेयर-इन-काउंसिल व्यवस्था |
| अर्बन चैलेंज फंड | 1 लाख करोड़ रुपये, 2025-26 के बजट में घोषित |
| शहरी आर्थिक क्षेत्र | 7 क्षेत्रों को पांच वर्ष में 5,000 करोड़ रुपये प्रति क्षेत्र |
| वित्त आयोग अनुदान | शहरी निकायों का हिस्सा 36 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत |
| मेट्रो और बस निवेश | लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें, वक्ता राजीव गौबा (सदस्य, नीति आयोग), आयोजन दूसरा राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव, रिपोर्ट मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस (नीति आयोग और आवासन तथा शहरी कार्य मंत्रालय), 74वें संशोधन के 18 कार्य, शहरी आबादी 50 करोड़ से 85 करोड़ (2050 तक), कुल आबादी 2060 के आसपास 165 करोड़, 2025-26 के बजट का 1 लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड, 7 शहरी आर्थिक क्षेत्रों को 5,000 करोड़ रुपये प्रति क्षेत्र और वित्त आयोग अनुदान में निकायों का हिस्सा 36 से 45 प्रतिशत।
अभ्यास प्रश्न
भारत की शहरी आबादी 2050 तक आज के लगभग 50 करोड़ से बढ़कर कितनी होने का अनुमान है?
- A.65 करोड़
- B.75 करोड़
- C.85 करोड़
- D.95 करोड़
उत्तर देखें
दूसरे राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव के समापन सत्र में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने बताया कि 2050 तक देश की करीब आधी आबादी शहरी क्षेत्रों में रह रही होगी और इसी के साथ शहरी आबादी आज के लगभग 50 करोड़ से बढ़कर 85 करोड़ हो जाएगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नीति आयोग ने राज्यों से 74वें संविधान संशोधन के अनुरूप शहरी स्थानीय निकायों को कितने कार्य सौंपने को कहा?
- A.11
- B.15
- C.18
- D.29
उत्तर देखें
राजीव गौबा ने नीति आयोग और आवासन तथा शहरी कार्य मंत्रालय की साझा रिपोर्ट मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों को 74वें संविधान संशोधन के अनुरूप सभी 18 कार्य शहरी स्थानीय निकायों को सौंप देने चाहिए, जिनमें महायोजना बनाना, जलापूर्ति, अग्निशमन सेवाएं और यातायात…
पूरी व्याख्या पढ़ें →2025-26 के बजट में घोषित अर्बन चैलेंज फंड कितने रुपये का है?
- A.25,000 करोड़ रुपये
- B.50,000 करोड़ रुपये
- C.1 लाख करोड़ रुपये
- D.2 लाख करोड़ रुपये
उत्तर देखें
नीति आयोग की ग्रोथ हब पहल का ब्योरा देते हुए राजीव गौबा ने बताया कि 2025-26 के बजट में शहरों को विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का अर्बन चैलेंज फंड घोषित किया गया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →'मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस' रिपोर्ट नीति आयोग ने किस मंत्रालय के साथ मिलकर तैयार की है?
- A.गृह मंत्रालय
- B.आवासन तथा शहरी कार्य मंत्रालय
- C.पंचायती राज मंत्रालय
- D.सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
उत्तर देखें
राजीव गौबा ने मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस को नीति आयोग और इसी मंत्रालय की साझा रिपोर्ट बताया तथा उसकी सिफारिशों को अपने पूरे संबोधन का आधार बनाया, जिनमें सीधे चुने जाने वाले मेयर, पांच वर्ष का कार्यकाल, मेयर-इन-काउंसिल व्यवस्था, समय पर नगर निकाय चुनाव और 74वें संविधान संशोधन के…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दूसरे राष्ट्रीय शहरी कॉन्क्लेव में सशक्त शहरी सरकारों की मांग किसने रखी?
नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने, समापन सत्र में। उन्होंने कहा कि शहरों को राज्य की राजधानी से नहीं चलाया जा सकता और सीधे चुने जाने वाले मेयर, समय पर नगर निकाय चुनाव तथा 74वें संविधान संशोधन के सभी 18 कार्यों का हस्तांतरण जरूरी है।
अर्बन चैलेंज फंड कितने का है और कब घोषित हुआ?
यह 1 लाख करोड़ रुपये का है और 2025-26 के बजट में घोषित हुआ था। यह नीति आयोग की ग्रोथ हब पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहरों को विकास के केंद्र के रूप में खड़ा करना है। इस वर्ष के बजट में 7 शहरी आर्थिक क्षेत्रों को पांच वर्ष में 5,000 करोड़ रुपये प्रति क्षेत्र दिए गए हैं।
मूविंग टुवर्ड्स इफेक्टिव सिटी गवर्नेंस रिपोर्ट क्या सिफारिश करती है?
नीति आयोग और आवासन तथा शहरी कार्य मंत्रालय की यह रिपोर्ट सीधे चुने जाने वाले मेयर, पांच वर्ष का कार्यकाल, मेयर-इन-काउंसिल व्यवस्था, समय पर नगर निकाय चुनाव और 74वें संविधान संशोधन में गिनाए गए सभी 18 कार्यों को शहरी स्थानीय निकायों को सौंपने की सिफारिश करती है।
भारत की शहरी आबादी कितनी बढ़ने का अनुमान है?
आज के लगभग 50 करोड़ से बढ़कर 85 करोड़, और 2050 तक देश की करीब आधी आबादी शहरों में रह रही होगी। कुल आबादी कई दशकों तक बढ़ती रहेगी तथा 2060 के आसपास लगभग 165 करोड़ पर स्थिर होगी।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2328168 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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