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GK24
पर्यावरणमध्यम

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना की कुल स्वीकृत परियोजना लागत कितनी है?

  1. A.54,082 करोड़ रुपये
  2. B.1,36,378 करोड़ रुपये
  3. C.1,86,405 करोड़ रुपये
  4. D.2,50,000 करोड़ रुपये

सही उत्तर

C. 1,86,405 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 1,86,405 करोड़ रुपये है, जो योजना के लिए स्वीकृत पूरी लागत है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 54,082 करोड़ रुपये उसी लागत के भीतर की केंद्रीय वित्तीय सहायता है, जो इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज की भरपाई करती है और इस तरह उपभोक्ताओं के लिए बिजली की कीमत नीचे रखती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 1,36,378 करोड़ रुपये केवल ट्रांसमिशन हिस्सा है, जो योजना के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा इस मंजूरी का हिस्सा नहीं है। लागत का बाकी 50,000 करोड़ रुपये 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर खर्च होगा। पूरी योजना वित्त वर्ष 2032-33 तक स्थापित करने का लक्ष्य है, और इसकी अगुवाई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पास है, जबकि समग्र कार्यान्वयन एजेंसी के तौर पर स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज काम करेंगी।

पूरा लेख पढ़ें: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III मंजूर, 50 GWh बैटरी भंडारण

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Q1.पर्यावरणआसान

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कितनी नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए बनाई गई है?

  1. A.85 गीगावाट तक
  2. B.135 गीगावाट तक
  3. C.250 गीगावाट तक
  4. D.500 गीगावाट तक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 135 गीगावाट तक

व्याख्या

सही उत्तर 135 गीगावाट तक है। GEC-III इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को इसीलिए मजबूत करती है कि इस पैमाने की नवीकरणीय बिजली उत्पादन स्थल से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर ग्रिड तक पहुंचाई जा सके। विकल्प A गलत है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा इस योजना से जुड़ा नहीं है। विकल्प C भी गलत है; यह देखने में ठीक लगने वाला गोल आंकड़ा है, लेकिन योजना की निकासी क्षमता यह नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस फैसले से जुड़ा इससे बड़ा एकमात्र आंकड़ा 2035 तक 900 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता का अलग लक्ष्य है, जो पूरे देश का उत्पादन लक्ष्य है, इस योजना का ट्रांसमिशन आंकड़ा नहीं। तारों के साथ GEC-III में 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए भी धन रखा गया है।

Q2.पर्यावरणमध्यम

GEC-III के तहत ग्रीनफील्ड इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाएं किस माध्यम से क्रियान्वित होंगी?

  1. A.टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली
  2. B.कॉस्ट प्लस बेसिस
  3. C.केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को नामांकन
  4. D.स्विस चैलेंज पद्धति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली

व्याख्या

सही उत्तर टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली है, जिसे टीबीसीबी लिखा जाता है। GEC-III के ट्रांसमिशन घटक की हर ग्रीनफील्ड परियोजना इसी रास्ते से जाएगी, और ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेनटेन यानी BOOM मॉडल पर इसमें भाग लेंगे। विकल्प B गलत है, क्योंकि कॉस्ट प्लस बेसिस काम की दूसरी श्रेणी के लिए रखा गया है, यानी ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करने वाले कार्य। विकल्प C गलत है, क्योंकि योजना किसी उपक्रम को नामांकन के आधार पर ग्रीनफील्ड काम नहीं देती; समग्र कार्यान्वयन एजेंसी स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज हैं, पर परियोजनाएं बोली से दी जाएंगी। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसी कोई पद्धति इस मंजूरी में नहीं है। प्रतिस्पर्धी रास्ता ही एक वजह है जिससे सरकार को उम्मीद है कि ट्रांसमिशन शुल्क और इसलिए उपभोक्ता की बिजली दर काबू में रहेगी।

Q3.पर्यावरणमध्यम

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना किस राष्ट्रीय क्षमता लक्ष्य में सहायक मानी गई है?

  1. A.2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता
  2. B.2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता
  3. C.2040 तक 450 गीगावाट सौर क्षमता
  4. D.2047 तक 1,200 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता

व्याख्या

सही उत्तर 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता है। योजना को इस लक्ष्य तक पहुंचने में मददगार बताया गया है, क्योंकि नई नवीकरणीय क्षमता का लाभ तभी है जब उससे बनी बिजली खपत केंद्रों तक पहुंच सके। विकल्प A, C और D क्षमता और वर्ष के अन्य मेल बताते हैं और गलत हैं, क्योंकि उनमें या मात्रा या समय-सीमा बदली हुई है और वे इस फैसले का हिस्सा नहीं हैं। क्षमता लक्ष्य के अलावा सरकार को इस योजना से दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन फुटप्रिंट में कमी की भी अपेक्षा है। इसे रोजगार का स्रोत भी बताया गया है: बिजली, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार, बैटरी बनने और लगने से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में नया काम, तथा भाग लेने वाले राज्यों में संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन के टिकाऊ कुशल रोजगार।

Q4.पर्यावरणआसान

राजस्थान का सबसे बड़ा देहलावास सीवेज शोधन संयंत्र किस शहर में है?

  1. A.जोधपुर
  2. B.उदयपुर
  3. C.कोटा
  4. D.जयपुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. जयपुर

व्याख्या

सही उत्तर जयपुर है। देहलावास संयंत्र 22.50 हेक्टेयर में 2020-23 के दौरान बना और 215 एमएलडी क्षमता के साथ राजस्थान में सबसे बड़ा है। यह स्काडा प्रणाली से पूरी तरह स्वचालित है और अनुक्रमिक बैच रिएक्टर पर चलता है, जिसमें पानी पार्शल फ्लूम, प्राथमिक क्लैरिफायर और बेसिन से होकर क्लोरीन टैंक तक पहुंचता है। शोधित पानी सिंचाई और उद्योग में दोबारा इस्तेमाल होता है, कुछ हिस्सा पास की कॉलोनी को बागवानी के लिए जाता है और बाकी द्रव्यवती नदी में छोड़ा जाता है, जबकि परिसर के चारों ओर 30,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। विकल्प A, B और C राजस्थान के अन्य बड़े शहर जोधपुर, उदयपुर और कोटा हैं, जहां यह संयंत्र नहीं है। संयंत्र का नाम, शहर और क्षमता साथ जोड़कर याद रखें।

Q5.पर्यावरणमध्यम

एसबीएम 2.0 में मंजूर सीवेज शोधन संयंत्र परियोजनाओं से कितनी शोधन क्षमता जुड़ेगी?

  1. A.1,500 एमएलडी
  2. B.2,750 एमएलडी
  3. C.4,900 एमएलडी
  4. D.7,200 एमएलडी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 4,900 एमएलडी

व्याख्या

सही उत्तर 4,900 एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन है। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत छोटे शहरों में सीवेज शोधन संयंत्र लगाने के लिए मंजूर परियोजनाओं से इतनी ही क्षमता जुड़ने का अनुमान है, और इनके पीछे कई हजार करोड़ रुपये की राशि है। विकल्प A, B और D में दिए गए आंकड़े मंजूर क्षमता से मेल नहीं खाते। परीक्षा की दृष्टि से मंजूर राशि और उससे जुड़ने वाली क्षमता, दोनों को साथ याद रखें और यह भी कि ये परियोजनाएं महानगरों के बजाय छोटे शहरों के लिए हैं। साथ ही यह क्षमता वाटर प्लस प्रमाणन ढांचे और ओडीएफ प्लस प्लस प्रोटोकॉल के साथ चलती है, जो सीवेज, मल कीचड़ और सेप्टेज के सुरक्षित प्रबंधन को परखते हैं, इसलिए अकेली क्षमता किसी शहर के प्रदर्शन का पूरा पैमाना नहीं है।