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GK24

एनजीटी का जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, राष्ट्रपति का संबोधन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में एनजीटी के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' के समापन सत्र को संबोधित किया।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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एनजीटी का जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, राष्ट्रपति का संबोधन

चर्चा में क्यों

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया।

सम्मेलन क्या था

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) का दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इसके समापन सत्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संबोधित किया। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 सितंबर को किया था। इसमें 17 देशों के न्यायविद, शिक्षाविद, नीति निर्माता, वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हुए, साथ ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी भाग लिया।

राष्ट्रपति ने क्या कहा

राष्ट्रपति ने पर्यावरण प्रशासन को मज़बूत करने में न्यायाधिकरण की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन मानव जीवन में कई स्तरों पर असंतुलन पैदा करता है और जैव विविधता के ह्रास, जल संकट और भू-क्षरण से गहराई से जुड़ा है। इसका असर खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर भी पड़ रहा है। उनका मुख्य संदेश था कि पारंपरिक ज्ञान पर आधारित, लोगों और समुदायों को केंद्र में रखने वाले अनुकूलन उपायों से जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता बढ़ाई जाए। उन्होंने ग्रामीण और वनवासी समाज, छोटे किसानों और महिलाओं की ज़रूरतों पर खास ध्यान देने को कहा, क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं की सबसे ज़्यादा मार इन्हीं पर पड़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संधारणीय वनीकरण का असली लक्ष्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि स्वस्थ और अपने बल पर टिके रहने वाले पारिस्थितिक तंत्र फिर से खड़े करना है। विकासशील देशों को विकास की रफ़्तार बनाए रखते हुए यह क्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने भारत सरकार की मिशन LiFE पहल का उदाहरण दिया, जिसने दिखाया है कि जनभागीदारी से पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सार्थक काम किया जा सकता है।

समापन सत्र में अन्य वक्ता

  • मनोहर लाल, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री, ने बताया कि देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है और भारत ने 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर लिया।
  • न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश, ने न्यायालय के पर्यावरण-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने और प्रभावी संस्थाओं, प्रवर्तन तथा न्याय तक पहुंच की ज़रूरत पर बात की।
  • न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, एनजीटी के अध्यक्ष, ने कहा कि अब समस्याएं गिनाने से आगे बढ़कर ऐसे कानून, संस्थाएं और साझेदारियां बनानी होंगी जो इनसे निपट सकें।
  • तुषार मेहता, भारत के सॉलिसिटर जनरल, ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रगति में बाधा नहीं, बल्कि टिकाऊ प्रगति की शर्त है।

हरित न्यायम और तकनीकी सत्र

मनोहर लाल ने एनजीटी का स्मारिका प्रकाशन 'हरित न्यायम' जारी किया और इसकी पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की। इसमें न्यायाधिकरण की स्थापना, विकास और उपलब्धियों का ब्योरा है। दूसरे दिन दो तकनीकी सत्र हुए: 'ग्रहीय पर्यावरणीय चुनौतियाँ और सहयोग' तथा 'भविष्य के लिए वन: वन संरक्षण और पुनर्स्थापन पर संवाद'।

परीक्षा के लिए

सम्मेलन का शीर्षक, दोनों तारीखें (19 सितंबर को प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन और 20 सितंबर को राष्ट्रपति का समापन संबोधन), 17 भागीदार देश, स्मारिका का नाम 'हरित न्यायम', एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और बिजली क्षेत्र के आंकड़े याद रखें: लगभग 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म क्षमता और 50 प्रतिशत का लक्ष्य पांच साल पहले पूरा।

महत्वपूर्ण तथ्य

सम्मेलन'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
आयोजकराष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी)
स्थाननई दिल्ली
उद्घाटन19 सितंबर 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
समापन संबोधन20 सितंबर 2026, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
भागीदारी17 देश, यूएनईपी और एशियाई विकास बैंक
एनजीटी अध्यक्षन्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव
जारी स्मारिकाहरित न्यायम
स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म हिस्सालगभग 55 प्रतिशत
50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म लक्ष्यतय समय से पांच साल पहले हासिल

परीक्षा की दृष्टि से

सम्मेलन का शीर्षक, प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन और राष्ट्रपति द्वारा समापन, 17 भागीदार देश, स्मारिका 'हरित न्यायम', एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म क्षमता का आंकड़ा याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

सितंबर 2026 में 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' विषय पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की कौन-सी स्मारिका जारी की गई?

  1. A.हरित न्यायम
  2. B.प्रकृति वंदन
  3. C.हरित भारत
  4. D.पर्यावरण न्याय
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. हरित न्यायम

व्याख्या

सही उत्तर हरित न्यायम है। 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एनजीटी की स्मारिका 'हरित न्यायम' जारी की और इसकी पहली प्रति भारत की राष्ट्रपति को भेंट की। यह दस्तावेज न्यायाधिकरण की स्थापना, विकास और उपलब्धियों का विवरण देता है और दो दिवसीय सम्मेलन में हुए विचारों को भी दर्ज करता है।

प्रकृति वंदन, हरित भारत और पर्यावरण न्याय मिलते-जुलते नाम हैं और इसी कारण विकल्पों में रखे गए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी इस स्मारिका का नाम नहीं है। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। सरकारी कार्यक्रमों में जारी प्रकाशनों के नाम अक्सर वन-लाइनर के रूप में पूछे जाते हैं, इसलिए यह भी याद रखें कि इसे किसने जारी किया (मनोहर लाल), पहली प्रति किसे मिली (राष्ट्रपति) और यह किस संस्था का प्रकाशन है (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण)।

Q2.पर्यावरणमध्यम

सितंबर 2026 के एनजीटी सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के अनुसार देश की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग कितना हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है?

  1. A.40 प्रतिशत
  2. B.50 प्रतिशत
  3. C.55 प्रतिशत
  4. D.65 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 55 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 55 प्रतिशत है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि देश की कुल स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लगभग 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त होता है। उन्होंने इसे तेज़ विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के भारत के प्रयासों का हिस्सा बताया।

विकल्प B यानी 50 प्रतिशत एक जाल है। यह गैर-जीवाश्म क्षमता का वह लक्ष्य है जिसे मंत्री के अनुसार भारत ने तय समय से पांच साल पहले हासिल कर लिया; यह मौजूदा हिस्सा नहीं है। विकल्प A और D, यानी 40 और 65 प्रतिशत, विज्ञप्ति में नहीं हैं। अपने नोट्स में दोनों संख्याओं को अलग रखें: लक्ष्य 50 प्रतिशत था जो समय से पहले पूरा हुआ, और मौजूदा हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत है।

Q3.पर्यावरणमध्यम

सितंबर 2026 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़ी विज्ञप्ति में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के रूप में किसका नाम है?

  1. A.न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव
  2. B.न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना
  3. C.तुषार मेहता
  4. D.मनोहर लाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव

व्याख्या

सही उत्तर न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव है। विज्ञप्ति में उन्हें एनजीटी का अध्यक्ष बताया गया है। अपने समापन भाषण में उन्होंने कहा कि दो दिन की चर्चाओं ने दिखाया है कि पर्यावरणीय चुनौतियों की पहचान से आगे बढ़कर ऐसे कानून, संस्थाएं और साझेदारियां बनाने की ज़रूरत है जो इनसे निपट सकें, और जलवायु कार्रवाई समावेशी और न्यायसंगत होनी चाहिए।

बाकी तीनों ने भी इसी सत्र में भाषण दिया, लेकिन उनके पद अलग हैं। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं। तुषार मेहता भारत के सॉलिसिटर जनरल हैं। मनोहर लाल केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री हैं, जिन्होंने स्मारिका 'हरित न्यायम' जारी की। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। जब एक विज्ञप्ति में कई गणमान्य व्यक्ति हों, तो परीक्षक अक्सर उनके पद आपस में बदल देते हैं, इसलिए हर नाम को उसके पद के साथ याद रखें।

Q4.पर्यावरणआसान

सितंबर 2026 के एनजीटी सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किस सरकारी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि जनभागीदारी से पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाया जा सकता है?

  1. A.मिशन LiFE
  2. B.नमामि गंगे
  3. C.हरित भारत मिशन
  4. D.नगर वन योजना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मिशन LiFE

व्याख्या

सही उत्तर मिशन LiFE है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने युवाओं और आम लोगों को जोड़कर पर्यावरण चेतना बढ़ाने में सराहनीय काम किया है, और भारत सरकार की मिशन LiFE पहल ने दिखाया है कि जनभागीदारी और सामुदायिक पहल से पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सार्थक कार्य किए जा सकते हैं।

नमामि गंगे, हरित भारत मिशन और नगर वन योजना भी पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रम हैं, लेकिन राष्ट्रपति ने इस संबोधन में इनमें से किसी का उल्लेख नहीं किया। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। उत्तर के साथ उनकी बाकी मुख्य बातें भी याद रखें: पारंपरिक ज्ञान पर आधारित और समुदाय को केंद्र में रखने वाले अनुकूलन उपाय, और ऐसा संधारणीय वनीकरण जो सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित न रहकर स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र फिर से स्थापित करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 का एनजीटी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किस विषय पर था?

इसका शीर्षक 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' था। नई दिल्ली में दो दिन चले इस सम्मेलन में 17 देशों के विशेषज्ञ, यूएनईपी और एशियाई विकास बैंक पर्यावरण और जलवायु चुनौतियों पर चर्चा के लिए जुटे।

हरित न्यायम क्या है?

हरित न्यायम राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण का स्मारिका प्रकाशन है, जिसे सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने जारी किया। इसमें न्यायाधिकरण की स्थापना, विकास और उपलब्धियों का विवरण है और इसकी पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की गई।

एनजीटी सम्मेलन में राष्ट्रपति मुर्मु ने किस बात पर ज़ोर दिया?

उन्होंने पारंपरिक ज्ञान पर आधारित, लोगों और समुदायों को केंद्र में रखने वाले अनुकूलन उपायों से जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दिया और जनभागीदारी के उदाहरण के रूप में मिशन LiFE का उल्लेख किया।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCUPSCUPSC सिविल सेवा