जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन का कॉप-31 कहां हो रहा है?
- A.अंताल्या, तुर्किये
- B.येरेवान, आर्मेनिया
- C.उलानबाटर, मंगोलिया
- D.बेलेम, ब्राजील
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर अंताल्या, तुर्किये है। जलवायु कन्वेंशन का इकतीसवां पक्षकार सम्मेलन यहीं 9 से 20 नवंबर 2026 तक हो रहा है, और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने नई दिल्ली की प्रेस वार्ता में इन वार्ताओं के लिए भारत का पक्ष रखा। विकल्प B में आर्मेनिया के येरेवान का नाम है, जहां जैव विविधता कन्वेंशन के पक्षकारों की सत्रहवीं बैठक हुई थी, जो एक अलग संधि है। विकल्प C में मंगोलिया के उलानबाटर का नाम है, जो मरुस्थलीकरण कन्वेंशन के सत्रहवें सत्र का स्थान था, जहां भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष चुना गया। विकल्प D में दिया स्थान इस वार्ता में बताए गए स्थानों में शामिल नहीं है। तीनों कन्वेंशन और उनके अलग-अलग मेजबान शहरों को अलग-अलग याद रखना ही इस तरह के प्रश्नों की असली परीक्षा है।
पूरा लेख पढ़ें: अंताल्या में कॉप-31 के लिए भारत की प्राथमिकताएं तय
अभ्यास प्रश्न
भारत के अनुसार जलवायु कन्वेंशन के किस अनुच्छेद के तहत जलवायु वित्त देना विकसित देशों का दायित्व है?
- A.अनुच्छेद 4.2
- B.अनुच्छेद 6
- C.अनुच्छेद 9.1
- D.अनुच्छेद 12
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पर्यावरण मंत्री ने कहा कि जलवायु वित्त उपलब्ध कराना इस अनुच्छेद के तहत विकसित देशों पर डाला गया दायित्व है, और यह वित्त अनुमानित, मुख्यतः सार्वजनिक तथा रियायती होना चाहिए, जिससे विकासशील देशों पर कर्ज का बोझ न बढ़े।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उलानबाटर में मरुस्थलीकरण कन्वेंशन के सत्रहवें सत्र में भारत किस पद पर चुना गया?
- A.पक्षकार सम्मेलन का अध्यक्ष
- B.एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष
- C.विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति का अध्यक्ष
- D.ग्लोबल स्टॉकटेक का सह-अध्यक्ष
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मंगोलिया की राजधानी में हुए इस सत्र में भारत ने यह अध्यक्षता संभाली और फिर 2030 तक दो करोड़ साठ लाख हेक्टेयर से अधिक बिगड़ी भूमि बहाल करने का संकल्प दोहराया, साथ ही बहाली और सूखा लचीलेपन के लिए विविध, पर्याप्त तथा निरंतर अंतरराष्ट्रीय वित्त की मांग रखी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कृषि में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली पीएम कुसुम योजना कब शुरू की गई थी?
- A.फरवरी 2019
- B.फरवरी 2015
- C.अगस्त 2020
- D.जनवरी 2023
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प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, जिसे संक्षेप में पीएम कुसुम कहा जाता है, उसी समय शुरू हुई थी, ताकि खेती में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़े, डीजल पर निर्भरता घटे और किसान अपनी कमाई के स्रोत बढ़ा सकें।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एग्रीवोल्टाइक्स के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा दूसरा नाम प्रयोग होता है?
- A.तैरता सौर
- B.दोहरे उपयोग वाला सौर
- C.संकेंद्रित सौर ऊर्जा
- D.रूफटॉप सौर
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एग्रीवोल्टाइक्स को एग्रीसोलर या दोहरे उपयोग वाला सौर भी कहा जाता है, और ये नाम उसी विचार की ओर संकेत करते हैं कि एक ही खेत दो काम करे — फसल उगाए और बिजली बनाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अगस्त 2025 तक भारत में कितनी एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चालू थीं और उनकी स्थापित क्षमता कितनी थी?
- A.26 परियोजनाएं, 27.54 मेगावाट
- B.36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट
- C.46 परियोजनाएं, 47.54 मेगावाट
- D.36 परियोजनाएं, 137.54 मेगावाट
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अगस्त 2025 तक भारत की चालू एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की यही स्थिति थी और इनके साथ 10 पायलट परियोजनाएं विकासाधीन थीं।
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