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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के किस मिशन से इस अध्ययन को आंशिक वित्त पोषण मिला?

  1. A.राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन
  2. B.अंतरविषयी साइबर-भौतिक प्रणाली राष्ट्रीय मिशन
  3. C.राष्ट्रीय क्वांटम मिशन
  4. D.गहरे समुद्र मिशन

सही उत्तर

C. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन

व्याख्या

सही उत्तर है राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, जिसे विज्ञप्ति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का प्रमुख मिशन बताया गया है और जिसने इस अध्ययन का एक हिस्सा वित्त पोषित किया। शेष विकल्पों में भी असली राष्ट्रीय मिशन दिए गए हैं, और यही इस प्रश्न को सही परख बनाता है। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन उच्च निष्पादन कंप्यूटिंग क्षमता बनाता है, साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन रोबोटिक्स तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों को सहारा देता है, और गहरे समुद्र मिशन समुद्री अन्वेषण एवं प्रौद्योगिकी पर काम करता है; इनमें से किसी का श्रेय यहां नहीं है। इस परिणाम का व्यावहारिक महत्व यह है कि क्वांटम कंप्यूटर में क्वांटम सूचना के टिके रहने की एक सीमा होती है, और यह प्रयोग दिखाता है कि उस सीमा के भीतर एक ही क्रिया का समय एंटैंगलमेंट का भविष्य बदल सकता है।

पूरा लेख पढ़ें: आरआरआई: सही समय के एक फ्लिप से एंटैंगलमेंट का नुकसान टला

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एंटैंगलमेंट के अचानक अंत को टालने वाले अध्ययन का नेतृत्व किस संस्थान ने किया?

  1. A.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान
  2. B.रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट
  3. C.साहा परमाणु भौतिकी संस्थान
  4. D.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट

व्याख्या

सही उत्तर है रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और जिसकी क्वांटम सूचना एवं कंप्यूटिंग प्रयोगशाला ने इस काम का नेतृत्व किया। टीम ने कैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम किया, और अध्ययन को उसी विभाग के प्रमुख राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से आंशिक वित्त पोषण मिला। शेष विकल्पों में खगोल भौतिकी, परमाणु भौतिकी और मूलभूत अनुसंधान के जाने-माने भारतीय संस्थान हैं, पर विज्ञप्ति इस अध्ययन का श्रेय उनमें से किसी को नहीं देती। संस्थान के साथ दो नाम भी याद रखने लायक हैं: प्रयोगशाला की समूह प्रमुख और वरिष्ठ प्रोफेसर उर्बासी सिन्हा, जिन्होंने कहा कि समय केवल प्रयोग का ब्योरा नहीं बल्कि नियंत्रण का साधन है, और प्रमुख लेखक सौम्या रंजन बेहरा, जिनका शोध पत्र फिजिकल रिव्यू ए में जुलाई में छपा।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एंटैंगलमेंट के अचानक अंत से क्या अभिप्राय है?

  1. A.दोनों कणों का स्थिर अवस्था में पूर्ण क्षय
  2. B.क्षय पूरा होने से पहले ही निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट का अचानक लुप्त हो जाना
  3. C.क्वांटम कंप्यूटर का परिणाम पढ़ने में विफल हो जाना
  4. D.मापन पर तरंग फलन का पतन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. क्षय पूरा होने से पहले ही निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट का अचानक लुप्त हो जाना

व्याख्या

सही उत्तर है क्षय पूरा होने से पहले ही निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट का अचानक लुप्त हो जाना। विज्ञप्ति बताती है कि दो एंटैंगल कणों में से हर कण उत्तेजित अवस्था से स्थिर अवस्था की ओर खिसकता है, ठीक वैसे जैसे कोई परमाणु अपने परिवेश को ऊर्जा देता है, और इसी के साथ एंटैंगलमेंट कमजोर पड़ता जाता है। भौतिक विज्ञानियों को हैरान करने वाली बात यह है कि एंटैंगलमेंट एक निश्चित क्षण पर पूरी तरह समाप्त हो सकता है, जबकि क्षय स्वयं अभी पूरा नहीं हुआ होता, और इसी अचानक लुप्त होने को यह नाम मिला है। विकल्प ए क्षय की प्रक्रिया बताता है, जो अलग बात है और अधिक समय लेती है। विकल्प सी क्वांटम कंप्यूटर की पठन विफलता है, जो व्यावहारिक अभियांत्रिकी समस्या है। विकल्प डी मापन पर तरंग फलन का पतन है, जो क्वांटम यांत्रिकी की अलग अवधारणा है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भारत किस मिशन के तहत करीब 40 और डॉप्लर मौसम रडार जोड़ने की योजना बना रहा है?

  1. A.मिशन मौसम
  2. B.मिशन समुद्र
  3. C.मिशन वर्षा
  4. D.मिशन आकाश
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मिशन मौसम

व्याख्या

सही उत्तर मिशन मौसम है। मंत्री ने कहा कि इस मिशन के तहत करीब चालीस और रडार लगाने की योजना है, जिससे देश में कुल संख्या लगभग इक्यासी हो जाएगी। विकल्प B, C और D काल्पनिक नाम हैं, जिन्हें इसलिए रखा गया है क्योंकि वे इसी नीति क्षेत्र के लगते हैं; रडार नेटवर्क के संदर्भ में ऐसा कोई मिशन नहीं बताया गया। घोषणा का बड़ा संदेश यह है कि तैयारी केवल रडार पर नहीं टिकती। ओडिशा भर में जिला और विद्यालय स्तर तक स्वचालित मौसम स्टेशन तथा वर्षामापी यंत्र लगाए जा रहे हैं, और रेडियो सोंडे स्टेशन तथा माइक्रोवेव रेडियोमीटर भी तैनात हो रहे हैं, ताकि बहुस्तरीय अवलोकन नेटवर्क खेती, आपदा प्रबंधन और बिजली क्षेत्र के लिए स्थानीय पूर्वानुमान दे सके।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

पृथ्वी विज्ञान मंत्री के अनुसार 2014 में भारत के पास कितने डॉप्लर मौसम रडार थे?

  1. A.8
  2. B.14
  3. C.24
  4. D.40
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 14

व्याख्या

सही उत्तर 14 है। मंत्री ने एक दशक पहले की स्थिति की तुलना मौजूदा नेटवर्क से की, जो संबलपुर सुविधा के चालू होने के साथ 51 रडार तक पहुंच गया है। विकल्प A गलत है क्योंकि उस वर्ष के लिए ऐसा कोई आंकड़ा नहीं बताया गया। विकल्प C भी इसी कारण गलत है और इसे पुरानी तथा नई संख्या के बीच रखा गया है ताकि जल्दबाजी में अनुमान लगाने वाला अभ्यर्थी फंस जाए। विकल्प D एक अलग तरह का जाल है: यह मिशन मौसम के तहत प्रस्तावित अतिरिक्त रडारों की संख्या है, जिनके जुड़ने पर देश में कुल संख्या लगभग 81 हो जाएगी, आधार वर्ष की संख्या नहीं। इन तीनों आंकड़ों को एक समूह के रूप में याद रखें, क्योंकि प्रश्न प्रायः एक पूछकर बाकी दो को विकल्प बना देते हैं।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

17 सितंबर 2026 को उद्घाटित भारत का 51वां डॉप्लर मौसम रडार किस स्थान पर है?

  1. A.पारादीप, ओडिशा
  2. B.संबलपुर, ओडिशा
  3. C.गोपालपुर, ओडिशा
  4. D.बालासोर, ओडिशा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. संबलपुर, ओडिशा

व्याख्या

सही उत्तर संबलपुर, ओडिशा है। पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री ने ओडिशा के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में इस रडार का वर्चुअल उद्घाटन किया और इसका मुख्य काम पश्चिमी ओडिशा के साथ-साथ दक्षिणी झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़, उत्तरी आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लगे हुए हिस्सों पर मौसम की निगरानी मजबूत करना है। विकल्प A और C गलत हैं क्योंकि पारादीप और गोपालपुर में इससे पहले ही रडार लगे हुए थे; संबलपुर जुड़ने के बाद राज्य में इनकी संख्या तीन हो गई है। विकल्प D गलत है क्योंकि बालासोर अभी प्रस्तावित सूची में है, पुरी और भुवनेश्वर के साथ, और इस दिन वहां कोई रडार चालू नहीं हुआ। ऐसे प्रश्नों में पहले से मौजूद और केवल प्रस्तावित स्थानों को मिलाकर पूछा जाता है।