अगस्त 2025 तक भारत में कितनी एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चालू थीं और उनकी स्थापित क्षमता कितनी थी?
- A.26 परियोजनाएं, 27.54 मेगावाट
- B.36 परियोजनाएं, 37.54 मेगावाट
- C.46 परियोजनाएं, 47.54 मेगावाट
- D.10 परियोजनाएं, 100 मेगावाट
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 36 परियोजनाएं और 37.54 मेगावाट है। अगस्त 2025 तक भारत में इतनी ही एग्रीवोल्टाइक परियोजनाएं चालू थीं, और इनके साथ 10 प्रायोगिक परियोजनाएं विकास के चरण में थीं। ये परियोजनाएं अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फैली हैं और इनमें ऊंचे ढांचे, फसलों के बीच जगह छोड़ने वाले लेआउट तथा ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं, जिससे पता चलता है कि सौर उत्पादन और कृषि उत्पादन को जोड़ने के तरीके अब भी विभिन्न परिस्थितियों में परखे जा रहे हैं। विकल्प A और विकल्प C दोनों में परियोजनाओं की संख्या और क्षमता का आंकड़ा बदल दिया गया है, इसलिए वे अगस्त 2025 की स्थिति से मेल नहीं खाते। विकल्प D में दो अलग आंकड़े मिला दिए गए हैं, क्योंकि 10 संख्या विकासाधीन प्रायोगिक परियोजनाओं की है, चालू परियोजनाओं की नहीं, और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में लगा तंत्र 100 किलोवाट का है, 100 मेगावाट का नहीं। अभ्यर्थी इसके साथ एक बड़ा आंकड़ा भी याद रखें, देश की अनुमानित एग्रीवोल्टाइक क्षमता 3,000 गीगावाट से लगभग 14,000 गीगावाट तक है, जो वास्तव में चल रही 37.54 मेगावाट क्षमता से बहुत बड़ी है।
पूरा लेख पढ़ें: एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 नई दिल्ली में
अभ्यास प्रश्न
नई दिल्ली में हुए 7वें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन की थीम क्या थी?
- A.फूड फर्स्ट, एनर्जी नेक्स्ट
- B.पावरिंग द ग्लोबल साउथ
- C.सनलाइट फॉर एवरी फार्म
- D.क्लाइमेट रेज़िलिएंट वाटर मैनेजमेंट
उत्तर देखें
सातवां एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन नई दिल्ली में 21-23 अक्टूबर 2026 तक चला और इसके लिए यही विषय तय किया गया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खेती में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली पीएम कुसुम योजना कब शुरू की गई थी?
- A.फरवरी 2019
- B.अगस्त 2020
- C.फरवरी 2023
- D.जनवरी 2015
उत्तर देखें
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, जिसे संक्षेप में पीएम कुसुम कहा जाता है, इसी महीने शुरू की गई थी, ताकि खेती में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिले।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएक्यूएम ने पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठकें किस शहर में कीं?
- A.नई दिल्ली
- B.चंडीगढ़
- C.लुधियाना
- D.पानीपत
उत्तर देखें
सही उत्तर चंडीगढ़ है, जो दोनों राज्यों की साझा राजधानी है, इसलिए आयोग उसी दिन दोनों सरकारों से अलग-अलग मिल सका।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएक्यूएम का कौन सा निर्देश ईंट भट्ठों में पराली से बने बायोमास पैलेट और ब्रिकेट का उपयोग अनिवार्य करता है?
- A.निर्देश संख्या 76
- B.निर्देश संख्या 88
- C.निर्देश संख्या 92
- D.निर्देश संख्या 99
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पंजाब तथा हरियाणा दोनों के साथ इसके अनुपालन की समीक्षा हुई, क्योंकि ईंट भट्ठों को पराली से बने पैलेट और ब्रिकेट पर लाने से अवशेष की स्थायी मांग बनती है और खेत में आग लगाने का कारण ही खत्म हो जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंजाब और हरियाणा के साथ प्रदूषण नियंत्रण की समीक्षा करने वाले वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष कौन हैं?
- A.राजेश वर्मा
- B.भूपेंद्र यादव
- C.तन्मय कुमार
- D.अटल डुल्लू
उत्तर देखें
उन्होंने चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ हुई दो अलग-अलग समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता की, जिनमें जमीनी प्रवर्तन, जिला स्तर की तैयारी और फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के उपयोग की पड़ताल हुई।
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