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GK24

अंताल्या में कॉप-31 के लिए भारत की प्राथमिकताएं तय

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि तुर्किये के अंताल्या में होने वाले यूएनएफसीसीसी कॉप-31 में भारत अनुमानित जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण पर जोर देगा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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अंताल्या में कॉप-31 के लिए भारत की प्राथमिकताएं तय

चर्चा में क्यों

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में तुर्किये के अंताल्या में होने वाले यूएनएफसीसीसी कॉप-31 के लिए भारत की प्राथमिकताएं तथा येरेवान में सीबीडी कॉप-17 और उलानबाटर में यूएनसीसीडी कॉप-17 में भारत की भागीदारी के परिणाम बताए।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के इकतीसवें पक्षकार सम्मेलन में भारत क्या मांगें रखेगा। यह सम्मेलन तुर्किये के अंताल्या में होगा। नई दिल्ली में पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि भारत समाधान केंद्रित दृष्टिकोण के साथ वार्ता में जाएगा, ग्लोबल साउथ के लिए व्यावहारिक समाधान लेकर जाएगा और जी-77 तथा चीन समूह, समान विचारधारा वाले विकासशील देशों और बेसिक समूह के साथ मिलकर काम करेगा।

भारत की मांगें

  • जलवायु वित्त: सम्मेलन में जलवायु वित्त कार्य कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय। मंत्री ने कहा कि कन्वेंशन के अनुच्छेद 9.1 के तहत वित्त विकसित देशों का दायित्व है और यह अनुमानित, मुख्यतः सार्वजनिक तथा रियायती होना चाहिए, जिससे गरीब देशों पर कर्ज का बोझ न बढ़े।
  • शमन: ग्लोबल स्टॉकटेक पक्षकारों से संचालित, सहायक और गैर-दंडात्मक रहे, जलवायु लक्ष्यों की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रकृति का सम्मान हो और ऊपर से थोपे गए नए लक्ष्य न हों।
  • अनुकूलन: अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य के संकेतक स्वैच्छिक रहें और वित्त पाने की शर्त न बनें, साथ ही अनुकूलन वित्त बढ़ाया जाए।
  • न्यायसंगत परिवर्तन: न्यायसंगत परिवर्तन कार्य कार्यक्रम पक्षकार संचालित व्यवस्था के जरिये जारी रहे, जिसे जलवायु न्याय, विकास के अधिकार और सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता की दृष्टि से देखा जाए।
  • तकनीक: तकनीक हस्तांतरण विकसित देशों का दायित्व है और लागत, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा व्यापार से जुड़ी अड़चनें दूर होनी चाहिए। कार्बन बाजार में भागीदारी स्वैच्छिक रहे।

भारत खेती में अनुकूलन को खाद्य सुरक्षा तथा छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से भी जोड़ेगा। सम्मेलन में भारत का कार्यक्रम स्वीडन के साथ लीडआईटी 3.0, तटीय लचीलेपन पर कार्यक्रम तथा अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस और वनों पर परिचर्चा शामिल करता है।

अन्य दो कॉप के परिणाम

मंत्री ने जैव विविधता और भूमि वार्ताओं की जानकारी भी दी। आर्मेनिया के येरेवान में सीबीडी कॉप-17 में भारत ने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के न्यायसंगत कार्यान्वयन का समर्थन किया, विकसित देशों से अनुच्छेद 20(2) के तहत दायित्व निभाने की मांग की, दानकर्ता आधार के किसी अनिवार्य विस्तार का विरोध किया और डिजिटल सीक्वेंस सूचना पर काली फंड सहित बहुपक्षीय तरीके से लाभ साझा करने की बात रखी।

मंगोलिया के उलानबाटर में यूएनसीसीडी कॉप-17 में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष चुना गया और उसने 2030 तक दो करोड़ साठ लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि बहाल करने का संकल्प दोहराया। भारत ने सूखे पर प्रतिक्रिया से सूखे के प्रति लचीलेपन की ओर बढ़ने की बात कही, चरागाहों की समुदाय आधारित बहाली का समर्थन किया, पशुपालकों को भागीदार बताया और भारत के घास के मैदानों तथा अन्य खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों पर अपनी पहली मार्गदर्शिका जारी की।

महत्वपूर्ण तथ्य

सम्मेलनयूएनएफसीसीसी का कॉप-31
स्थान और तिथिअंताल्या, तुर्किये, 9 से 20 नवंबर 2026
भारत का पक्ष रखाभूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री
वित्त पर मांगजलवायु वित्त कार्य कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय; वित्त अनुच्छेद 9.1 के तहत दायित्व
सहयोगी समूहजी-77 और चीन, समान विचारधारा वाले विकासशील देश, बेसिक
साझेदारी कार्यक्रमस्वीडन के साथ लीडआईटी 3.0
सीबीडी कॉप-17येरेवान, आर्मेनिया; कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा, काली फंड, अनुच्छेद 20(2)
यूएनसीसीडी कॉप-17उलानबाटर, मंगोलिया; भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष चुना गया
भूमि बहाली संकल्प2030 तक दो करोड़ साठ लाख हेक्टेयर से अधिक

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कॉप-31 का स्थान और तिथियां (अंताल्या, तुर्किये, 9 से 20 नवंबर 2026), जलवायु वित्त कार्य कार्यक्रम शुरू करने की मांग, वित्त पर अनुच्छेद 9.1 तथा जैव विविधता कन्वेंशन का अनुच्छेद 20(2), भारत के सहयोगी समूह (जी-77 और चीन, एलएमडीसी, बेसिक), स्वीडन के साथ लीडआईटी 3.0, सीबीडी कॉप-17 का स्थान येरेवान, यूएनसीसीडी कॉप-17 का स्थान उलानबाटर, एशिया-प्रशांत समूह की अध्यक्षता और 2030 तक दो करोड़ साठ लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि बहाली का संकल्प।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन का कॉप-31 कहां हो रहा है?

  1. A.अंताल्या, तुर्किये
  2. B.येरेवान, आर्मेनिया
  3. C.उलानबाटर, मंगोलिया
  4. D.बेलेम, ब्राजील
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अंताल्या, तुर्किये

जलवायु कन्वेंशन का इकतीसवां पक्षकार सम्मेलन यहीं 9 से 20 नवंबर 2026 तक हो रहा है, और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने नई दिल्ली की प्रेस वार्ता में इन वार्ताओं के लिए भारत का पक्ष रखा।

Q2.पर्यावरणकठिन

भारत के अनुसार जलवायु कन्वेंशन के किस अनुच्छेद के तहत जलवायु वित्त देना विकसित देशों का दायित्व है?

  1. A.अनुच्छेद 4.2
  2. B.अनुच्छेद 6
  3. C.अनुच्छेद 9.1
  4. D.अनुच्छेद 12
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 9.1

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि जलवायु वित्त उपलब्ध कराना इस अनुच्छेद के तहत विकसित देशों पर डाला गया दायित्व है, और यह वित्त अनुमानित, मुख्यतः सार्वजनिक तथा रियायती होना चाहिए, जिससे विकासशील देशों पर कर्ज का बोझ न बढ़े।

Q3.पर्यावरणमध्यम

उलानबाटर में मरुस्थलीकरण कन्वेंशन के सत्रहवें सत्र में भारत किस पद पर चुना गया?

  1. A.पक्षकार सम्मेलन का अध्यक्ष
  2. B.एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष
  3. C.विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति का अध्यक्ष
  4. D.ग्लोबल स्टॉकटेक का सह-अध्यक्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष

मंगोलिया की राजधानी में हुए इस सत्र में भारत ने यह अध्यक्षता संभाली और फिर 2030 तक दो करोड़ साठ लाख हेक्टेयर से अधिक बिगड़ी भूमि बहाल करने का संकल्प दोहराया, साथ ही बहाली और सूखा लचीलेपन के लिए विविध, पर्याप्त तथा निरंतर अंतरराष्ट्रीय वित्त की मांग रखी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनएफसीसीसी कॉप-31 कहां और कब हो रहा है?

तुर्किये के अंताल्या में, 9 से 20 नवंबर 2026 तक। भारत इसमें समाधान केंद्रित दृष्टिकोण के साथ जाएगा और जी-77 तथा चीन, समान विचारधारा वाले विकासशील देशों तथा बेसिक के साथ काम करेगा।

जलवायु वित्त पर कॉप-31 में भारत की मुख्य मांग क्या है?

जलवायु वित्त कार्य कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय। भारत का मत है कि अनुच्छेद 9.1 के तहत वित्त विकसित देशों का दायित्व है और यह अनुमानित, मुख्यतः सार्वजनिक तथा रियायती होना चाहिए, जिससे कर्ज न बढ़े।

उलानबाटर में यूएनसीसीडी कॉप-17 में भारत ने क्या संकल्प दोहराया?

एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष चुने जाने के बाद भारत ने 2030 तक दो करोड़ साठ लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि बहाल करने का संकल्प दोहराया और बहाली तथा सूखा लचीलेपन के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय वित्त की मांग की।

स्रोत

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