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संयुक्त राष्ट्र बैठक में भारत ने न्यायसंगत पीएबीएस मांगा

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने रोगजनक पहुंच और लाभ साझाकरण की निष्पक्ष प्रणाली पर जोर दिया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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संयुक्त राष्ट्र बैठक में भारत ने न्यायसंगत पीएबीएस मांगा

चर्चा में क्यों

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 26 सितंबर 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव का वह वक्तव्य जारी किया जो उन्होंने 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में महामारी पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक में दिया, जिसमें भारत ने निष्पक्ष पीएबीएस प्रणाली की मांग रखी।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 25 सितंबर को हुई महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया पर उच्च स्तरीय बैठक में भारत का पक्ष केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने रखा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से मिले सबक को सतत निवेश, मजबूत संस्थागत क्षमता और झटका झेल सकने वाली स्वास्थ्य प्रणालियों में बदलना जरूरी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने उनका वक्तव्य 26 सितंबर 2026 को जारी किया।

भारत की मुख्य मांग

भारत के हस्तक्षेप का केंद्र रोगजनक पहुंच और लाभ साझाकरण यानी पीएबीएस की न्यायसंगत व्यवस्था रही। स्वास्थ्य सचिव ने मई 2025 में अपनाए गए डब्ल्यूएचओ महामारी समझौते को मील का पत्थर बताया, पर जोड़ा कि इसकी विश्वसनीयता इस बात पर टिकी है कि रोगजनक और जैविक संसाधन साझा करने वाले देशों को बदले में टीके, निदान साधन, उपचार और प्रौद्योगिकियां समय पर मिलें तथा उनकी राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान हो। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक घोषणा-पत्र को पीएबीएस अनुबंध पर चल रही वार्ता का परिणाम पहले से तय नहीं मानना चाहिए और उसे हर देश की परिस्थिति और क्षमता के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए। एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर भी उन्होंने घरेलू कानून, अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप अमल की बात कही।

कोविड-19 का भारतीय अनुभव

स्वास्थ्य सचिव ने याद दिलाया कि महामारी के दौरान भारत ने लगभग 100 देशों और संयुक्त राष्ट्र की दो संस्थाओं को 30 करोड़ टीके की खुराकें भेजीं तथा 150 से अधिक देशों को चिकित्सा सहायता दी। उन्होंने इसे एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के सिद्धांत और ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता से जोड़ा। उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु का दर्जा देने की मांग भी रखी, क्योंकि निगरानी, टीकाकरण, जोखिम संचार, आपूर्ति श्रृंखला और सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता डिजिटल साधनों के सहारे ही चल पाई। देश के भीतर प्रयोगशाला नेटवर्क, आपात समन्वय, स्वास्थ्य कार्यबल, भंडार और नैदानिक देखभाल क्षमता का विस्तार किया जा रहा है, जिसका आधार घरेलू वित्तपोषण है।

बैठक के अन्य वक्ता

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम गेब्रियसस ने महामारी समझौते और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों में संशोधन को प्रगति बताया और चेताया कि पीएबीएस प्रणाली पर वार्ता में देरी अगली महामारी से निपटने की क्षमता को कमजोर कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना मोहम्मद ने आत्मसंतुष्टि से बचने की चेतावनी दी और शुरुआती पहचान के लिए समुदाय आधारित प्रणालियों पर बल दिया।

महत्व

यह बैठक सदस्य देशों के लिए प्रगति नापने, कमियों को चिह्नित करने और भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए न्यायसंगत तथा टिकाऊ प्रणालियों का संकल्प दोहराने का अवसर बनी।

महत्वपूर्ण तथ्य

बैठकमहामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक
स्थान और तिथिसंयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क, 25 सितंबर
भारत का प्रतिनिधित्वकेंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव
मुख्य मांगरोगजनक पहुंच और लाभ साझाकरण की निष्पक्ष प्रणाली
डब्ल्यूएचओ महामारी समझौतामई 2025 में अपनाया गया
कोविड-19 में दी गई खुराकें30 करोड़, लगभग 100 देशों और दो संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं को
चिकित्सा सहायता150 से अधिक देशों को
भारत का उद्धृत सिद्धांतएक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य
डब्ल्यूएचओ महानिदेशकटेड्रोस एडनोम गेब्रियसस
संयुक्त राष्ट्र उप महासचिवअमीना मोहम्मद

परीक्षा की दृष्टि से

बैठक का नाम, उसका स्थान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क और भारत की ओर से वक्ता केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव याद रखें। पीएबीएस का पूरा नाम, डब्ल्यूएचओ महामारी समझौते का मई 2025 में अपनाया जाना तथा कोविड-19 के आंकड़े यानी लगभग 100 देशों को 30 करोड़ खुराकें और 150 से अधिक देशों को सहायता परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अंतरराष्ट्रीयआसान

महामारी पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?

  1. A.केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री
  2. B.केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव
  3. C.संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि
  4. D.भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव

व्याख्या

सही उत्तर है केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, जिन्होंने 25 सितंबर को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत का पक्ष रखा और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराई। विकल्प क गलत है, क्योंकि यह वक्तव्य मंत्रालय की शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी ने दिया, न कि मंत्री ने। विकल्प ग उस राजदूत की ओर संकेत करता है जो संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन का नेतृत्व करते हैं, पर इस बैठक में स्वास्थ्य से जुड़ा हस्तक्षेप मंत्रालय की ओर से आया। विकल्प घ उस संस्था के प्रमुख का नाम है जिसकी महामारी के दौरान बड़ी भूमिका रही, फिर भी इस बैठक में उन्होंने भाषण नहीं दिया। ऐसे प्रश्नों में पद को ध्यान से पढ़ना चाहिए, इसलिए बैठक, स्थान और वक्ता का पद तीनों साथ याद रखें।

Q2.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

डब्ल्यूएचओ महामारी समझौते के संदर्भ में पीएबीएस का आशय क्या है?

  1. A.महामारी चेतावनी और जैवसुरक्षा प्रणाली
  2. B.जैविक नमूनों तक सार्वजनिक पहुंच
  3. C.रोगजनक पहुंच और लाभ साझाकरण
  4. D.तैयारी और बुनियादी निगरानी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रोगजनक पहुंच और लाभ साझाकरण

व्याख्या

सही उत्तर है रोगजनक पहुंच और लाभ साझाकरण। भारत का तर्क था कि समझौते की परख इसी बात से होगी कि यह प्रणाली कितनी निष्पक्ष है, अर्थात रोगजनक या जैविक संसाधन साझा करने वाले देश को बदले में टीके, निदान साधन, उपचार और अन्य प्रौद्योगिकियां समय पर मिलें और उसकी संप्रभुता बनी रहे। विकल्प क, विकल्प ख और विकल्प घ गढ़े हुए विस्तार हैं, जो स्वास्थ्य आपात स्थितियों की शब्दावली से एक-एक शब्द उठाकर भ्रम पैदा करते हैं, पर समझौते में प्रयुक्त शब्द यही नहीं हैं। यह भी याद रखें कि इस प्रणाली का अनुबंध अब भी वार्ता में है, भारत ने घोषणा-पत्र से उस वार्ता का परिणाम पहले से तय न करने को कहा, और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने वार्ता जल्द पूरी करने पर बल दिया।

Q3.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

बैठक में बताए अनुसार कोविड-19 के दौरान भारत ने कितनी टीका खुराकें उपलब्ध कराई थीं?

  1. A.लगभग 60 देशों को 15 करोड़ खुराकें
  2. B.लगभग 100 देशों और दो संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं को 30 करोड़ खुराकें
  3. C.लगभग 120 देशों को 50 करोड़ खुराकें
  4. D.लगभग 90 देशों को 70 करोड़ खुराकें
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लगभग 100 देशों और दो संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं को 30 करोड़ खुराकें

व्याख्या

सही उत्तर है लगभग 100 देशों और दो संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं को 30 करोड़ खुराकें। भारत ने इस आपूर्ति के साथ 150 से अधिक देशों को दी गई चिकित्सा सहायता का भी उल्लेख किया और इसे एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के सिद्धांत तथा ग्लोबल साउथ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। विकल्प क खुराकों की संख्या को आधा कर देता है और प्राप्तकर्ता देशों की सूची भी छोटी कर देता है। विकल्प ग और विकल्प घ आपूर्ति को बैठक में कही गई बात से कहीं अधिक बढ़ा देते हैं। परीक्षा में यह आंकड़ा जोड़े के रूप में पूछा जाता है, इसलिए खुराकों की संख्या और देशों की संख्या साथ-साथ याद रखें तथा दो संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं वाला अंश भी न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएबीएस का पूरा नाम क्या है?

रोगजनक पहुंच और लाभ साझाकरण। भारत ने कहा कि मई 2025 में अपनाए गए डब्ल्यूएचओ महामारी समझौते की विश्वसनीयता इसी प्रणाली की निष्पक्षता पर निर्भर करेगी।

संयुक्त राष्ट्र की इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने, 25 सितंबर को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में। उन्होंने कहा कि महामारी से निपटने की तैयारी साझा जिम्मेदारी है।

कोविड-19 के दौरान भारत ने कितनी सहायता दी थी?

भारत ने लगभग 100 देशों और संयुक्त राष्ट्र की दो संस्थाओं को 30 करोड़ टीके की खुराकें भेजीं तथा 150 से अधिक देशों को चिकित्सा सहायता दी।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS