कोयला मंत्रालय की गोवा में माइनिंग फॉर फ्यूचर परामर्श बैठक
कोयला मंत्रालय ने गोवा के पणजी में हुई माइनिंग फॉर फ्यूचर बैठक में बताया कि 2020 से आवंटित 137 वाणिज्यिक कोयला खदानों में से केवल 25 उत्पादन कर रही हैं।

चर्चा में क्यों
30 अक्टूबर 2026 को कोयला मंत्रालय ने गोवा के पणजी में माइनिंग फॉर फ्यूचर हितधारक परामर्श बैठक की, जिसमें बताया गया कि 2020 से आवंटित 137 वाणिज्यिक कोयला खदानों में से केवल 25 उत्पादन कर रही हैं।
कोयला मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को गोवा के पणजी में दिन भर चली हितधारक परामर्श बैठक माइनिंग फॉर फ्यूचर आयोजित की। इसमें कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खंडों के आवंटियों के साथ राज्य सरकारों, केंद्रीय भूजल प्राधिकरण, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय, पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि तथा वरिष्ठ अधिकारी बैठे और इस पर चर्चा हुई कि आवंटित खंड जल्दी कैसे शुरू हों, सुधारों का अगला दौर क्या हो और जिम्मेदार खनन के लिए क्या जरूरी है। कोयला सचिव विक्रम देव दत्त मुख्य अतिथि थे, और अतिरिक्त सचिव तथा नामित प्राधिकारी रूपिंदर बरार भी मौजूद रहीं।
जो अंतर मंत्रालय भरना चाहता है
2020 से आवंटित 137 वाणिज्यिक खदानों में से केवल 25 उत्पादन कर रही हैं। सचिव ने आवंटियों से कहा कि आवंटित पर बंद पड़ा खंड वह क्षमता है जो देश ने अलग रखी है लेकिन काम में नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि खदानें संशोधित समय सीमा से पहले खोलें, पूरी क्षमता तक जल्दी पहुंचें और जमीन, वन तथा राज्य स्तर की दिक्कतें देर से नहीं, शुरू में ही सामने रखें।
घरेलू कोयले पर जोर क्यों
- फरवरी के अंत से पश्चिम एशिया के संघर्ष ने एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति बिगाड़ी, तब खदानों तथा बिजली घरों में रखा कोयला ही बिजली की निरंतरता का भरोसा बना
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार गैस बाजार 2027 तक तंग रहेगा, और दूसरी तिमाही में एशियाई हाजिर एलएनजी औसतन 17.5 अमेरिकी डॉलर प्रति एमबीटीयू रहा, जो साल भर पहले से 45 प्रतिशत अधिक है
- वर्ष 2026 में विश्व कोयला मांग रिकॉर्ड 8.94 अरब टन रहने का अनुमान है
- भारत ने 2025-26 में 1,041 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया और देश की 70 प्रतिशत से अधिक बिजली आज भी कोयले से बनती है
- नीति आयोग के अनुमान में मांग 2025 के करीब 1.25 अरब टन से बढ़कर 2050 तक 2.6 अरब टन से ऊपर जाएगी, और शुद्ध शून्य राह पर भी 1.8 अरब टन से अधिक रहेगी
अब तक के सुधार
अतिरिक्त सचिव ने बताया कि 2020 की व्यवस्था ने अंतिम उपयोग की शर्त हटाई, बोली को राष्ट्रीय कोयला सूचकांक पर आधारित राजस्व हिस्सेदारी से जोड़ा, तकनीकी तथा वित्तीय पात्रता की शर्तें हटाईं और स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी, जिसमें भूमिगत खदानों को रियायतें मिलीं। पूरी तरह अन्वेषित खंडों के लिए निर्धारित समय 51 से 40 महीने और आंशिक रूप से अन्वेषित खंडों के लिए 66 से 52 महीने कर दिया गया है। खनन योजना की मंजूरी अब नौ महीने के मुकाबले साढ़े चार महीने में मिलती है, खदान खोलने की अनुमति कंपनी बोर्ड देता है, और 44 मान्यता प्राप्त अन्वेषण एजेंसियों को पूर्वेक्षण लाइसेंस की जरूरत नहीं रही।
और क्या चर्चा हुई
सत्रों में भूमिगत कोयला गैसीकरण, खदानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स, खदान पर ही राख घटाना, पेस्ट फिलिंग, वैज्ञानिक खदान बंदी, पुनर्वास और पुनर्स्थापन, श्रमिक कल्याण, निगम सामाजिक दायित्व, वनरोपण, खदान सुरक्षा, भूजल मंजूरी, पहले मील की संपर्कता और कोकिंग कोल उत्पादन बढ़ाने के उपाय शामिल रहे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | माइनिंग फॉर फ्यूचर हितधारक परामर्श बैठक |
|---|---|
| स्थान और तिथि | पणजी, गोवा, 30 अक्टूबर 2026 |
| मुख्य अतिथि | विक्रम देव दत्त, सचिव, कोयला मंत्रालय |
| नामित प्राधिकारी | रूपिंदर बरार, अतिरिक्त सचिव |
| 2020 से आवंटित वाणिज्यिक खदानें | 137, जिनमें 25 उत्पादनरत |
| 2025-26 में भारत का कोयला उत्पादन | 1,041 मिलियन टन |
| बिजली में कोयले की हिस्सेदारी | 70 प्रतिशत से अधिक |
| 2026 में विश्व कोयला मांग | रिकॉर्ड 8.94 अरब टन का अनुमान |
| नीति आयोग का अनुमान | 2025 के 1.25 अरब टन से 2050 तक 2.6 अरब टन से ऊपर |
| अन्वेषित खंडों की समय सीमा | 51 से 40 महीने |
| प्रत्यक्ष विदेशी निवेश | स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: बैठक का नाम और स्थान (माइनिंग फॉर फ्यूचर, पणजी, गोवा), कोयला सचिव विक्रम देव दत्त, 2020 से आवंटित 137 खंड जिनमें 25 उत्पादनरत, 2025-26 में 1,041 मिलियन टन उत्पादन, बिजली में कोयले की 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी, नीति आयोग का 2050 का अनुमान और घटी हुई समय सीमाएं।
अभ्यास प्रश्न
कोयला मंत्रालय के अनुसार 2020 से आवंटित वाणिज्यिक कोयला खदानों में से कितनी उत्पादन कर रही हैं?
- A.137 में से 25
- B.125 में से 37
- C.137 में से 52
- D.90 में से 25
उत्तर देखें
गोवा की परामर्श बैठक में मंत्रालय ने बताया कि सुधारों की व्यवस्था आने के बाद आवंटित वाणिज्यिक खदानों में से थोड़ी ही उत्पादन तक पहुंची हैं, और कोयला सचिव ने कहा कि आवंटित पर बंद पड़ा खंड वह क्षमता है जो देश ने अलग रखी है पर उपयोग में नहीं…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कितना कोयला उत्पादन किया?
- A.778 मिलियन टन
- B.893 मिलियन टन
- C.1,041 मिलियन टन
- D.1,250 मिलियन टन
उत्तर देखें
यही आंकड़ा बैठक में रखा गया, जहां अधिकारियों ने यह भी बताया कि देश की 70 प्रतिशत से अधिक बिजली कोयले से बनती है, इसलिए बंद पड़े खंड और भी अहम हो जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मौजूदा नीतियों के आधार पर नीति आयोग 2050 तक भारत की कोयला मांग कितनी आंकता है?
- A.1.5 अरब टन से अधिक
- B.2.6 अरब टन से अधिक
- C.3.4 अरब टन से अधिक
- D.4.2 अरब टन से अधिक
उत्तर देखें
बैठक में रखे अनुमान के अनुसार मौजूदा नीतियों के चलते मांग 2025 के करीब 1.25 अरब टन से बढ़कर 2050 तक 2.6 अरब टन से ऊपर पहुंच जाएगी, और शुद्ध शून्य की राह पर भी यह 1.8 अरब टन से अधिक बनी रहेगी, क्योंकि कोयले के तीन सबसे बड़े उपभोक्ता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2020 से आवंटित वाणिज्यिक कोयला खदानों में कितनी उत्पादन कर रही हैं?
2020 से आवंटित 137 वाणिज्यिक खदानों में से केवल 25 उत्पादन कर रही हैं। इसी अंतर को घटाने के लिए कोयला मंत्रालय ने पणजी में माइनिंग फॉर फ्यूचर बैठक की।
भारत ने 2025-26 में कितना कोयला उत्पादन किया?
भारत ने 2025-26 में 1,041 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया, और देश की 70 प्रतिशत से अधिक बिजली आज भी कोयले से बनती है।
नीति आयोग कोयला मांग के बारे में क्या अनुमान लगाता है?
मांग 2025 के करीब 1.25 अरब टन से बढ़कर 2050 तक 2.6 अरब टन से ऊपर जाएगी, और शुद्ध शून्य राह पर भी 1.8 अरब टन से अधिक रहेगी।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2330546 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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