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GK24
पर्यावरणमध्यम

सितंबर 2026 के एनजीटी सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के अनुसार देश की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग कितना हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है?

  1. A.40 प्रतिशत
  2. B.50 प्रतिशत
  3. C.55 प्रतिशत
  4. D.65 प्रतिशत

सही उत्तर

C. 55 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 55 प्रतिशत है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि देश की कुल स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लगभग 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त होता है। उन्होंने इसे तेज़ विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के भारत के प्रयासों का हिस्सा बताया।

विकल्प B यानी 50 प्रतिशत एक जाल है। यह गैर-जीवाश्म क्षमता का वह लक्ष्य है जिसे मंत्री के अनुसार भारत ने तय समय से पांच साल पहले हासिल कर लिया; यह मौजूदा हिस्सा नहीं है। विकल्प A और D, यानी 40 और 65 प्रतिशत, विज्ञप्ति में नहीं हैं। अपने नोट्स में दोनों संख्याओं को अलग रखें: लक्ष्य 50 प्रतिशत था जो समय से पहले पूरा हुआ, और मौजूदा हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत है।

पूरा लेख पढ़ें: एनजीटी का जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, राष्ट्रपति का संबोधन

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Q1.पर्यावरणआसान

सितंबर 2026 में 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' विषय पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की कौन-सी स्मारिका जारी की गई?

  1. A.हरित न्यायम
  2. B.प्रकृति वंदन
  3. C.हरित भारत
  4. D.पर्यावरण न्याय
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. हरित न्यायम

व्याख्या

सही उत्तर हरित न्यायम है। 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एनजीटी की स्मारिका 'हरित न्यायम' जारी की और इसकी पहली प्रति भारत की राष्ट्रपति को भेंट की। यह दस्तावेज न्यायाधिकरण की स्थापना, विकास और उपलब्धियों का विवरण देता है और दो दिवसीय सम्मेलन में हुए विचारों को भी दर्ज करता है।

प्रकृति वंदन, हरित भारत और पर्यावरण न्याय मिलते-जुलते नाम हैं और इसी कारण विकल्पों में रखे गए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी इस स्मारिका का नाम नहीं है। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। सरकारी कार्यक्रमों में जारी प्रकाशनों के नाम अक्सर वन-लाइनर के रूप में पूछे जाते हैं, इसलिए यह भी याद रखें कि इसे किसने जारी किया (मनोहर लाल), पहली प्रति किसे मिली (राष्ट्रपति) और यह किस संस्था का प्रकाशन है (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण)।

Q2.पर्यावरणमध्यम

सितंबर 2026 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से जुड़ी विज्ञप्ति में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के रूप में किसका नाम है?

  1. A.न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव
  2. B.न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना
  3. C.तुषार मेहता
  4. D.मनोहर लाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव

व्याख्या

सही उत्तर न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव है। विज्ञप्ति में उन्हें एनजीटी का अध्यक्ष बताया गया है। अपने समापन भाषण में उन्होंने कहा कि दो दिन की चर्चाओं ने दिखाया है कि पर्यावरणीय चुनौतियों की पहचान से आगे बढ़कर ऐसे कानून, संस्थाएं और साझेदारियां बनाने की ज़रूरत है जो इनसे निपट सकें, और जलवायु कार्रवाई समावेशी और न्यायसंगत होनी चाहिए।

बाकी तीनों ने भी इसी सत्र में भाषण दिया, लेकिन उनके पद अलग हैं। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं। तुषार मेहता भारत के सॉलिसिटर जनरल हैं। मनोहर लाल केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों और विद्युत मंत्री हैं, जिन्होंने स्मारिका 'हरित न्यायम' जारी की। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। जब एक विज्ञप्ति में कई गणमान्य व्यक्ति हों, तो परीक्षक अक्सर उनके पद आपस में बदल देते हैं, इसलिए हर नाम को उसके पद के साथ याद रखें।

Q3.पर्यावरणआसान

सितंबर 2026 के एनजीटी सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किस सरकारी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि जनभागीदारी से पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाया जा सकता है?

  1. A.मिशन LiFE
  2. B.नमामि गंगे
  3. C.हरित भारत मिशन
  4. D.नगर वन योजना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मिशन LiFE

व्याख्या

सही उत्तर मिशन LiFE है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने युवाओं और आम लोगों को जोड़कर पर्यावरण चेतना बढ़ाने में सराहनीय काम किया है, और भारत सरकार की मिशन LiFE पहल ने दिखाया है कि जनभागीदारी और सामुदायिक पहल से पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सार्थक कार्य किए जा सकते हैं।

नमामि गंगे, हरित भारत मिशन और नगर वन योजना भी पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रम हैं, लेकिन राष्ट्रपति ने इस संबोधन में इनमें से किसी का उल्लेख नहीं किया। इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। उत्तर के साथ उनकी बाकी मुख्य बातें भी याद रखें: पारंपरिक ज्ञान पर आधारित और समुदाय को केंद्र में रखने वाले अनुकूलन उपाय, और ऐसा संधारणीय वनीकरण जो सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित न रहकर स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र फिर से स्थापित करे।

Q4.पर्यावरणमध्यम

एनआरएए ने जिस रिवार्ड कार्यक्रम के तहत तकनीकी समिति की बैठक की, उसका अर्थ क्या है?

  1. A.नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरुस्त करना
  2. B.कृषि और ग्रामीण विकास के लिए जल संसाधनों का नवीनीकरण
  3. C.पारिस्थितिकी, जल और वर्षा आधारित शुष्क भूमि की बहाली
  4. D.वाटरशेड और वर्षा आधारित विकास से ग्रामीण रोजगार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरुस्त करना

व्याख्या

सही उत्तर नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरुस्त करना है। विज्ञप्ति में इसी कार्यक्रम के तहत नई दिल्ली के एनएएससी परिसर में तकनीकी समिति की बैठक होने की बात है और वहीं यह अर्थ दिया गया है। दूसरा विकल्प गलत है, इसमें शब्द भरोसेमंद लगते हैं पर दिए गए अर्थ से मेल नहीं खाते और सबसे बड़ी बात यह कि इसमें जलवायु-अनुकूल होने का भाव छूट जाता है, जो कार्यक्रम के उद्देश्य के केंद्र में है। तीसरा विकल्प भी इसी कारण गलत है और इसमें पारिस्थितिकी तथा शुष्क भूमि जैसे शब्द जोड़ दिए गए हैं जो नाम में नहीं हैं। चौथा विकल्प गलत है क्योंकि यह रोजगार की योजना नहीं है, और इसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों से मिला देना एक आम भूल है। कार्यक्रम के साथ उसे चलाने वाली संस्था और मंत्रालय भी याद रखें।

Q5.पर्यावरणमध्यम

एनआरएए जो राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश तैयार कर रहा है, वे किस योजना के घटक के तहत लागू होंगे?

  1. A.प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का वाटरशेड विकास घटक
  2. B.प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  3. C.सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन
  4. D.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का वाटरशेड विकास घटक

व्याख्या

सही उत्तर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का वाटरशेड विकास घटक है, और वह भी इसके तीसरे चरण में। विज्ञप्ति में कहा गया है कि तैयार हो रहे दिशानिर्देश देश में आने वाली पीढ़ी के वाटरशेड विकास के लिए इसी घटक के तहत उपयोग होंगे, इसीलिए बैठक का ज्यादातर समय मसौदे के दावों की जांच और दोनों राज्यों के आंकड़ों पर लगा। दूसरे विकल्प वाली फसल बीमा योजना गलत है, वह फसल के नुकसान की भरपाई करती है और वाटरशेड दिशानिर्देश बनाने से उसका कोई संबंध नहीं। तीसरे विकल्प वाला सतत कृषि मिशन गलत है, यह अलग कार्यक्रम है और विज्ञप्ति में इसका नाम कहीं नहीं आता। चौथे विकल्प वाली कृषि विकास योजना भी इसी कारण गलत है। दिशानिर्देशों को वाटरशेड घटक और उसके चरण के साथ जोड़कर याद रखें।