ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III मंजूर, 50 GWh बैटरी भंडारण
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1,86,405 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी, जो 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा ढोएगी।

चर्चा में क्यों
30 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1,86,405 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी, जिसमें इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन के साथ 50 GWh बैटरी भंडारण शामिल है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दे दी, जिसे संक्षेप में GEC-III कहा जाता है। यह योजना इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) को इतना मजबूत बनाएगी कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन स्थल से निकालकर ग्रिड तक पहुंचाई जा सके। इसकी अगुवाई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय करेगा।
भंडारण भी योजना का हिस्सा
तारों के साथ-साथ GEC-III में 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के लिए भी पैसा रखा गया है। इन्हें नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर या उत्पादक के छोर पर, या ग्रिड की लचीलापन बनाए रखने के लिहाज से अहम किसी अन्य स्थान पर लगाया जाएगा। भंडारण का मकसद सौर और पवन बिजली की चार जानी-पहचानी दिक्कतों का जवाब देना है: रुक-रुक कर आने वाली आपूर्ति, नेटवर्क पर कंजेशन, पीक आवर में कटौती, और उन घंटों की मांग जब सूरज नहीं होता।
योजना की लागत
| मद | राशि |
| कुल परियोजना लागत | 1,86,405 करोड़ रुपये |
| इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम | 1,36,378 करोड़ रुपये |
| बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (50 GWh) | 50,000 करोड़ रुपये |
| केंद्रीय वित्तीय सहायता | 54,082 करोड़ रुपये |
योजना पूरी करने का लक्ष्य वित्त वर्ष 2032-33 है। केंद्रीय वित्तीय सहायता इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज की भरपाई करती है, और सरकार इसी रास्ते से आखिरी छोर के उपभोक्ता के लिए बिजली की कीमत काबू में रखने की उम्मीद कर रही है।
काम कैसे बांटा जाएगा
ट्रांसमिशन घटक की हर ग्रीनफील्ड परियोजना टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली यानी टीबीसीबी से गुजरेगी। ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करने वाले काम कॉस्ट प्लस बेसिस पर होंगे। समग्र कार्यान्वयन एजेंसी स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज रहेंगी, जबकि ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर टीबीसीबी के तहत बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेनटेन यानी BOOM मॉडल पर बोली लगाएंगे।
जलवायु लक्ष्य के लिहाज से महत्व
यह योजना भारत को 2035 तक 900 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता तक पहुंचाने में मदद करेगी। सरकार को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन फुटप्रिंट में कमी के साथ बिजली, विनिर्माण तथा निर्माण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार की भी उम्मीद है। बैटरी बनाने और लगाने से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में काम बढ़ेगा, और नई ग्रिड परिसंपत्तियों के संचालन, रखरखाव तथा प्रबंधन से भाग लेने वाले राज्यों में टिकाऊ कुशल रोजगार पैदा होगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III (GEC-III) |
|---|---|
| मंजूरी | केंद्रीय मंत्रिमंडल, अध्यक्ष प्रधानमंत्री |
| मंत्रालय | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय |
| नवीकरणीय ऊर्जा निकासी | राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक |
| बैटरी भंडारण | 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) |
| कुल लागत | 1,86,405 करोड़ रुपये |
| केंद्रीय वित्तीय सहायता | 54,082 करोड़ रुपये |
| पूरा होने का लक्ष्य | वित्त वर्ष 2032-33 |
| कार्यान्वयन एजेंसी | स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज; ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर BOOM मॉडल पर टीबीसीबी से |
| जुड़ा लक्ष्य | 2035 तक 900 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: योजना का नाम (ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III या GEC-III), मंत्रालय (नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा), निकासी क्षमता (135 गीगावाट), भंडारण (50 GWh बीईएसएस), कुल लागत (1,86,405 करोड़ रुपये) और उसका बंटवारा, केंद्रीय वित्तीय सहायता (54,082 करोड़ रुपये), पूरा होने का वर्ष (वित्त वर्ष 2032-33), बोली के रास्ते (टीबीसीबी और कॉस्ट प्लस बेसिस), BOOM मॉडल तथा 2035 का 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म लक्ष्य।
अभ्यास प्रश्न
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कितनी नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए बनाई गई है?
- A.85 गीगावाट तक
- B.135 गीगावाट तक
- C.250 गीगावाट तक
- D.500 गीगावाट तक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 135 गीगावाट तक
व्याख्या
सही उत्तर 135 गीगावाट तक है। GEC-III इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को इसीलिए मजबूत करती है कि इस पैमाने की नवीकरणीय बिजली उत्पादन स्थल से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर ग्रिड तक पहुंचाई जा सके। विकल्प A गलत है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा इस योजना से जुड़ा नहीं है। विकल्प C भी गलत है; यह देखने में ठीक लगने वाला गोल आंकड़ा है, लेकिन योजना की निकासी क्षमता यह नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस फैसले से जुड़ा इससे बड़ा एकमात्र आंकड़ा 2035 तक 900 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता का अलग लक्ष्य है, जो पूरे देश का उत्पादन लक्ष्य है, इस योजना का ट्रांसमिशन आंकड़ा नहीं। तारों के साथ GEC-III में 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए भी धन रखा गया है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना की कुल स्वीकृत परियोजना लागत कितनी है?
- A.54,082 करोड़ रुपये
- B.1,36,378 करोड़ रुपये
- C.1,86,405 करोड़ रुपये
- D.2,50,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1,86,405 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 1,86,405 करोड़ रुपये है, जो योजना के लिए स्वीकृत पूरी लागत है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 54,082 करोड़ रुपये उसी लागत के भीतर की केंद्रीय वित्तीय सहायता है, जो इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज की भरपाई करती है और इस तरह उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमत नीचे रखती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 1,36,378 करोड़ रुपये केवल ट्रांसमिशन हिस्सा है, जो योजना के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा इस मंजूरी का हिस्सा नहीं है। लागत का बाकी 50,000 करोड़ रुपये 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर खर्च होगा। पूरी योजना वित्त वर्ष 2032-33 तक स्थापित करने का लक्ष्य है, और इसकी अगुवाई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पास है, जबकि समग्र कार्यान्वयन एजेंसी के तौर पर स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज काम करेंगी।
GEC-III के तहत ग्रीनफील्ड इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाएं किस माध्यम से क्रियान्वित होंगी?
- A.टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली
- B.कॉस्ट प्लस बेसिस
- C.केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को नामांकन
- D.स्विस चैलेंज पद्धति
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली
व्याख्या
सही उत्तर टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली है, जिसे टीबीसीबी लिखा जाता है। GEC-III के ट्रांसमिशन घटक की हर ग्रीनफील्ड परियोजना इसी रास्ते से जाएगी, और ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेनटेन यानी BOOM मॉडल पर इसमें भाग लेंगे। विकल्प B गलत है, क्योंकि कॉस्ट प्लस बेसिस काम की दूसरी श्रेणी के लिए रखा गया है, यानी ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करने वाले कार्य। विकल्प C गलत है, क्योंकि योजना किसी उपक्रम को नामांकन के आधार पर ग्रीनफील्ड काम नहीं देती; समग्र कार्यान्वयन एजेंसी स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज हैं, पर परियोजनाएं बोली से दी जाएंगी। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसी कोई पद्धति इस मंजूरी में नहीं है। प्रतिस्पर्धी रास्ता ही एक वजह है जिससे सरकार को उम्मीद है कि ट्रांसमिशन शुल्क और इसलिए उपभोक्ता की बिजली दर काबू में रहेगी।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना किस राष्ट्रीय क्षमता लक्ष्य में सहायक मानी गई है?
- A.2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता
- B.2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता
- C.2040 तक 450 गीगावाट सौर क्षमता
- D.2047 तक 1,200 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता
व्याख्या
सही उत्तर 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता है। योजना को इस लक्ष्य तक पहुंचने में मददगार बताया गया है, क्योंकि नई नवीकरणीय क्षमता का लाभ तभी है जब उससे बनी बिजली खपत केंद्रों तक पहुंच सके। विकल्प A, C और D क्षमता और वर्ष के अन्य मेल बताते हैं और गलत हैं, क्योंकि उनमें या मात्रा या समय-सीमा बदली हुई है और वे इस फैसले का हिस्सा नहीं हैं। क्षमता लक्ष्य के अलावा सरकार को इस योजना से दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन फुटप्रिंट में कमी की भी अपेक्षा है। इसे रोजगार का स्रोत भी बताया गया है: बिजली, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार, बैटरी बनने और लगने से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में नया काम, तथा भाग लेने वाले राज्यों में संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन के टिकाऊ कुशल रोजगार।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना की कुल लागत कितनी है?
कुल 1,86,405 करोड़ रुपये, जिसमें इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 GWh बैटरी भंडारण के लिए 50,000 करोड़ रुपये हैं, तथा केंद्रीय वित्तीय सहायता 54,082 करोड़ रुपये है।
GEC-III से कितनी नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी होगी?
इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम मजबूत करके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक। योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
GEC-III में ग्रीनफील्ड ट्रांसमिशन परियोजनाएं किस रास्ते से लागू होंगी?
टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली यानी टीबीसीबी से, जिसमें ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेनटेन (BOOM) मॉडल पर भाग लेंगे। ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन कॉस्ट प्लस बेसिस पर होगा।
स्रोत
- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के साथ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के साथ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना को मंजूरी दी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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