भारत और जापान ने जारी किया जेसीएम परिचालन मैनुअल
भारत और जापान ने नई दिल्ली में संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र का परिचालन मैनुअल जारी किया, जो पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत बनी कार्बन बाजार व्यवस्था है।

चर्चा में क्यों
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 05 अक्टूबर 2026 को बताया कि भारत और जापान ने अपने संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र का परिचालन मैनुअल जारी किया है, जिससे पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत यह कार्बन बाजार व्यवस्था तैयारी के चरण से कार्यान्वयन की ओर बढ़ गई है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 05 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति में बताया कि भारत और जापान ने भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (जेसीएम) का परिचालन मैनुअल जारी कर दिया है। यह मैनुअल 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत में जापान के राजदूत श्री केइची ओनो तथा मंत्रालय के तत्कालीन सचिव श्री तन्मय कुमार ने संयुक्त रूप से जारी किया।
यह तंत्र क्या करता है
दोनों देशों के बीच यह संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र भारत में उन्नत कम कार्बन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ाने, जलवायु वित्त जुटाने, प्रौद्योगिकी सहयोग को सुगम बनाने तथा उच्च गुणवत्ता वाले उत्सर्जन में कमी और उत्सर्जन हटाने के कार्यों को सहारा देने के लिए बनाया गया है। मंत्रालय के अनुसार यह व्यवस्था भारत में सतत विकास में योगदान देगी और साथ ही अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों में भरोसा तथा पारदर्शिता भी मजबूत करेगी।
पेरिस समझौते से संबंध
यह मैनुअल पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत सहयोग को व्यावहारिक रूप देता है। यही प्रावधान दो देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तांतरित शमन परिणामों के माध्यम से सहयोग की अनुमति देता है। ऐसी व्यवस्था में एक देश की परियोजना से अर्जित कार्बन क्रेडिट साझेदार देश के जलवायु लक्ष्य में गिने जा सकते हैं, इसलिए मापन और प्राधिकरण के स्पष्ट नियम आवश्यक होते हैं।
व्यवस्था के तीन चरण
- भारत और जापान के बीच सहयोग ज्ञापन पर 07 अगस्त 2025 को हस्ताक्षर हुए।
- तंत्र के लिए कार्यान्वयन नियम 08 जून 2026 को अपनाया गया।
- परिचालन मैनुअल 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जारी हुआ और इसकी घोषणा 05 अक्टूबर 2026 को हुई।
मैनुअल में क्या है
मैनुअल में एक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यापक प्रक्रियात्मक ढांचा दिया गया है, जो पूरी परियोजना प्रक्रिया को कवर करता है। यह प्रक्रिया प्रोजेक्ट आइडिया नोट जमा करने से शुरू होती है और जेसीएम क्रेडिट जारी करने तथा उनके प्राधिकरण तक जाती है। मंत्रालय इस मैनुअल के जारी होने को संस्थागत तैयारी से वास्तविक कार्यान्वयन की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण पड़ाव मानता है, क्योंकि पहले के दस्तावेजों ने व्यवस्था खड़ी की थी जबकि मैनुअल परियोजना विकासकर्ता को बताता है कि उसे क्या और किस क्रम में प्रस्तुत करना है।
परीक्षा की दृष्टि
कार्बन बाजार से जुड़े प्रश्न अक्सर तंत्र और उसके आधार वाले संधि प्रावधान की जोड़ी पर आते हैं, इसलिए संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र तथा पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 का संबंध, दोनों देश, संबंधित मंत्रालय और तीनों तिथियों का क्रम याद रखना चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| तंत्र | भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (जेसीएम) |
|---|---|
| जारी दस्तावेज | भारत-जापान जेसीएम का परिचालन मैनुअल |
| कब जारी हुआ | 30 सितंबर 2026, नई दिल्ली; घोषणा 05 अक्टूबर 2026 |
| किसने जारी किया | जापान के राजदूत केइची ओनो तथा तत्कालीन सचिव (एमओईएफसीसी) तन्मय कुमार |
| संधि आधार | पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6.2 |
| सहयोग ज्ञापन | 07 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित |
| कार्यान्वयन नियम | 08 जून 2026 को अपनाया गया |
| परियोजना प्रक्रिया | प्रोजेक्ट आइडिया नोट से जेसीएम क्रेडिट जारी करने और प्राधिकरण तक |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र भारत और जापान की व्यवस्था है और पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 पर आधारित है; परिचालन मैनुअल 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जापान के राजदूत केइची ओनो तथा तत्कालीन पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार ने जारी किया; सहयोग ज्ञापन 07 अगस्त 2025 का और कार्यान्वयन नियम 08 जून 2026 का है; परियोजना प्रक्रिया प्रोजेक्ट आइडिया नोट से शुरू होती है।
अभ्यास प्रश्न
वर्ष 2026 में जिस संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र का परिचालन मैनुअल जारी हुआ, वह भारत और किस देश के बीच की व्यवस्था है?
- A.जर्मनी
- B.जापान
- C.दक्षिण कोरिया
- D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जापान
व्याख्या
सही उत्तर जापान है। पर्यावरण मंत्रालय की विज्ञप्ति में इस दस्तावेज को भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र का परिचालन मैनुअल बताया गया है, और इसे भारत में जापान के राजदूत श्री केइची ओनो तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्कालीन सचिव श्री तन्मय कुमार ने जारी किया। विकल्प A, C और D गलत हैं, क्योंकि इस विज्ञप्ति में जर्मनी, दक्षिण कोरिया या ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी कोई व्यवस्था नहीं है। यह तंत्र द्विपक्षीय है और इसका आधार वह सहयोग ज्ञापन है जिस पर भारत तथा जापान ने 07 अगस्त 2025 को हस्ताक्षर किए, जिसके बाद 08 जून 2026 को कार्यान्वयन नियम अपनाया गया। यह तंत्र पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत आता है और इसका उद्देश्य भारत की परियोजनाओं में कम कार्बन प्रौद्योगिकी तथा जलवायु वित्त लाना है। परीक्षार्थी को देश, तंत्र और संधि प्रावधान, तीनों की जोड़ी साथ याद रखनी चाहिए।
भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र पेरिस समझौते के किस अनुच्छेद के अंतर्गत सहयोग को व्यावहारिक रूप देता है?
- A.अनुच्छेद 4.1
- B.अनुच्छेद 5.3
- C.अनुच्छेद 6.2
- D.अनुच्छेद 9.4
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 6.2
व्याख्या
सही उत्तर अनुच्छेद 6.2 है। विज्ञप्ति के अनुसार मैनुअल का जारी होना पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत भारत और जापान के द्विपक्षीय सहयोग को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। यही प्रावधान देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तांतरित शमन परिणामों के माध्यम से सहयोग की अनुमति देता है। विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि इस तंत्र के संदर्भ में विज्ञप्ति में इनमें से किसी प्रावधान का उल्लेख नहीं है और इन्हें जोड़ना तंत्र के विधिक आधार को गलत बताना होगा। परीक्षा के लिए तथ्यों की यह श्रृंखला उपयोगी है, अर्थात 07 अगस्त 2025 के सहयोग ज्ञापन से व्यवस्था बनी, 08 जून 2026 के कार्यान्वयन नियम से यह तय हुआ कि काम कैसे होगा, और 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जारी परिचालन मैनुअल से पूरी परियोजना प्रक्रिया की विधि मिली, जो प्रोजेक्ट आइडिया नोट से शुरू होती है।
भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र से जुड़ा कौन-सा दस्तावेज 08 जून 2026 को अपनाया गया था?
- A.सहयोग ज्ञापन
- B.कार्यान्वयन नियम
- C.परिचालन मैनुअल
- D.प्रोजेक्ट आइडिया नोट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कार्यान्वयन नियम
व्याख्या
सही उत्तर कार्यान्वयन नियम है। विज्ञप्ति में तीन चरण क्रम से दिए गए हैं और इनमें कार्यान्वयन नियम वही दस्तावेज है जो 08 जून 2026 को अपनाया गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि भारत और जापान के बीच सहयोग ज्ञापन पर इससे पहले 07 अगस्त 2025 को हस्ताक्षर हुए थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि परिचालन मैनुअल वह दस्तावेज है जो 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जारी हुआ और जिसकी घोषणा इस विज्ञप्ति में की गई; मंत्रालय इसे संस्थागत तैयारी से कार्यान्वयन की ओर बढ़ने का पड़ाव मानता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि प्रोजेक्ट आइडिया नोट कोई द्विपक्षीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि मैनुअल में वर्णित परियोजना प्रक्रिया का पहला प्रस्तुतीकरण है, और यह प्रक्रिया जेसीएम क्रेडिट जारी करने तथा प्राधिकरण तक चलती है। तीनों तिथियों को तीन दस्तावेजों से मिलाकर याद रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र पेरिस समझौते के किस प्रावधान के तहत काम करता है?
पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत। 30 सितंबर 2026 को जारी परिचालन मैनुअल इसी प्रावधान के अंतर्गत भारत और जापान के द्विपक्षीय सहयोग को व्यावहारिक रूप देता है।
भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र का परिचालन मैनुअल किसने जारी किया?
भारत में जापान के राजदूत श्री केइची ओनो तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्कालीन सचिव श्री तन्मय कुमार ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में इसे संयुक्त रूप से जारी किया।
इस तंत्र के उद्देश्य क्या हैं?
भारत में उन्नत कम कार्बन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ाना, जलवायु वित्त जुटाना, प्रौद्योगिकी सहयोग को सुगम बनाना तथा उच्च गुणवत्ता वाले उत्सर्जन में कमी और उत्सर्जन हटाने के कार्यों को सहारा देना, और साथ ही अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों में पारदर्शिता मजबूत करना।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2319373 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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