एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 नई दिल्ली में
नई दिल्ली में 21-23 अक्टूबर 2026 को 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन हुआ, जिसकी थीम पावरिंग द ग्लोबल साउथ रही और भारत की कृषि-सौर क्षमता पर बात हुई।

चर्चा में क्यों
23 अक्टूबर 2026 को भारत में एग्रीवोल्टाइक्स की स्थिति विस्तार से सामने रखी गई, जब नई दिल्ली में 21-23 अक्टूबर 2026 तक 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन पावरिंग द ग्लोबल साउथ थीम पर चला।
भारत अब एक ही खेत से दो काम लेने की राह पर है। एग्रीवोल्टाइक्स, जिसे एग्रिसोलर या दोहरे उपयोग वाला सोलर भी कहा जाता है, में सौर पैनल फसल की पंक्तियों के ऊपर या उनके बीच लगाए जाते हैं, जिससे एक ही ज़मीन से फसल और बिजली दोनों मिलती हैं। 23 अक्टूबर 2026 को जारी एक पृष्ठभूमि दस्तावेज़ में इस तकनीक की भारत में स्थिति बताई गई, और यह राजधानी में हो रहे 7वें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन के साथ जारी हुआ।
सम्मेलन
सातवां संस्करण नई दिल्ली में 21-23 अक्टूबर 2026 तक चला और इसकी थीम पावरिंग द ग्लोबल साउथ थी। इसमें उद्योग, अनुसंधान, नीति और वित्त क्षेत्र के हितधारक जुटे। चर्चा का केंद्र भूमि का कुशल उपयोग, कृषि की मजबूती और कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना रहा।
खेती को सौर ऊर्जा क्यों चाहिए
देश की लगभग 46.1 प्रतिशत आबादी की आजीविका का मुख्य आधार खेती है, और 2025-26 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का सकल मूल्य वर्धन 52.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। 2023-24 के भूमि उपयोग आंकड़ों के अनुसार देश का कुल क्षेत्रफल 306.96 मिलियन हेक्टेयर है, जिसका करीब 55 प्रतिशत कृषि भूमि है। शुद्ध बुआई क्षेत्र 138.99 मिलियन हेक्टेयर और कुल फसल क्षेत्र 217.88 मिलियन हेक्टेयर है। ऊंचे ढांचों पर लगे पैनल धूप और बारिश को नीचे फसल तक पहुंचने देते हैं और उनके नीचे से कृषि उपकरण भी निकल जाते हैं। आंशिक छाया से मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण घटता है और फसल तेज़ गर्मी से बचती है।
भारत में अब तक
| चालू परियोजनाएं (अगस्त 2025) | 36, स्थापित क्षमता 37.54 मेगावाट |
| विकासाधीन प्रायोगिक परियोजनाएं | 10 |
| अनुमानित राष्ट्रीय क्षमता | 3,000 गीगावाट से लगभग 14,000 गीगावाट |
| एग्री-पीवी के लिए चिह्नित भूमि | 47.35 मिलियन हेक्टेयर प्रतिबंधित कृषि भूमि |
| प्रति एकड़ सालाना कमाई | लगभग 60,000 रुपये से बढ़कर 1 लाख रुपये से अधिक |
पीछे खड़ी योजनाएं
- पीएम कुसुम योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई और इसमें लगभग 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
- राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान ने आईसीएआर के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर उत्कृष्टता केंद्र बनाया है, जहां 100 किलोवाट का तंत्र लगा है।
- भारत एग्रीवोल्टाइक्स गठबंधन राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संघ के नेतृत्व में 2023 में शुरू हुआ और इसके सदस्य 40 से अधिक हो गए हैं।
- राज्यों में महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत लगभग 35,000 एकड़ पर 16,000 मेगावाट की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, गुजरात की किसान सूर्योदय योजना दिन में 16 घंटे बिजली देती है और कर्नाटक की सूर्य रैथा योजना सौर सिंचाई पंप बढ़ाती है।
पैनलों के नीचे फल, सब्जियां, मसाले और औषधीय पौधे उगाना उपयुक्त माना गया है। महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश मिलकर देश की अनुमानित एग्री-पीवी क्षमता का करीब 50 प्रतिशत रखते हैं, जबकि ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल की क्षमता मध्यम आंकी गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | 7वां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन |
|---|---|
| स्थान और तिथि | नई दिल्ली, 21-23 अक्टूबर 2026 |
| थीम | पावरिंग द ग्लोबल साउथ |
| चालू परियोजनाएं (अगस्त 2025) | 36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट, साथ में 10 प्रायोगिक |
| अनुमानित क्षमता | 3,000 गीगावाट से लगभग 14,000 गीगावाट |
| उपयुक्त भूमि | 47.35 मिलियन हेक्टेयर प्रतिबंधित कृषि भूमि |
| पीएम कुसुम | फरवरी 2019 में शुरू, लगभग 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता |
| उत्कृष्टता केंद्र | राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, 100 किलोवाट तंत्र |
| भारत एग्रीवोल्टाइक्स गठबंधन | एनएसईएफआई के नेतृत्व में, 2023 में शुरू, 40 से अधिक सदस्य |
| कृषि जीवीए | 2025-26 के लिए 52.08 लाख करोड़ रुपये का अनुमान |
परीक्षा की दृष्टि से
संस्करण (7वां), शहर (नई दिल्ली), तिथियां (21-23 अक्टूबर 2026) और थीम (पावरिंग द ग्लोबल साउथ) याद रखें। साथ में अगस्त 2025 के आंकड़े 36 परियोजनाएं और 37.54 मेगावाट, 3,000 से 14,000 गीगावाट की क्षमता, 47.35 मिलियन हेक्टेयर भूमि, पीएम कुसुम की फरवरी 2019 शुरुआत और 34,422 करोड़ रुपये की सहायता तथा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का 100 किलोवाट तंत्र भी याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
नई दिल्ली में हुए 7वें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन की थीम क्या थी?
- A.फूड फर्स्ट, एनर्जी नेक्स्ट
- B.पावरिंग द ग्लोबल साउथ
- C.सनलाइट फॉर एवरी फार्म
- D.क्लाइमेट रेज़िलिएंट वाटर मैनेजमेंट
उत्तर देखें
सातवां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन नई दिल्ली में 21-23 अक्टूबर 2026 तक चला और इसके लिए यही विषय तय किया गया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अगस्त 2025 तक भारत में कितनी एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चालू थीं और उनकी स्थापित क्षमता कितनी थी?
- A.26 परियोजनाएं, 27.54 मेगावाट
- B.36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट
- C.46 परियोजनाएं, 47.54 मेगावाट
- D.10 परियोजनाएं, 100 मेगावाट
उत्तर देखें
अगस्त 2025 तक भारत में इतनी ही एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चालू थीं, और इनके साथ 10 प्रायोगिक परियोजनाएं विकास के चरण में थीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खेती में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली पीएम कुसुम योजना कब शुरू की गई थी?
- A.फरवरी 2019
- B.अगस्त 2020
- C.फरवरी 2023
- D.जनवरी 2015
उत्तर देखें
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, जिसे संक्षेप में पीएम कुसुम कहा जाता है, इसी महीने शुरू की गई थी, ताकि खेती में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिले।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
7वें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन की थीम क्या थी?
पावरिंग द ग्लोबल साउथ। यह संस्करण नई दिल्ली में 21-23 अक्टूबर 2026 तक चला और इसमें उद्योग, अनुसंधान, नीति तथा वित्त क्षेत्र के हितधारक सौर ऊर्जा और खेती को जोड़ने पर विचार करने के लिए जुटे।
भारत में कितनी एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चल रही हैं?
अगस्त 2025 तक 36 परियोजनाएं चालू थीं, जिनकी स्थापित क्षमता 37.54 मेगावाट थी। इनके अलावा 10 प्रायोगिक परियोजनाएं विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विकास के चरण में थीं।
भारत की अनुमानित एग्रीवोल्टाइक क्षमता कितनी है?
अनुमान 3,000 गीगावाट से लगभग 14,000 गीगावाट तक जाते हैं। जीआईएस आधारित राष्ट्रीय स्क्रीनिंग में पर्यावरणीय, कृषि और तकनीकी फिल्टर लगाने के बाद 47.35 मिलियन हेक्टेयर प्रतिबंधित कृषि भूमि एग्री-पीवी के लिए उपयुक्त पाई गई।
खेती में सौर ऊर्जा के लिए कौन सी योजना चल रही है?
पीएम कुसुम, जो फरवरी 2019 में शुरू हुई और जिसमें लगभग 34,422 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान है। यह कृषि पंपों के सौरकरण और विकेंद्रीकृत सौर उत्पादन को संभव बनाती है तथा डीजल पर निर्भरता घटाती है।
स्रोत
- https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2327188 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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