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GK24

RRB ग्रुप D GK प्रश्न 2026

RRB Group D में स्थैतिक GK कोई अलग खंड नहीं है, लेकिन पेपर के याददाश्त वाले अंकों का बड़ा हिस्सा यही तय करता है। CEN 09/2025 के अनुसार General Science में 10वीं (CBSE) स्तर की भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान के 25 प्रश्न हैं, और General Awareness के 20 प्रश्न ख़बरों के पीछे के स्थायी तथ्यों पर टिके होते हैं: घटना से जुड़ा खेल, पुरस्कार, संस्था, राज्य, नदी या वैज्ञानिक। इस पेज पर RRB Group D के लिए GK24 के विषयवार GK नोट्स हैं। General Science के नोट्स गति और बल, कार्य, ऊर्जा और शक्ति, गुरुत्वाकर्षण, ऊष्मा, प्रकाश, ध्वनि, विद्युत और चुंबकत्व, परमाणु संरचना और आवर्त सारणी, रासायनिक अभिक्रियाएँ, अम्ल, क्षार और लवण, धातु और अधातु, और कार्बन यौगिकों को विषय दर विषय कवर करते हैं, और Life Sciences के नोट्स कोशिका, मानव शरीर, पोषण, रोग, पौधों और आनुवंशिकी को। स्थैतिक GK के नोट्स भारतीय रेल के ज़ोन और तथ्य, राष्ट्रीय प्रतीक, भारत और विश्व में प्रथम और सबसे बड़ा, पुरस्कार और सम्मान, महत्वपूर्ण दिवस, पुस्तकें और लेखक, खेल GK, कला-संस्कृति, और भारतीय राजव्यवस्था, भूगोल, इतिहास और अर्थव्यवस्था की बुनियादी बातें कवर करते हैं। हर नोट छोटे तथ्यों और तालिकाओं में है जिसे एक बैठक में दोहराया जा सकता है। एक नोट पढ़ें, फिर इस साइट पर उसकी क्विज़ और पिछले वर्षों के प्रश्न हल करके देखें कि क्या याद रहा।

RRB ग्रुप D GK प्रश्न उत्तर सहित

Q1461.भूगोलमध्यम

कैलिफोर्निया का सैन एंड्रियास भ्रंश किस प्रकार के प्लेट किनारे का उदाहरण है?

  1. A.रचनात्मक या अपसारी
  2. B.विनाशकारी या अभिसारी
  3. C.संरक्षी या रूपांतर
  4. D.क्षेपण क्षेत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. संरक्षी या रूपांतर

सैन एंड्रियास भ्रंश के सहारे प्रशांत प्लेट और उत्तर अमेरिकी प्लेट क्षैतिज रूप से एक-दूसरे के समीप से खिसकती हैं।

Q1462.भूगोलआसान

हिमालय का निर्माण किस प्रकार के प्लेट किनारे से हुआ?

  1. A.अपसारी किनारा
  2. B.रूपांतर किनारा
  3. C.महाद्वीप और महाद्वीप का अभिसारी किनारा
  4. D.महासागर और महासागर का अभिसारी किनारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. महाद्वीप और महाद्वीप का अभिसारी किनारा

भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़कर यूरेशियाई प्लेट से मिली। दोनों पर हल्का महाद्वीपीय भूपटल है, इसलिए कोई भी मैंटल में गहरे नहीं धंस सकी; उनके बीच पड़े टेथिस सागर के अवसाद दब गए, मुड़े और ऊपर उठकर हिमालय बने, और टक्कर आज भी जारी है, इसीलिए श्रेणी अब भी…

Q1463.भूगोलमध्यम

सागर नितल प्रसरण की संकल्पना किसने दी?

  1. A.अल्फ्रेड वेगनर
  2. B.हैरी हेस
  3. C.अल्फ्रेड लोथार नाज्का
  4. D.एडवर्ड स्वेस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हैरी हेस

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद सागर नितल के विस्तृत मानचित्रण से मध्य महासागरीय कटक, गहरी गर्त तथा आश्चर्यजनक रूप से पतली अवसाद परत सामने आई, और हेस ने 1961 में प्रस्तावित किया कि पिघला पदार्थ कटक के सहारे ऊपर आता है, नया सागर नितल बनाता है और…

Q1464.भूगोलमध्यम

पैंजिया के विभाजन के बाद टेथिस सागर किन दो भूखंडों को अलग करता था?

  1. A.लॉरेशिया और गोंडवानालैंड
  2. B.अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका
  3. C.भारत और ऑस्ट्रेलिया
  4. D.अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लॉरेशिया और गोंडवानालैंड

लगभग बीस करोड़ वर्ष पूर्व जब पैंजिया टूटने लगा, वह उत्तर में लॉरेशिया या अंगारालैंड तथा दक्षिण में गोंडवानालैंड में बंट गया, और दोनों के बीच लंबा संकरा टेथिस सागर फैला रहा।

Q1465.भूगोलमध्यम

वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन का कारण किन बलों को बताया था?

  1. A.कटक धक्का और प्लेट खिंचाव
  2. B.ध्रुवीय प्रतिकर्षण बल और ज्वारीय बल
  3. C.समस्थिति और गुरुत्व
  4. D.संवहन धाराएं और रेडियोसक्रियता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ध्रुवीय प्रतिकर्षण बल और ज्वारीय बल

वेगनर ने महाद्वीपों की क्षैतिज गति का कारण ध्रुवीय प्रतिकर्षण बल बताया, जो पृथ्वी के घूर्णन तथा विषुवत रेखा के उभार से उत्पन्न होता है, और ज्वारीय बल, जो चंद्रमा तथा सूर्य के आकर्षण से उत्पन्न होता है।

Q1466.भूगोलआसान

वेगनर के सिद्धांत में महाखंड पैंजिया को घेरने वाले एकमात्र विशाल महासागर का नाम क्या था?

  1. A.टेथिस
  2. B.पैंथालासा
  3. C.लॉरेशिया
  4. D.गोंडवाना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पैंथालासा

वेगनर के अनुसार लगभग पच्चीस करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी की सारी भूमि एक ही पिंड पैंजिया के रूप में थी और उसके चारों ओर एक ही विशाल महासागर पैंथालासा फैला था।

Q1467.भूगोलआसान

महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया?

  1. A.अल्फ्रेड वेगनर
  2. B.हैरी हेस
  3. C.आर्थर होम्स
  4. D.चार्ल्स लायल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अल्फ्रेड वेगनर

जर्मन मौसम तथा जलवायु विज्ञानी वेगनर ने 1912 में महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत रखा और उसे अपनी पुस्तक महाद्वीपों और महासागरों की उत्पत्ति में विकसित किया; उनका मत था कि सभी महाद्वीप पहले एक ही भूखंड पैंजिया थे, जो लगभग बीस करोड़ वर्ष पूर्व टूटने लगा।

Q1468.सामान्य विज्ञानमध्यम

लंबे समय से ईंधन के रूप में प्रयुक्त पीट किस पौधे के अर्धविघटित अवशेषों से बनता है?

  1. A.स्फैग्नम
  2. B.स्पाइरोगाइरा
  3. C.सेलाजिनेला
  4. D.वुल्फिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. स्फैग्नम

स्फैग्नम एक दलदली मॉस अर्थात ब्रायोफाइट है, जिसकी मृत कोशिकाएं अपने भार से कई गुना जल रोक लेती हैं; जलमग्न तथा अम्लीय दलदलों में उसके अवशेष केवल आंशिक रूप से विघटित होकर पीट के रूप में जमा होते हैं, जिसे काटकर सुखाकर ईंधन के रूप में जलाया जाता है और…

Q1469.सामान्य विज्ञानकठिन

आवृतबीजी बीज का भ्रूणपोष त्रिगुणित होता है क्योंकि वह बनता है:

  1. A.दो नर युग्मकों के संयोजन से
  2. B.एक नर युग्मक तथा दो ध्रुवीय केंद्रकों के त्रिसंयोजन से
  3. C.युग्मनज के विभाजन से
  4. D.अंड तथा सहायक कोशिका के संयोजन से
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक नर युग्मक तथा दो ध्रुवीय केंद्रकों के त्रिसंयोजन से

आवृतबीजी में द्विनिषेचन होता है: परागनलिका लाए गए दो नर युग्मकों में से एक अंड से मिलकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है और दूसरा केंद्रीय कोशिका के दो ध्रुवीय केंद्रकों से मिलता है।

Q1470.सामान्य विज्ञानआसान

नग्न बीज, अर्थात फल में बंद न रहने वाले बीज, किस समूह का लक्षण हैं?

  1. A.टेरिडोफाइटा
  2. B.ब्रायोफाइटा
  3. C.अनावृतबीजी
  4. D.आवृतबीजी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनावृतबीजी

शब्द का अर्थ ही नग्न बीज है: बीजांड अंडाशय में बंद नहीं होते, इसलिए निषेचन के बाद बीज शंकु के शल्कों की सतह पर खुले पड़े रहते हैं और फल नहीं बनता।

Q1471.सामान्य विज्ञानमध्यम

किस पौधे को जीवित जीवाश्म कहा जाता है?

  1. A.सिकोया
  2. B.जिंकगो बाइलोबा
  3. C.इक्वीसीटम
  4. D.रैफ्लेसिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जिंकगो बाइलोबा

यह अपने गण की एकमात्र बची प्रजाति है, करोड़ों वर्षों से लगभग अपरिवर्तित रही है और डायनासोर के युग के जीवाश्मों से ज्ञात है, इसीलिए इसे जीवित जीवाश्म कहा जाता है; यह पंखे के आकार की पत्तियों वाला अनावृतबीजी है, जो सजावटी वृक्ष के रूप में व्यापक रूप से उगाया…

Q1472.सामान्य विज्ञानकठिन

नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सायनोबैक्टीरिया युक्त प्रवाल मूल किसमें पाई जाती हैं?

  1. A.पाइनस
  2. B.साइकस
  3. C.मार्सीलिया
  4. D.फ्यूनेरिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. साइकस

साधारण जड़ों के अतिरिक्त साइकस में छोटी शाखित जड़ें बनती हैं, जो सतह के पास ऊपर की ओर बढ़ती हैं और प्रवाल जैसी दिखती हैं; इन प्रवाल मूलों में एनाबीना तथा नॉस्टॉक जैसे सायनोबैक्टीरिया रहते हैं, जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करके पौधे को देते हैं।

Q1473.सामान्य विज्ञानमध्यम

लैमिनेरिया तथा सारगासम का भूरा रंग किस वर्णक के कारण होता है?

  1. A.फाइकोएरिथ्रिन
  2. B.फ्यूकोजैंथिन
  3. C.फाइकोसायनिन
  4. D.एंथोसायनिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. फ्यूकोजैंथिन

फियोफाइसी वर्ग के भूरे शैवालों में क्लोरोफिल ए तथा सी के साथ जैंथोफिल वर्णक फ्यूकोजैंथिन होता है, और चूंकि फ्यूकोजैंथिन हरे क्लोरोफिल को ढक देता है, पौधा जैतूनी हरे से गहरे भूरे रंग का दिखता है; लैमिनेरिया, सारगासम, फ्यूकस, एक्टोकार्पस और डिक्टयोटा इसके उदाहरण हैं तथा इनमें से अनेक में…

Q1474.सामान्य विज्ञानमध्यम

क्लोरोफिल ए और क्लोरोफिल बी किस शैवाल वर्ग के मुख्य वर्णक हैं?

  1. A.क्लोरोफाइसी
  2. B.फियोफाइसी
  3. C.रोडोफाइसी
  4. D.बेसिलेरियोफाइसी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्लोरोफाइसी

हरे शैवाल का रंग क्लोरोफिल ए तथा क्लोरोफिल बी के कारण होता है, जिन्हें कोई अन्य वर्णक ढकता नहीं; क्लैमिडोमोनास, वॉल्वॉक्स, स्पाइरोगाइरा, यूलोथ्रिक्स और कारा इसी वर्ग में आते हैं और इनका संचित भोजन स्टार्च है।

Q1475.सामान्य विज्ञानमध्यम

प्रयोगशाला के संवर्धन माध्यम तथा आइसक्रीम में प्रयुक्त एगार किससे प्राप्त होता है?

  1. A.हरे शैवाल
  2. B.भूरे शैवाल
  3. C.लाल शैवाल
  4. D.नील-हरित शैवाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लाल शैवाल

एगार मुख्यतः रोडोफाइसी वर्ग के जेलिडियम तथा ग्रेसिलेरिया से प्राप्त होता है और इसका उपयोग सूक्ष्मजीव तथा पादप ऊतक उगाने के ठोस माध्यम बनाने में, तथा जेली और आइसक्रीम में होता है।

Q1476.सामान्य विज्ञानआसान

संवहन ऊतक विकसित करने वाला पहला पादप समूह कौन माना जाता है?

  1. A.शैवाल
  2. B.ब्रायोफाइटा
  3. C.टेरिडोफाइटा
  4. D.अनावृतबीजी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. टेरिडोफाइटा

फर्न तथा उनके संबंधी, जैसे सेलाजिनेला, लाइकोपोडियम, इक्वीसीटम, टेरिस, एडिएंटम और मार्सीलिया, पहले पौधे हैं जिनमें जल तथा खनिज ले जाने के लिए जाइलम और भोजन ले जाने के लिए फ्लोएम है, तथा जिनमें सच्ची जड़, तना और पत्ती मिलती है; इसी कारण उन्हें संवहनी क्रिप्टोगैम भी कहा जाता है।

Q1477.सामान्य विज्ञानआसान

ब्रायोफाइटा को पादप जगत का उभयचर क्यों कहा जाता है?

  1. A.वे जल तथा रेगिस्तान दोनों में उगते हैं
  2. B.वे थल पर रहते हैं पर निषेचन के लिए जल चाहिए
  3. C.उनमें जड़ और मूलाभास दोनों होते हैं
  4. D.वे प्रकाश संश्लेषण के साथ भोजन अवशोषित भी करते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वे थल पर रहते हैं पर निषेचन के लिए जल चाहिए

मार्केंशिया, रिक्सिया, फ्यूनेरिया तथा स्फैग्नम जैसे ब्रायोफाइटा मिट्टी, चट्टान और वृक्षों के तनों पर उगते हैं, परंतु उनके नर युग्मक कशाभिकायुक्त होते हैं और अंड तक पहुंचने के लिए उन्हें जल की परत में तैरना पड़ता है, इसलिए शुष्क दशा में निषेचन नहीं हो सकता।

Q1478.सामान्य विज्ञानमध्यम

आइक्लर के वर्गीकरण में किस समूह में वे पौधे आते हैं जिनमें बीज नहीं बनते?

  1. A.क्रिप्टोगैमी
  2. B.फैनरोगैमी
  3. C.जिम्नोस्पर्मी
  4. D.एंजियोस्पर्मी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्रिप्टोगैमी

आइक्लर ने पादप जगत को दो भागों में बांटा: क्रिप्टोगैमी, जिसका अर्थ है छिपे जननांगों वाले बीजरहित पौधे, जिनमें शैवाल अर्थात थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा तथा टेरिडोफाइटा आते हैं; और फैनरोगैमी, अर्थात बीजधारी पौधे।

Q1479.भारतीय इतिहासआसान

लघु पाषाण उपकरण प्रागितिहास के किस काल के विशिष्ट उपकरण हैं?

  1. A.निम्न पुरापाषाण
  2. B.मध्यपाषाण
  3. C.नवपाषाण
  4. D.ताम्रपाषाण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मध्यपाषाण

लघु पाषाण उपकरण अर्थात माइक्रोलिथ बहुत छोटा फलक होता है, सामान्यतः एक से पाँच सेंटीमीटर लंबा, जो लकड़ी या हड्डी के हत्थे में जड़कर तीर, हारपून या हँसिया जैसा संयुक्त उपकरण बनाता था, और यह बागोर, लंघनाज तथा आदमगढ़ जैसे स्थलों पर मध्य पाषाण युग का परिचायक उपकरण है।

Q1480.भारतीय इतिहासकठिन

रथ, भैंसे, हाथी और गैंडे की प्रसिद्ध कांस्य मूर्तियाँ किस ताम्रपाषाणिक स्थल से मिलीं?

  1. A.आहड़
  2. B.नवदाटोली
  3. C.दायमाबाद
  4. D.गिलुंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दायमाबाद

महाराष्ट्र में प्रवरा नदी पर स्थित जोरवे संस्कृति के इस स्थल से ठोस ढली कांस्य मूर्तियों का भंडार मिला, जिनमें चालक के साथ दो बैलों द्वारा खींचा जाता रथ तथा भैंसे, हाथी और गैंडे की आकृतियाँ हैं, जो ताम्रपाषाणिक भारत का श्रेष्ठतम धातुकर्म है।