सीएक्यूएम ने 34 जिलों में तैनात किए फ्लाइंग स्क्वॉड
पराली जलाने से रोकने के लिए सीएक्यूएम ने पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों में 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं।

चर्चा में क्यों
05 अक्टूबर 2026 को पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि सीएक्यूएम ने पराली जलाने के विरुद्ध मैदानी निगरानी बढ़ाते हुए पंजाब और हरियाणा के 34 जिलों में 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 की अवधि के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 05 अक्टूबर 2026 को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पंजाब तथा हरियाणा के 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात कर अपनी मैदानी निगरानी और सख्त कर दी है। ये दल 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक काम करेंगे, क्योंकि इसी अवधि में धान की कटाई होती है और फसल अवशेष जलाने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। यह तैनाती सीएक्यूएम द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को भेजे गए पत्र के बाद की गई है।
34 जिलों का बंटवारा
| पंजाब | 18 जिले |
| हरियाणा | 16 जिले |
| तैनाती अवधि | 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 |
पंजाब में ये दल धान उत्पादक प्रमुख जिलों में तैनात हैं, जिनमें संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब शामिल हैं। हरियाणा में जींद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, सोनीपत, रोहतक, सिरसा, करनाल, पलवल, झज्जर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, पानीपत और हांसी को कवर किया गया है।
दल क्या करेंगे
- अपने आवंटित जिले में जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे।
- किसानों, पराली सुरक्षा बल, जिला अधिकारियों, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे।
- एसएएस नगर स्थित सीएक्यूएम सेल तथा आयोग के साथ तालमेल रखेंगे।
- जमीनी स्थिति और उठाए गए रोकथाम के कदमों की जानकारी प्रतिदिन सीएक्यूएम सेल को देंगे।
तैनाती क्रमिक चरणों में की गई है और दलों को अलग-अलग अवधि के लिए जिले सौंपे गए हैं, जिससे वर्ष 2026 के पूरे कटाई मौसम में निगरानी बनी रहे।
यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है
दोनों राज्यों में धान के अवशेष जलाना अक्टूबर और नवंबर में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता तेजी से गिरने के कारणों में से एक है। सीएक्यूएम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तथा निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के लिए बनी संस्था है और वह राज्य सरकारों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा जिला प्रशासनों के साथ रोकथाम उपायों की समीक्षा करता रहा है। आयोग ने बार-बार कहा है कि पराली जलाने की रोकथाम के लिए किसानों तथा अन्य संबंधित पक्षों का सहयोग आवश्यक है। दलों की दैनिक रिपोर्ट से आयोग स्थिति का लगातार आकलन कर सकेगा और संबंधित अधिकारियों के साथ आगे की कार्रवाई कर सकेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्था | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) |
|---|---|
| कार्रवाई | पराली जलाने के विरुद्ध फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती |
| शामिल जिले | कुल 34, पंजाब में 18 और हरियाणा में 16 |
| अवधि | 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 |
| पत्र भेजा गया | केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को |
| रिपोर्टिंग | एसएएस नगर स्थित सीएक्यूएम सेल को प्रतिदिन |
| मैदानी सहयोगी | किसान, पराली सुरक्षा बल, जिला अधिकारी, राज्य नोडल अधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड |
| घोषणा | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, 05 अक्टूबर 2026 |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें सीएक्यूएम का पूरा नाम और यह कि वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तथा निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की संस्था है; 34 जिलों का आंकड़ा, जिसमें पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिले हैं; तैनाती की अवधि 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026; केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पराली सुरक्षा बल की भूमिका; एसएएस नगर का सीएक्यूएम सेल और दैनिक रिपोर्ट की शर्त।
अभ्यास प्रश्न
सीएक्यूएम ने पराली जलाने की रोकथाम के लिए पंजाब और हरियाणा के कितने जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं?
- A.24 जिले
- B.30 जिले
- C.34 जिले
- D.42 जिले
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 34 जिले
व्याख्या
सही उत्तर 34 जिले है। पर्यावरण मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार दोनों राज्यों के 34 जिलों में 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 की अवधि के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं, और इसमें पंजाब के 18 तथा हरियाणा के 16 जिले बताए गए हैं। विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि ये विज्ञप्ति में दिए आंकड़े से मेल नहीं खाते, और अठारह तथा सोलह का योग केवल चौंतीस ही बनता है। पंजाब के लिए नामित जिलों में संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, बठिंडा, अमृतसर, पटियाला और लुधियाना शामिल हैं, जबकि हरियाणा के लिए जींद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, करनाल तथा कुरुक्षेत्र जैसे जिले बताए गए हैं। यह तैनाती सीएक्यूएम द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र भेजने के बाद हुई, और दल जमीनी स्थिति की रिपोर्ट एसएएस नगर स्थित सीएक्यूएम सेल को प्रतिदिन देते हैं। परीक्षार्थी को कुल आंकड़े के साथ राज्यवार बंटवारा भी याद रखना चाहिए।
पंजाब और हरियाणा में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती किस अवधि के लिए की गई है?
- A.01 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026
- B.01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026
- C.15 अक्टूबर से 15 दिसंबर 2026
- D.01 नवंबर से 31 दिसंबर 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026
व्याख्या
सही उत्तर 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 है। विज्ञप्ति में तैनाती की अवधि ठीक यही बताई गई है, क्योंकि पंजाब और हरियाणा में इसी दौरान धान की कटाई होती है तथा फसल अवशेष जलाने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं, और यही वह समय भी है जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता तेजी से गिरती है। विकल्प A, C और D गलत हैं, क्योंकि ये अवधि को विज्ञप्ति में बताए कटाई मौसम से पहले या बाद खिसका देते हैं, जबकि आयोग ने तैनाती को इसी अवधि के भीतर क्रमिक चरणों में व्यवस्थित किया है। इस अवधि में दलों को अलग-अलग समय के लिए जिले सौंपे गए हैं, जिससे मौसम के बीच निगरानी न टूटे। दल किसानों, पराली सुरक्षा बल, जिला स्तर के अधिकारियों, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ काम करते हैं और प्रतिदिन रिपोर्ट देते हैं।
फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात करने वाले सीएक्यूएम ने इस तैनाती से संबंधित पत्र किस संस्था को भेजा था?
- A.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- B.राष्ट्रीय हरित अधिकरण
- C.भारत मौसम विज्ञान विभाग
- D.राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
व्याख्या
सही उत्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड है। विज्ञप्ति के अनुसार फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती सीएक्यूएम द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजे गए पत्र के बाद की गई, जिसे सामान्यतः सीपीसीबी लिखा जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरण से जुड़े विवादों का न्यायिक निकाय है और इस तैनाती में उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग मौसम पूर्वानुमान का काम करता है और यहां उसकी कोई भूमिका नहीं बताई गई। विकल्प D गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण आपदा प्रबंधन से जुड़ा है और विज्ञप्ति में उसका जिक्र नहीं है। सीएक्यूएम का पूरा नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग है, और मैदान में दल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों, राज्य नोडल अधिकारियों, जिला अधिकारियों, पराली सुरक्षा बल तथा किसानों के साथ समन्वय करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीएक्यूएम ने पराली जलाने के विरुद्ध कितने जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं?
पंजाब और हरियाणा के कुल 34 जिलों में, अर्थात पंजाब के 18 जिलों तथा हरियाणा के 16 जिलों में, और यह तैनाती 01 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 की अवधि के लिए है।
सीएक्यूएम का पूरा नाम क्या है?
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग। यह राज्य सरकारों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा जिला प्रशासनों के साथ पराली जलाने की रोकथाम के उपायों की निगरानी और समीक्षा करता है।
फ्लाइंग स्क्वॉड किसे और क्या रिपोर्ट देंगे?
वे अपने आवंटित जिलों की जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे और उसकी तथा पराली जलाने की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी एसएएस नगर स्थित सीएक्यूएम सेल को प्रतिदिन देंगे।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2319355 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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