सितंबर 2026 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़ी विज्ञप्ति में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के रूप में किसका नाम है?
- A.न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव
- B.न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना
- C.तुषार मेहता
- D.मनोहर लाल
सही उत्तर
A. न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव
व्याख्या
सही उत्तर न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव है। विज्ञप्ति में उन्हें एनजीटी का अध्यक्ष बताया गया है। अपने समापन भाषण में उन्होंने कहा कि दो दिन की चर्चाओं ने दिखाया है कि पर्यावरणीय चुनौतियों की पहचान से आगे बढ़कर ऐसे कानून, संस्थाएं और साझेदारियां बनाने की ज़रूरत है जो इनसे निपट सकें, और जलवायु कार्रवाई समावेशी और न्यायसंगत होनी चाहिए।
बाकी तीनों ने भी इसी सत्र में भाषण दिया, लेकिन उनके पद अलग हैं। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं। तुषार मेहता भारत के सॉलिसिटर जनरल हैं। मनोहर लाल केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री हैं, जिन्होंने स्मारिका 'हरित न्यायम' जारी की। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। जब एक विज्ञप्ति में कई गणमान्य व्यक्ति हों, तो परीक्षक अक्सर उनके पद आपस में बदल देते हैं, इसलिए हर नाम को उसके पद के साथ याद रखें।
पूरा लेख पढ़ें: एनजीटी का जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, राष्ट्रपति का संबोधन
अभ्यास प्रश्न
सितंबर 2026 में 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' विषय पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की कौन-सी स्मारिका जारी की गई?
- A.हरित न्यायम
- B.प्रकृति वंदन
- C.हरित भारत
- D.पर्यावरण न्याय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. हरित न्यायम
व्याख्या
सही उत्तर हरित न्यायम है। 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एनजीटी की स्मारिका 'हरित न्यायम' जारी की और इसकी पहली प्रति भारत की राष्ट्रपति को भेंट की। यह दस्तावेज न्यायाधिकरण की स्थापना, विकास और उपलब्धियों का विवरण देता है और दो दिवसीय सम्मेलन में हुए विचारों को भी दर्ज करता है।
प्रकृति वंदन, हरित भारत और पर्यावरण न्याय मिलते-जुलते नाम हैं और इसी कारण विकल्पों में रखे गए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी इस स्मारिका का नाम नहीं है। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। सरकारी कार्यक्रमों में जारी प्रकाशनों के नाम अक्सर वन-लाइनर के रूप में पूछे जाते हैं, इसलिए यह भी याद रखें कि इसे किसने जारी किया (मनोहर लाल), पहली प्रति किसे मिली (राष्ट्रपति) और यह किस संस्था का प्रकाशन है (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण)।
सितंबर 2026 के एनजीटी सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के अनुसार देश की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग कितना हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है?
- A.40 प्रतिशत
- B.50 प्रतिशत
- C.55 प्रतिशत
- D.65 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 55 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर 55 प्रतिशत है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि देश की कुल स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लगभग 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त होता है। उन्होंने इसे तेज़ विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के भारत के प्रयासों का हिस्सा बताया।
विकल्प B यानी 50 प्रतिशत एक जाल है। यह गैर-जीवाश्म क्षमता का वह लक्ष्य है जिसे मंत्री के अनुसार भारत ने तय समय से पांच साल पहले हासिल कर लिया; यह मौजूदा हिस्सा नहीं है। विकल्प A और D, यानी 40 और 65 प्रतिशत, विज्ञप्ति में नहीं हैं। अपने नोट्स में दोनों संख्याओं को अलग रखें: लक्ष्य 50 प्रतिशत था जो समय से पहले पूरा हुआ, और मौजूदा हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत है।
सितंबर 2026 के एनजीटी सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किस सरकारी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि जनभागीदारी से पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाया जा सकता है?
- A.मिशन LiFE
- B.नमामि गंगे
- C.हरित भारत मिशन
- D.नगर वन योजना
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सही उत्तर: A. मिशन LiFE
व्याख्या
सही उत्तर मिशन LiFE है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने युवाओं और आम लोगों को जोड़कर पर्यावरण चेतना बढ़ाने में सराहनीय काम किया है, और भारत सरकार की मिशन LiFE पहल ने दिखाया है कि जनभागीदारी और सामुदायिक पहल से पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सार्थक कार्य किए जा सकते हैं।
नमामि गंगे, हरित भारत मिशन और नगर वन योजना भी पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रम हैं, लेकिन राष्ट्रपति ने इस संबोधन में इनमें से किसी का उल्लेख नहीं किया। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। उत्तर के साथ उनकी बाकी मुख्य बातें भी याद रखें: पारंपरिक ज्ञान पर आधारित और समुदाय को केंद्र में रखने वाले अनुकूलन उपाय, और ऐसा संधारणीय वनीकरण जो सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित न रहकर स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र फिर से स्थापित करे।
आवा पानी झोकी आंदोलन, जिसमें किसानों ने जल संरक्षण के लिए अपनी भूमि का 5 प्रतिशत दिया, किस जिले में है?
- A.प्रकाशम जिला, आंध्र प्रदेश
- B.कोरिया जिला, छत्तीसगढ़
- C.कालाहांडी जिला, ओडिशा
- D.बाड़मेर जिला, राजस्थान
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सही उत्तर: B. कोरिया जिला, छत्तीसगढ़
व्याख्या
सही उत्तर कोरिया जिला, छत्तीसगढ़ है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट बताती है कि वहां किसानों ने आवा पानी झोकी आंदोलन के तहत स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा पुनर्भरण तालाबों और सीढ़ीदार गड्ढों के लिए समर्पित किया, और इस मॉडल को इस बात का प्रमाण बताती है कि स्थायी जल प्रबंधन के लिए न बड़े पैमाने पर विस्थापन जरूरी है, न भारी पूंजी। 1,260 से अधिक किसानों ने इसे अपनाया, जिले में 2,000 से अधिक सोख्ता गड्ढे बने, कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर बढ़ा और 17 दूरदराज की आदिवासी बसाहटों में झरने पुनर्जीवित हुए। विकल्प क जाल है, क्योंकि आंध्र प्रदेश का प्रकाशम जिला भी इसी रिपोर्ट में आता है, पर वहां मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेल्ला गांवों ने ग्राम सभाओं तथा कलाजत्था के साथ रिज-टू-वैली दृष्टिकोण अपनाया। विकल्प ग और घ के जिलों का कोई उल्लेख नहीं है।
जल संचय जनभागीदारी 3 सी से निर्देशित होती है। ये तीन सी क्या हैं?
- A.समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत
- B.जलग्रहण, संरक्षण और समुदाय
- C.लागत, क्षमता और समन्वय
- D.समुदाय, संरक्षण और अनुपालन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत
व्याख्या
सही उत्तर समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट बताती है कि यह पहल 3 सी से निर्देशित होती है और इन्हें ठीक इन्हीं शब्दों में गिनाती है। बाकी विकल्प उसी विषय के शब्दों से बनाए गए हैं और इसीलिए सही लगते हैं, जो ऐसे प्रश्नों की बनावट है। जलग्रहण, संरक्षण, क्षमता, समन्वय और अनुपालन जैसे शब्द जल नीति के लेखन में आते हैं, पर यहां के तीन सी नहीं हैं। यह परिभाषा पहल के बाकी ढांचे के साथ याद रखनी चाहिए, क्योंकि जल संचय जनभागीदारी कम लागत वाली भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण संरचनाएं बनाती है, निष्क्रिय बोरवेल को पुनर्जीवित करती है तथा संपूर्ण सरकार एवं संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण से वैज्ञानिक पर स्थानीय रूप से उपयुक्त समाधान बढ़ाती है। इसकी शुरुआत 6 सितंबर 2024 को हुई थी।